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जलियांवाला बाग में सरकार ने ऐसा क्या कर दिया कि लोगों का गुस्सा फट पड़ा है

भारत के इतिहास में दर्ज एक काला अध्याय जलियांवाला बाग (Jallianwala Bagh). अंग्रेज जनरल डायर ने यहां पर 102 साल पहले 1000 से ज्यादा निहत्थे लोगों को गलियों से भून दिया गया था. अब नरेंद्र मोदी सरकार ने जलियांवाला बाग स्मारक के नवीनीकरण का फैसला लिया. पीएम मोदी ने 28 अगस्त को इसका उद्घाटन किया. लेकिन जैसे ही जलियांवाला बाग के नए रूप की तस्वीरें और जानकारियां सामने आईं, लोगों का सरकार के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा.

सोशल मीडिया पर ज्यादातर आलोचनाएं उन बदलावों को लेकर हो रही हैं, जो एतिहासिक स्थल में किए गए हैं. सबसे ज्यादा नाराजगी उन गलियारों को लेकर है, जिनका रूप अब पूरी तरह बदल दिया गया है. इन गलियारों से गुजरकर ही जनरल डायर ने अपने आदमियों का नेतृत्व करते हुए, वहां बैसाखी पर शांति से प्रदर्शन कर रहे पुरुषों और महिलाओं पर गोली चलाने का आदेश दिया था.

जलियांवाला बाग मेमोरियल में किए गए ये बदलाव

जलियांवाला बाग मेमोरियल के नवीनीकरण का काम पिछले दो साल से चल रहा था. साल 2019 में जलियांवाला बाग हत्याकांड के 100 साल पूरे होने के मौके पर केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए 20 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए थे. फरवरी 2019 से ही इसे जनता के लिए बंद कर दिया गया था, और तभी से इसका काम चल रहा था. स्मारक के मेकओवर की जिम्मेदारी सरकार के स्वामित्व वाली एनबीसीसी लिमिटेड कंपनी को दी गई थी. संस्कृति मंत्रालय की ओर से कैंपस के टिकट काउंटर, शौचालय और पीने के पानी जैसी सुविधाओं का निर्माण करवाया गया है.

लेजर और साउंड शो: जलियांवाला बाग में मेहमानों के लिए एक खास मैदान भी तैयार किया गया है. यहां पर रोजाना लेजर और साउंड शो होगा. 28 मिनट का ये साउंड एंड लाइट शो रोजाना शाम को होगा. इस दौरान 13 अप्रैल, 1919 की घटनाओं को दिखाया जाएगा. यह शो मुफ्त होगा. कुछ लोग इस साउंड शो को लेकर भी आपत्ति जता रहे हैं.

Jallianwala Bagh Memorial Light And Sound
जलियांवाला बाग में तकरीबन आधे घंटे के एक लाइट एंड साउंड प्रोग्राम की व्यवस्था भी की गई है. ये मुफ्त होगा.

शहीदी कुएं में अब झांक नहीं पाएंगे : जब जनरल डायर ने जलियांवाला बाग में निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवाई थीं  तो बहुत से लोग जान बचाने के लिए परिसर में बने कुएं में कूद गए थे. जलियांवाला बाग का ये कुआं एक महत्वपूर्ण साइट की तरह है. लेकिन अब इसमें कुछ बदलाव किया गया है. पहले जहां लोग इस कुएं में झांककर देख सकते थे, अब ऐसा नहीं कर पाएंगे. शहीदी कुएं को एक शीशे की चादर से ढक दिया गया है. सरकार को इस फैसले पर काफी आलोचना झेलनी पड़ी. इसके अलावा मुख्य स्मारक के चारों ओर एक तालाब बनाया गया है, जहां कमल के फूल दिखाई देते हैं. जलियावाला बाग कैंपस में दाखिल होने और बाहर निकलने के प्वाइंट्स को बदल दिया गया है.

नई मूर्तियां लगाई गईं: स्मारक के जिस बदलाव का सबसे ज्यादा विरोध हुआ है, वो है गैलरी. इस गैलरी से ही लोग उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन पार्क में आए थे, लेकिन कभी वापस नहीं लौटे. इस गैलरी में गोलियों के निशान भी हैं. नवीकरण के दौरान स्मारक की गैलरी में शहीदों की कई नई मूर्तियां लगाई गई हैं. अब इस गैलरी के जरिए ही मेहमान कैंपस में दाखिल होते हैं. ये मूर्तियां विभिन्न क्षेत्रों के सामान्य पंजाबियों का प्रतिनिधित्व करती हैं. हालांकि अथॉरिटीज़ का कहना है कि मूर्तियों के बनाते वक्त गोलियों के निशान वाली जगहों को छोड़ दिया गया है.

Jallianwala Bagh Memorial
जलियांवाला बाग मेमोरियल में कई नई मूर्तियां लगाई गई हैं और एंट्री का रास्ता भी बदला गया है.

चार नए म्यूजियम: जलियांवाला बाग मेमोरियल में चार नई म्यूजियम गैलरी भी बनाई गई हैं. लंबे वक्त से बेकार पड़ी और कम इस्तेमाल वाली इमारतों को रिनोवेट करके इन्हें बनाया गया है. यहां उस अवधि के दौरान पंजाब में हुई ऐतिहासिक घटनाओं के साक्ष्यों को दर्शाया जाएगा. इसमें गुरुनानक देव, सिख योद्धा बंदा सिंह बहादुर और महाराजा रणजीत सिंह की एक मूर्ति भी लगाई गई है.

आम से लेकर खास तक ने नाराजगी दिखाई

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सरकार पर जलियांवाला बाग के नवीकरण के नाम पर इतिहास को नष्ट करने का आरोप लगाया. आरोप लगाने वालों में इतिहासकार, राजनेता से लेकर आम लोग भी शामिल रहे. इतिहासकार एस इरफान हबीब ने ट्वीट किया

“यह स्मारकों का निगमीकरण है, जहां वे आधुनिक संरचनाओं के रूप में समाप्त हो जाते हैं, विरासत मूल्य खो देते हैं.”

ब्रिटिश इतिहासकार किम ए वैगनर ने ट्वीट किया

“यह सुनकर स्तब्ध हूं कि 1919 के अमृतसर नरसंहार के स्थल जलियांवाला बाग को नया रूप दिया गया है – जिसका अर्थ है कि घटना के आखिरी निशान प्रभावी रूप से मिटा दिए गए हैं. यही मैंने अपनी पुस्तक में स्मारक के बारे में लिखा है, एक स्थान का वर्णन करते हुए जो अब खुद इतिहास बन गया है.”

 

राहुल गांधी ने ट्वीट किया-

सीपीएम के सीताराम येचुरी ने भी ट्वीट करके तीखी आलोचना की. उन्होंने लिखा-

“ये हमारे शहीदों का अपमान है. बैसाखी पर जमा हुए हिंदू, मुस्लिम और सिखों के जलियांवाला बाग नरसंहार की वजह से स्वतंत्रता संग्राम को बल मिला. यहां की हर ईंट ब्रिटिश शासन की क्रूरता की गवाह है. केवल वो जो स्वतंत्रता संग्राम से दूर रहे, इस तरह का कांड कर सकते हैं”.

 

लोगों की सबसे ज्यादा आपत्ति लाइट एंड साउंड शो को लेकर है. पीएम मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल से इस लाइट एंड साउंड प्रोग्राम को प्रमोट किया था. लोगों ने कहा कि एक नरसंहार की साइट पर लाइट एंड साउंड के रंगारंग प्रोग्राम की नहीं बल्कि श्रद्धांजलि की जरूरत होती है.

दीपा नाम की यूजर ने हैरानी जताते हुए ट्वीट किया.

“एक नरसंहार की साइट पर लाइट एंड साउंड प्रोग्राम.”

गब्बर सिंह नाम के ट्विटर हैंडल से लिखा गया-

“जलियांवाला बाग वहां से बहुत आगे निकल गया है जहां से जनरल डायर गुजरा था. मैं इससे खुश नहीं हूं. इसे ओरिजनल तरीके से ही रखना चाहिए था. इसे गुड़गांव रियल स्टेट की लॉबी की तरह बनाने की कोई जरूरत नहीं थी.”

 

सोशल मीडिया पर लोग इसकी तुलना यूरोप में नाजी उत्पीड़न के शिकार लोगों की याद में बनाए स्मारक से करते भी नजर आए. उनका कहना था कि इतनी दर्दनाक घटना का मेमोरियल दुख और दर्द को प्रकट करने वाला होना चाहिए, न कि रंगारंग कार्यक्रम जैसा.

बता दें कि पंजाब में चुनाव होने में अब कुछ ही महीने बचे हैं और राष्ट्रवाद की राजनीति जोर पकड़ रही है. पिछले हफ्ते ही पंजाब के मुख्यमंत्री ने एक दूसरे स्मारक, जलियांवाला बाग शताब्दी स्मारक पार्क का उद्घाटन किया था. इस स्मारक को ‘अज्ञात शहीदों को श्रद्धांजलि’ देने के लिए बनाया गया है. दूसरा स्मारक स्थल, इस कैंपस से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित है, जिसका निर्माण 1.5 एकड़ भूमि पर कराया गया है.


वीडियो – गन्ना किसानों का प्रदर्शन जारी, कहा- बातचीत का प्रस्ताव नहीं मिलेगा तो पंजाब बंद बुलाएंगे

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