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2021 का सबसे पावरफुल पासपोर्ट किस देश का है, जान लीजिए

दुनिया भर में कोरोना के खिलाफ लड़ाई का फाइनल दौर शुरू हो चुका है. वैक्सीनेशन कई देशों में शुरू हो चुका है या बस शुरू होने वाला है. कोरोना की वजह से विदेश यात्रा करने वालों के अरमान ठंडे पड़े हुए हैं. उम्मीद है कि वैक्सीन आने के बाद इसमें कुछ सुधार होगा. देश से बाहर जाने के लिए एक और चीज की जरूरत होती है, वह है पासपोर्ट. लेकिन क्या आपको पता है कि पासपोर्ट की भी अपनी ताकत होती है.

जी हां, दुनिया के कई ऐसे देश हैं, जिनका पासपोर्ट दूसरों के मुकाबले ज्यादा ताकतवर है. दुनियाभर के पासपोर्ट्स की एक पावर रैंकिंग हर साल आती है. हाल ही में हेनले एंड पार्टनर्स पासपोर्ट इंडेक्स ने दुनिया के ताकतवर पासपोर्ट्स  की सूची जारी की है. लिस्ट में सबसे ऊपरी पायदान पर जापान का पासपोर्ट है. ऐसा किस आधार पर होता है, और क्या है पावरफुल पासपोर्ट का तिया-पांचा, आइए जानते हैं.

सबसे पहले तो पासपोर्ट और वीजा का सिस्टम समझिए

# पासपोर्ट आपको अपना देश इश्यू करेगा. इस डॉक्यूमेंट के जरिए ही आपको देश से बाहर जाने की इजाज़त मिलती है.

# वीज़ा वो देश इश्यू करेगा, जहां पर आपको जाना है.

# मतलब अगर आपको भारत से अमेरिका जाना है, तो भारत का पासपोर्ट और अमेरिका का वीजा लेना होगा. जिस देश में रहते हैं, वहां का पासपोर्ट तो कुछ कागज दिखाकर मिल जाएगा, लेकिन वीजा देना या न देना उस देश की सरकार पर है, जहां आप जाना चाहते हैं.

# हालांकि कुछ देश ऐसे होते हैं, जिनके लोगों को दूसरे देश ‘वीजा फ्री’ एंट्री की इजाजत देते हैं. यह भरोसे का मामला है. मतलब एक देश, दूसरे देश के बारे में इतना आश्वस्त है कि वह वीजा के सिस्टम के बिना ही उसके नागरिकों को अपने देश आने की इजाजत दे देता है.

पासपोर्ट अगर अपने देश से बाहर जाने का पास है तो वीसा दूसरे देश में घुसने का एंट्री पास.

अब एक घरेलू उदाहरण से समझिए. गांव में कई घर ऐसे होंगे, जहां पर आपको अंदर जाने के लिए इजाज़त की ज़रूरत नहीं पड़ती होगी. क्योंकि आप शर्मा जी के लड़के हैं. कई जगह आप अंदर पहुंचकर बस अपना नाम बता सकते हैं और लोग आपके घर-परिवार के बारे में इतनी अच्छी तरह से जानते हैं कि उन्हें आपसे कोई दिक्कत नहीं होगी. लेकिन कुछ ऐसे घर हैं, जहां बिना पूछे एंट्री नहीं है, चाहे आप किसी के भी बेटे हों.

# इसी तरह दुनिया में कई देश ऐसे हैं, जहां पर किसी भारतीय को वीज़ा की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि उसके पास भारत का पासपोर्ट है. कई जगह ऐसी होंगी, जहां वीजा तो लेना पड़ेगा, लेकिन वह वीजा उस देश में पहुंचकर भी लिया जा सकता है.

तो इस तरह जिस पासपोर्ट धारक को बिना वीज़ा के या वहां पहुंचकर वीजा लेने (वीजा ऑन अराइवल) की सुविधा के साथ सबसे ज़्यादा देश अपने यहां आने की इजाजत देते हैं, वो पासपोर्ट उतना ही मज़बूत या ताकतवर कहलाता है.

दुनिया भर में घूमने के लिए पासपोर्ट के साथ वीसा की भी जरूरत होती है.
दुनिया भर में घूमने के लिए पासपोर्ट के साथ वीसा की भी जरूरत होती है.

पासपोर्ट की शुरुआत कब से हुई?

अब सवाल यह भी उठता है कि आखिर कौन सा देश है, जिसने सबसे पहले पासपोर्ट की शुरुआत की थी. पासपोर्ट की कहानी इतनी पुरानी है कि इसके इतिहास को भी प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक जैसे कालों में बांटा जा सकता है.

पासपोर्ट जैसा सबसे पुराना डॉक्युमेंट हमें हिब्रू बाइबल में मिलता है. इस बाइबल को नेहेमिहा कहा जाता है. इसकी रचना 450 ईसा पूर्व हुई थी. इसमें एक राजा को अपने दूत को एक डॉक्युमेंट सौंपने का वर्णन है. इस डॉक्युमेंट में नदी पार करके दूसरे राज्य में जाने की परमीशन दी गई थी.

इसके बाद पासपोर्ट जैसे डॉक्युमेंट का वर्णन भारतीय ग्रंथ अर्थशास्त्र में मिलता है. मौर्य कालीन इस ग्रंथ की रचना चाणक्य ने की थी. इसमें राजव्यवस्था से जुड़ा पूरा सिस्टम समझाया गया है. राज्य के एक अधिकारी मुद्राराक्षस का वर्णन इस ग्रंथ में मिलता है. इसका काम किसी भी बाहर से देश में आने वाले और देश के बाहर जाने वाले के डॉक्युमेंट पर मुहर लगाने का होता था. ये बात तकरीबन 3 ईसा पूर्व की है.

इसके साथ ही चीन में चिन औऱ हान साम्राज्य के वक्त भी लोगों को नाम, पते और हुलिया के हिसाब से डॉक्युमेंट इश्यू करने का ब्यौरा मिलता है. इनके आधार पर ही वह देश के बाहर जा सकते थे.

मध्यकाल की बात करें तो इस्लामिक खलीफत के वक्त भी ऐसे डॉक्युमेंट्स का चलन पाया गया है. यह बात 6वीं शताब्दी से 9वीं शताब्दी के बीच की है. इसमें बर्रा नाम का एक डॉक्युमेंट दिया जाता था. इसे इस्लामिक टैक्स जकात और जज़िया भरने के बाद ही दिया जाता था. इसके बाद ही कोई देश के बाहर जाने का अधिकारी होता था.

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अरब में सातवीं शताब्दी में जारी किया गया एक ट्रैवल डॉक्युमेंट. इसे हर यात्री को इश्यू किया जाता था. (फोटो-विकीपीडिया)

आधुनिक पासपोर्ट का अविष्कारक ब्रिटेन के शासक हेनरी पंचम को माना जाता है. उन्होंने अपने करीबी लोगों को विदेश में नियुक्ति के वक्त ऐसे डॉक्युमेंट्स इश्यू किए, जिनसे पता चल सके कि वो किस पद पर हैं और उनका अता-पता क्या है. यह लगभग 1420 के आसपास का वक्त रहा होगा. तब तक ‘पासपोर्ट’ शब्द चलन में नहीं आया था. पहले कम लोगों को यह डॉक्युमेंट इश्यू होता था लेकिन बाद में इसकी संख्या बढ़ने लगी. ब्रिटेन के राजा की मदद करने वाली प्रिवी काउंसिल ने 1540 में एक एक्ट पास किया. उसमें पासपोर्ट का फॉर्मल सिस्टम बनाना शुरू किया. यह पहली बार था कि ‘पासपोर्ट’ शब्द इस्तेमाल में आया. 1794 में ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने बाकायदा पासपोर्ट इश्यू करना शुरू कर दिया. इसे देश के बाहर जाने के लिए सबसे जरूरी डॉक्युमेंट माना जाता था. अगर इसके बिना कोई देश से बाहर जाता तो उसे देशनिकाला देने का प्रावधान था.

साल 1920 में लीग ऑफ नेशंस ने पासपोर्ट पर एक कॉन्फ्रेंस की. इससे ही पासपोर्ट का डिजाइन, रंग आदि निकलकर आया. इसके बाद ऐसी ही कॉन्फ्रेंस 1926 और 1927 में हुईं, जिनमें पासपोर्ट के सिस्टम को और सुधारा गया. ये लीग ऑफ नेशन वही संगठन था, जिसे पहले विश्व युद्ध के बाद विश्व शांति बनाए रखने के लिए बनाया गया था. यह आधुनिक पासपोर्ट सिस्टम की तरफ बढ़ाया गया पहला बड़ा कदम माना जा सकता है.

पासपोर्ट का सिस्टम परवान चढ़ ही रहा था कि दूसरे विश्व युद्ध का माहौल बनने लगा. एक दूसरे देश में आना-जाना तो दूर, युद्ध शुरू हो गए. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद युनाइटेड नेशन या संयुक्त राष्ट्र संघ ने पासपोर्ट गाइडलाइंस पर गंभीरता से काम शुरू किया. यह 1963 की बात है. हालांकि पूरी तरह से पासपोर्ट का स्टैंडर्डाइजेशन 1980 में ही हो सका. एक नई संस्था इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन ने पासपोर्ट के मानकीकरण और सिस्टम बनाने का जिम्मा संभाला. इसके बाद ही आधुनिक बुकलेट जैसी शक्ल के पासपोर्ट सामने आए. कुछ साल बाद बायोमैट्रिक पहचान और कंप्यूटराइज्ड एंट्री होने लगी. अब तो कई देशों ने डिजिटल पासपोर्ट इश्यू करने शुरू कर दिए हैं. पासपोर्ट की शक्ल एक बुकलेट से बदलकर एक क्रेडिट कार्ड जैसी हो चुकी है. इनमें ही बायोमैट्रिक इंफॉर्मेशन स्टोर रहती है. हर देश अपने हिसाब से नागरिकों को अलग-अलग कैटेगिरी के पासपोर्ट इश्यू करती है.

भारत आजाद होने से पहले भारतीयों को खास ब्रिटिश पासपोर्ट ही इश्यू किया जाता था. इन पासपोर्ट को उन देशों के लोगों के लिए बनाया गया था, जो ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा थे. जब 1947 में भारत आजाद हुआ तो इन पासपोर्ट धारकों को अपने मन के मुताबिक भारत, पाकिस्तान या ब्रिटेन की नागरिकता स्वीकार करने का ऑप्शन दिया गया. इसके बाद भारत ने अपने खुद के पासपोर्ट इश्यू करना शुरू कर दिया.

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आजाद होने से पहले भारतीयों को स्पेशल ब्रिटिश पासपोर्ट इश्यू किए जाते थे.

भारत में कितनी तरह के पासपोर्ट हैं?

भारत तीन तरह के पासपोर्ट इश्यू करता है. साधारण पासपोर्ट, डिप्लोमैटिक पासपोर्ट और ऑफिशियल पासपोर्ट

# साधारण पासपोर्ट आम नागरिकों को इश्यू किया जाता है. इसका रंग नीला होता है. इसमें 36 से 60 पेज होते हैं. इसे P कैटिगरी का पासपोर्ट कहा जाता है

# डिप्लोमैटिक पासपोर्ट भारत के राजदूतों, सांसदों और देश के मंत्रियों को इश्यू किया जाता है. यह पासपोर्ट किसी ऐसे सरकारी अधिकारी को भी इश्यू किया जा सकता है जो किसी आधिकारिक दौरे पर देश के बाहर की यात्रा कर रहा हो. इसका रंग मैरून होता है और इसे D कैटिगरी का पासपोर्ट कहा जाता है.

# अगर कोई भी अधिकारी सरकार के किसी भी काम से दूसरे देश की यात्रा पर कर रहा है, तो उसे ऑफिशियल पासपोर्ट इश्यू किया जाता है. इसका रंग सफेद होता है. इसे S कैटिगरी या सर्विस कैटिगरी का पासपोर्ट कहा जाता है.

दुनिया भर में पासपोर्ट बनाने का काम अमूमन उस देश का विदेश मंत्रालय ही करता है. देश एक दूसरे से संबंध के हिसाब से पासपोर्ट को लेकर शर्तें तय करते हैं. मिसाल के तौर पर कई देशों में इतने दोस्ताना रिश्ते होते हैं कि वह एक दूसरे के नागरिकों को बिना वीजा दिए ही अपने देश में आने देते हैं. वीजा लेने की प्रक्रिया दूसरे देश में पहुंचने के बाद करते हैं.

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भारत के नागरिकों के तीन तरह के पासपोर्ट इश्यू किए जाते हैं. ये सफेद,नीले और मरून कलर के होते हैं.

 सब पर भारी जापानी पासपोर्ट

दुनियाभर के पासपोर्ट और वीजा के डेटा को जमा करके हेनले पासपोर्ट इंडेक्स नाम की वेबसाइट ने रैंकिंग जारी की है. इस रैंकिंग में किसी भी पासपोर्ट की ताकत इस बात पर निर्भर करती है कि उसके देश के पासपोर्ट धारक को कितने देश बिना वीजा अपने देश में आने देते हैं. इस लिहाज से दुनियाभर में जापान का पासपोर्ट सबसे ताकतवर है और अफगानिस्तान का सबसे कमजोर. जापान को 191 देश बिना वीजा (आने पर वीजा) के एंट्री देते हैं. अफगानिस्तान को सिर्फ 25 देश वीजा ऑन अराइवल एंट्री देते हैं.

कौन हैं पासपोर्ट के हिसाब से टॉप 10 देश

1. जापान : 191 देश बिना वीजा या ऑन अरावल वीजा की सुविधा देते हैं.

2. सिंगापुर 190 देशों में बिना वीजा लिए या ऑन अरावल वीजा की सुविधा

3. जर्मनी और दक्षिण कोरियाः 189 देश

4. फिनलैंड और इटली : 188 देश

5. डेनमार्क, लक्जमबर्ग और स्पेन : 187 देश

6. फ्रांस और स्वीडन : 186 देश

7. ऑस्ट्रेलिया आयरलैंड, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्विट्जरलैंडः 185 देश

8. बेल्जियम, ग्रीस, नॉर्वे, यूके और अमेरिका : 184 देश

9. ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चेक रिपब्लिक, माल्टा और न्यूजीलैंड : 183 देश

10. हंगरी, लिथुआनिया और स्लोवाकिया : 181 देश

भारत की क्या स्थिति है?

पावरफुल पासपोर्ट की लिस्ट में भारत का नंबर 85वां है. भारत का पासपोर्ट रखने वाला 58 देशों में या तो बिना वीजा या वीजा ऑन अरावल की सुविधा के साथ जा सकता है. भारत के साथ 85 नंबर की रैंगिक तजाकिस्तान भी शेयर करता है. इसके अलावा चीन की रैंकिंग 70 और पाकिस्तान की 107 है. भारत की रैंकिंग पिछले साल के मुकाबले 2 पायदान नीचे आ गई है.


वीडियो – मज़बूत पासपोर्ट कैसे तय होता है और न्यूजीलैंड इस दुनिया का बाहुबली कैसे बना?

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