Submit your post

Follow Us

रिव्यू पिटीशन क्या होता है? कौन, क्यों, कब दाखिल कर सकता है?

17
शेयर्स

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड. यानी AIMPLB.अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका यानी रिव्यू पिटीशन दाखिल करेगा. मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पूरा मामला उसी की निगरानी में चल रहा था. सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को अयोध्या भूमि विवाद पर फैसला सुनाया था. कोर्ट ने विवादित जमीन हिन्दू पक्ष को सौंप दी थी. कोर्ट ने तीन महीने के अंदर सरकार से ट्रस्ट बनाने के लिए कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था.

लेकिन 17 नवंबर को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ऐलान किया कि वो पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा.

क्या होता है रिव्यू पिटीशन

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और सीनियर एडवोकेट हैं जितेंद्र मोहन शर्मा. उनका कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अधिकार है. अदालत के दिए किसी फैसले पर पक्षकार कोर्ट से आग्रह करता है कि वो अपने निर्णय पर फिर से विचार करे. इसे दाखिल करने की एक मियाद होती है. अगर रिव्यू पिटीशन डालनी है, तो फैसला दिए जाने के 30 दिन के भीतर डाली जानी होगी. कोई भी पक्षकार फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकता है.

याचिका दाखिल होने के बाद गेंद होती है अदालत के पाले में. अब सुप्रीम कोर्ट के ऊपर है कि वो याचिका मंजूर करे या न करे. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने वाली 99.9 फीसदी पुनर्विचार याचिकाएं खारिज हो जाती हैं. सिर्फ 0.1 फीसदी पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई होती है. पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट की उसी बेंच के समक्ष दाखिल की जाती है, जिसने फैसला सुनाया है.

जस्टिस रंजन गोगई तो रिटायर्ड हो गए फिर क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे एडवोकेट अनस तनवीर का कहना है कि अयोध्या मामले पर फैसला सुनाने वाले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई रिटायर हो गए हैं. उनकी जगह बेंच में दूसरे जस्टिस को शामिल किया जाएगा. हालांकि बेंच में शामिल बाकी 4 जज वही रहेंगे. जिन्होंने फैसला सुनाया. वर्तमान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस एसए बोबड़े पहले ही इस बेंच में शामिल हैं ऐसे में कोई और जस्टिस को शामिल किया जाएगा.

रिव्यू पिटीशन कौन दायर कर सकता है?
जवाब है पक्षकार. यानी जिन्हें कोर्ट ने पक्ष माना है. लेकिन अनस तनवीर का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के मुताबिक, कोई भी जिसे  लगता है फैसले ने प्रभावित किया है रिव्यू पिटीशन दायर कर सकता है. हाल ही में सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश से जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ 50 से ज्यादा पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं. इनमें से कई पक्षकार नए थे. कोर्ट ने रिव्यू पिटीशन को बड़ी बेंच को सौंप दिया है.

रिव्यू पिटीशन क्यों दायर कर रहा है AIMPLB

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की स्थापना 1973 में हुई थी. यह एक गैर सरकारी संगठन है, जो भारतीय मुस्लिमों के लिए शरीयत में बने कानूनों को लागू करने और मुस्लिमों की देखभाल करने के साथ ही उनका प्रतिनिधित्व करता है.

aimplb banner

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने काम को सही तरीके से अंजाम देने के लिए चार कमिटियां बनाई हैं. इनमें से एक है बाबरी मस्जिद कमिटी. इस समिति का काम देश-दुनिया में चल रहे मुकदमों की पैरवी करना है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील डॉ. जफरयाब जिलानी बताते हैं कि बाबरी मस्जिद कमिटी के जरिए हम मुकदमों की पैरवी और उनकी निगरानी करते हैं. यही कारण है कि अयोध्या पर फैसला आने के बाद AIMPLB रिव्यू पिटीशन दायर करने की बात कह रहा है.

क्या इसके अलावा भी कोई रिव्यू पिटीशन फाइल कर रहा है?

जवाब है हां. अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में आठ मुस्लिम पक्षकार थे. इनमें से पांच ने रिव्यू पिटीशन दाखिल करने का फैसला किया है. मिसबाहुद्दीन, मौलाना महफूजुर्रहमान, मोहम्मद उमर और हाजी महबूब ने पुनर्विचार याचिका दायर करने पर अपनी सहमति AIMPLB को दी है. इसके अलावा जमीयत उलेमा-ए-हिंद (हामिद मोहम्मद सिद्दीकी) की ओर से मौलाना अरशद मदनी ने भी रिव्यू पिटिशन दाखिल करने का ऐलान किया है.

कौन रिव्यू पिटीशन फाइल नहीं कर रहा है?

मुस्लिम पक्षकारों में इकबाल अंसारी पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेंगे. इसके अलावा सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके साफ कर दिया कि वो भी पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करेगा.


ऐसा क्या हुआ कि निरंजन अखाड़ा के महंत आशीष गिरी ने खुद को गोली मार जान दे दी?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

न्यू मॉन्क

दुनिया के पहले स्टेनोग्राफर के पांच किस्से

अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन के अवसर पर पढ़िए गणपति से जुड़ी कुछ रोचक बातें.

यज्ञ में नहीं बुलाया गया तो शिव ने भस्म करवा दिया मंडप

शिव से बोलीं पार्वती- 'आप श्रेष्ठ हो, फिर भी होती है अनदेखी'.

नाम रखने की खातिर प्रकट होते ही रोने लगे थे शिव!

शिव के सात नाम हैं. उनका रहस्य जानो, सीधे पुराणों के हवाले से.

ब्रह्मा की हरकतों से इतने परेशान हुए शिव कि उनका सिर धड़ से अलग कर दिया

बड़े काम की जानकारी, सीधे ब्रह्मदारण्यक उपनिषद से.

एक बार सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने भी झूठ बोला था

राजा हरिश्चंद्र सत्य का पर्याय हैं. तभी तो कहा जाता है- सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र. पर एक बार हरिश्चंद्र ने भी झूठ कहा था. क्यों कहा था?

जटायु के पापा का सूर्य से क्या रिश्ता था?

अगर पूरी रामायण पढ़े हो तो पता होगा. नहीं पता तो यहां पढ़ो.

ब्रह्मा की पूजा से जुड़ा सबसे बड़ा झूठ, बेटी से नहीं की थी शादी

कहते हैं कि बेटी सरस्वती से विवाह कर लिया था ब्रह्मा ने. इसीलिए उनकी पूजा नहीं होती. न मंदिर बनते हैं. सच ये है.

उपनिषद् का वो ज्ञान, जिसे हासिल करने में राहुल गांधी को भी टाइम लगेगा

जानिए उपनिषद् की पांच मजेदार बातें.

औरतों को कमजोर मानता था महिषासुर, मारा गया

उसने वरदान मांगा कि देव, दानव और मानव में से कोई हमें मार न पाए, पर गलती कर गया.

राम-सीता की शादी के लिए नहीं हुआ था कोई स्वयंवर

न स्वयंवर हुआ था, न उसमें रावण आया था: रामायण का एक कम जाना हुआ सच.