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हेती के राष्ट्रपति सत्ता में बने रहने के लिए हत्याएं करवा रहे?

ये कहानी है एक राष्ट्रपति और एक पुलिस अधिकारी की. वो पुलिस अफ़सर, जिसने कुछ साथी पुलिसवालों के साथ मिलकर एक नरसंहार को अंज़ाम दिया. इतना क्रूर नरसंहार कि 10 महीने के बच्चे की पीट-पीटकर हत्या कर दी. चार साल के बच्चे को गोली मारकर उसकी लाश सुअरों को खिला दी. बच्चों के सामने उनकी मांओं से बलात्कार करके उन्हें ज़िंदा जला दिया.

इस नरसंहार में एक ख़ास बात थी. ये जिस इलाके में हुआ, वो विपक्षी पार्टी का गढ़ है. नरसंहार की टाइमिंग भी बड़ी स्पेशल थी. ये जिस वक़्त हुआ, उसके ऐन बाद विपक्ष की एक सरकार-विरोधी रैली होने वाली थी. राष्ट्रपति और उस एक्स-कॉप गैंगमैन के बीच का कनेक्शन इस नरसंहार के बाद भी बना रहा. जैसे-जैसे राष्ट्रपति का विरोध बढ़ता गया, वैसे-वैसे उस एक्स पुलिस अफ़सर का आतंक भी बढ़ता गया. अब ये हाल है कि देश की राजधानी पर इस हत्यारे का कब्ज़ा है और वो चुन-चुनकर राष्ट्रपति के विरोधियों को ठिकाने लगाता है.

ये पूरा मामला क्या है, विस्तार से बताते हैं आपको

कैरेबियन में एक देश है-हेती. ये देश एक ज़माने में फ्रांस का ग़ुलाम था. वो यहां की ब्लैक आबादी से गन्ने के खेतों में ग़ुलामी खटवाते और मुनाफ़ा कमाते. अपनी दुर्दशा से बौखलाए ब्लैक्स ने बग़ावत कर दी. उन्होंने नेपोलियन की भेजी सेना को हरा दिया. इस जीत के बाद 1804 में हेती आज़ाद हो गया. ये बना दुनिया का पहला ब्लैक रिपब्लिक.

Untitled Design
लाल घेरे में कैरेबियन देश हेती. (गूगल मैप्स)

मगर ये आज़ादी हेती को महंगी पड़ी. फ्रांस ने ग़ुलाम हाथ से निकलने के कारण हुए अपने नुकसान का हर्जाना मांगा. कितना हर्जाना? आज की वैल्यू में करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये. ये रकम कहलाई इंडिपेंडेंस डेब्ट. यानी, आज़ादी का कर्ज़ा. हेती गरीब था. इतना गरीब कि 127 बरस तक कर्ज़ा भरता रहा, तब भी पूरा नहीं दे पाया.

ये कथित कर्ज़ पूरी तरह से अन्याय था. इसको चुकाने के चक्कर में हेती कंगाल हो गया. वहां की नींव में ही गरीबी लिख गई. रही-सही कसर पूरी की तानाशाही, राजनैतिक अस्थिरता और प्राकृतिक आपदाओं ने. ये सारी स्थितियां क्राइम के लिए बहुत मुफ़ीद हैं. ऐसे में हेती के भीतर कई हिंसक गैंग्स बन गए. इनमें से ही एक था- बेस डेलमास 6 गैंग्स. इस गैंग का सरगना है जिमी चेरिज़ियर, जिसे हेती के लोग बारबिक्यू के नाम से बुलाते हैं.

Barbecue, Jimmy Cherizier
बेस डेलमास 6 गैंग का सरगना जिमी चेरिज़ियर. (फोटो: एएफपी)

कौन है ये आदमी?

ये वही पुलिस अफ़सर है, जिसका एक कारनामा हमने शुरुआत में आपको बताया था. लोग कहते हैं, लोगों को ज़िंदा जलाने के कारण उसका नाम बारबिक्यू चल निकला. हालांकि वो दावा करता है कि उसकी मां मुर्गे भूनकर बेचती थी, इसलिए ये नाम मिला.

ये जो बारबिक्यू है, उसका इलाका है हेती की राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस. इसी राजधानी में है ला सलाइन नाम का एक स्लम. एपिसोड की शुरुआत में हमने आपको जिस नरसंहार के बारे में बताया, वो इसी स्लम में हुआ था. कब? 13 से 17 नवंबर 2017 के बीच. इस नरसंहार में करीब 70 लोग मारे गए. इस नरसंहार में बारबिक्यू के साथ कुछ और भी गैंग शामिल थे. इन्हें सत्ता का भी आशीर्वाद मिला हुआ था.

Haiti 2018 Massacre
2017 नरसंहार में करीब 70 लोग मारे गए थे. (फोटो: एएफपी)

कैसे, इसकी एक मिसाल देते हैं. इस नरसंहार में बारबिक्यू का साथ देने वाले दो मुख्य लोग थे. एक, आंतरिक मंत्रालय का डायरेक्टर फेडनेल मोनकैरी. दूसरा, शहर का पूर्व मेयर जोसफ़ डुपलान. ये जो डुपलान है, उसका कनेक्शन सीधा राष्ट्रपति जुवेनेल मोइज़ से है. प्रेज़िडेंट मोइज़ ने डुपलान को देश के पश्चिमी इलाके में अपना प्रतिनिधि चुना था. स्थानीय मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नरसंहार की प्लानिंग बारबिक्यू के घर पर हुई थी. ऊपरी मदद के कारण नरसंहार में शामिल हत्यारों को सरकारी गाड़ियां और पुलिस की वर्दी दी गईं.

क्या था इस हत्याकांड का मकसद?

ये बताने से पहले आपको हेती के राजनैतिक हालात समझने होंगे. लंबी राजनैतिक उठापटक के बाद नवंबर 2016 में यहां चुनाव हुए. धांधली की आशंका के कारण विपक्ष ने इसका बहिष्कार किया. केवल 21 पर्सेंट लोग ही वोट डालने गए. इस कमज़ोर चुनाव में जीतकर फरवरी 2017 में हेती के राष्ट्रपति बने जुवेनेल मोइज़. एक साल भी नहीं बीता कि उनका नाम एक भ्रष्टाचार स्कैंडल में आ गया. इसके बाद उनके इस्तीफ़े की मांग उठी. मगर मोइज़ ने इस्तीफ़ा नहीं दिया.

President Jovenel Moïse
2017 में हेती के राष्ट्रपति बने जुवेनेल मोइज़. (फोटो: एएफपी)

जुलाई 2018 आते-आते मोइज़ के प्रति विरोध उग्र होता गया. मुख्य विपक्षी नेता ज़ॉ चार्ल्स मोइज़ और उनकी पिटिट डेसालिन पार्टी ने इसे अपना मुख्य मुद्दा बना लिया. अक्टूबर 2018 में प्रदर्शन और बढ़ गए. विपक्ष ने तय किया कि 18 नवंबर को और बड़े लेवल पर प्रोटेस्ट करेंगे. इसी बैकग्राउंड में आई 6 नवंबर की तारीख़. इसी दिन बारबिक्यू और उसके साथियों ने नरसंहार की प्लानिंग की.

अब सवाल है कि इन्होंने ला सलाइन नाम स्लम को ही क्यों चुना?

इसलिए कि ला सलाइन राजधानी के उन गरीब इलाकों में है, जहां विपक्ष के सरकार विरोधी मूवमेंट का बड़ा असर था. ऐसे में अगर यहां पर हत्याकांड होता, तो बाकी इलाकों में भी आतंक फैलता. 18 नवंबर के प्रोटेस्ट में शामिल होने वालों के बीच दहशत फैल जाता. आपको एक भयानक सच बताएं. नवंबर 2018 में हुए इस हत्याकांड के समय बारबिक्यू पुलिस की नौकरी में था. 2019 में विभाग ने उसे बर्ख़ास्त किया. किस आरोप में? अवैध हथियार रखने और ड्यूटी पर न आने के आरोप में.

Opposition Leader Jean Charles Moïse
मुख्य विपक्षी नेता ज़ॉ चार्ल्स मोइज़. (फोटो: एएफपी)

तो क्या इस नरसंहार के बाद राष्ट्रपति मोइज़ का विरोध ख़त्म हो गया?

जवाब है, नहीं. विरोध चलता रहा. इसके साथ ही बारबिक्यू का आतंक भी बढ़ता गया. उसने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए एक बड़ा काम किया. राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस में कई हिंसक गैंग्स सक्रिय थे. उनके बीच आएदिन हिंसा होती रहती थी. बारबिक्यू ने इन गैंग्स को एकजुट किया और जून 2020 में सबको साथ मिलाकर बनाया एक महागैंग. इसका नाम रखा- G9 फैमिली ऐंड अलाइज़.

अपराधियों के बीच हुई इस एकता के सहारे बारबिक्यू बन गया पोर्ट-ओ-प्रिंस का सबसे ताकतवर आदमी. बारबिक्यू और उसके लोग राष्ट्रपति मोइज़ के विरोधियों को लगातार निशाना बना रहे हैं. विपक्ष के प्रभाव वाले गरीब इलाकों में इन्होंने आतंक मचाया हुआ है. बारबिक्यू कहता है कि प्रेज़िडेंट मोइज़ से उसका कोई लेना-देना नहीं. मगर फैक्ट्स इस दावे का साथ नहीं देते. चश्मदीदों के मुताबिक, बारबिक्यू के गुंडे पुलिस और सेना को मिली हथियारबंद गाड़ियों में घूमते हैं. पुलिस के हथियार इस्तेमाल करते हैं.

Delmas 6 Gang
गरीब इलाकों में इस G9 गैंग ने आतंक मचाया हुआ है. (फोटो: एपी)

तो क्या बारबिक्यू असल में प्रेज़िडेंट मोइज़ का हेंचमैन है?

तथ्य और चश्मदीदों के गवाह तो यही बताते हैं. मसलन, हेती के जस्टिस मिनिस्टर लुकमाने डेलिले की मिसाल देख लीजिए. इसी साल मार्च की बात है. 6 मार्च को डेलिले जस्टिस ऐंड पब्लिक सिक्यॉरिटी मिनिस्टर बनाए गए. इनके आगे सबसे बड़ी चुनौती थी राजधानी में मौजूद अराजकता ख़त्म करना. यहां क़ानून-व्यवस्था की स्थिति बनाना. मंत्री बनने के चार रोज़ बाद 10 मार्च को डेलिले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने पुलिस से कहा कि आतंक फैलाने वाले गिरोहों के पीछे लग जाएं. किसी हाल में क्राइम का सफ़ाया करें. ये आदेश देने के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति मोइज़ ने डेलिले को बर्ख़ास्त कर दिया.

Justice Minister Lucman Delille
जस्टिस मिनिस्टर लुकमाने डेलिले.

अपराधियों, ख़ासकर बारबिक्यू के साथ सांठगांठ के आरोपों पर राष्ट्रपति मोइज़ क्या कहते हैं?

स्वाभाविक है, वो इससे इनकार करते हैं. उनके मुताबिक, उनकी सरकार बातचीत और विमर्श से सुलह करना चाहती है. फिर चाहे वो डकैत और हत्यारे ही क्यों न हों. मोइज़ का कहना है कि अच्छा नागरिक हो या अपराधी, वो तो पूरे हेती के राष्ट्रपति हैं. काश कि राष्ट्रपति मोइज़ अपने विरोधियों के साथ भी यही शांति दूत रवैया अपनाते.

बारबिक्यू पर दर्ज़नों लोगों की हत्या करवाने का आरोप है. उसका अपराध साबित करने के लिए कई साक्ष्य हैं. यहां तक कि पुलिस विभाग की एक पुरानी जांच रिपोर्ट भी 2018 के नरसंहार में बारबिक्यू को मुख्य किरदार बता चुकी है. मगर इसके बावजूद बारबिक्यू पर नरसंहार तो छोड़िए, एक हत्या का केस तक दर्ज नहीं हुआ. लोग आरोप लगाते हैं कि राष्ट्रपति मोइज़ अपनी ही टीम के कैप्टन पर कार्रवाई क्यों होने देंगे.

राष्ट्रपति मोइज़ के पास सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक आधार नहीं बचा है. अक्टूबर 2019 में वहां चुनाव होना था. मोइज़ ने अपने विरुद्ध हो रहे प्रदर्शनों को बहाना बनाकर चुनाव नहीं करवाए. इलेक्शन नहीं हुआ, तो संसद का नया सत्र नहीं शुरू हुआ. संसद नहीं बैठी, तो राष्ट्रपति ने ख़ुद ही आदेश निकालकर शासन चलाने का फैसला किया. अब कोरोना के बीच बिगड़े हालात में वो नया संविधान लाने की बात कर रहे हैं.

तो क्या मोइज़ को कोई कुछ नहीं कह रहा है?

उसका पड़ोसी अमेरिका भी चुप है क्या? जवाब है, नहीं. ऊपर-ऊपर से अमेरिका कई बार चुनाव करवाने की अपील कर चुका है. अभी 17 अगस्त को भी उसने यही अपील की. इस रोज़ अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट माइक पॉम्पिओ हेती प्रेज़िडेंट मोइज़ से मिले. इसके बाद पॉम्पिओ का ट्वीट आया. इसमें लिखा था कि उन्होंने चुनाव को लेकर मोइज़ से डिस्कशन किया. इस मीटिंग के बाद मोइज़ ने भी 2021 में चुनाव करवाने की बात कही. मगर सवाल है कि उनके सत्ता में रहते निष्पक्ष चुनाव कैसे होंगे? चुनाव होंगे भी कि नहीं, ये कौन जानता है.

अमेरिका और कनाडा जैसे बड़े देशों पर मोइज़ की ज़्यादतियों की अनदेखी का आरोप लगता है. ऐसा इसलिए कि हेती के पड़ोस में है वेनेजुएला. वहां के शासक निकोलस मादुरो से वेस्ट की रार है. ऐसे में वेनेजुएला के खिलाफ़ क्षेत्रीय सपोर्ट चाहिए. मोइज़ ये सपोर्ट देते हैं और बदले में अमेरिका जैसे देश उनकी ज़्यादतियों पर चुप रहते हैं. ये आरोप केवल हेती के लोग नहीं लगाते. ख़ुद कुछ अमेरिकी सांसद बारबिक्यू का ज़िक्र करते हुए ये इल्ज़ाम लगा चुके हैं.

Nicolás Maduro Venezuela
वेनेजुएला के शासक निकोलस मादुरो. (फोटो: एपी)

हेती में एक पुरानी कहावत है- डाय मोन जेन मोन. इसका मतलब होता है, पहाड़ों के पीछे और भी पहाड़ हैं. इस कहावत का भाव है कि अड़चनों का कोई अंत नहीं. यही हाल हेती की मुश्किलों का भी है. यहां की जनता 1957 से 1986 तक तानाशाही झेल चुकी है. उन्हें आभास हो रहा है कि बारबिक्यू जैसे हत्यारों की मदद लेकर मोइज़ भी इसी राह बढ़ रहे हैं. अगर एक और तानाशाही आई, तो हेती के रीढ़ की हड्डी टूट जाएगी.


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