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कहानी काल पेन की, जिन्होंने एडल्ट कॉमेडी फिल्म की और उन्हें काम मिलना बंद हो गया

साल 2012. जब मेरे दसवीं बोर्ड एग्ज़ाम में ठीक-ठाक सीजीपीए आए. जिन्होंने इतना कॉन्फिडेंस दे दिया कि साइंस ले लेते हैं. कुछ तो हो ही जाएगा. हुआ बहुत कुछ, लेकिन सारे काम पढ़ाई से दूर. 11th क्लास को हम वैसे ही ट्रीट कर रहे थे. जैसे इंडियन टीम ने इस टी-20 वर्ल्ड कप को किया. ऊपर से इनऑर्गैनिक केमिस्ट्री भी कोई खास मददगार साबित नहीं हो रही थी. एस ब्लॉक, पी ब्लॉक, सब सिर के ऊपर. शाम को हमारे केमिस्ट्री ट्यूशन होते, जहां मैं और मेरे दोस्त बस एक घंटा पूरा होने का वेट करते. हल्का सा भी डिस्ट्रैक्शन हम लोगों के लिए काफी था.

ऐसे में एक दिन ट्यूशन से पहले एक दोस्त ने प्रस्ताव रखा. कि ट्यूशन बंक करते हैं, मेरे घर चलो. मैंने एक मूवी डाउनलोड की है, वो देखेंगे. हम सभी में से वो इकलौता डायल अप इंटरनेट कनेक्शन वाला बंदा था. ट्यूशन अटेंड करने की नीयत किसी की थी नहीं. इसलिए हम चुपचाप उसके घर को हो लिए. घर पहुंचने पर उसने अपने मॉनिटर स्क्रीन वाले कंप्युटर पर फिल्म प्ले की. ‘Van Wilder 2’. एक एडल्ट कॉमेडी. कहानी थी एक इंडियन ओरिजिन वाले लड़के की जो कॉलेज जॉइन करता है. फिल्म के एक-एक जोक पर हम खूब हंसे. इतना कि अब सोचकर शर्म आती है. फिल्म में सबसे ज्यादा पसंद आया वो इंडियन लड़का. जिसके बारे में और जानने की इच्छा हुई.

गूगल किया तो पता चला कि भाईसाहब का नाम काल पेन (Kal Penn) है. और उन्होंने और भी फिल्में की हैं. जिनमें से ‘Harold and Kumar Go To White Castle’ सबसे पॉपुलर थी. अब बस ये वाली पिच्चर देखनी थी. शुभ मुहूर्त देखकर फिर ट्यूशन बंक किया गया. तब तक इंटरनेट कनेक्शन वाले दोस्त ने फिल्म भी डाउनलोड कर ली थी. दो लड़के जो बिचारे बस बर्गर खाना चाहते थे, ये था फिल्म का प्लॉट. फिल्म हमारी फेवरेट कॉमेडीज़ में से एक बन गई. आज भी जब मिलते हैं तो ‘Harold and Kumar’ के रेफरेंस में ही बातें होती हैं.

कहानी थी एक इंडियन ओरिजिन वाले लड़के की
Van Wilder 2 वाला ताज जिसके चीप सरनेम पर पहले बहुत हंसी आती थी.

लाइफ हम सबके लिए आगे बढ़ गई. लेकिन काल पेन हमारे उन दिनों के नॉस्टैलजिया का अहम हिस्सा बन चुके हैं. उनकी लाइफ और करियर से जुड़ा कोई भी अपडेट आता है तो फॉलो करते हैं. जैसे जब उन्होंने ‘तारक मेहता का उलटा चश्मा’ में काम करने की इच्छा जताई. हाल ही में उनको लेकर एक और बड़ी न्यूज़ बाहर आई. काल ने अपनी बुक ‘You Can’t Be Serious’ रिलीज़ की है. बुक से रिलेटेड एक इंटरव्यू में काल ने बताया कि वो होमोसेक्शुअल हैं. काल ने आगे कहा कि वो पिछले 11 सालों से अपने पार्टनर जॉश के साथ रिलेशनशिप में हैं. और दोनों एंगेज़्ड हैं. काल ने बताया कि और लोगों की तुलना में उन्होंने अपनी सेक्शुऐलिटी काफी लेट डिस्कवर की.

काल सिर्फ ‘एनी अदर इंडियन ओरिजिन’ एक्टर नहीं. उनकी लाइफ और करियर में बहुत कुछ आउट ऑफ द बॉक्स घट चुका है. जो उनकी जर्नी को इंट्रेस्टिंग बनाता चला गया. आज बात करेंगे काल पेन की.

Spotlight


# नाम में क्या रखा है?

1991 में मीरा नायर की फिल्म आई थी. ‘Mississipi Masala’. जिसे अमेरिका के न्यू जर्सी में रहने वाले कल्पेन मोदी ने देखा. कल्पेन के पेरेंट्स गुजरात के रहने वाले थे. लेकिन उनका जन्म अमेरिका में ही हुआ था. कल्पेन तब 7th ग्रेड में थे. मीरा नायर की फिल्म ने उनके नन्हे दिमाग पर गहरा असर डाला. इतना कि वो खोज-खोजकर मीरा के बारे में पढ़ने लगे. तय कर लिया कि लाइफ में आगे कुछ भी बने, लेकिन एक्टिंग तो करनी ही है.

अपने देसी पेरेंट्स को ऐसी करियर चॉइस के लिए मनाना आसान नहीं था. किसी तरह कंविंस किया और घरवाले भी मान ही गए. इसके बाद का सफर स्मूद होता चला गया. एक्टिव तौर पर थिएटर करने लगे. और आखिरकार यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से फिल्म और सोशियोलॉजी में ग्रैजुएशन किया. कल्पेन को पता था कि फिल्मों में काम करना है तो लॉस एंजिल्स आना ही पड़ेगा. इसलिए वो 1995 में एलए शिफ्ट हो गए. रहने के लिए अपनी जगह नहीं थी, इसलिए ऑड जॉब्स करते. ताकि रेंट और बाकी चीज़ें चलती रहें.

मीरा नायर की फिल्म ने उनके नन्हे दिमाग
मीरा नायर की वो फिल्म जिसने छोटे कल्पेन को एक्टिंग के लिए इंस्पायर किया.

कल्पेन का खर्चा पानी ठीक-ठाक चल रहा था. लेकिन एक्टिंग फ्रंट पर अभी भी वैसी कामयाबी नसीब नहीं हुई, जिसकी उन्हें तलाश थी. वो अपनी ओर से पूरी मेहनत कर रहे थे. फिर भी समझ नहीं आया कि कमी कहां रह रही थी. ऐसे ही एक रात अपने दोस्तों के साथ बैठे थे. सभी एक्टिंग और फिल्म बैकग्राउंड वाले. कल्पेन ने अपनी प्रॉब्लम डिस्कस की. दोस्तों की तरफ से सुझाव आने शुरू हो गए. किसी ने कहा ये कर के देखो, या ये ट्राइ कर के देखो. ऐसे ही सजेशन्स में से एक था कि नाम बदल कर क्यों नहीं देखते. तुम्हारे नाम के साथ स्टीरियोटाइप जुड़ा है. इसलिए कास्टिंग डायरेक्टर्स काम देने से कतराएंगे. कल्पेन को ये सलाह सही लगी.

बस फिर क्या था. नामों के सुझाव आने लगे. किसी ने कहा काल पैचिनो रख लो. तो किसी ने कोई दूसरा कॉम्बिनेशन सुझाया. रात खत्म होने को थी. तभी एक दोस्त ने कहा कि अपने फर्स्ट नेम के साथ कुछ क्यों नहीं करते. जैसे कल्पेन को तोड़कर कुछ बनाया जा सके. कल्पेन ने ट्राइ किया. और बना काल पेन. ये नाम उन्हें जंच गया. तय कर लिया कि प्रोफेशनली अब यही नाम यूज़ करेंगे. काश सिर्फ नाम बदलने से काल का सफर आसान हो जाता. लेकिन ऐसा हुआ भी और नहीं भी. उसी के बारे में आगे बात करते हैं.


# ‘तुम्हारी पगड़ी कहां हैं?’

हॉलीवुड में लंबे समय से इंडियन कैरेक्टर्स को स्टीरियोटिपिकल तरीके से दिखाने का चलन है. जैसे इंडियन है तो तांत्रिक होगा. सांप पकड़ने वाला होगा. या फिर गांधी जैसा होगा. बस इतनी सीमित परिभाषा थी इंडियन किरदारों की. ऐसे स्टीरियोटाइप का एक बड़ा एग्ज़ाम्पल हम ‘Indiana Jones and The Temple of Doom’ में भी देख चुके हैं. साथ ही इंडियन किरदारों को एक खास एक्सेंट दिया जाता. और उन्हें उसी ढंग से अपने डायलॉग बोलने होते. हालांकि, अब ग्लोबलाइज़ेशन की बदौलत ये ट्रेंड कुछ कम होता दिख रहा है.

Indiana Jones And The Temple Of Doom
‘इंडियाना जोन्स’ के एक सीन में अमरीश पुरी.

लेकिन काल को भी अपने शुरुआती दिनों में इस तरह का रेसिज़म फेस करना पड़ा था. वो भी अनगिनत मौकों पर. जैसे काल जब लॉस एंजिल्स शिफ्ट हुए, तब ऑडिशंस ढूंढा करते थे. एक बार उन्हें पता चला कि किसी ऐड की कास्टिंग चल रही है. वो वहां पहुंच गए. कास्टिंग डायरेक्टर की नज़र जैसे ही उन पर पड़ी, उसने पूछा कि तुम्हारी पगड़ी कहां है. काल ने कहा कि वो सिख नहीं हैं, इसलिए पगड़ी नहीं पहनते. इस पर कास्टिंग डायरेक्टर बिगड़ गई. फिर काल उसे सिख और गैर सिख का फर्क समझाने लगे. लेकिन वो सुनने को तैयार नहीं. कहने लगी कि कम से कम घर जाकर अपने सिर पर कोई बेडशीट ही लपेट कर आ जाओ. काल घर आ गए. लेकिन वापस ऑडिशन वेन्यू पर लौटने के लिए नहीं.

काल ने बात दिल पर नहीं ली. और आगे ऑडिशन देते रहे. उन दिनों ‘Sabrina The Teenage Witch’ नाम से एक सिटकॉम आता था. जिसके एक एपिसोड के लिए इंडियन ओरिजिन वाले कैरेक्टर की ज़रूरत थी. काल ने अपने छोटे कज़िन्स से शो के बारे में सुना था. वो उसके फैन थे. काल ने सोचा कि ऑडिशन तो दे ही देते हैं. वो सिलेक्ट भी हो गए. शूट के दिन सेट पर पहुंचे. जहां उन्हें ब्रीफ किया गया कि उन्हें इंडियन एक्सेंट यूज़ करना है. काल ने समझाया कि वो अमेरिका में ही पले-बड़े हैं. वो नॉर्मल तरीके से बोल सकते हैं. साथ ही वादा किया कि वो नॉर्मल तरीके से ही फन क्रिएट कर पाएंगे. लेकिन डायरेक्टर सुनने को राज़ी नहीं.

पगड़ी नहीं पहनते
काल ने अपनी किताब में भी अपने ऐसे अनुभव साझा किए हैं.

काल ने अपने कज़िन्स का ज़िक्र किया. कहा कि वो शो को बहुत प्यार करते हैं. अगर काल एक्सेंट यूज़ करेंगे तो उन्हें देखकर बुरा लगेगा. लेकिन डायरेक्टर कुछ भी सुनने के मूड में नहीं था. उसके बाद उसने चुभने वाली बात कही. कहा कि तुम और तुम्हारे कज़िन्स को अपने आप को खुशनसीब मानना चाहिए, जो तुम्हें यहां काम करने का मौका मिल रहा है.

काल अपने एक इंटरव्यू में बताते हैं कि इस किस्म की टिप्पणी उस वक्त कॉमन थी. जिसे इंडस्ट्री गलत भी नहीं मानती थी. लेकिन वो शुक्रगुज़ार हैं कि अब चीज़ें बदल रही हैं.


# वो फिल्म, जिसके बाद काम मिलना बंद हो गया

लेट नाइंटीज़ और अर्ली 2000 हॉलीवुड में एडल्ट कॉमेडीज़ का दौर लाया. जहां ‘अमेरिकन पाइ’ और ‘स्केरी मूवी’ जैसी फिल्में रिलीज़ हुई, जो आगे चलकर फ्रैन्चाइज़ी बनीं. इंडियन-अमेरिकन को-प्रोडक्शन ‘अमेरिकन देसी’ में काम करने के बाद काल ने भी एक एडल्ट कॉमेडी फिल्म में काम किया. वो फिल्म थी ‘Van Wilder’. लीड में ‘डैडपूल’ वाले रायन रेनॉल्ड्स थे. यहां काल का रोल काफी छोटा था. हालांकि, फिल्म के सीक्वल में उन्हें लीड करने का मौका मिला. कैमियो से लीड का ये ट्रान्ज़िशन मुमकिन हुआ ‘Van Wilder’ के बाद आई एक एडल्ट कॉमेडी की वजह से. जो आज भी काल के करियर की सबसे पॉपुलर फिल्मों में से एक है.

फिल्म के लिए काल ने सात राउंड्स में ऑडिशन दिया
Harold and Kumar, वो फिल्म जिसने काल को कुमार बना दिया.

वो फिल्म थी ‘Harold and Kumar Go to White Castle’. दो एशियन लड़कों की कहानी जो एक रात बर्गर खाने निकल पड़ते हैं. फिल्म के लिए काल ने सात राउंड्स में ऑडिशन दिया. और फाइनली सिलेक्ट हो ही गए. काल ने कुमार नाम का कैरेक्टर पोर्ट्रे किया. जिसे उसके पेरेंट्स डॉक्टर बनाना चाहते हैं. लेकिन उसे कोई दिलचस्पी नहीं. ऐसी फिल्में बॉक्स ऑफिस ब्लॉकबस्टर नहीं बनती. ‘Harold and Kumar’ भी ट्रेंड ब्रेकिंग फिल्म नहीं थी. बॉक्स ऑफिस पर आई हवा, गई हवा टाइप हाल हुआ. फिर भी काल पेन हिट हो गए. ऐसा हुआ दो इंडियन तरीकों की वजह से. पहला था वर्ड ऑफ माउथ. जिसकी वजह से हर दूसरे बंदे तक फिल्म की बातें पहुंच गई. दूसरी वजह थी पायरेसी. फिल्म की डीवीडी की धड़ल्ले से पायरेटिड कॉपीज़ बिकी. जिसका फायदा फिल्म को तो नहीं हुआ. लेकिन एक्टर्स को ज़रूर हुआ.

काल बताते हैं कि उन्होंने यूएस के स्टोर्स में भी फिल्म की पायरेटिड डीवीडी बिकते देखी थीं. फिर और जगहों का हाल तो आप इमैजिन कर ही लीजिए. फिल्म में काम करने के लिए काल को करीब 75,000 डॉलर्स मिले थे. जो उस समय सही अमाउंट था. लेकिन एजेंट, मैनेजर, पब्लिसिस्ट और बाकी सब की फीस काटने के बाद वो अमाउंट आधे से भी कम होकर रह गया. मजबूरन फिर काल को अपनी ऑड जॉब्स की ओर मुड़ना पड़ा. लेकिन अब स्टार बक्स से लेकर जूस सेंटर तक, कोई उन्हें रखने को राज़ी नहीं. सबने एक ही बात कही. कि ‘Harold and Kumar’ के बाद लोग तुम्हें पहचानने लगे हैं. ऐसे में हम नहीं चाहते कि लोग तुम्हें देखने के लिए स्टोर पर भीड़ लगाने लगें.

एक रोल के लिए उन्होंने काल को अप्रोच किया
‘सुपरमैन रिटर्न्स’ में काल पेन.

फिल्म की वजह से भले ही काल को ऑड जॉब्स ढूंढने में दिक्कतें आने लगीं. लेकिन इसने उनके फिल्मी करियर को बड़ी मदद भी पहुंचाई. ‘X Men’ के डायरेक्टर ब्रायन सिंगर ‘Harold and Kumar’ के बड़े वाले फैन थे. इसलिए जब वो ‘Superman Returns’ डायरेक्ट करने वाले थे तो एक रोल के लिए उन्होंने काल को अप्रोच किया. काल को अपनी ड्रीम डायरेक्टर के साथ काम करने का मौका भी ‘Harold and Kumar’ ने ही दिलवाया.


# जिस किरदार के नाम पर होटल में रहे, उसे निभाने का मौका मिला

काल लगभग अपने हर इंटरव्यू में दो बुक्स का ज़िक्र ज़रूर करते हैं. जो उन्हें बहुत पसंद हैं. ‘The Catcher in the Rye’ और ‘The Namesake’. झुम्पा लहिरी के लिखे ‘द नेमसेक’ को तो उन्होंने लिटरली जीने की कोशिश की. उन्हें किताब का लीड किरदार गोगोल गांगुली बेहद पसंद था. खुद से उसमें कुछ समानता पाते, और कुछ अंतर. काल पर कैरेक्टर का ऐसा असर हुआ था कि वो जब होटल्स में चेक इन करने जाते, तो अपने नाम की जगह गोगोल गांगुली लिखवाते. और ऐसा उन्होंने अनेकों मौकों पर किया.

काल खुद इस नॉवल को अडैप्ट करना चाहते थे. राइट्स खरीदने की कोशिश की. तो पता चला कि पहले से नॉवल के राइट्स बिक चुके हैं. अपने एजेंट के ज़रिए काल को पता चला कि इस नॉवल को मीरा नायर अडैप्ट करने वाली हैं. काल कुछ भी कर के खुद को फिल्म का हिस्सा बनाना चाहते थे. हर संभव तरीका आजमाया. मीरा से कॉन्टैक्ट किया. उन्हें लेटर्स लिखे. अपने एजेंट से कहलवाया. लेकिन कुछ भी कारगर साबित नहीं हुआ. थक हारकर काल ने एक आखिरी कोशिश करने की सोची. मीरा के नाम एक और लेटर लिखा. जहां लिखा कि उनकी वजह से ही वो एक्टर बन पाए हैं. और आपको मेरा ऑडिशन लेना ही होगा.

काल
काल जिस किरदार के नाम पर होटल में रह रहे थे, उसे जीने का मौका मिला.

लेटर भेज दिया. जिसके बाद अगले दो हफ्तों तक कुछ नहीं हुआ. फिर एक दिन उन्हें एक कॉल आया. दूसरी ओर मीरा नायर थीं. जो काल से मिलना चाहती थीं. उत्साहित काल मीरा से मिलने पहुंच गए. लेकिन सारा जोश ठंडा हो गया. जब मीरा ने बताया कि गोगोल के लिए पहले ही किसी दूसरे एक्टर को कास्ट किया जा चुका है. फिर मीरा ने उन्हें यहां क्यों बुलाया? क्योंकि उनका बेटा ‘Harold and Kumar’ का तगड़ा फैन था. और वो पिछले छह महीनों से मीरा के पीछे पड़ा था. कि वो काल पेन का ऑडिशन लें. बेटे के दबाव में आकर मीरा ने ‘Harold and Kumar’ देख डाली. पहली सोच यही आई कि ये बंदा तो ‘नेमसेक’ के लिए सही नहीं रहेगा.

मीरा और काल की लंबी चौड़ी बातचीत चली. जिसके बाद मीरा का उनके प्रति परसेप्शन बदल गया. दूसरी ओर जिस एक्टर को गोगोल के लिए फाइनल किया था, वो भी आनाकानी करने लगा. ऐसे हालात में मीरा को काल ही बेस्ट ऑप्शन लगे. उन्हें बुलाया, फाइनल किया और आगे जो हुआ, वो सबके सामने हैं.


# नाना की गांधी वाली कहानियों ने कैसी प्रेरणा दी?

काल के पेरेंट्स गुजरात के रहने वाले थे. बचपन की छुट्टियों में काल अपने नाना-नानी के यहां जाते. उनकी कहानियां सुनते कि कैसे वो महात्मा गांधी के साथ आज़ादी की लड़ाई में शामिल हुए. क्या हुआ था जब अंग्रेजों ने उन्हें जेल में बंद कर दिया था. ये किस्से छोटे कल्पेन को बोर करते. लेकिन बड़े होने पर उन्हें उनकी अहमियत समझ आई. एक्टिंग करियर में एस्टैब्लिश होने के बाद काल अब सोसाइटी के लिए कुछ करना चाहते थे.

इसी सोच के साथ डेमोक्रेटिक पार्टी जॉइन कर ली. 2007 और 2008 में प्रेसिडेंशियल उम्मीदवार बराक ओबामा के लिए कैम्पेन करने लगे. उस दौरान वो टीवी सीरीज़ ‘हाउस’ पर भी काम कर रहे थे. ओबामा प्रेसीडेंट बन गए. दूसरी ओर ‘हाउस’ पर उनका कैरेक्टर भी मर चुका था. पॉलिटिकल करियर पर ध्यान देने की सोची. ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन ने उन्हें व्हाइट हाउस में असोशिएट डायरेक्टर ऑफ पब्लिक एन्गेजमेंट की पोस्ट ऑफर की. जिसे काल ने तुरंत एक्सेप्ट कर लिया. काल ने व्हाइट हाउस में काम शुरु कर दिया. लेकिन कुछ महीनों बाद ही उन्हें ब्रेक लेना पड़ा. ‘Harold and Kumar’ के तीसरे पार्ट को शूट करने के लिए.

2007 और 2008 में प्रेसिडेंशियल उम्मीदवार बराक ओबामा के लिए कैम्पेन
ओबामा और काल पेन.

फिल्म पर काम पूरा करने के बाद वो 15 नवंबर, 2010 को फिर व्हाइट हाउस लौट आए.


# जब गुजराती काल को इंडिया आकर हिंदी सीखनी पड़ी

काल ने अपने करियर में करीब 75 से ज्यादा फिल्मों और टीवी शोज़ पर काम किया है. सभी के बारे में बात करना यहां मुमकिन नहीं. इसलिए हम आपको उनकी कुछ चुनिंदा कमाल की परफॉरमेंसेज़ के बारे में बताते हैं.

#1. Bhopal: A Prayer for Rain

भोपाल गैस ट्रेजडी को बैकड्रॉप लेकर बनाई गई इस फिल्म में काल ने एक जर्नलिस्ट का रोल निभाया. लोकल पत्रकार जिसे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी से कोई मतलब नहीं. लेकिन फिर गैस कांड के बाद उसकी सच्चाई जनता के सामने लाने में जुट जाता है. शूट के लिए काल को इंडिया बुलाया गया. काल अपनी लाइंस प्रैक्टिस कर रहे थे. कि तभी डायरेक्टर ने उन्हें टोक दिया. कहा कि आपको अपने डायलॉग हिंदी में बोलने हैं. काल इस बात से परिचित नहीं थे.

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फिल्म में काल ने एक जर्नलिस्ट का रोल निभाया.

उनकी अंग्रेजी अच्छी थी. गुजराती भी ठीक-ठाक थी. लेकिन हिंदी की हालत बेहद खस्ता. लोकल कैरेक्टर को तो हिंदी आनी चाहिए. लेकिन इतने कम समय में सीख भी नहीं सकते. काल ने एक रास्ता निकाला. इंडिया में रहने वाले अपने तमाम रिश्तेदारों को फोन मिलाना शुरू किया. वो फोन पर अपनी लाइंस बोलते और पूछते कि क्या ठीक से बोल रहे हैं. ऐसे कर के काल ने अपनी हिंदी सीखी.

#2. Designated Survivor

रियल लाइफ में व्हाइट हाउस में काम करने के बाद काल ने रील लाइफ में भी ये रोल दोहराया. उन्होंने ‘Designated Survivor’ में सेथ राइट नाम का किरदार निभाया. जो व्हाइट हाउस में बतौर स्पीच राइटर काम करता है. प्रेस सेक्रेटरी की डेथ की वजह से सेथ को उनकी पोज़िशन संभालनी पड़ती है. अपने पास्ट अनुभव के चलते काल ने शो पर बतौर पॉलिटिकल कंसलटेंट भी काम किया.

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शो पर बतौर पॉलिटिकल कंसलटेंट भी काम किया.

#3. Clarice

1991 में एक क्लासिक फिल्म आई थी, ‘The Silence of The Lamb’. ये शो उस फिल्म के एक साल बाद के इवेंट्स की कहानी है. इस साइकोलॉजिकल हॉरर ड्रामा की लीड नायिका क्लैरिस स्टारलिंग हैं. लेकिन काल भी शो पर मेजर कैरेक्टर पोर्ट्रे कर रहे हैं. इसी साल मई में शो का पहला सीज़न रिलीज़ हुआ है.

काल पेन एक उम्दा स्टोरीटेलर है. और ये पॉइंट समझने के लिए आपको उनकी फिल्में देखने की ज़रूरत नहीं. उनका कोई भी इंटरव्यू उठा लीजिए, समझ जाएंगे. वो आगे भी कमाल का काम करते रहें, ऐसी हमें उम्मीद है.


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