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जो लड़का घर आकर शिकायत करता था, अगले दिन उसे आउट कर देती थीं पूनम

स्कोरबोर्ड पर सिर्फ 133 रनों का लक्ष्य. विश्वकप जैसा बड़ा स्टेज. सामने ऑस्ट्रेलिया जैसी नंबर एक टीम और 9वें ओवर तक टीम का स्कोर 58 रन. शायद ही कोई खेल जानकार इस बात को एक्सेप्ट करेगा कि टीम इंडिया इस मुकाबले को अब भी जीत सकती है. लेकिन महिला टी20 विश्वकप के पहले मैच में ऐसा हुआ. भारत ने हारी हुई बाज़ी को जीतकर इतिहास रच दिया. और इस इतिहास का सेहरा बंधा टीम की छोटी लेकिन अनुभवी गेंदबाज़ पूनम यादव के सिर.

सात साल पहले 2013 में इस छोटी सी लड़की ने टीम इंडिया के लिए अपना डेब्यू किया था. उसके बाद से पूनम ने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा. पूनम वनडे रैंकिंग में सातवें, जबकि टी20 में 12वें स्थान पर मौजूद हैं. इतना ही नहीं बीते दो सालों में उन्होंने सबसे अधिक विकेट भी लिये हैं. पूनम ने भारत के लिए अब तक कुल 63 मैच में 89 विकेट चटकाए हैं. टीम इंडिया की ये लेग ब्रेक गेंदबाज़ अपनी गुगली गेंदों के लिए पहचानी जाती हैं. साथ ही वो गेंद को इस तरह से फ्लाइट देती हैं कि बल्लेबाज़ों के लिए मुसीबत बन जाती है.

आगरा की रहने वाली पूनम टीम इंडिया तक कैसे पहुंचीं, और उनकी ज़िंदगी से जुड़े कुछ ऐसी बातें आपको बताते हैं जो दिलचस्प हैं.

कैसे क्रिकेट बना पूनम का पहला प्यार:

क्रिकेट को लेकर पूनम का लगाव 6-7 साल की उम्र में शुरू हो गया. इस उम्र में ही उन्होंने बल्ला पकड़ना शुरू किया. खुद पूनम ने एक बार बताया था कि क्रिकेट खेलने की शुरुआत में वो लड़कों के साथ खेलती थीं. वो अपने बड़े भाई के साथ खेलने जाती थीं. वहां लड़के ही खेलते थे. उन्होंने कहा कि शुरुआत में उनकी मां ने टोका, लेकिन उन्हें अनसुना करके पूनम ने अपना खेल जारी रखा. वह लड़कों के साथ क्रिकेट ही नहीं गिल्ली-डंडा और कंचे भी खेलती थीं.

जब पूनम 10-11 साल की थीं, तब उनके साथ खेलने वाले लड़कों ने ही उन्हें क्रिकेट खेलने से रोकने की कोशिश की.  एक लड़के ने कई बार पूनम से कहा कि लड़कियां कुछ नहीं कर पाती हैं. एक बार उसने पूनम के घर पर शिकायत भी की. उसने कहा था कि आखिर क्यों वो लोग पूनम को खेलने जाने देते हैं. वहां पर कोई लड़की नहीं आती. दरअसल खेल के दौरान पूनम अक्सर उस लड़के को आउट कर देती थीं.

हालांकि बाद में चीज़ें बदल गईं. पूनम अपने भाई के साथ खेलने जाती थीं. लेकिन उनके भाई उन्हें लेकर जाना पसंद नहीं करते थे. कई बार वो उन्हें लेकर नहीं जाते, तो भाई के दोस्त कहते, ‘पूनम को खेलने लेकर आ वरना मत आना.’ पूनम के भाई से उनके दोस्तों ने कहा कि ‘ये अच्छा खेलती है, इसे खिलाओ.’

क्रिकेट में करियर बनाने के लिए अकेले ही स्टेडियम पहुंच गई:

गली क्रिकेट खेलते-खेलते क्रिकेट पूनम का पैशन बन गया. वो इसमें करियर बनाना चाहती थीं लेकिन शुरुआत में घरवाले इसके खिलाफ थे. पूनम को डर था कि वो अपने मम्मी-पापा को इस बारे में बताएंगी तो वो डांटेंगे कि पढ़ाई नहीं करती और क्रिकेट खेलना है. पूनम की दोस्तों ने उन्हें बताया था कि क्रिकेट में करियर बनाना है तो उन्हें स्टेडियम जॉइन करना चाहिए. इसलिए एक बार वह बिना गार्डियन के स्टेडियम पहुंच गईं. बाद में उनकी दो सहेलियों ने पूनम की मम्मी को उनके स्टेडियम जॉइन करने के लिए मनाया था.

एक वक्त क्रिकेट छोड़ने तक का मन बना चुकी थी पूनम:

जब पूनम ने पहली बार यूपी के लिए ट्रायल दिया तो उन्होंने बोलिंग के साथ-साथ बैटिंग में भी हाथ आज़माने का मन बनाया. लेकिन ट्रायल में उन्होंने सिंगल डिजिट में रन बनाए. उन्हें लगा कि उनसे नहीं हो पाएगा, उन्हें क्रिकेट छोड़ देना चाहिए. तब उन्होंने भगवान के नाम एक नोट लिखा,

‘मुझे क्रिकेट छोड़ देना चाहिए.’

ये नोट पूनम की भाभी ने देख लिया और पूनम के पापा को इस बारे में बताया. पापा ने पूछा कि क्या तुम क्रिकेट छोड़ना चाहती हो? तब पूनम ने कहा,

“हां पापा प्रैक्टिस कर रही थी तो कुछ हो नहीं पा रहा था, तो सोचा छोड़ दूं.”

इसके बाद पूनम के पापा ने जो उनसे कहा वही उनकी लाइफ का सबसे बड़ा मोटिवेशन बन गया. उन्होंने कहा,

“पूनम तुमने मेहनत की है, हो सकता है इसका फल एक साल में न मिले, दो साल में न मिले, तीन साल में न मिले लेकिन अगर मेहनत की है तो उसका फल चौथे साल में ज़रूर मिलेगा.”

मां, ऑफिस और रेलवे ने जमकर किया पूनम का सपोर्ट:

जिस तरह भारतीय टीम में आने से पहले एमएस धोनी रेलवे में टी.टी. का काम करते थे. उसी तरह पूनम भी टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने से पहले रेलवे के साथ जुड़ी थीं. रेलवे में काम के दौरान पूनम के ऑफिस के साथियों और उनकी मां का सबसे ज्यादा सपोर्ट रहा. वो बताती हैं कि मैच के बाद वो अक्सर किट में ही या फिर बिना धुले कपड़ों में ऑफिस पहुंच जाती थीं. लेकिन ऑफिस वालों ने उन्हें इसके लिए कभी टोका नहीं. हमेशा सपोर्ट किया.

Team India Womens
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत के साथ भारतीय क्रिकेट टीम ने टी20 विश्वकप का आगाज़ किया है. फोटो: AP

पूनम के देर रात प्रैक्टिस करके या मैच खेलकर लौटने पर पड़ोस के लोग टोकते थे. लेकिन खेल के प्रति पूनम की दीवानगी को देखते हुए उनके परिवार ने उनका पूरा सपोर्ट किया.

टीम की सबसे चुलबुली कैरेक्टर:

पूनम ने खुद ही एक बार ये कहा था कि वो टीम की सबसे चुलबुली कैरेक्टर हैं. वो मैच के दौरान भी टीम के बाकी खिलाड़ियों के साथ मस्ती-मज़ाक करती रहती हैं. जबकि टीम की एंटरटेनर के तौर पर उन्होंने कप्तान हरमनप्रीत कौर और वेदा कृष्णामूर्ति के नाम बताए थे.

अब जब खेल की इतनी बातें हो गईं तो आपको पूनम की पर्सनल लाइफ के बारे में थोड़ा बताते हैं:

पूनम हिंदी गाने सुनने की शौकीन हैं. अक्सर खाली वक्त में वो किशोर कुमार और अरिजीत सिंह के गाने सुनती और गुनगुनाती हैं.

न्यूज़ नहीं सीरियल्स की शौकीन हैं:

अक्सर सुर्खियों में रहने वाली पूनम को न्यूज़ देखना भी पसंद नहीं हैं. हालांकि वो कभी-कभी कुछ सीरियल्स ज़रूर देखती हैं. लेकिन ज्यादातर समय वो यू-ट्यूब पर अपनी गेंदबाज़ी के वीडियोज़ देखती हैं. ताकि वो अपनी गेंदबाज़ी में सुधार कर सकें.

घर में मां का हाथ भी बंटाती है पूनम:

वैसे तो पूनम का शेड्यूल इतना बिज़ी रहता है कि उन्हें घर में कुछ करने का मौका नहीं मिलता. लेकिन जब कभी वो घर में होती हैं तो मां का हाथ बंटाती हैं.

भारतीय टीम ने पूनम यादव के भरोसे विश्वकप का सफल आगाज़ कर लिया है. लेकिन अभी सफर लंबा है, और पूरा देश ये ही चाहता है कि इस बार विमेन टीम इंडिया इतिहास रचकर ही लौटे.


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