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तेज प्रताप यादव को अपनी ही पार्टी के लोगों पर इतना ग़ुस्सा क्यों आता है?

तेज प्रताप यादव. लालू यादव के बड़े सुपुत्र. पिछले कुछ दिनों से गुस्से में हैं. अपनी ही पार्टी के नेताओं पर तेज प्रताप का गुस्सा फूट पड़ा है. गुस्सा इतना ज्यादा की वह कोर्ट-मुकदमे की बात कर रहे हैं. मीडिया में लगातार बयान दे रहे हैं. ट्विटर के जरिए भी निशाना साध रहे हैं. तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा,

अगर जगदानंद सिंह के ऊपर कार्रवाई नहीं होगी तो हम कोर्ट तक जाने का काम करेंगे. इस संविधान (हाथ में RJD का संविधान दिखाते हुए) को लेकर. हम मुकदमा करेंगे… मैं तो कोर्ट जाऊंगा. संविधान को लेकर मैं कोर्ट जाऊंगा.

आखिर तेज प्रताप यादव, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह से इतना गुस्सा क्यों हैं? वहीं जगदानंद सिंह यह सवाल क्यों कर रहे हैं, Who is Tej Pratap, I am not accountable for him. यानी तेज प्रताप कौन हैं, मैं उनके प्रति जवाबदेह नहीं हूं.

पूरा विवाद जानेंगे. साथ ही यह भी जानेंगे कि आकाश यादव कौन और गगन कुमार कौन हैं.

दरअसल हालिया विवाद शुरू हुआ है छात्र RJD के प्रदेश अध्यक्ष पद से आकाश यादव को हटाने के बाद. इस कार्रवाई के बाद तेज प्रताप यादव भड़क गए. उन्होंने कहा,

अगर जगदा बाबू की हैसियत है तो मुझ पर कार्रवाई करके दिखाएं. वह पार्टी में मनमानी कर रहे हैं. वह भूल गए हैं कि पार्टी संविधान से चलती है और पार्टी का संविधान कहता है कि बिना नोटिस दिए आप किसी पदाधिकारी को पदमुक्त नहीं कर सकते हैं.

तेज प्रताप ने आगे कहा,

‘छात्र राजद के नए प्रदेश अध्यक्ष गगन को मैं नेता नहीं मानता. कल तक राष्ट्रीय जनता दल का रहिएगा और रात में बीजेपी के बैनर के नीचे लाल पानी लीजिएगा, उनको मैं नेता मान लूंगा. छात्र- नौजवान देख रहे हैं, पटना यूनिवर्सिटी में क्या हो रहा है.

तेज प्रताप ने यह आशंका तक जताई कि जिस तरह से कार्रवाई हो रही है, उससे पार्टी के भीतर उनके विरोधी उनकी हत्या करा सकते हैं. उन्होंने कहा कि जब तक जगदानंद सिंह के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है, तब तक वह पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे.

जगदानंद सिंह क्या कह रहे हैं?

तेज प्रताप और जगदानंद सिंह के खिलाफ विवाद तब बढ़ गया जब जगदानंद सिंह ने आकाश यादव को छात्र आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाकर गगन कुमार को यह पद दे दिया. इसके बाद दोनों के बीच लंबे समय से चल रहा बवाल और अधिक बढ़ गया. विवाद के बीच जगदानंद ने भी कह दिया-

Who is Tej Pratap, I am not accountable for him. मैं लालू प्रसाद के प्रति जवाबदेह हूं. वे मेरे अध्यक्ष हैं. पार्टी के 75 सदस्यों में से तेज प्रताप एक हैं. क्या पार्टी में उनके पास कोई अन्य पद भी है?’

जगदानंद सिंह का कहना है कि पार्टी में संरक्षक का कोई पद नहीं होता. कोई (यानी तेज प्रताप) खुद से बन जाए तो क्या कहा जाए. तेज प्रताप यादव को जान का खतरा है? इस सवाल का जवाब देते हुए जगदानंंद ने कहा-

“मैं अपनी पार्टी के हर विधान मंडल सदस्य की मान व मर्यादा का ख्याल रखता हूं. मेरे पास मामला आएगा तो उसको जरूर देखूंगा.”

वहीं, आकाश यादव को छात्र राजद के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने के सवाल पर उन्होंने कहा-

“यह पार्टी का अंदरूनी मामला है. मैं इस पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद को जवाब दूंगा. हमसे गलती हुई कि आज तक छात्र राजद का संगठन नहीं बना पाया था.”

यहां से विवाद शुरू हुआ

रविवार 8 अगस्त. RJD की छात्र ईकाई के एक कार्यक्रम ‘छात्र बैठक’ में तेज प्रताप यादव शामिल हुए. इस कार्यक्रम के लिए पार्टी के प्रदेश कार्यालय के बाहर एक होर्डिंग लगा, जिसमें तेज प्रताप यादव के साथ लालू यादव और राबड़ी देवी को जगह दी गई. लेकिन इस पोस्टर से तेजस्वी यादव गायब थे. इसी पोस्टर में RJD के तत्कालीन छात्र नेता आकाश यादव की भी फोटो थी.

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तेजप्रताप की बैठक का पोस्टर. फोटो- आजतक

बैठक के अगले दिन आकाश यादव की तस्वीर पर किसी ने कालिख लगा दी. इस होर्डिंग को हटाकर एक दूसरा होर्डिंग लगा दिया गया. इसमें लालू यादव और राबड़ी देवी के साथ तेजस्वी यादव की तस्वीर थी. यहां तेज प्रताप यादव गायब दिखे.

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तेजस्वी यादव की फोटो वाला पोस्टर. फोटो- आजतक

‘छात्र बैठक’ में तेज प्रताप ने कहा था,

“जगदानंद सिंह सब जगह जाकर के हिटलर की तरह बोलते हैं. पहले जब मैं पार्टी कार्यालय आता था, उस वक्त और अब में जमीन आसमान का फर्क आ गया है. जब पिताजी यहां थे तो पार्टी का गेट हमेशा खुला रहता था. मगर उनके जाने के बाद बहुत लोगों ने मनमानी करनी शुरू कर दी है. कुर्सी किसी की बपौती नहीं है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिटलर वाले बयान से नाराज जगदानंद ने ऑफिस आना बंद कर दिया. 15 अगस्त को वह पार्टी कार्यालय में भी झंडा फहराने नहीं आए. 18 अगस्त को दोपहर को वह राबड़ी आवास पहुंचे. तेजस्वी से लंबी बैठक हुई. देर शाम तेजस्वी के साथ पार्टी ऑफिस गए और छात्र RJD के प्रदेश अध्यक्ष आकाश यादव को पद से हटाकर गगन कुमार को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया.

इसके बाद 19 अगस्त को देर शाम तेज प्रताप ने प्रेस कांफ्रेंस कर जगदानंद पर हमला बोला.

तेजस्वी क्या बोले?

20 अगस्त को तेजस्वी यादव ने इस मामले में मीडिया से बात की. कहा,

तेज प्रताप हमारे बड़े भाई हैं, यह अलग बात है. लेकिन माता-पिता ने एक बात तो जरूर सिखाई है, संस्कार दिए हैं कि बड़ों का सम्मान करना चाहिए और थोड़ा अनुशासन में रहना चाहिए.

तेजस्वी ने तेज प्रताप से न मिलने के आरोपों पर सफाई भी दी. बोले,

तेज प्रताप आए थे, हमारी उनसे मुलाकात भी हुई थी, लेकिन 4.30 बजे सोनिया गांधी की मीटिंग थी, और मीटिंग की शुरुआत होगी तो हम उसमें पार्टिसिपेट करेंगे न.

इसके अलावा, तेज प्रताप की जगदानंद सिंह ने नाराजगी के सवाल पर तेजस्वी ने कहा कि ऐसा होता रहता है.

Tejaswi Yadav
तेजस्वी ने तेज को अनुशासन में रहने की सलाह दी है.

कौन हैं आकाश यादव जिन्हें लेकर बवाल हुआ है?

आकाश यादव तेज प्रताप के बहुत करीबी कहे जाते हैं. उनका फेसबुक और ट्विटर देखने पर पता चलता है कि वह भी तेज प्रताप यादव की तरह भगवान शंकर के भक्त हैं.

Akash Yadav
आकाश यादव के बगल में कुर्सी पर बैठे हैं तेज प्रताप यादव. (फाइल फोटो)

आकाश मूल रूप से पटना के रहने वाले हैं. इस पूरे विवाद पर जब दी लल्लनटॉप ने आकाश से फोन पर बात की तो उन्होंने कहा,

हमारी जानकारी में कोई प्रसंग नहीं आया है. मुझे पद से हटाने के बाद ही जानकारी मिली कि पार्टी में हम शुरू से ही नहीं हैं, जैसा कि हमारे प्रदेश अध्यक्ष जी ने बोला है. हमेशा उस पोस्ट (छात्र आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष) पर संरक्षक तेज प्रताप भैया ने रखने का काम किया था. हमें बहुत दुख हुआ कि बिना पद के ही थे, स्टार कैंपेनर बन गए. बहुत तरह की चीजें हुईं, लेकिन उन चीजों से कोई मतलब नहीं है. बड़े लोगों की बात है, हम उसमें क्या बोलें. हम कार्यकर्ता लोग हैं.

आकाश यादव 2013-14 में छात्र RJD से जुड़े. 2016 में उन्हें राजद का अध्यक्ष बनाया गया था. लेकिन जनवरी 2019 में उन्हें पदमुक्त कर दिया गया. उनका कहना है कि पदमुक्त संरक्षक ने किया था. दल ने नहीं किया था. उन्होंने संरक्षक का आदेश माना था और पद से इस्तीफा दिया था.

आकाश बताते हैं कि उन्होंने बीती 25 मई को जेपी ब्रिगेड का निर्माण किया था. उसी को लेकर वह बिहार का भ्रमण कर रहे थे. उनका कहना है,

हमारे संरक्षक ने ही हमें वापस बुलाया. साल 2020 में सोशल मीडिया के माध्यम से हमारे संरक्षक महोदय (तेज प्रताप) ने हमें फिर से छात्र राजद का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया. जिसके बाद मुझे पार्टी ने स्टार प्रचारक भी बनाया. जिसके बाद मैंने तेज प्रताप जी के इलाके में कैम्पेन किया. हसनपुर विधानसभा में तेज प्रताप को जितवाने का काम किया और तेजस्वी यादव के लिए संघर्ष किया.

पार्टी छोड़ने के सवाल पर आकाश ने कहा कि इसका एक से दो दिन में मालूम चल जाएगा. बोले,

राष्ट्रीय जनता दल एक संगठन है. जब संगठन के अध्यक्ष ने ही बोल दिया कि हम दल में नहीं हैं तो फिर हम जबरदस्ती नहीं घुसेंगे. हम आदरणीय लालू प्रसाद यादव, जयप्रकाश नारायण की विचारधारा के साथ आगे बढ़ेंगे. एक दो दिन बाद मैं सारे विवादों पर बात करूंगा.

गगन कौन हैं?

गगन कुमार मूल रूप से जमुई के हैं. उन्होंने फोन पर दी लल्लनटॉप को बताया कि उनका परिवार शुरू से आरजेडी से जुड़ा था. उन्होंने 2013 में आरजेडी ज्वाइन की थी. बीएन कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. अभी पटना लॉ कॉलेज के छात्र हैं. पटना यूनिवर्सिटी से 2018 में छात्रसंघ का चुनाव भी लड़ चुके हैं. गगन कुमार ने हमसे कहा,

मुझे काम करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. मैं पार्टी का आभार प्रकट करता हूं. तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव, तेज प्रताप यादव, प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद जिन्होंने मेरे संघर्ष को देखते हुए छात्र राष्ट्रीय जनता दल का प्रदेश अध्यक्ष बनाया, उनका आभार प्रकट करता हूं. किसी की छुट्टी नहीं होती है. हर किसी का कार्यकाल होता है. कार्यकाल खत्म हुआ तो मुझे बना दिया. पोस्टर वार कहीं कुछ नहीं हुआ. मैं पार्टी का आदेश मानूंगा.

Gagan
छात्र राष्ट्रीय जनता दल के नए प्रदेश अध्यक्ष गगन

गगन ने दी लल्लनटॉप से कहा कि आकाश यादव उनके मित्र हैं. दोनों साथ में काम कर चुके हैं. उनसे पहले भी अच्छा संबंध था और अब भी है. विवाद जैसी कोई बात नहीं है.

जगदानंद सिंह RJD के लिए इतने अहम क्यों हैं?

लालू प्रसाद यादव और जगदानंद की दोस्ती बहुत पुरानी है. समाजवादी आंदोलन के दौरान की. एक सीनियर पत्रकार लल्लनटॉप से बातचीत में एक किस्सा बताते हैं. इससे पता चल जाता है कि जगदानंद सिंह लालू के कितने करीबी हैं.

पत्रकार ने हमें बताया,

जब लालू प्रसाद यादव जेल जा रहे थे, तो राबड़ी और लालू दोनों रोने लगे. उस समय लालू प्रसाद यादव ने राबड़ी देवी से कहा था- किसी भी चीज पर दस्तखत करना हो, बिना जगदानंद भाई के पूछे मत करना. अपने भाई के कहने पर भी नहीं, नहीं तो जेल चली जाओगी.

अब आप इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि लालू प्रसाद यादव, जगदानंद पर कितना भरोसा करते थे.

जगदानंद बीएचयू से पढ़े हैं. पढ़ाई के दिनों में राजनीति में कम इंट्रेस्ट था. हालांकि खेलों में ज्यादा रूचि रखते थे. उनको करीब से जानने वाले एक पत्रकार बताते हैं कि कुछ लोग उन्हें ‘कूदन सिंह’ भी कहते हैं. लेकिन राजनीति में आने के बाद उन्होंने गंभीरता दिखाई. अपने क्षेत्र में रामगढ़ बिजली को लेकर बहुत काम किया. इसके बाद इनका नाम हो गया ‘बिजुलिया बाबा’. इन पत्रकार ने हमें बताया कि रामगढ़ में कहीं ट्रांसफॉर्मर में शिकायत हो, किसी गांव में लाइट ना जा रही हो तो लोग कहते थे कि बिजिुलिया बाबा से फोन करवाओ.

Jagdanand
बाएं जगदानंद सिंह और दाएं सुधाकर सिंह

जगदानंद सिंह 1985 से चुनाव जीतते आ रहे हैं. 2005 तक वह लगातार जीतते रहे. 2009 में बक्सर से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत गए. 2009 में लोकसभा में जाने के बाद उनकी सीट पर उपचुनाव हुआ. उनके बेटे सुधाकर चुनाव लड़े. लेकिन जगदानंद का मानना था कि परिवारवाद का ठप्पा लग जाएगा. उन्होंने बेटे को मनाने की कोशिश की. लेकिन सुधाकर नहीं माने और बीजेपी में चले गए. उन्होंने बेटे के खिलाफ प्रचार किया और हरवा दिया. कहने वाले कहते हैं कि अगर जगदानंद ने बेटे के खिलाफ प्रचार नहीं किया होता तो वह जीत जाते.

एक सीनियर पत्रकार बताते हैं कि जगदानंद को नीतीश कुमार ने 2010 में डिप्टी सीएम का ऑफर दिया था और कहा था- हमारे साथ आ जाइए. नीतीश ने कई नेताओं को लगाया था. जब लालू प्रसाद यादव से पूछा गया कि क्या जगदानंद पार्टी छोड़ देंगे तो उन्होंने कहा था- सूरज भले पूरब की जगह पश्चिम से उगने लगे, लेकिन जगदानंद पार्टी छोड़कर नहीं जाएंगे. सीनियर पत्रकार यह भी बताते हैं कि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व आज भी  जगदानंद को पार्टी में लेने के लिए तैयार है.

6 बार विधायक, एक बार सांसद और बिहार में कई बार मंत्री रहे जगदानंद सिंह को आरजेडी ने नवंबर 2019 में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था. आज उसी जगदानंद सिंह और लालू के बड़े बेटे के बीच विवाद इतना बढ़ गया है कि मुकदमे की बात हो रही है.


लालू यादव के बेटों तेजस्वी और तेज प्रताप के बीच क्या सब कुछ ठीक चल रहा है?

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