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मोदी सरकार कश्मीर में कुछ बहुत बड़ा करने जा रही?

क्या कश्मीर को लेकर मोदी सरकार कुछ बहुत बड़ा करने वाली है? 5 अगस्त 2019 जितना बड़ा कुछ? ऐसे सवालों के ईर्द-गिर्द तरह तरह की बातें कश्मीर में पिछले कई दिनों से चल रही हैं. एक-एक डॉट जोड़कर कश्मीर के लोग पूरी पिक्चर समझने की कोशिश कर रहे हैं. कैसा माहौल बन रहा है इसे समझने के लिए अगस्त 2019 का पहला हफ्ता याद करिए. जब कश्मीर में सिक्योरिटी फॉर्सेज़ की तैनाती बढ़ रही थी. सुरक्षा कई गुना बढ़ा दी गई थी. पर्यटक वापस भेजे जा रहे थे. किसी को पता नहीं था कि असल में क्या होने वाला है, लेकिन लोगों में एक डर और अनिश्चितता का माहौल था. लोग राशन स्टोर करने में लग गए थे. पूछ रहे थे कि क्या होने वाला है. और सरकार कह रही थी कि कुछ नहीं होने वाला है. और फिर 4 अगस्त की रात को कश्मीर में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिया गया था. इसके अगले दिन जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने और सूबे को दो हिस्सों में बांटने का ऐलान हुआ था.

बाद में कई महीनों तक जम्मू कश्मीर बिना इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क के रहा. दर्जनों राजनेताओं को नज़रबंद रखा गया था. बहुत तरह की सख्ती हुई थी. अब अंदेशा जताया जा रहा है कि वैसा ही कुछ अब होने वाला है. ट्विटर, फेसबुक पर किस तरह की बातें चल रही हैं, कुछ मिसाल देखिए. इफ़्त ग़ाज़िया नाम के ट्विटर हैंडल से लिखा गया – “मैंने बात करने के लिए जल्दी से अपनी मम्मी को फ़ोन किया. यदि ये अफवाह सही हैं तो हम महीनों तक नेटवर्क से कटे हुए रहेंगे.” एक और ट्विटर हैंडल से लिखा गया कि “जम्मू कश्मीर में बहुत बड़ी तादाद में सेना की अतिरिक्त तैनाती हो रही है. बातें हो रही हैं कि अगस्त 2019 जैसा ही कुछ होने वाला है. भारत के एक और विध्वंसकारी फैसले का कश्मीरी इंतजार कर रहे हैं.” कश्मीर के कई राजनेताओं ने भी इन अफवाहों पर ट्विट किए. नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता तनवीर सादिक़ ने लिखा- अफवाहें और तेज़ हो रही हैं तो क्या हमें दूसरे सेमेस्टर की तैयारी कर लेनी चाहिए. एमएलए हॉस्टल 2.0? श्रीनगर में एमएलए हॉस्टल को सब-जेल बनाया गया था. अगस्त 2019 के बाद कई नेताओं को एमएलए हॉस्टल में ही रखा गया था. पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सजाद लोन ने भी अफवाहों पर ट्वीट किया. और फिर इस मामले में होती है पाकिस्तान की एंट्री. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी कई ट्विट किए. लिखा कि जम्मू कश्मीर में भारत फिर से विभाजन या जनसंख्या का बदलाव कर सकता है, ऐसी गंभीर और चिंताजनक रिपोर्ट्स हमारे संज्ञान में आई हैं. कब्ज़े का कोई भी नया इंस्ट्रूमेंट वैध नहीं माना जाएगा.”

तो पाकिस्तान भी हल्ला मचा देना चाहता है. ताकि ऐसा ना हो कि भारत अगस्त 2019 की तरह चुपचाप कुछ कर ले, और सबकुछ होने के बाद दुनिया को मालूम चले.

तो क्या करना चाहती है मोदी सरकार, कश्मीर को लेकर?

कश्मीर को लेकर चार तरह की अटकलें चल रही हैं.

एक अटकल ये है कि मोदी सरकार जम्मू कश्मीर को फिर से दो हिस्सों में तोड़ेगी. जम्मू को राज्य का दर्जा मिलेगा, और कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में अलग किया जाएगा.
दूसरी अटकल ये है कि जम्मू के साथ दक्षिण कश्मीर का कुछ हिस्सा मिलाया जाएगा. और इसके बाद जम्मू राज्य घोषित किया जाएगा. जबकि उत्तरी कश्मीर के हिस्से को लद्दाख के साथ मिला दिया जाएगा. इस तरह से नक्शे में कश्मीर नाम की कोई जगह ही नहीं रहेगी.
तीसरी अटकल ये है कि कश्मीर पंडितों को घाटी में बसाने के लिए खास तरह के अरेंजमेंट्स किए जाएंगे.
चौथी अटकल ये है कि जम्मू और कश्मीर के तीन-तीन ज़िलों को मिलाकर नया डिविज़न बनाया जाएगा, जिसे बाद अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाएगा.

इन आशंकाओं या अटकलों की शुरुआत कहां से हुई?

तो सोशल मीडिया का ज़्यादातर विमर्श इन्हीं तीन-चार आशंकाओं पर है. अचानक कश्मीर में ये बातें क्यों होनी लगी? इसकी कई वजह हैं. एक वजह है सुरक्षाबलों का मूवमेंट. पैरामिलिट्री फॉर्सेज़ की कई कंपनियों का हाल ही जम्मू कश्मीर में डिप्लॉयमेंट हुआ. इसके आधार ये बात फैलाई जाने लगी कि सरकार 2019 की तरह ही भारी तादाद में कश्मीर में फॉर्सेज़ तैनात कर रही है. कुछ और घटनाओं को भी इसके साथ जोड़ा गया. 7 जून को जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल ने दिल्ली आकर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इससे पहले उन्होंने गृह सचिव अजय कुमार भल्ला के साथ बैठक की थी. मनोज सिन्हा के साथ जम्मू कश्मीर के नए चीफ सेक्रेटरी अरुण मेहता, आईबी चीफ अरविंद कुमार और जम्मू कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह भी दिल्ली आए थे. इस मुलाकातों के मायने कुछ लोगों ने ये निकाल लिए कि कश्मीर को लेकर किसी बड़ी प्लानिंग पर चर्चा हुई है.

जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी के चीफ़ अल्ताफ बुखारी के दिल्ली आने की भी खबरें उड़ी. अल्ताफ बुखारी की पार्टी को सरकार के करीब माना जाता है. अल्ताफ बुखारी का नाम जोड़कर अफवाहों को और मज़बूत किया गया. इन सारी घटनाओं को मिलाकर एक मजबूत नैरेटिव तैयार किया गया कि वाकई कुछ बड़ा होने वाला है. लेकिन क्या ऐसा है? जम्मू कश्मीर प्रशासन के मुताबिक ये सब सिर्फ अफवाहें हैं. कश्मीर रेंज के आईजीपी विजय कुमार ने ऐसी बातों को खारिज किया. विजय कुमार के मुताबिक सुरक्षाबलों की कोई नई तैनाती नहीं है. चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों में पैरामिलिट्री फॉर्सेज़ को जम्मू कश्मीर से भेजा गया था, अब उनकी वापसी हो रही है.

मनोज सिन्हा के दिल्ली में अमित शाह से मिलने पर भी खबर आई कि रेग्यूलर सिक्योरिटी रिव्यू के लिए बैठक थी. अमरनाथ यात्रा को लेकर सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स पर बैठक में चर्चा हुई थी.

गुपकार अलायंस क्या कह रही?

यानी सरकार के मुताबिक जो बातें फैलाई जा रही हैं वो निराधार हैं, बेबुनियाद हैं. लेकिन फिर इन्हीं अफवाहों के बीच बुधवार को गुपकार अलायंस की बैठक हुई. आप जानते ही हैं कि गुपकार अलायंस कश्मीर की बड़ी पार्टियां का गठबंधन है. अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर शुरू में जम्मू कश्मीर की 7 पार्टियों ने ये अलायंस बनाया था. बाद में कांग्रेस इससे अलग हो गई थी. सज्जाद लोन की पार्टी पीपल्स कॉन्फ्रेंस ने अलायंस छोड़ दिया था. अब इसमें एनसी, पीडीपी और सीपीएम को मिलाकर कुछ 5 पार्टियां हैं. कल महबूबा मुफ्ती के आवास पर बैठक में फारूक़ अब्दुल्ला समेत कश्मीर के कई बड़े नेता शामिल हुई. क्या अफवाहों पर बैठक थी, ये सवाल फारूक अब्दुल्ला से पूछा गया. उनका जवाब था- उनको जो करना है करेंगे, हमें कुछ नहीं मालूम.

तो कुछ होने वाला है या नहीं इस पर राजनीतिक पार्टीज़ भी ज़्यादा भरोसे के साथ कुछ नहीं कह रही हैं. एक तरफ सरकार हर तरह की खबरों को अफवाह बता रही है, लेकिन लोगों को सरकार पर भरोसा नहीं हो रहा है. लोग पूछ रहे हैं कि 2019 में भी तो दो दिन पहले तक सरकार कह रही थी कि कुछ नहीं होने वाला, तो अब कैसे मान लें. मसला सरकार के इकबाल का है. उम्मीद है इस बार जम्मू कश्मीर की सरकार लोगों को भरोसा दिलाने में कामयाब रहेगी कि जो सरकार कह रही है वही सच है, बाकी सब अफवाह.


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