Submit your post

Follow Us

बिहार में क्वारंटीन सेंटर की 'राजनीति' कहीं 'कोरोना विस्फोट' ना करा दे!

16वीं शताब्दी के इटैलियन डिप्लोमेट और मशहूर ऑथर रहे निकोलो मैकियावेली ने लिखा था-‘ Politics have no relation to morals’. यानी राजनीति का नैतिकता से कोई संबंध नहीं होता है. आज हम बिहार की जिस खबर का ज़िक्र करने जा रहे हैं, उसमें राजनीति प्रचुर मात्रा में छिपी हुई है, जिसका नैतिकता से संबंध बस संयोगवश होगा.

खबर से पहले बैकग्राउंडर

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच देश में 24 मार्च से लॉकडाउन 1.0 की शुरुआत हुई. लॉकडाउन की शुरुआत होते ही अपने राज्यों से दूर रह रहे मजदूर अपने-अपने राज्यों की तरफ निकल पड़े. मजदूरों के निकलने का सिलसिला शुरू हो गया, क्योंकि उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या आ खड़ी हुई थी.

Untitled Design
लॉकडाउन 1.0 के पहले सप्ताह से ही मजदूरों का पलायन शुरू हो गया. (तस्वीर- इंडिया टुडे)

बिहार में कितने प्रवासी मजदूर लौटे?

अकेले बिहार की बात करें, तो यहां 1 जून तक दूसरे राज्यों से करीब 30 लाख मजदूर लौट चुके हैं. एक अनुमान के मुताबिक, जून के अंत तक ये आंकड़ा 40 लाख तक पहुंच जाएगा. दबे स्वर में लोगों ने ये कहा कि मजदूरों के लौटने के बाद बिहार में संक्रमण के चांस और बढ़ जाएंगे. इस आशंका को देखते हुए बिहार सरकार ने प्रवासियों को 14 दिन के लिए क्वारंटीन में रहना ज़रूरी कर दिया. इसके लिए बिहार के अलग-अलग ज़िलों के अलग-अलग ब्लॉक में 12 हजार से ज्यादा क्वारंटीन सेंटर बनाए गए.

Untitled Design (1)
अलग-अलग दावों के बीच बिहार में 12 हजार से ज्यादा क्वारंटीन सेंटर बनाए गए. (तस्वीर-सोशल मीडिया)

वक्त ने करवट ली और नियम बदल गया

आंकड़े लगातार बढ़ ही रहे हैं. ऐसे में नीतीश सरकार ने नियम बदल लिया. क्वारंटीन में रखने की जो प्रकिया अप्रैल के पहले हफ्ते से शुरू हुई, उसका अंत 14 जून को मुकम्मल कर दिया गया. नीतीश सरकार ने कहा कि अब जो भी प्रवासी आएंगे, उन्हें रजिस्ट्रेशन कराने और क्वारंटीन सेंटर में रहना ज़रूरी नहीं होगा. सरकार ने तर्क दिया कि जितने मजदूर लौटने थे, वे सभी लौट आए हैं. अब जो नए मजदूर आएंगे, उन्हें रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है. आंकड़े बताते हैं कि बिहार में 12 हजार क्वारंटीन सेंटर में 13 लाख प्रवासियों का रजिस्ट्रेशन कराया गया है.

Untitled Design (2)
लगातार बढ़ रहे मामलों के बीच सीएम नीतीश कुमार ने रजिस्ट्रेशन और क्वारंटीन सेंटर बंद करने का फैसला ले लिया.

अब मुद्दे पर आते हैं

बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे देखते हुए नेता लोग भी एक्टिव हो गए हैं. हमारे पास बिहार से दो तस्वीरें आई. एक मोतिहारी के केसरिया विधानसभा से, तो दूसरे सीतामढ़ी के बेलसंड विधानसभा से. इन दोनों तस्वीरों में जेडीयू नेता अपनी-अपनी राजनीति चमका रहे हैं. वैसे राजनीति चमकाना और राजनीति करना, दोनों ही किसी भी तरह से गलत नहीं है. लेकिन नियमों को ताक पर रखकर ऐसा करना जायज़ भी नहीं है.

Untitled Design (3)
मोतिहारी के जेडीयू नेता महेश्वर सिंह (बाएं) और सीतामढ़ी के जेडीयू नेता राणा रणधीर सिंह (दाएं) ने क्वारंटीन सेंटर के कैंपस में जाकर सामान बांटे. (तस्वीर सोशल मीडिया)

इन दोनों नेताओं ने अपने-अपने विधानसभा में मजदूरों के लिए ज़रूरी सामान बांटे, लेकिन क्वारंटीन सेंटर के भीतर जाकर. इन्होंने लोगों की मदद की, लेकिन जो तरीका इन्होंने अपनाया, उससे कोरोना का खतरा और बढ़ जाता है.

पहले मोतिहारी के केसरिया की बात 

यहां के जेडीयू नेता हैं महेश्वर सिंह. हरसिद्धि सीट से दो बार विधायक रहे हैं, लेकिन इस बार मोतिहारी के केसरिया सीट से टिकट के प्रबल दावेदार हैं. इन्होंने 24 मई के दिन केसरिया के कई पंचायतों के क्वारंटीन सेंटर का दौरा किया. वैसे नियमों के मुताबिक, कोई भी क्वारंटीन सेंटर के भीतर नहीं जा सकता है, लेकिन भावी जेडीयू प्रत्याशी होने के नाते ये क्वारंटीन सेंटर के भीतर गए. इसकी जानकारी इन्होंने फेसबुक पर डाली. तस्वीरें देखने से पता चलता है कि वो अकेले नहीं, पूरी टीम के साथ क्वारंटीन सेंटर गए और बाकायदा ‘चुनाव चिह्न’ के साथ सामान बांट आए.

Untitled Design (4)
महेश्वर सिंह ने क्वारंटीन सेंटर के अंदर और बाहर चुनाव चिह्न के लिफाफे में सामान बांटे. (सोशल मीडिया)

तस्वीरें सोशल मीडिया पर लोगों ने शेयर कीं, तो हमने बात करने की सोची. फोन लगाकर क्वारंटीन सेंटर के भीतर जाने की वजह पूछी तो नेता जी ने कहा-

हां, हम 24 तारीख को गए थे क्वारंटीन सेंटर. हम नेता लोग हैं, लोगों की सेवा कर रहे थे. लेकिन क्वारंटीन सेंटर के भीतर नहीं गए थे, बाहर से सामान बांट कर चले आए.

जब हमने पूछा कि तस्वीरें तो कुछ और बयां कर रही हैं. आप कैंपस के भीतर भी गए थे. फिर महेश्वर सिंह ने कहा-

नहीं, तस्वीरें गलत हैं. हम क्वारंटीन सेंटर के बाहर ही थे, भीतर नहीं गए.

हमारी बातचीत ठीक से खत्म भी नहीं हुई थी कि नेताजी के जिस समर्थक ने क्वारंटी सेंटर की तस्वीर डाली थी, उन्होंने फेसबुक से वो पोस्ट ही हटा ली. स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते हैं.

Untitled Design (5)
जेडीयू नेता महेश्वर सिंह के करीबी का फेसबुक पोस्ट, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया. (फेसबुक स्क्रीन शॉट)

इसके बाद हमने सर्किल ऑफिसर रंजन कुमार को फोन लगाया. रंजन कुमार के जिम्मे ही केसरिया के सभी प्रखंड के क्वारंटीन सेंटर हैं. पहली बार बातचीत में इन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार कर दिया, लेकिन फिर जब क्वारेंटीन सेंटर के भीतर की तस्वीर हमने भेजी, तो इन्होंने बातचीत करने से भी इनकार कर दिया.

सर्किल ऑफिसर के बाद हमने मोतिहारी के ज़िलाधिकारी कपिल अशोक से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो पाई. ज़िलाधिकारी को हमने कॉल के बाद मैसेज भी भेजा, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया.

अब अगला अध्याय 

सीतामढ़ी ज़िले की बेलसंड विधानसभा से जेडीयू की विधायक हैं सुनीता देवी. इनके पति हैं राणा रणधीर सिंह चौहान. रणधीर सिंह विधायक पति कहलाते हैं और सीतमाढ़ी से जेडीयू के ज़िलाध्यक्ष भी हैं. इन्होंने भी क्वारंटीन सेंटर का दौरा किया. लोगों से मुलाकात की, ज़रूरी सामग्री बांटी और फेसबुक के लिए जमकर तस्वीरें खिंचवाई. इन्होंने भी कुछ वैसा ही किया, जैसा कि मोतिहारी के केसरिया में हुआ.

Untitled Design (6)
सीतामढ़ी के जेदीयू नेता राणा रणधीर सिंह ने क्वारंटीन सेंटर के कैंपस में मजदूरों को ज़रूरी सामान बांटा. (तस्वीर- रणधीर सिंह फेसबुक)

क्वारंटीन सेंटर के भीतर जाने की वजह पूछने के लिए हमने इन्हें फोन किया, तो इन्होंने कहा-

हां, हमने दौरा किया. कई प्रखंडों के क्वारंटीन सेंटर के दौरा किया, लेकिन सेंटर के भीतर हम नहीं घुसे, बाहर से ही सामान बांट कर चले आए.

इनसे भी वही पूछा-

सर, तस्वीरें तो ये कह रही हैं कि आप क्वारंटीन सेंटर के कैंपस के भीतर घुसे, और वहां जाकर आपने लोगों को राहत सामग्री बांटी.

इस पर रणधीर सिंह मुकर गए और वहीं हमारी बातचीत का समापन हो गया.

Untitled Design
सीतामढ़ी से जेडीयू नेता राणा रणधीर सिंह चौहान का फेसबुक पोस्ट. (फेसबुक- स्क्रीन शॉट)

इसके बाद बेलसंड प्रखंड के सर्किल ऑफिसर अरविंद प्रताप शाही से लेकर सीतामढ़ी की ज़िलाधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा को हमने फोन किया. सीओ ने क्वारंटीन सेंटर को उनके प्रखंड का होने इनकार कर दिया, तो ज़िलाधिकारी ने फोन नहीं उठाया.

सीओ के इनकार करने के बाद हमने तस्वीरों को गौर से देखा, तो पता चला रणधीर सिंह बेलसंड प्रखंड के क्वारंटीन सेंटर तो गए ही थे, लेकिन वो तरियानी प्रखंड के क्वारंटीन सेंटर भी पहुंचे थे, जिसका कुछ हिस्सा शिवहर ज़िले में पड़ता है.

Untitled Design (7)
रणधीर सिंह सुरगाही पंचायत के क्वारंटीन सेंटर भी गए जो शिवहर में पड़ता है.

जवाबदेही के लिए शिवहर के भी ज़िलाधिकारी अवनीश कुमार सिंह को फोन किया, लेकिन जवाब वहां से भी नहीं मिला.

कुल मिलाकर ‘गए तो गए’ वाली बात हो गई. कोई जवाबदेही नहीं और कोई अपनी गलती मानने को तैयार नहीं. बाकी बिहार में कोरोना के मामले बढ़ ही रहे हैं, जिसके बीच नेताओं की ऐसी हरकत कोरोना के डर को और बढ़ा देती है.


वीडियो- बिहार में हुए गोपालगंज ट्रिपल मर्डर केस पर जेडीयू और आरजेडी अब राजनीति कर रहे हैं?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

'हिटमैन' रोहित शर्मा को आप कितना जानते हैं, ये क्विज़ खेलकर बताइए

आज 33 साल के हो गए हैं रोहित शर्मा.

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

मधुबाला को खटका लगा हुआ था इस हीरोइन को दिलीप कुमार के साथ देखकर

एक्ट्रेस निम्मी के गुज़र जाने पर उनको याद करते हुए उनकी ज़िंदगी के कुछ किस्से

90000 डॉलर का कर्ज़ा उतारकर प्राइवेट जेट खरीद लिया था इस 'गैंबलर' ने

उस अमेरिकी सिंगर की अजीब दास्तां, जो बात करने के बजाए गाने में ज़्यादा कंफर्टेबल महसूस करता था

YES Bank शुरू करने वाले राणा कपूर कौन हैं, जिन्होंने नोटबंदी को 'मास्टरस्ट्रोक' बताया था

यस बैंक डूब रहा है.

सात साल पहले केजरीवाल ने वो बात कही थी जो आज वो ख़ुद नहीं सुनना चाहते

बरसों पुरानी इस बात की वजह से सोशल मीडिया पर घेर लिए गए हैं.

क्या भारत सरकार से पूछे बिना पाकिस्तान चली गई इंडियन कबड्डी टीम?

अब ढेरों खेल-तमाशा हो रहा है.

बजट का कितना ज्ञान है, ये क्विज़ खेलकर चेक कर लो!

कितना नंबर पाया, बताते हुए जाना. #Budget2020

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.