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देश की बड़ी कंपनी इन्फोसिस के साथ ऐसा क्या हुआ कि एक झटके में डूब गए 53 हजार करोड़ रुपये

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इन्फोसिस. देश की सबसे बड़ी निजी कंपनियों में से एक. बिजनेस कंसल्टिंग, इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी और आउटसोर्सिंग के मामले में टाटा के बाद दूसरी सबसे बड़ी कंपनी. इस कंपनी में निवेश करने वाले लोगों को 22 अक्टूबर के दिन करीब 55,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इसकी वजह ये है कि 22 अक्टूबर को शेयर मार्केट में कंपनी के शेयर इतनी तेजी से गिरे कि एक झटके में लोगों के 55,000 करोड़ डूब गए. ये हुआ कंपनी में मची उथल-पुथल से, जिसका सीधा असर देखने को मिला शेयर मार्केट में.

बीएसई यानी कि बंबई स्टॉक एक्सचेंज में इन्फोसिस के शेयर 16.21 फीसदी तक गिर गए और 643.30 रुपये पर बंद हुए. वहीं एनएसई यानी कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में भी इन्फोसिस को 16.65 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ा और यहां पर इसके शेयर 640 रुपये की कीमत पर बंद हुई. नतीजा ये हुआ कि कंपनी को 53,450.92 करोड़ रुपये का नुकसान हो गया. कंपनी के बाजार में जो पैसे लगे थे वो थे 3,29,751 करोड़ रुपये जो घटकर 2,76,300.08 करोड़ रुपये पर आ गए.

इन्फोसिस के शेयरधारकों को एक दिन में करीब 53,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
इन्फोसिस के शेयरधारकों को एक दिन में करीब 53,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

इन्फोसिस में आखिर ऐसा हुआ क्या है कि कंपनी को इतना बड़ा नुकसान हो गया?

20 सितंबर, 2019. इन्फोसिस बोर्ड के पास एक चिट्ठी पहुंची. चिट्ठी लिखी थी कंपनी में ही काम करने वाले कुछ लोगों ने, जो खुद को एथिकल एम्प्लाइज यानी कि नैतिक कर्मचारी कहते हैं. इन लोगों ने चिट्ठी में अपना नाम जाहिर नहीं किया था, लेकिन कंपनी के सीईओ सलिल पारेख और कंपनी के सीएफओ निलांजन रॉय पर गंभीर आरोप लगाए थे. इन्फोसिस बोर्ड को चिट्ठी लिखने के एक हफ्ते के बाद ही इन अज्ञात लोगों ने अमेरिका के शेयर बाजार के रेग्युलेटर यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (US Securities and Exchange Commission) को भी एक चिट्ठी लिखी. और ये चिट्ठी ऐसे वक्त में लिखी गई है जब कंपनी ने बताया कि उसका जुलाई-सितंबर 2019 की तिमाही में मुनाफा बढ़ा है और ये 5.8 फीसदी बढ़कर 4019 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. इसके अलावा कंपनी की आमदनी भी 7 फीसदी की दर से बढ़ी है और अब ये 23,255 करोड़ रुपये हो गई है. इस चिट्ठी का मजमून था-

# कंपनी के सीईओ सलिल पारेख और कंपनी के सीएफओ निलांजन रॉय ने कंपनी का मुनाफा ज्यादा दिखाने के लिए आंकड़ों में हेर-फेर किया है.

# कंपनी के इन दोनों बड़े अधिकारियों ने कम वक्त में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए कई गलत काम किए हैं. और ऐसा उन्होंने इस तिमाही में भी किया है.

कंपनी के सीईओ सलिल पारेख (दाएं) और सीएफओ नीलांजन रॉय (बाएं) पर चिट्ठी लिखकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
कंपनी के सीईओ सलिल पारेख (दाएं) और सीएफओ नीलांजन रॉय (बाएं) पर चिट्ठी लिखकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

# कंपनी के इन अधिकारियों ने जो गलतियां की हैं, उसके पर्याप्त सबूत उपलब्ध हैं. आरोपों को साबित करने के लिए ईमेल्स और वॉयस रिकॉर्डिंग्स भी मौजूद हैं.

# चिट्ठी के मुताबिक कंपनी के सीईओ सलिल पारेख बड़े-बड़े सौदों में मुनाफा ज्यादा दिखाने के लिए कर्मचारियों पर दबाव बनाते हैं. इसके अलावा वो मुनाफे का अनुमान गलत बताने के लिए भी दबाव डालते हैं. सलिल पारेख ने कर्मचारियों से मार्जिन दिखाने के लिए गलत अनुमान देने को कहा और बड़े सौदों के मसले पर बोर्ड में प्रजेंटेशन देने से भी रोक दिया.

# सीएफओ नीलांजन रॉय ने कंपनी का मुनाफा ज्यादा दिखाने के लिए बोर्ड और ऑडिटर की जरूरी मंजूरी नहीं ली और निवेश नीति के साथ ही एकाउंटिंग में छेड़छाड़ कर दी.

# सीईओ सलिल पारेख ने बड़े सौदों की समीक्षा रिपोर्ट को नजरअंदाज किया. ऑडिटर और कंपनी के बोर्ड से मिली सूचनाओं को छिपाया.

सीईओ सलिल पारेख पर आरोप है कि उन्होंने बड़े सौदों की समीक्षा रिपोर्ट को नजरअंदाज किया.
सीईओ सलिल पारेख पर आरोप है कि उन्होंने बड़े सौदों की समीक्षा रिपोर्ट को नजरअंदाज किया.

# चिट्ठी में आरोप लगाया गया है कि चिट्ठी लिखने वाले एथिकल समूह को कंपनी में काम नहीं करने दिया जा रहा है और इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि इससे कंपनी के मुनाफे और शेयर की कीमतों पर असर पड़ेगा.

# इस चिट्ठी में ‘वेरिजॉन, एबीएन, इंटेल और जापान जेवी के साथ हुए सौदों और उनसे हुए मुनाफों के आंकड़ों में हुई गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है. साथ ही सीएफओ निलांजन रॉय की वायस रिकॉर्ड‍िंग भी है, जिसमें वो कहते हुए सुने जा रहे हैं कि इस जानकारी को कंपनी के ऑडिटर और बोर्ड के सामने नहीं पेश किया जाए.

इस मामले में कंपनी का क्या कहना है?

जब कंपनी के पास ये शिकायत पहुंची तो उसने एक बयान जारी किया. कहा कि कंपनी के नियमों के मुताबिक इन शिकायतों को ऑडिट कमिटी के सामने रखा गया है. 22 अक्टूबर को इस मामले पर बयान देने के लिए सामने आए इन्फोसिस कंपनी के चेयरमैन नंदन नीलेकणी. उन्होंने कहा कि लॉ फर्म शार्दूल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी इस मामले की जांच करेगी और जांच निष्पक्षता से हो सके, इसके लिए कंपनी के सीईओ सलिल पारेख और सीएफओ निलांजन रॉय को मामले से बाहर रखा गया है. इस फर्म की ऑडिट कमिटी को लीड करेंगे डी सुंदरम. उनके अलावा इस ऑडिट टीम में बोर्ड मेंबर पुनीता कुमार सिन्हा और रूपा कुडवा भी शामिल होंगी.

इन्फोसिस कंपनी के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने कहा है कि इस मामले की जांच एक लॉ फर्म को दी गई है.
इन्फोसिस कंपनी के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने कहा है कि इस मामले की जांच एक लॉ फर्म को दी गई है.

इन शिकायतों का कंपनी पर क्या असर पड़ेगा?

एक तात्कालिक असर तो यही है कि कंपनी के निवेशकों के 53,000 करोड़ रुपये से ज्यादा एक झटके में डूब गए हैं. लेकिन कंपनी पर इसका असर और भी ज्यादा हो सकता है. वजह ये है कि कंपनी हमेशा से कहती रही है कि बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस के मामले में ये कंपनी नंबर 1 है. अभी दो साल पहले की ही बात है, जब इस कंपनी के सीईओ हुआ करते थे विशाल सिक्का. 2017 में इसी तरह के व्हिसिल ब्लोवर ने शेयर बाजार को कंट्रोल करने वाली संस्था सेबी को लेटर लिखा था और कहा था कि कंपनी का सीईओ बनने के बाद विशाल सिक्का ने 2015 में पनाया के अधिग्रहण के दौरान कई नियमों का उल्लंघन किया है.

जानकारों की मानें तो कंपनी के सीईओ और सीएफओ पर लगे ये आरोप आने वाले वक्त में कंपनी को और नुकसान पहुंचा सकते हैं,
जानकारों की मानें तो कंपनी के सीईओ और सीएफओ पर लगे ये आरोप आने वाले वक्त में कंपनी को और नुकसान पहुंचा सकते हैं.

हालांकि कंपनी की एक इंटर्नल कमिटी की जांच रिपोर्ट में विशाल सिक्का को क्लीन चिट दे दी गई थी, लेकिन सेबी ने कंपनी को नोटिस जारी कर ऐक्शन लेने की बात कही थी. हालांकि इसके बाद कंपनी के फाउंडर नारायण मूर्ति और विशाल सिक्का के बीच लंबे समय तक विवाद चला था. विशाल सिक्का ने कंपनी के चीफ फाइनेंनशियल ऑफिसर राजीव बंसल को हर्जाने के तौर पर 24 महीने की सैलरी कंपनी छोड़ते वक्त दी थी. इस पर सेबी को आपत्ति थी. वहीं नारायण मूर्ति को विशाल सिक्का की सैलरी पर आपत्ति थी. विवाद बढ़ा तो विशाल सिक्का को कंपनी से इस्तीफा देना पड़ा था. जनवरी, 2018 में उनकी जगह ली थी सलिल पारेख ने.

अगस्त 2017 में कंपनी के सीईओ विशाल सिक्का को लेकर भी विवाद हुआ था. आखिर में उन्हें कंपनी से जाना पड़ा था.
अगस्त 2017 में कंपनी के सीईओ विशाल सिक्का को लेकर भी विवाद हुआ था. आखिर में उन्हें कंपनी से जाना पड़ा था.

अभी सलिल पारेख को सीईओ बने दो साल से भी कम का वक्त बीता है कि ऐसे ही आरोप उनके ऊपर भी लगने लगे. ये सारे मामले कंपनी की छवि को डेंट करेंगे. अगर कंपनी इन आरोपों से जल्दी छुटकारा नहीं पा लेती है, तो आने वाले वक्त में कंपनी को और बड़ा नुकसान होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता.


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