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मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने वैक्सीन को लेकर क्या सब कह दिया?

कोरोना महामारी की दूसरी लहर अब दूर जाती दिख रही है. कम से कम सरकारी आंकड़ों में तो संक्रमण के रोज़ाना मामले मामले कम होते दिख ही रहे हैं. आपाधापी बीतेगी, तो मंत्रणा का समय आएगा. क्या सबक लिया, इसपर विचार होगा. लेकिन फिर जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के ऐसे बयान आ जाते हैं कि उतनी दूर तक सोचने का कोई मतलब ही नहीं रह जाता. सबक वाली बात ही गोल हो जाती है. ऐसा लगता है कि भैया सबसे अर्जेंट है इन महाशय की परेशानी का इलाज. वर्ना कुछ गलत हो सकता है.

हरियाणा सीएम का यह लॉजिक समझ से परे!

मनोहर लाल खट्टर अपने पड़ोस के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नसीहत दे रहे थे. सार ये था कि टीकों की कमी बताना ड्रामा है और कम टीके लगाना ही सूझबूझ है.

मनोहर लाल खट्टर दूसरी बार के मुख्यमंत्री हैं. जानते हैं कि उनके पद पर आने के लिए संविधान की शपथ लेनी होती है. और सीएम साहब ये भी जानते होंगे कि संविधान की बगिया में एक चिड़िया होती है वैज्ञानिक चेतना की. वो चिड़िया, जिसका घोंसला सीएम साहब के बयानों से उजड़ने को हो रहा है. संविधान के अनुच्छेद 51ए में मूल कर्त्तव्य आते हैं. इस अनुच्छेद का भाग (h) कहता है कि वैज्ञानिक चेतना का विकास करना भी मौलिक कर्तव्य है. सीएम साहब संघ से आते हैं. संघ, जिसके लिए कर्तव्य और दायित्व – इन दोनों का बड़ा महत्व है. खट्टर को सोचना चाहिए कि क्या वो मूल कर्त्तव्यों की अनदेखी करके अपने दायित्व निभा सकते हैं?

क्योंकि टीकाकरण को लेकर वैज्ञानिक चेतना ये कहती है कि जितनी जल्दी टीके लगाए जा सकें, उतना जल्दी महामारी से बचाव है. दुनिया के कई देशों ने अपनी आबादी के बड़े हिस्से का टीकाकरण कर दिया है. भारत में भी इसकी ज़रूरत है. हरियाणा में भी है. लेकिन मुख्यमंत्री टीकों को बचाकर रोज़ थोड़ा थोड़ा लगाने का विज़न देते हैं. ताकि जनता का ये ना लगे कि टीके खत्म हो गए हैं या कम हैं. और मुख्यमंत्री जी को इससे भी फर्क नहीं पड़ता कि टीकाकरण केंद्रों के बाहर बड़ी भीड़ टीका लगवाने की उम्मीद में आती है. लेकिन टीकों की कम संख्या की वजह से उन्हें लौटना पड़ता है. ग़जब सूझबूझ है मुख्यमंत्री जी की.

देने के लिए उतना टीका है ही नहीं, जितनी ज़रूरत है?

तो टीकाकरण ज़रूरी है लेकिन सच्चाई ये है कि टीके हमारे पास पर्याप्त नहीं हैं. जिन राज्यों में भाजपा से इतर सरकारें हैं, उनकी शिकायत है कि टीका पर्याप्त मात्रा में मिल नहीं रहा. लेकिन न बीजेपी शासित प्रदेशों को ऐसा लगता है और न ही केंद्र की मोदी सरकार को. उनकी सुई ”दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रम” पर आकर अटक जाती है. सच क्या है, वो आप अपने फोन में कोविन एप खोलकर स्वयं देख सकते हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी वैक्सीन को लेकर एक प्रेस रिलीज जारी की. टाइटल में लिखा था कि अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 23 करोड़ से ज्य़ादा वैक्सीन दी जा चुकी हैं. हालांकि नीचे के पैराग्राफ में बता दिया कि इसमें राज्यों की खरीदी हुई और केंद्र से फ्री दी गई, दोनों कैटेगरी की वैक्सीन शामिल हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक राज्यों के पास एक करोड़ 75 लाख वैक्सीन लगाने के लिए उपलब्ध हैं. और 2 लाख 73 हज़ार और वैक्सीन पाइपलाइन में हैं. जो अगले 3 दिन में राज्यों को दे दी जाएंगी. स्वास्थ्य मंत्री को चाहिए कि ये भी बताते चलें कि टीकों की मांग है कितनी और वो पूरी कितनी कर पाते हैं.

सच ये है कि देने के लिए उतना टीका है ही नहीं, जितनी ज़रूरत है. आने वाले समय में हो सकता है कि इसमें कुछ राहत मिले. कोविशील्ड बनाने वाले सीरम इंस्टिट्यूट ने कहा है कि जून महीने में 9 से 10 करोड़ टीके सरकार को देगा. मई महीने में साढ़े 6 करोड़ टीके ही बनाए हैं. यानी कुछ हद तक वैक्सीन की किल्लत घट सकती है.

अब सुप्रीम कोर्ट की बात

टीकाकरण और कोरोना के इलाज प्रबंधन पर आज सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई की. कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है. सुनवाई करने वाली तीन जजों की बेंच में जस्टिस डी वाई चंद्रचूड, एल नागेश्वर राव और एस रवींद्र भट्ट शामिल थे. सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार की टीकाकरण नीति में कई कमियां निकालीं और तीखी टिप्पणियां भी की. केंद्र सरकार के वकील से जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि देश की टीकाकरण नीति क्या है, क्या केंद्र सरकार राज्यों के लिए टीके खरीद रहा है या उन्हें अपने दम पर छोड़ दिया है? सरकार को संविधान का अनुच्छेद 1 भी याद दिलाया गया. जिसमें भारत को यूनियन ऑफ स्टेट्स कहा गया है. कोर्ट ने कहा कि कई राज्यों के पास सीमित संसाधन हैं, उनका बजट कम है. क्या केंद्र सुनिश्चित करेगा कि हर राज्य को वैक्सीन मिले? इस पर सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि हमने वैक्सीन निर्माताओं और राज्यों से बात करके मूल्य तय करवाया है. मेहता ने कोर्ट को ये भी बताया कि इस साल के आखिर तक 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को वैक्सीन लगा दी जाएगी. इस दावे पर अमाइकस क्यूरी यानी कोर्ट की मदद के लिए नियुक्त वकील जयदीप गुप्ता ने कहा- कि अभी 15 करोड़ वैक्सीन हर महीने बन रही हैं. 6 महीने में लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता. कई वैक्सीन जिनके दिसंबर में तैयार होने की बात थी, वो तो अभी बनी ही नहीं. जवाब में सरकार के वकील ने कहा कि जो वैक्सीन अभी हैं उन्हीं के आधार पर लक्ष्य तय किया गया है. आप विस्तृत हलफनामे का इंतजार करिए.

कोविन ऐप पर भी उठे सवाल

इसके अलावा जस्टिस चंद्रचूड ने कोविन ऐप पर रजिस्ट्रेशन को लेकर भी सवाल उठाए. सरकार के वकील से पूछा कि डिजिटल डिवाइड के बारे में क्या व्यवस्था की गई है. क्या ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए कोविन ऐप पर रजिस्ट्रेशन कराना संभव है? जवाब में वकील तुषार मेहता ने कहा कि अगर सरकार सभी के लिए ऑफ लाइन रजिस्ट्रेशन शुरू करती है तो वैक्सीन सेंटर पर भारी भीड़ होने की संभावना है, एक सेंटर पर 5 हज़ार तक लोग आ सकते हैं. इसी वजह से एक सिस्टम बनाया गया है जिसमें 45 प्लस वालों के लिए ही ऑन स्पॉट रजिस्ट्रेशन है.

सुनवाई के दौरान शवों को नदी में फेंकने का ज़िक्र भी आया. अमाइकस क्यूरी मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि मौत के बाद अंतिम संस्कार के दौरान गरिमा का पालन नहीं हो रहा है. देश में कई श्मशान घाट काम नहीं कर रहे. गरीब लोगों के लिए अंतिम संस्कार की व्यवस्था राज्यों की तरफ से होनी चाहिए. जस्टिस राव ने कहा कि कल हमने नदी में शव तैरते हुए देखे हैं. इस पर जस्टिस चंद्रचूड का तंज आया. उन्होंने कहा कि “मुझे नहीं पता कि यह दिखाने के लिए समाचार चैनल के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है या नहीं.”

नदी में तैरते शवों और वैक्सीन के अलावा तीसरी लहर की तैयारी की जानकारी भी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगी. आज सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि खुद की कमी को स्वीकार करना मजबूती की निशानी होती है. यहां सुनवाई किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं हो रही. हमें पता है कि विदेश मंत्री आवश्यक चीजों के इंतजाम के लिए अमेरिका गए. यह स्थिति की गंभीरता को दिखाता है.

आखिर में जस्टिस चंद्रचूड ने कहा कि हम ऐसा कोई आदेश पारित नहीं करेंगे जो देश के कल्याण में बाधा बनें. कोर्ट ने केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया है.


विडियो- सरकार ने बता दिया कि कहां कहां बन सकते हैं कोरोना वैक्सीनेशन सेंटर?

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