Submit your post

Follow Us

जयललिता का फ़िल्मी सफर, जो बेमन से फिल्म इंडस्ट्री में आईं और तमिल सिनेमा की क्वीन बन गईं

‘पुरतची थलाइवी’. यानी क्रांतिकारी नेता. जनता ने इसी उपमा से नवाज़ा था अपनी एक नेता को. जिनका जीवन दो पारियों में बंटा. सिनेमा और पॉलिटिक्स. फिल्मों से हमेशा परहेज़ था. लेकिन जब स्क्रीन पर सामने आईं तो डेब्यू के महज 10 साल के अंदर 100 फिल्में दे डाली. कुछ ऐसा ही इनका राजनैतिक करियर भी रहा. जिसे लेकर शुरुआत में वो दुविधा में रही. लेकिन फिर ऐसी जम गईं कि आगे जाकर पांच बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं. लोग उन्हें पूजने लगे. ‘अम्मा’ कहकर पुकारने लगे. जी हां, हम बात कर रहे हैं भारतीय सिनेमा और पॉलिटिक्स के एक सितारे की. नाम है जयललिता. ज़िंदगी ऐसी करिश्माई कि उस पर एक फिल्म भी बनी है. ‘थलाइवी’. फिल्म में जया का किरदार निभाया है कंगना रनौत ने.

इसी मौके पर आज रियल लाइफ ‘थलाइवी’ के सिनेमाई सफर से कुछ किस्से बांचेंगे. सिर्फ सिनेमा से जुड़े किस्से. क्योंकि उनकी पॉलिटिक्स पर तो आर्टिकल्स का और वीडियोज़ का ढेर लगा हुआ है. जानेंगे क्या थे वो मौके, जिन्होंने साधारण-सी ‘अम्मू’ का मुकद्दर लिख दिया था.

Bharat Talkies


# जब मां के लिए आंखें सुजा ली

24 फ़रवरी, 1948 को हुआ जयराम और वेदवल्ली की बेटी का जन्म. नाम पड़ा कोमलवल्ली. हालांकि, जन्म के एक साल बाद ही इस बच्ची को जयललिता का नाम दिया गया. घरवाले प्यार से ‘अम्मू’ और ‘जया’ कहकर पुकारते थे. जया का बचपन तकलीफों भरा था. दो साल की थीं कि पिता चल बसे. जया और उनके भाई जयकुमार को लेकर मां अपने पिता के घर आ गईं. गुज़ारा करना मुश्किल हो रहा था. मां ने परिवार की ज़िम्मेदारी अपने कंधे ली. शॉर्ट हैंड टायपिंग सीखी और बतौर क्लर्क काम करने लगीं. दूसरी ओर वेदवल्ली की एक बहन थी. नाम था अंबुजावल्ली. फिल्मों में छुट-पुट रोल करती थीं. ‘विद्यावती’ के स्क्रीन नाम से.

Jaya Childhood
जया दो साल की थीं जब उनके पिता का निधन हो गया.

विद्या ने अपनी बहन वेदवल्ली से रिक्वेस्ट की. कि वो पिता का घर छोड़ उसके पास आ जाए. और मद्रास में अपने लिए रोजगार के बेहतर विकल्प तलाशे. वेदवल्ली को बात ठीक लगी. वो बिना ज़्यादा सोचे मद्रास आ गईं. दोनों बच्चों को उनके ननिहाल छोड़कर. एक दिन एक प्रड्यूसर अंबुजा के घर आए. नज़र पड़ी वेदवल्ली पर. कहा कि फिल्मों में ट्राई क्यूं नहीं करती. अंबुजा और वेदा, दोनों को बात जम गई. और इस तरह शुरू हुआ वेदा का फिल्मी सफर. पर वेदवल्ली के नाम से नहीं, बल्कि संध्या के नाम से.

संध्या एक कैरक्टर आर्टिस्ट थीं. फिल्मों में बिज़ी रहने लगीं. केवल छुट्टी मिलने पर ही अपने बच्चों से मिलने जा पाती. ये बात जया को मन ही मन खलती थी. एक्टिंग के पेशे पर खीज खाती थीं, जिसकी वजह से उनकी मां को उनसे दूर रहना पड़ रहा था. संध्या जब भी अपने बच्चों से मिलने आतीं, तो जया उनके साथ ही सोती. उनकी साड़ी के पल्लू को कसकर अपनी कलाई के साथ बांध लेती. ताकि मां कहीं फिर से दूर ना चली जाए. लेकिन मां भी मज़बूर. अगली सुबह फिर मद्रास के लिए रवाना होना पड़ता. इसलिए अपनी साड़ी बदल लेती. अपनी वो साड़ी अपनी तीसरी बहन को पहना देती. और खुद चुपके से निकल जाती. जया रात को सोती अपनी मां के साथ. और सुबह उठकर अपने बगल में मौसी को पाती.

Jaya Childhood 1
शुरू से पढ़ाई में अच्छी रही हैं जया.

जया का अपनी मां के साथ समय बिताना दुर्लभ ही था. एक ऐसे ही मौके पर उन्हें पता चला कि मां आ रही है. जया ने उसी दौरान अपने स्कूल में एक निबंध लिखा था. जिसकी सराहना हुई थी. वो उत्साहित थी निबंध मां को दिखाने के लिए. इसी चाव में तीन रातों तक मां का इंतज़ार किया. वो भी बिना सोए. तीन दिन गुज़र गए पर मां नहीं आई. ठान लिया कि चौथे दिन तो मां से मिलना ही है. उन्हें वो निबंध दिखाना ही है. चौथी रात भी वो बिना सोये निकालने वाली थीं. घर में सब ने सोने की ज़िद की, फिर भी हठी जया नहीं मानीं. घरवाले ज़्यादा कहने लगे तो जाकर ड्रॉइंग रूम में सो गई. घड़ी में रात के 12:30 बज रहे थे. घर में सब सो चुके थे. संध्या घर आईं. ड्रॉइंग रूम में जया को पाकर हैरान हुईं. उठाकर पूछा कि यहां क्या कर रही हो. जया आंखें मसलती हुई खड़ी हुईं. सूजी हुई आंखों के साथ. मां को देखकर बिलख पड़ी. नींद रहित आंखें और लाल हो गईं. कहा कि आपसे मिलने के लिए यहां सो रही थी. इतना सुनकर मां ने अपनी बच्ची को सीने से लगा लिया. जया के बगल में ही उनकी नोटबुक रखी थी. जिसमें उन्होंने अपना निबंध लिखा था. नोटबुक मां की ओर सरकाकर कहा, ‘देखिए, मुझे निबंध प्रतियोगिता में फर्स्ट प्राइज़ मिला है’. निबंध का शीर्षक था, ‘मेरे लिए मां के मायने’.


# ‘ये सोने की मूरत समान लड़की एक दिन एक्ट्रेस बनेगी’

संध्या नहीं चाहती थीं कि उनकी बेटी फिल्मों में आए. लेकिन उनकी एक इच्छा थी. अपनी बेटी को एक गुणी डांसर बनाने की. इसी के चलते के जे सरस के यहां डांस सीखने के लिए भेज दिया. के जे सरस एक प्रख्यात भरतनाट्यम गुरु थीं. जिनका नाम उन दिनों पूरे आदर से लिया जाता था. जया की डांस सीखने में कोई रुचि नहीं थी. लेकिन उनकी गुरु ने सख्ती की जगह धैर्य से काम लिया. जया को खुलने का समय दिया. इस धैर्य का नतीजा भी निकला. जब धीरे-धीरे जया भरतनाट्यम को लेकर उत्सुक होने लगीं. इतनी कि इस डांस फॉर्म में महारत हासिल कर ली. वो भी सिर्फ 12 साल की उम्र में.

Jayalalitha As Bharatnatyam Dancer
तीन साल की उम्र से भरतनाट्यम सीखना शुरू किया.

साल था 1960. मई का महीना. मौका आया जया के आरंगेतम का. आरंगेतम किसी भी इंडियन क्लासिकल डांस के स्टूडेंट की पहली परफॉरमेंस को कहते हैं. अपनी पहली ऑन स्टेज परफॉरमेंस के वक्त जया करीब 12 साल की थी. आयोजन हुआ. फिल्म इंडस्ट्री के लोग भी संध्या की बेटी की परफॉरमेंस देखने आए. उन्हीं मेहमानों की लिस्ट में शामिल थे शिवाजी गणेशन. तमिल सिनेमा के दिग्गज एक्टर. जया की परफॉरमेंस पूरी हुई. शिवाजी को स्टेज पर बुलाया गया. स्पीच देने के लिए. उन्होंने जया के लिए कहा,

ये लड़की एक सोने की मूरत के समान है. एक दिन भविष्य में ये फिल्म इंडस्ट्री में आएगी और बड़ा नाम कमाएगी. मैं ये दुआ करता हूं.

Jaya And Shivaji Ganeshan
जया और शिवाजी गणेशन ने साथ मिलकर 17 फिल्में दी.

जया और संध्या ये सुनकर बेहद खुश हुईं. हालांकि, उस वक्त तक दोनों का कोई प्लान नहीं था कि जया आगे चलकर फिल्मों में काम करने लगे. लेकिन अनजाने में ही कही शिवाजी की बात किस्मत की लकीर बनकर साबित हुई. क्यूंकि आगे चलकर जया ना सिर्फ फिल्मों में आई, बल्कि उनकी हीरोइन भी बनी. दोनों ने 17 फिल्मों में साथ काम किया. जिनमें से 15 फिल्में गोल्डन जुबिली हिट्स साबित हुई थीं. 1966 में आई ‘मोटर सुंदरम पिल्लई’ में जयललिता ने पहली बार शिवाजी गणेशन के साथ काम किया. इन दोनों एक्टर्स की साथ में की गई आखिरी फिल्म बनी 1976 की ‘चित्र पौरणमी’.


# स्कूली लड़की को मां की पार्टी में मिला सरप्राइज़

1964 में संध्या की एक तमिल फिल्म आई थी. नाम था ‘करनान’. बनाया था कन्नड डायरेक्टर और प्रड्यूसर बी आर पंत्तलु ने. फिल्म ने गदर मचा दिया. बॉक्स ऑफिस पर 100 दिनों से भी ज़्यादा सरपट दौड़ी. इसी सक्सेस को सेलिब्रेट करने के लिए पार्टी हुई. संध्या के साथ उनकी बेटी जया भी गई. उसके हाई स्कूल के पेपर हो चुके थे. ब्रेक चल रहा था. मां ने खुद अपनी बेटी को तैयार किया. साड़ी पहनाई. पार्टी में आए तमाम प्रड्यूसर्स और एक्टर्स की नज़र जया पर पड़ी. और सिर्फ पड़ी नहीं, बल्कि टिक गई. तभी पंत्तलु संध्या के पास पहुंचे. बताया कि मैं एक कन्नड फिल्म बना रहा हूं और आपकी बेटी को बतौर हीरोइन लेना चाहता हूं. संध्या ने टालने के लिए कहा कि दो महीनों में बेटी का कॉलेज शुरू हो रहा है. इसपर भी पंत्तलु को कोई दिक्कत नहीं थी. भरोसा दिलाया कि मैं इससे पहले फिल्म की शूटिंग पूरी कर लूंगा. संध्या जानती थीं कि जया एक्टिंग के पेशे से नफरत करती है. वो खुद ही मना कर देगी. इसलिए फ़ैसला बेटी पर छोड़ दिया. लेकिन अपनी मां को चौंकाते हुए जया ने फिल्म करने के लिए हामी भर दी.

Karnan 2
‘करनान’ उस दौर की बड़ी फिल्मों में शुमार हुई थी.

दो महीने की मोहलत मांगने वाले पंत्तलु ने फिल्म छह हफ्तों में पूरी कर दी. फिल्म थी 1964 में आई ‘चिन्नडा गोमबे’. बतौर लीड, जयललिता की पहली फिल्म. आगे जाकर इसका हिंदी रीमेक भी बना था. 1970 में आई दिलीप कुमार की फिल्म ‘गोपी’ के नाम से. अपनी पहली कन्नड फिल्म के लिए जया को 3000 रुपए दिए गए थे. उस वक्त उनकी उम्र थी 15 साल. फिल्म पूरी हो गई. जया उसे भूल अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने लगीं. स्टेला मेरिस कॉलेज से उन्हें लॉ जो पढ़ना था. लेकिन दूसरी ओर उनकी डेब्यू फिल्म बड़ी हिट साबित हुई. जिसके बाद जया एक जाना-माना चेहरा बन गईं.


# राष्ट्रपति के बेटे ने जया को देखा और फिल्म ऑफर कर दी

फिल्मों में आने से पहले जया थिएटर ग्रुप्स में लगातार एक्टिव थीं. इसी दौरान वो कई तमिल और इंग्लिश नाटकों का हिस्सा रहीं. उन्हीं में से एक था ‘टी हाउस ऑफ द ऑगस्ट मून’. एक शाम इसी प्ले की परफॉरमेंस चल रही थी. दर्शकों में एक खास शख्स बैठा था. जिसकी तमन्ना थी अपनी एक फिल्म बनाने की. प्ले में जया का किरदार आया. और इस शख्स की आंखें चमक उठी. जैसे उसे अपनी फिल्म की हीरोइन मिल गई हो. ये शख्स थे शंकर गिरी. आगे जाकर इनके पिता वी वी गिरी भारत के चौथे राष्ट्रपति बने थे.

Epistle
‘एपिस्टल’ पहली फिल्म थी जिसके लिए जया ने बतौर लीड शूटिंग की थी.

खैर, शंकर ने फ़ैसला कर लिया था जया को अपनी फिल्म में लेने का. देर थी तो बस संध्या की परमिशन लेने की. सो, संध्या से भी बात की. बताया कि मैं एक इंग्लिश फिल्म प्रड्यूस करने जा रहा हूं. नाम है ‘एपिस्टल’. जिसके लिए आपकी बेटी को साइन करना चाहता हूं. संध्या ज़रा हिचकिचाई. क्यूंकि उस समय जया की उम्र सिर्फ 13 साल थी. अपनी बेटी के स्कूल का हवाला दिया. शंकर को इस पर भी कोई आपत्ति नहीं. कहा कि मैं सिर्फ वीकेंड और स्कूल की छुट्टी के दिनों पर शूट करूंगा. संध्या आखिरकार मान गईं. और इस तरह ‘एपिस्टल’ वो पहली फिल्म बनी जिसके लिए जया ने बतौर लीड शूट किया था. हालांकि, ये फिल्म रिलीज़ 1966 में हुई. फिल्म नहीं चली. इस पॉइंट पर जया की कन्नड फिल्म ‘चिन्नडा गोमबे’ और पहली तमिल फिल्म ‘वेनिर आड़ई’ आ चुकी थीं. ‘वेनिर आड़ई’ एक हिट फिल्म थी. जया का काम यहां पसंद किया गया था. इसी को भुनाने के लिए ‘एपिस्टल’ को फिर से रिलीज़ किया गया. लेकिन दूसरी बार भी इसे ठंडा ही रिस्पॉन्स मिला.


# अपनी पहली फिल्म ही नहीं देख पाई जया

जया की पहली कन्नड फिल्म ‘चिन्नडा गोमबे’ और पहली तमिल फिल्म ‘वेनिर आड़ई’ में एक कनेक्शन था. दोनों फिल्मों में जया ने एक विधवा लड़की का किरदार निभाया था. दोनों चलीं भी खूब थीं. खासतौर पर ‘वेनिर आड़ई’. और इसमें सबसे बड़ा हाथ था एक कंट्रोवर्सी का. दरअसल, फिल्म में एक गाना था. जहां जया झरने के नीचे नहा रही थीं. सेंसर बोर्ड को ये रास नहीं आया. ऊपर से जया के किरदार ने स्लीवलेस ब्लाउज़ पहना था. जो उस दौर की सोच के हिसाब से तो बिल्कुल मेल नहीं खाता था. उस समय की हीरोइंस साड़ियों में ही दिखाई देती थीं. और यहां थी एक यंग एक्ट्रेस. वो भी स्लीवलेस ब्लाउज़ में. हंगामा होना तय था. हुआ भी.

Jaya Controversial Song 1
खूब हल्ला मचा था इस गाने पर.

किसी तरह मेकर्स ने सेंसर बोर्ड को मना लिया. सेंसर बोर्ड ने भले ही आपत्तिजनक गाने पर कैंची नहीं चलाई, लेकिन फिल्म को एडल्ट फिल्म का सर्टिफिकेट दे डाला. यानी कि सिर्फ 18 साल या उससे बड़े लोग ही फिल्म को थिएटर में देख सकते थे. फिल्म की रिलीज़ के वक्त जया की उम्र 17 साल थी. इसलिए चाहकर भी वो अपनी पहली तमिल फिल्म बड़े परदे पर नहीं देख पाईं.

Chali Chali 1
कंगना की फिल्म ‘थलाइवी’ में भी इसे रीक्रिएट किया गया है.

जिस गाने पर हंगामा मचा था, उसे कंगना वाली फिल्म में भी रीक्रिएट किया गया है. नाम है ‘चली चली’. जहां जया बनी कंगना को झरने के इर्द-गिर्द नाचते हुए देखा जा सकता है. ये गाना जया की फिल्म के आपत्तिजनक गाने से ही इंस्पायर्ड है. ड्रेस का रंग भी पिंक रखा गया है.


# एमजीआर के साथ अपने पहले सीन में कांप रही थी जया

मरूदर गोपालन रामचंद्रन. यानी एमजीआर. तमिल सिनेमा के आदिपुरुषों में से एक. जितने सफल एक्टर, उतने ही सफल पॉलिटिशियन. जया की लाइफ पर इनका बड़ा इम्पैक्ट रहा. जया के एक्टिंग और फिर शुरू हुए पॉलिटिकल करियर पर भी. जया के लिए एमजीआर उनके दोस्त, गुरु, मां और पिता के समान थे. कई जगह इस बात का भी ज़िक्र मिलता है कि वो एमजीआर ही थे, जिनको प्रेरणा मानकर जया राजनीति में उतरी थीं. एमजीआर के बाद उनकी पॉलिटिकल पार्टी AIADMK में उनकी उत्तराधिकारी जया ही बनी.

Mgr And Jaya 4
जया की ज़िंदगी पर गहरा प्रभाव था एमजीआर का.

जया और एमजीआर का साथ कई सालों तक चला. फिर चाहे वो फिल्मी जगत की साझेदारी हो या राजनीति की. दोनों ने साथ मिलकर 28 फिल्में दी. और सब की सब बॉक्स ऑफिस हिट्स. दोनों को आखिरी बार 1973 में आई ‘पत्तिकट्टू पोनइया’ में स्क्रीन शेयर करते हुए देखा गया. साथ में की गई इनकी पहली फिल्म थी 1965 में आई ‘आईरतिल ओरुवन’. जो जयललिता के करियर की तीसरी फिल्म थी. इस फिल्म को लेकर भी एक किस्सा है. जहां एमजीआर के साथ शूट किए अपने पहले सीन में जया के पसीने छूट गए थे. ये सीन सुहागरात का सीन था. जहां जया को एमजीआर के ऊपर लेटना था. बेड पर बैठी जया असहज होने लगी. बैकग्राउंड में गाना बज रहा था. टाइटल था ‘नानम्मो’. मतलब क्या तुम शर्मीली हो. सीन के बारे में सोचकर जया थर-थर कांपने लगी. शर्म से नहीं, बल्कि डर से. एमजीआर नई लड़की का ये डर भांप गए. शूटिंग रुकवा दी. जया को प्यार से समझाया. खूब बातें की. जब वो कम्फर्टेबल हुईं, तब जाकर शूटिंग शुरू करवाई.

Jaya First Scene 2
जया का एमजीआर के साथ शूट किया गया पहला सीन.

जया ने इस बात का कई मौकों पर खंडन किया कि वो एमजीआर की वजह से राजनीति में आईं. भले ही राजनीति में आने का फ़ैसला उनका अपना रहा हो. लेकिन उनके राजनैतिक भविष्य की घोषणा करने वाले एमजीआर ही थे. हुआ यूं कि जया और एमजीआर साथ में शूटिंग कर रहे थे. फिल्म थी 1972 में आई ‘रामन थेड़ई सीतै’. सेट रेडी हो रहा था. इस दौरान दोनों को-स्टार्स बातों में मशगूल थे. तभी एमजीआर ने जया से उनका हाथ बढ़ाने को कहा. जया ने अपनी हथेली थमा दी. रेखाएं पढ़कर एमजीआर बोले कि तुम जरूर पॉलिटिक्स में आओगी. जया चौंक गईं. कहा, मैं और पॉलिटिक्स? सवाल ही नहीं बनता. एमजीआर भी अपनी बात पर कायम थे. कहा कि लिखकर ले लो, मेरा कहा सही साबित होगा. एमजीआर और जया दोनों को इस बात का लेशमात्र भी अंदाज़ा नहीं था कि एक दिन एमजीआर का कहा वाकई में सच हो जाएगा.


# जब जयललिता को मारने भीड़ पहुंच गई

“भले ही मेरा जन्म कर्नाटक में हुआ और मुझे काफी अच्छी कन्नड भी आती है. लेकिन बावजूद इसके, मैं खुद को तमिल ही मानती हूं, कन्नाडिगा नहीं”.

जयललिता का अपने एक इंटरव्यू में दिया गया एक बयान. जिसकी बदौलत भयंकर हाय-तौबा मची. इस हंगामे के पीछे एक बैक स्टोरी है. ज़रा उसपर बात करते हैं. जया का जन्म हुआ था मैसूर के मांड्या जिले में. जो अब कर्नाटक का हिस्सा है. 70 का दशक था. कुछ संगठन मिलकर बवाल कर रहे थे. उनकी मांग थी कि मैसूर का नाम बदलकर कन्नड़ में किया जाए. तमिलनाडु का कर्नाटक के साथ कावेरी नदी को लेकर भी पुराना पंगा है. इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच एक मैगज़ीन ने जयललिता का इंटरव्यू लिया. जहां जया ने साफ-साफ कहा कि वो खुद को कन्नाडिगा नहीं, बल्कि तमिल मानती हैं. प्रदर्शन कर रहे कन्नड संगठनों तक भी ये बात पहुंची. सुनकर भड़क गए. बोले कि या तो जयललिता माफी मांगें वर्ना उनका बॉयकॉट करेंगे. इसी के चलते जया को मैसूर में अपनी एक डांस परफॉरमेंस भी कैंसल करनी पड़ी. सोचा कि कुछ समय में माहौल शांत हो जाएगा. पर ऐसा हुआ नहीं.

Jayalalitha 3
जया का जन्म मैसूर के मांड्या जिले में हुआ, जो अब कर्नाटक का हिस्सा है.

उन्हीं दिनों बी आर पंत्तलु अपनी कन्नड फिल्म ‘गंगा गौरी’ का तमिल रीमेक बनाने की सोच रहे थे. ये वहीं हैं, जिन्होंने जया को उनकी मां की पार्टी में फिल्म ऑफर की थी. खैर, रीमेक के लिए जया के पास पहुंचे. जया मान भी गईं. अक्सर तमिल फिल्मों की शूटिंग मद्रास में होती थी. लेकिन पंत्तलु ने अपनी इस फिल्म की शूटिंग मैसूर में करने का फ़ैसला लिया. प्लान था कि इससे बजट में कटौती की जाए. जया मैसूर में शूटिंग कर रही हैं. ये बात उन कन्नड संगठनों तक भी पहुंची. जो जया पर भड़के हुए थे. फिल्म की लोकेशन यानी प्रीमियर स्टूडियो में भीड़ घुस आई. जल्द ही 12 फीट ऊंचा दरवाज़ा बंद किया गया. लेकिन आक्रोशित जनता इसे फांद कर अंदर आ ही गई. जया को भद्दी गालियां देने लगी. कहने लगी कि माफी मांगो. जया ने साफ मना कर दिया. उल्टा भीड़ पर चीखीं कि मैं एक तमिल लड़की हूं, कन्नड लड़की नहीं. भीड़ शांत हो गई. उन्हें कुछ समझ नहीं आया. वजह थी कि जया ने गुस्से में जो कहा, वो तमिल में था. भीड़ को समझ आता तब तो कुछ बोलती.

Premier Studio 1
मैसूर के प्रीमियर स्टूडियो में हुआ था सारा हंगामा.

सेट पर फिल्म के डायरेक्टर स्वामी भी मौजूद थे. वो आगे आए. भीड़ को समझाया. कि हमारे राज्य में आए किसी तमिल नागरिक पर हमला करना हमारी ही बदनामी है. हैरानी से गुस्साए लोग मान गए. और वापस लौट गए.

इस घटना के बाद जया भी मैसूर छोड़, फिर से मद्रास लौट आईं.


# 100 से ज़्यादा फिल्मों में फैला करियर

जया की ज़िंदगी अनिश्चिताओं से भरी थी. कहाँ तो फिल्मों से परहेज़ था, कहाँ सिनेमा क्वीन बन बैठीं. अपने करियर में 140 से ज़्यादा फिल्में दे डाली. उनमें से भी अधिकतर बॉक्स ऑफिस सुपरहिट्स. तमिल समेत हिंदी, कन्नड और तेलुगु भाषी सिनेमा में भी अपने टैलेंट की जय करवाई. जया के इसी दो दशकों में फैले करियर में से हमनें उनकी कुछ फिल्में चुनी हैं. कुछ कमाल की फिल्में. वैसे तो उनके करियर में इतनी बड़ी-बड़ी फिल्में हैं कि सबको जगह दे पाना मुमकिन नहीं. इसलिए जो नाम रह जाएं, उनके लिए माफी.

#1. चंद्रोदायम (1966)

एमजीआर और जयललिता की एक और हिट फिल्म. कहानी है देवी की. अमीर घराने की लड़की. घरवाले उसकी मर्ज़ी के खिलाफ उसकी सगाई तय कर देते हैं. इसपर वो नाराज़ हो जाती है. सगाई से एक दिन पहले ही घर से भाग जाती है. रास्ते में मिलती है चंदन नाम के रिपोर्टर को. जिसका रोल एमजीआर ने निभाया. ये फिल्म 1934 में आई हॉलीवुड फिल्म ‘इट हैपन्ड वन नाइट’ से इंस्पायर्ड थी. जिससे प्रेरणा लेकर हिंदी सिनेमा में भी एक फिल्म बनी थी. फिल्म थी आमिर खान और पूजा भट्ट स्टारर ‘दिल है कि मानता नहीं’. खैर, अपनी इस तमिल फिल्म के लिए जयललिता को बेस्ट एक्ट्रेस का तमिलनाडु सिनेमा फैन अवॉर्ड भी मिला था.

1
एमजीआर और जया की सुपरहिट जोड़ी लीड में थी यहां.

#2. यार नी? (1966)

जयललिता ने अपने करियर में कुल आठ फिल्मों में डबल रोल निभाए. उन्हीं में से एक थी ये तमिल मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म. ये 1964 में आई मनोज कुमार की हिंदी फिल्म ‘वो कौन थी’ का रीमेक थी. जया की इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जमकर पैसा पीटा. उनके हिस्से कई अवॉर्ड्स भी आए. आगे चलकर इसे तेलुगु में भी बनाया गया. फिल्म का नाम था ‘आमे एवरू?’. तेलुगु रीमेक में भी जया ने लीड रोल निभाया था.

3
हिंदी फिल्म ‘वो कौन थी’ का ऑफिशियल रीमेक.

#3. अदाईमै पेन (1969)

एमजीआर और जयललिता की जोड़ी फिर से इस फिल्म के लिए लौटी. ऐसी लौटी कि फिल्म ने तमिल सिनेमा के तमाम रिकॉर्ड्स की धज्जियां उड़ा दी. थिएटर पर अपने 175 दिन पूरे किए. इतना ही नहीं, मद्रास के सिर्फ चार थिएटर्स में फिल्म ने 400 शोज़ पूरे किए.

1
फिल्म ने सिनेमाघरों में गदर मचा दिया था.

फिल्म में जया ने डबल रोल निभाया. रानी और दासी का. उनके काम की काफी प्रशंसा भी हुई थी. इसी फिल्म की बदौलत फिर से उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का तमिलनाडु सिनेमा फैन अवॉर्ड जीतने का मौका मिला था.


वीडियो: पाकिस्तानी बैंड ‘स्ट्रिंग्स’ की कहानी, जिसे ‘स्पाइडरमैन-2’ के गाने बनाने का ऑफर मिला था

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

जिन मीम्स को सोशल मीडिया पर शेयर कर चौड़े होते हैं, उनका इतिहास तो जान लीजिए

जिन मीम्स को सोशल मीडिया पर शेयर कर चौड़े होते हैं, उनका इतिहास तो जान लीजिए

कौन सा था वो पहला मीम जो इत्तेफाक से दुनिया में आया?

पार्टियों को चुनाव निशान के आधार पर पहचानते हैं आप?

पार्टियों को चुनाव निशान के आधार पर पहचानते हैं आप?

चुनावी माहौल में क्विज़ खेलिए और बताइए कितना स्कोर हुआ.

लगातार दो फिफ्टी मारने वाले कोहली ने अब कहां झंडे गाड़ दिए?

लगातार दो फिफ्टी मारने वाले कोहली ने अब कहां झंडे गाड़ दिए?

राहुल के साथ यहां भी गड़बड़ हो गई.

रोहित शेट्टी के ऊपर ऐसी कड़क Quiz और कहां पाओगे?

रोहित शेट्टी के ऊपर ऐसी कड़क Quiz और कहां पाओगे?

14 मार्च को बड्डे होता है. ये तो सब जानते हैं, और क्या जानते हो आके बताओ. अरे आओ तो.

आमिर पर अगर ये क्विज़ नहीं खेला तो दोगुना लगान देना पड़ेगा

आमिर पर अगर ये क्विज़ नहीं खेला तो दोगुना लगान देना पड़ेगा

म्हारा आमिर, सारुक-सलमान से कम है के?

परफेक्शनिस्ट आमिर पर क्विज़ खेलो और साबित करो कितने जाबड़ फैन हो

परफेक्शनिस्ट आमिर पर क्विज़ खेलो और साबित करो कितने जाबड़ फैन हो

आज आमिर खान का हैप्पी बड्डे है. कित्ता मालूम है उनके बारे में?

अनुपम खेर को ट्विटर और वॉट्सऐप वीडियो के अलावा भी ध्यान से देखा है तो ये क्विज खेलो

अनुपम खेर को ट्विटर और वॉट्सऐप वीडियो के अलावा भी ध्यान से देखा है तो ये क्विज खेलो

चेक करो अनुपम खेर पर अपना ज्ञान.

कहानी राहुल वैद्य की, जो हमेशा जीत से एक बिलांग पीछे रह जाते हैं

कहानी राहुल वैद्य की, जो हमेशा जीत से एक बिलांग पीछे रह जाते हैं

'इंडियन आइडल' से लेकर 'बिग बॉस' तक सोलह साल हो गए लेकिन किस्मत नहीं बदली.

गायों के बारे में कितना जानते हैं आप? ज़रा देखें तो...

गायों के बारे में कितना जानते हैं आप? ज़रा देखें तो...

कितने नंबर आए बताते जाइएगा.

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.