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जब नेहरू ने कहा, 'मेरे और पटेल के नाम पर स्टेडियम के नाम न रखे जाएं'

Piyush Babele

पीयूष बबेले पत्रकार हैं. 2004 से अब तक वे देश के अनेक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में पत्रकारिता कर चुके हैं. पत्र पत्रिकाओं और वेबसाइट्स के लिए लगातार लिखते रहे हैं. इनमें से बहुत से लेख आजादी के बाद वाले इतिहास के भ्रामक चित्रण के खिलाफ रहे हैं. उनकी लिखी किताब है. नेहरू: मिथक और सत्य. इसका एक अंश हम आपके लिए लेकर आए हैं.


गुजरात के अहमदाबाद में दर्शक संख्या के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम बनकर तैयार हुआ. नाम मिला- नरेंद्र मोदी स्टेडियम. इसी के साथ बातें होने लगीं कि लोगों के नाम पर स्टेडियम वगैरा का नाम रखना कितना सही है. जानते हैं कि इस बारे में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का क्या कहना था. पढ़िए पीयूष बबेले की किताब का अंश:


विज्ञान, कला और साहित्य के लिए फ़िक्रमंद नेहरू खेलों के लिए और ज़्यादा चिंतित थे. उन्हें 1951 में देश में पहले एशियाड खेलों का आयोजन कराना था. खेल के बहाने उन्हें दुनिया में एक नए राजनैतिक ध्रुव की नींव रखनी थी. 11 फ़रवरी 1949 को क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के मानद सचिव एएस डीमेलो के पत्र के जवाब में नेहरू ने एक नोट लिखा –

“मैंने मिस्टर डीमेलो द्वारा बनाया गया वह नोट पढ़ा, जिसमें उन्होंने नई दिल्ली में ‘नेहरू स्टेडियम इन पार्क’ और मुंबई में ‘वल्लभ भाई पटेल ओलंपिक स्टेडियम’ बनाने का सुझाव दिया है.

मैं भारत में खेल-कूद और एथलेटिक्स को पूरा प्रोत्साहन देने के पक्ष में हूं. यह बहुत अफसोस की बात है कि देश में कहीं भी कोई ढंग का स्टेडियम नहीं है. पटियाला या एक-दो जगहों को छोड़ दें तो देश में कहीं भी कायदे का रनिंग ट्रैक तक नहीं है. इसलिए मुझे लगता है कि सरकार को हर तरह से स्टेडियम निर्माण के काम को बढ़ावा देना चाहिए.

मैं किसी भी स्टेडियम का नाम अपने या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर रखे जाने के सख़्त ख़िलाफ़ हूं. यह एक बुरी आदत है और इसे बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए. स्टेडियम का नाम ‘नेशनल स्टेडियम’ या इसी तरह का कोई दूसरा नाम हो सकता है.”

इस मामले में भी नेहरू ने स्टेडियम के लिए सुझाए गए भारी-भरकम बजट से हाथ जोड़ लिए. यह काम भी समय के साथ पूरा हुआ. हालांकि नेहरू की वह इच्छा पूरी नहीं हो सकी, जिसमें उन्होंने इंसानों के नाम पर स्टेडियम का नाम रखने का विरोध किया था. आज दिल्ली में उनके और उनकी बेटी इंदिरा के नाम पर बड़े-बड़े स्टेडियम हैं. खिलाड़ियों को दिए जाने वाले एक प्रतिष्ठित पुरस्कार का नाम उनके नाती राजीव गांधी के नाम पर ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ रखा गया है.


किताब का नामः नेहरू: मिथक और सत्य

लेखकः पीयूष बबेले

प्रकाशकः संवाद प्रकाशन

उपलब्धता: ऐमजॉन

मूल्यः 300 रुपए


वीडियो: जवाहर लाल नेहरू के राष्ट्रीयकरण का एयर इंडिया पर क्या प्रभाव पड़ा?

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