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धौलपुर का डकैत जगन गुर्जर, जिसके डर से गांव में शादियां तक नहीं होती थीं

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राजस्थान का एक जिला है धौलपुर. ये जिला तीन तरफ से बीहड़ों से घिरा हुआ है. इन बीहड़ों में हमेशा से डकैतों का राज रहा है. धौलपुर में इन्हीं बीहड़ों से घिरा हुआ एक इलाका है, जिसे डांग कहते हैं. बीहड़ का ये डांग हमेशा से डकैतों की पनाहगाह बनते रहे हैं. इस डांग में पनाह लेकर डकैती की दुनिया में दाखिल हुए इस इलाके के सबसे बड़े डकैत का नाम है जगन गुर्जर.

# जगन गुर्जर, जिसके डर से गांवों में लोग शादियां तक नहीं करते थे.

# जगन गुर्जर, जिसने मुख्यमंत्री रहीं वसुंधरा राजे के महल को उड़ा देने की धमकी दी थी.

# जगन, जिसपर पुलिस ने 11 लाख रुपये का इनाम रखा था.

# जगन, जिसपर पुलिस ने हत्या, हत्या की कोशिश, लूट और डकैती के 87 केस दर्ज कर रखे थे.

# जगन, जो तीन बार जेल गया, हर बार जमानत पर बाहर आया और पहले से ज्यादा उत्पात मचाया.

# जगन, जिसने पत्नी को सियासत में उतारा, हार गया और फिर से डकैती करने लगा.

डकैत जगन और उसके साथियों ने धौलपुर के बाजार में फायरिंग कर दहशत मचाई. पूरी वारदात सीसीटीवी फुटेज में कैद है.
डकैत जगन और उसके साथियों ने धौलपुर के बाजार में फायरिंग कर दहशत मचाई. पूरी वारदात सीसीटीवी फुटेज में कैद है.

इसी डकैत जगन गुर्जर की तलाश में राजस्थान की पुलिस पिछले 15 दिनों से बीहड़ों की खाक छान रही थी. कुछ हाथ नहीं लगा. लेकिन जगन गुर्जर पर दबाव बनाए रखा. आखिर में 28 जून को जगन गुर्जर ने सरेंडर कर दिया. और ये चौथी बार था, जब जगन गुर्जर ने सरेंडर किया है. जगन ने 12 जून को धौलपुर के बाड़ी कस्बे में सरकारी अस्पताल के सामने सरेआम दुकानदारों को पीटा और उनकी दुकानें उजाड़ दीं. इतना ही नहीं, उसने करणसिंह का पुरा गांव में महिलाओं के साथ मारपीट की और उन्हें बिना कपड़ों के गांव में घुमाया.  इस वारदात के बाद से ही पुलिस जगन की तलाश में चंबल में कॉम्बिंग कर रही थी. चंबल में पुलिस और डकैतों के बीच कई बार मुठभेड़ भी हो चुकी थी, लेकिन जगन पुलिस के हाथ नहीं लग पा रहा था. 28 जून को भी सफलता पुलिस को नहीं लगी, बल्कि जगन ने खुद से ही सरेंडर कर दिया.

1994 में पत्नी और भाइयों के साथ बनाया था डकैत का गैंग

जगन गुर्जर धौलपुर के डांग के भवूतीपुरा का ही रहने वाला है. 1994 में उसके जीजा की हत्या हो गई थी. इसी हत्या का बदला लेने के लिए उसने गांव के ही एक आदमी का कत्ल कर दिया. पुलिस से बचने का कोई उपाय न देखकर वो अपनी पत्नी और तीन भाइयों के साथ चंबल में उतर गया. उसने अपना गैंग बना लिया और डकैती शुरू कर दी. जगन ने अपनी पत्नी और भाइयों के साथ मिलकर राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैले चंबल में अपनी धाक जमा ली और चंबल का बादशाह बन गया. उसका खौफ इतना था कि उसके गांव में करीब 10 सालों तक कोई शादी नहीं हुई थी. खुद जगन के पिता गांव छोड़कर चले गए थे. गांव के अधिकांश लोग भी जगन की दहशत की वजह से गांव से भाग गए थे.

प्रेमिका को गोली लगी, पुलिस ने गिरफ्तार किया तो खुद को सरेंडर कर दिया

2001 में पहली बार जगन ने सरेंडर किया था.
2001 में पहली बार जगन ने सरेंडर किया था.

जगन ने जब 1994 में डकैती की शुरुआत की थी, तो उसके गैंग में उसकी पत्नी और चार भाई थे. धीरे-धीरे इस गैंग में कुल 25 लोग हो गए, जिनमें एक महिला कोमेश गुर्जर भी थी. बाद में कोमेश जगन की प्रेमिका बन गई. एक डकैती के दौरान पुलिस और डकैतों की मुठभेड़ हो गई. दोनों तरफ से हुई फायरिंग में कोमेश को गोली लग गई. किसी तरह से जगन गुर्जर पुलिस को चकमा देते हुए कोमेश को धौलपुर के एक नर्सिंग होम मेंले गया. अभी इलाज चल ही रहा था कि पुलिस को भनक लग गई. पुलिस पहुंची और कोमेश को गिरफ्तार कर लिया. कोमेश की गिरफ्तारी से परेशान होकर जगन ने हथियार डालने की शर्त रखी. कहा कि अगर उसे अपनी प्रेमिका के साथ रहने दिया जाए, तो वो सरेंडर कर देगा. पुलिस ने बात मान ली. और फिर साल 2001 में धौलपुर के एसपी रहे बीजू जॉर्ज जोसेफ के सामने जगन ने सरेंडर कर दिया. उसे जेल भेज दिया गया.

2005 में जेल से बाहर आया और बन गया सबसे बड़ा डकैत

जगन 2005 में जमानत पर जेल से बाहर आ गया. उसकी प्रेमिका कोमेश भी बाहर आ गई. जेल से छूटने के बाद कोमेश ने तो अपराध का रास्ता छोड़ दिया, लेकिन जगन अपने भाइयों लालसिंह, पान सिंह और पप्पू के साथ फिर से डकैत बन गया. कई अपराध किए. इस दौरान 2008 में राजस्थान में गुर्जर आंदोलन शुरू हो गया. तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस आंदोलन को दबाने की भरपूर कोशिश की. इसी दौरान जगन गुर्जर भी इस आंदोलन में कूद गया. उसने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर वाले महल को बम से उड़ाने की धमकी दे दी. फिर तो पुलिस हरकत में आई और उसने जगन पर 11 लाख रुपये का इनाम रख दिया. इसके बाद जगन चंबल का सबसे बड़ा डकैत बन गया.

सचिन पायलट के सामने किया सरेंडर, जेल से छूटा और फिर डकैती शुरू कर दी

राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट.
2009 में जब सचिन पायलट केंद्र में मंत्री थे, जगन गुर्जर ने उनके सामने सरेंडर कर दिया था.

11 लाख रुपये का इनाम घोषित होने के बाद राजस्थान की पुलिस जगन के पीछे पड़ गई. मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस भी जगन की तलाश में लग गई. कोई चारा न देखकर जगन ने 30 जनवरी, 2009 को कैमरी गांव के जगन्नाथ मेले में कांग्रेस नेता और केंद्र में मंत्री रहे सचिन पायलट के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. उसके साथ उसके पूरे गैंग ने भी हथियार डाल दिए. लंबे अरसे के बाद 2010 में जगन के गांव भवूतिपुरा में कोई शादी हुई. ये शादी जगन के बड़े भाई की बेटी की थी, जिसे जगन ने गोद ले रखा था. इस शादी में कन्यादान करने के लिए जगन पेरोल पर बाहर आया था. बेटी का कन्यादान करने के बाद उसने ऐलान किया कि अब वो कोई अपराध नहीं करेगा.

मार्च, 2017 में जेल से छूटा और सियासत में उतर गया

जगन की पत्नी ममता 2017 में धौलपुर का उपचुनाव लड़ी और हार गई.

करीब 8 साल तक जेल में रहने के बाद 6 मार्च, 2017 को जगन गुर्जर को राजस्थान हाई कोर्ट से जमानत मिल गई. अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज 70 में से 69 मामलों में जगन गुर्जर बरी हो गया. एक मामला था, जिसमें जगन को हाई कोर्ट से 10 साल की सजा मिली थी. ये मामला पुलिस मुठभेड़ से जुड़ा था, जिसमें बाड़ी कोर्ट ने उसे सजा सुनाई थी. जगन के जेल से बाहर आने के बाद ही धौलपुर में विधानसभा का उपचुनाव होना था. इस उपचुनाव में जगन ने अपनी पत्नी ममता को निर्दलीय चुनावी मैदान में उतार दिया. नतीजा आया, तो ममता बुरी तरह से चुनाव हार गई. इसके बाद जगन फिर से डकैती करने लगा. एक बार फिर से पुलिस ने उसके ऊपर 5000 रुपये का इनाम घोषित कर दिया.

तीसरी बार किया सरेंडर और फिर जमानत पर आ गया बाहर

jagan surrender
अगस्त 2018 में जगन ने आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने हथियार डाल दिए. ये तीसरी बार था, जब जगन ने सरेंडर किया था.

जेल से बाहर आने के बाद जगन लोगों से चौथ वसूली करने लगा था. कई लोगों के साथ मारपीट की थी और हत्या की धमकी दी थी. कई जगहों पर फायरिंग भी की थी, जिसके बाद पुलिस उसकी तलाश में जुट गई थी. जब जगन को लगा कि पुलिस से बचना मुश्किल है तो 19 अगस्त, 2018 की शाम को जगन ने फिर से सरेंडर कर दिया. इस बार वो भरतपुर के बयाना कोतवाली में पहुंचा और आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने हथियार डाल दिए. पूछताछ के दौरान उसने कहा कि वो अब समाज की मुख्यधारा में शामिल होना चाहता है, इसलिए उसने सरेंडर किया है.

जमानत पर छूटा तो फिर से कर दी गुंडई

जमानत पर बाहर आए, जगन ने महिलाओं के साथ मारपीट की और फिर उन्हें बिना कपड़ों के पूरे गांव में घुमाया. उन महिलाओं को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.
जमानत पर बाहर आए, जगन ने महिलाओं के साथ मारपीट की और फिर उन्हें बिना कपड़ों के पूरे गांव में घुमाया. उन महिलाओं को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.

इसी जून महीने में ही जगन गुर्जर को अदालत ने फिर से जमानत दे दी. बाहर आने के बाद उसने अपनी दहशत कायम करने के लिए करौली के बाजार में दिन दहाड़े फायरिंग कर दी. इसके बाद वो 13 जून को धौलपुर के बाड़ी कस्बे में पहुंचा और एक दुकानदार से मारपीट की. इसके बाद जगन धौलपुर के डांग के सायपुर करनसिंह का पुरा में पहुंचा. रात में उसने गांव के एक परिवार को मुखबिरी के शक में बंधक बना लिया. जगन और उसके साथियों ने महिलाओं बच्चों से मारपीट की और फिर हथियार की नोक पर महिलाओं को बिना कपड़े के गांव में घुमाया.

धौलपुर पुलिस अब भी चंबल के जंगलों में जगन के लिए कॉम्बिंग कर रही है.
धौलपुर पुलिस अब भी चंबल के जंगलों में जगन के लिए कॉम्बिंग कर रही है.

गांव के लोगों ने बताया कि गांव में पानी खत्म होने की वजह से गांव के सभी पुरुष जानवरों को लेकर पानी की तलाश में निकल गए थे. इसी दौरान 13 जून की रात जगन ने गांव में हमला कर दिया और उनकी औरतों को बिना कपड़ों के पूरे गांव में घुमाया. करीब एक घंटे तक गांव में गुंडई करने के बाद जगन करौली की ओर भाग गया. 14 जून की सुबह पुलिस को सूचना दी गई तो खुद एसपी अजय सिंह गांव में पहुंचे. पुलिस टीमें भी पहुंची और चंबल के जंगलों में कॉम्बिंग शुरू क दी. लेकिन जगन पुलिस के हाथ नहीं लगा. पुलिस का मानना है कि जगन राजस्थान की सीमा पारकर मध्यप्रदेश में दाखिल हो गया है.


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