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ससुराल में किसका फ़ोन जाने पर सचिन पायलट का ग़ुस्सा ख़त्म हो गया?

राजस्थान में जो पॉलिटिकल गेम चल रहा था, अब उस पर विराम लग गया है. विराम सचिन पायलट की गांधी परिवार से मुलाक़ात और केसी वेणुगोपाल के प्रेस नोट के बाद आया है. मीडिया में सचिन पायलट कांग्रेस के अभिन्न अंग बता दिए गए हैं. कह दिया गया है कि उनके और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच सारे गिले-शिकवे दूर कर लिए गए हैं. और भाजपा की तैयारियां भी ठंडे बस्ते में चली गयी हैं. 11 अगस्त को भाजपा के विधायकों की जो मीटिंग होनी थी, वो 13 अगस्त तक टाल दी गई है. अब कोई तेज़ी-तैयारी नहीं दिख रही.

लेकिन एकदम भन्नाए हुए सचिन पायलट की वापसी इतनी आसान भी नहीं थी कि राहुल-प्रियंका से मिले और सारा मैटर सॉल्व. बहुत जोड़तोड़ हुआ. और पूरे जोड़तोड़ की कहानी सचिन पायलट की तीन शर्तों पर टिकी थी :

शर्त नम्बर 1 : भविष्य में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की सार्वजनिक घोषणा की जाए.

शर्त नम्बर 2 : अगर ऐसा नहीं होता तो सचिन पायलट कैंप से दो वरिष्ठ नेता दो उपमुख्यमंत्री बनेंगे. बाकी सभी नेताओं को मंत्रिमंडल या अलग-अलग बोर्ड और निगम के पदों पर एडजस्ट किया जाएगा. सचिन पायलट दिल्ली में कांग्रेस महासचिव का पद भी संभाल सकते हैं.

शर्त नम्बर 3 : सार्वजनिक रूप से कांग्रेस घोषणा पत्र में राहुल गांधी के किए वादों को लागू करने की घोषणा की जाए, जिससे कि सम्मानजनक वापसी की जा सके.

और एक छोटी-कहानी का मौक़ा आता है. इंडिया टुडे के पत्रकार शरत कुमार के हवाले से आयी ये कहानी बताती है कि सचिन पायलट वापस कैसे आए.

गहलोत से रूठकर पायलट जिस दिन दिल्ली गए, उस दिन इनके साथ 25 विधायक थे. 12 जुलाई को पायलट ने अशोक गहलोत सरकार के अल्पमत में आ जाने का ऐलान कर दिया. सरकार को गिराने के संकेत देने लगे. पायलट गुस्से में थे और अशोक गहलोत को सबक सिखाना चाहते थे. इंडिया टुडे के साथ एक बातचीत में कह भी दिया था कि चुनाव उन्होंने जीता, लेकिन अशोक गहलोत बिना किसी काम के मुख्यमंत्री बनने का दावा लेकर आ गए. यहां तक कहा जाने लगा कि सचिन पायलट अशोक गहलोत की सरकार गिराएंगे और बीजेपी के साथ मिलकर मुख्यमंत्री बनेंगे.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

मगर इस बीच पायलट के तीन साथियों ने धोखा दे दिया. चेतन डूडी, रोहित बोहरा और दानिश अबरार. 12 जुलाई का दिन. तीनों ने बहाना बनाया कि वो खाना खाने पंडारा रोड जा रहे हैं. लेकिन उनकी गाड़ी सीधे अशोक गहलोत के दरवाज़े जयपुर जाकर रुकी. कहा कि सचिन पायलट का प्लान था कि हम सब बीजेपी में शामिल होंगे, इसलिए हम उन्हें छोड़कर चले आए. यह खबर चल गई कि सचिन पायलट अमित शाह और जेपी नड्डा से मिलकर बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं. सचिन पायलट ने बिना वक्त गंवाए इस खबर का खंडन किया और कहा कि मैं कांग्रेस छोड़कर नहीं जा रहा हूं.

12 जुलाई यानी इस पूरे घटनाक्रम के सबसे ग़र्म दिन ही प्रियंका गांधी ने पायलट के ससुर फारुख अब्दुल्ला और पायलट के साले उमर अब्दुल्ला से बातचीत कर सचिन के लिए रास्ता खोल दिया था. गांधी परिवार ने पुराने संबंधों का हवाला देकर सचिन पायलट की मां रमा पायलट से भी संपर्क साधा. कहते हैं कि सचिन पायलट ने अपने परिवार को तो समझा-बुझा लिया, लेकिन प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद से वो कमजोर पड़ने लगे थे. कांग्रेस के युवा नेता दीपेंद्र हुड्डा ने राहुल गांधी से संपर्क कर सचिन पायलट को मनाने का जिम्मा उठाया. हुड्डा ने अपने पुराने मित्र कांग्रेस नेता भंवर जितेंद्र सिंह से भी पायलट को समझाने के लिए संपर्क किया. ये सब कोशिशें चल रही थीं, लेकिन गहलोत अपने ही तेवर में थे. तीखा हमला किया और बातचीत डिरेल हो गयी. तब सचिन पायलट को लगा कि कांग्रेस हमारे साथ कोई खेल खेल रही है, एक तरफ बातचीत की जा रही है और दूसरी तरफ हमारे ऊपर प्रहार किया जा रहा है. पायलट दिनोंदिन कन्फ़्यूज़ हो रहे थे. क्योंकि वो बीजेपी में जाने का मन तो नहीं बना पा रहे थे, लेकिन गुस्से में बीजेपी से जो समझौता कर चुके थे, वो तोड़ भी नहीं पा रहे थे.

क्या राहुल गांधी सचिन पायलट को मना पाएंगे?
राहुल गांधी और सचिन पायलट

अब कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल का ट्वीट आया- अस्तबल से सब घोड़े निकल जाएंगे, तब जागेगी कांग्रेस क्या? कहा जा रहा है कि प्रियंका गांधी ने कपिल सिब्बल से कहा कि आप ही संपर्क कीजिए. गांधी परिवार ने अब कार्ति चिदंबरम को इस मामले में शामिल किया क्योंकि कार्ति सचिन पायलट के मित्र रहे हैं. राजनीति में आने से पहले उनके साथ मिलकर एक मेडिकल कंपनी भी खोली थी. कार्ति चिदंबरम और पी चिदंबरम सचिन पायलट से बात कर ही रहे थे कि अशोक गहलोत ने हमला और तेज कर दिया और ऑडियो सीडी रिलीज कर दी. बातचीत फिर टूट गई. जब भी कांग्रेस पार्टी पायलट को मनाने के एक क़दम नज़दीक पहुंचती, गहलोत के बयानों से मामला ध्वस्त हो जाता.

मामला कोर्ट में जा चुका था. गहलोत अपने विधायकों को लेकर रिज़ॉर्ट में जा चुके थे. नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिख चुके थे कि आपकी पार्टी द्वारा किए जा रहे इस काम से भाजपा की बहुत बदनामी हो रही है. रविवार 2 अगस्त. अब इस मामले में निर्णायक मोड़ आ चुका था. सूत्र बताते हैं कि प्रियंका गांधी ने पायलट के ससुराल फिर से फोन लगाया. और अब्दुल्ला परिवार के ज़रिए फिर से सचिन पायलट से सम्पर्क साधा गया. इधर अशोक गहलोत और उनके साथ के लोगों को भी सख़्त हिदायत दी गयी. अब सचिन पायलट पर कोई हमला नहीं बोलेंगे. सचिन ने दिन चुन लिया. 9 अगस्त यानी अगस्त क्रांति के दिन सचिन गांधी परिवार से मिलकर इस पूरे मामले को ख़त्म कर देंगे. मगर ये दिन बीत गया. पूरा दिन बातचीत में चला गया, क्योंकि गहलोत को भी समझाना था. उन्हें कहा गया कि अल्पकालिक फ़ायदा देखने के बजाय वो पार्टी का दीर्घकालिक फ़ायदा देखें. अशोक गहलोत मान नहीं रहे थे. फिर भी सचिन पायलट को प्रियंका-राहुल से मिलने का न्यौता दिया गया. पायलट पहुंच गए. और अपने विधायकों को भी समझा दिया कि बेवजह झगड़ा करने का फ़ायदा नहीं है. आश्वासन दिया कि वे कांग्रेस आलाकमान से अपने साथ के विधायकों के लिए सम्मानजनक कुर्सी की बात रखेंगे.

सचिन पायलट के साले उमर अब्दुल्ला
सचिन पायलट के साले उमर अब्दुल्ला

सचिन की मुलाक़ात हुई. प्रियंका गांधी ने कहा कि पार्टी ने इतना कुछ दिया और उस पार्टी को आप छोड़ने के बारे में कैसे सोच सकते हैं? सचिन पायलट ने जवाब दिया, कहा- जब उपमुख्यमंत्री बनाकर आपने भेजा था तो कहा था कि साथ में सरकार चलानी है, मगर वहां मेरी हैसियत एक विधायक से भी गई गुजरी है. फिर बातचीत में भूली-बिसरी बातों का भी दौर आया. फिर समझाया गया. तय हुआ कि पार्टी इतनी बड़ी है और जिस तरह से दबाव में आकर हाथों-हाथ अगर पार्टी सचिन पायलट के लिए समझौता करती है, तो पंजाब, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी इस तरह की बगावतों को हवा मिलेगी. सचिन पायलट को समझाया गया कि थोड़ा इंतजार कीजिए, कांग्रेस में एक बेहतर जगह तलाशी जाएगी. और पायलट के साथ आए विधायकों का भी मान सम्मान रखेंगे. इसी कड़ी में तय हुआ कि पायलट के साथ आए विधायकों से प्रियंका गांधी मिलेंगी, ताकि उन्हें ऐसा ना लगे कि वो खाली हाथ दिल्ली से लौट रहे हैं. मगर यह समझौता आसान नहीं है. क्योंकि ख़बर है कि गहलोत गुट के विधायक रात से ही कहने लगे हैं कि सचिन पायलट से कोई वादा नहीं किया गया है, वह तो मजबूरी में कांग्रेस में आए हैं.

लेकिन सचिन आ गए हैं. ससुराल लगाए गए कुछ फ़ोन कॉल ने सचिन की वापसी का रास्ता खोल दिया है.


वीडियो : राजस्थान: क्या BJP को अपने विधायकों के अशोक गहलोत के पाले में चले जाने का डर है?

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