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श्रीनाथ, जिन्हें रिटायर होने के बाद वर्ल्ड कप के लिए बुलाया

6 दिसंबर 1991. वेस्ट इंडीज़ वर्सेज़ इंडिया. पर्थ, ऑस्ट्रेलिया. नया-नया बैट्समैन क्रीज़ पर था. कीथ ऐर्थरटन. वेस्ट इंडीज़ की हालत विकट थी. 55 रन पर 4 विकेट जा चुके थे. पिछली ही गेंद पर कार्ल हूपर निपट चुके थे. हालांकि अज़हर की कप्तानी में खेल रही टीम इंडिया ने भी टार्गेट मामूली सा ही दिया था. वेस्ट इंडीज़ को जीतने के लिए कुल 126 रन ही चाहिए थे. लेकिन डेसमंड हेंस, रिची रिचर्डसन, ब्रायन लारा और कार्ल हूपर के चले जाने के बाद आदमी वैसे भी होश में न आ पाए. यहां तो अभी 72 रन और बनाने थे.

एक सूखा सा इंसान गेंद लेकर वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया की हरी ज़मीन पर दौड़ रहा था. अभी-अभी उसने कार्ल हूपर के विकेट्स उखाड़े थे. शरीर सूखा लेकिन गेंद एकदम कटीली. एक लंबी बांह से फेंकी गयी गेंद. ऐर्थरटन बायां हत्था बल्लेबाज थे. गेंद उनके लेग स्टम्प की लाइन के भी बाहर की ट्रेजेक्टरी फॉलो कर रही थी. फ्लिक करने लायक. वैसा फ्लिक जैसा युवराज सिंह ने ब्रेट ली को डरबन में T-20 वर्ल्ड कप के दौरान मारा था. वो 119 मीटर लम्बा छक्का.

खैर, ये न डरबन था, न बैटिंग क्रीज़ पर युवराज. ये बात तब की है जब कमेंट्री बॉक्स में माइक पकड़े टोनी ग्रेग साक्षात मौजूद रहते थे. गेंद लेग स्टंप के बाहर की लाइन पकड़ बैट्समैन के ठीक सामने टप्पा खाती है. गुड लेंथ से कुछ आगे गिरी गेंद पर ऐर्थरटन शायद कुछ कन्फ्यूज़ हो गए थे. वो बैकफुट पर चले गए. और गेंद को वहीं डिफेंड कर निष्क्रिय कर देना चाहा.

लेकिन उस दिन खेल को कुछ और ही मंजूर था. गेंद पड़ते ही तैर गयी. बाहर की ओर. उसने बैट्समैन को छोड़ विकेट्स की ओर रुख कर लिया. लेग स्टंप पर पड़ी गेंद बैट्समैन को छोड़ मिडल स्टंप से जा मिली. गिल्लियां हवा में उछल पड़ीं. शायद टोनी ग्रेग भी उछल पड़े थे. “Oh! He’s bowled him! First ball. You little beauty. He’s on a hat-trick!” इसके आगे रिची बेनॉड की आवाज़ सुनाई पड़ती है. वो कहते हैं, “That was the most perfectly pitched delivery.”

वो सूखा सा इंसान, इंडिया का सबसे तेज़ गेंद फेंकने वाला बॉलर था. जवागल श्रीनाथ. 31 अगस्त 1969 में मैसूर, कर्नाटक की पैदाइश. कपिल देव की स्विंग कुंद हो जाने के बाद इंडिया का पेस अटैक संभालने और उसे सिर्फ ज़िन्दा ही नहीं, दौड़ाये रखने वाला बॉलर. और जब 11 साल इंडिया के लिए क्रिकेट खेलने के बाद रिटायर हुआ तो कपिल देव के बाद सबसे ज़्यादा विकेट्स लेने वाला खिलाड़ी.

एक तगड़ा ऐक्शन. कंधे का जितना हो सकता था, उतना इस्तेमाल. पिच को गेंद से ऐसे ठोंकता था जैसे कोई दुश्मनी हो. इनकटर और अन्दर की ओर स्विंग होती गेंदें प्रमुख हथियार. लेकिन मूड होता था और कंडीशन साथ देती थीं, तो बाहर भी निकाल देता था.

अहमदाबाद. 1996. इंडिया वर्सेज़ साउथ अफ़्रीका. दो दिन में 170 रन बनाना बच्चों से खेल से कुछ ही मुश्किल होता है. साउथ अफ्रीका चौथी इनिंग्स में अपने ओपनर्स से काफ़ी उम्मीद लगाये बैठी थी. वो चाहते थे कि स्पिनर्स के आने से पहले खूब रन बना लिए जायें. लेकिन उस दिन फिर से खेल को कुछ और ही मंज़ूर था. श्रीनाथ फिर से गच्चा दे गए. आये और अपनी पांचवीं गेंद पर ही कमाल दिखा दिया. हडसन के पैर पर गेंद दे मारी. अन्दर की ओर स्विंग होती हुई गेंद.

जैसे श्रीनाथ से बात करती हो और उनके कहे अनुसार ही चलती हो. प्लेयर्स अपील में उछले और दिल्ली के अम्पायर श्याम बंसल ने उंगली उठा दी. हालांकि बाद में देखा गया कि लेग स्टंप मिस कर रही थी. डेरिल कलिनन श्रीनाथ के अगले टार्गेट थे. इन्हें विकेट के पीछे मोंगिया ने कैच किया. साउथ अफ़्रीका बिना किसी रन के दो विकेट खो चुकी थी. उस इनिंग्स में क्रोन्ये के सिवा कोई बैट्समैन इतनी देर तक नहीं टिक पाया, जो अफ्रीका के लिए आस जगा सकता.

इनिंग्स में कुल 6 बैट्समैन बिना कोई रन बनाये आउट हुए. इसमें से 4 को श्रीनाथ ने ही वापस भेजा. श्रीनाथ की स्विंग और कुम्बले के टप्पों ने साउथ अफ़्रीका को दबा कर रक्खा. 96 रन पर 4 विकेट के स्कोर के बाद 105 पर ऑल आउट हो गए. श्रीनाथ के 12 ओवर में एक गेंद कम में कुल 21 रन आये और 6 विकेट. मैन ऑफ़ द मैच की ट्रॉफी कुछ ही देर में श्रीनाथ के हाथ में चमक रही थी.

javagal srinathकलकत्ता. 1999. इंडिया वर्सेज़ पाकिस्तान. इस टेस्ट मैच को हालांकि मैदान में हुए दंगे, सचिन के अजीब-ओ-गरीब रन आउट और शोएब का सचिन को पहली ही गेंद पर बोल्ड करने के लिए ज़्यादा याद किया जाता है. लेकिन इस मैच में एक बात और हुई थी. सईद अनवर और श्रीनाथ को एक साथ मैन ऑफ़ द मैच मिला था.

श्रीनाथ के पाकिस्तान की दूसरी इनिंग्स में 8 विकेट थे. सक़लैन मुश्ताक़, सईद अनवर और मोईन खान को छोड़कर सभी को श्रीनाथ ने लपेटा. आखिरी के 7 विकेट 54 रनों के अन्दर गिरे. इसमें 6 श्रीनाथ के थे.

श्रीनाथ के पास सिर्फ गेंद ही नहीं रहती थी. उनकी किट में एक बल्ला भी था. हैमिल्टन. जनवरी 1999. न्यूज़ीलैंड के 366 रनों के जवाब में 211 रन पर 7 विकेट जा चुके थे. द्रविड़ एकमात्र आस थे. लेकिन पार्टनर्स की कमी के चलते उनसे जितना बन पड़ रहा था, वो करते जा रहे थे. नौंवें विकेट के लिए खेलने आये श्रीनाथ.

द्रविड़ के साथ 144 रन की पार्टनरशिप बनाई. लगभग 49 गेंदों में. आठवां विकेट 355 पर गिरा. मैच ड्रॉ हुआ. श्रीनाथ ने बैटिंग में कई एडवेंचर ट्राई किये. किये भी, इनसे करवाए भी गए. लेकिन सक्सेस रेट काफ़ी कम रहा. टेस्ट में 4 पचासे और वन-डे में एक. लेकिन वन में छक्के कुल 17 मारे हैं. मतलब बल्ला भांजना आता था. लगी-लगी वरना जय राम जी की.

श्रीनाथ उस वक़्त में इंडियन टीम का हिस्सा थे जब नीली जर्सी पहन कर खेलने वाले लड़कों के झुंड में कर्नाटक से आने वालों का बोलबाला था. इनके साथ दूसरे एंड से बॉलिंग करने वाले वेंकटेश प्रसाद भी वहीं से कर्नाटक से आते थे. लेकिन जनता जनार्दन का भरोसा श्रीनाथ पर था. जबकि जानकार प्रसाद को ज़्यादा घातक मानते थे. गेंद पर सटीक कंट्रोल, पटक, स्विंग, ऊंचाई से गेंद छोड़ने की आदत और समय से विकेट लेने की फ़ितरत श्रीनाथ को पब्लिक के बीच भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर चुकी थी.

करियर के आख़िरी हिस्से में श्रीनाथ के तरकश में नये तीर आये. श्रीनाथ ने वन डे मैचों में लेग कटर और स्लोवर गेंदें फेंकनी शुरू कीं. आख़िरी दिनों में आने वाले बॉलर्स के मेंटर के रूप में श्रीनाथ दिखे. ज़हीर खान और आशीष नेहरा श्रीनाथ के उत्तराधिकारी कहे जा सकते हैं. 2002 में श्रीनाथ ने क्रिकेट से रिटायरमेंट अनाउंस कर दिया. लेकिन सौरव गांगुली उन्हें 2003 वर्ल्ड कप टीम में देखना चाहते थे. उन्हें वापस बुलाया गया. लेकिन वर्ल्ड कप 2003 का फाइनल श्रीनाथ के लिए वो फेयरवेल था जिसे वो कतई डिज़र्व नहीं करते थे.

Srinath


 

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