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टोक्यो ओलंपिक: सभी 127 भारतीय खिलाड़ियों से उम्मीद, लेकिन इन 7 से है ज़्यादा आस

तमाम खिलाड़ियों के बीच इन 3 से मेडल की ख़ास उम्मीद है - दीपिका कुमार, पीवी सिंधु और नीरज चोपड़ा. (फोटो- India Today)

अब से कुछ ही घंटों बाद जापान के टोक्यो शहर में खेलों का महाकुंभ शुरू हो जाएगा. मेडल का सपना लिए दुनियाभर से खिलाड़ी टोक्यो में जुटे हैं. ओलंपिक में जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए कायमाबी का सबसे ऊंचा सोपान माना जाता है. और इस प्रतिष्ठा तक पहुंचने की ओलंपिक गेम्स की भी 127 साल लंबी यात्रा रही है. साल 1896 में ग्रीस के एथेंस में आधुनिक ओलंपिक शुरू हुए थे. लेकिन तब ये खेल सिर्फ यूरोप के लिए ही महदूद थे. एथेंस ओलंपिक में सिर्फ पुरुषों ने भाग लिया था. महिलाओं को हिस्सा लेने की परमिशन ही नहीं थी. और पुरुषों में भी ज्यादतर ग्रीस थे, या फिर वो लोग थे जो ग्रीस की यात्रा पर आए थे. कमोबेश एक देश का घरेलू टूर्नामेंट सा था. शुरू होने के चार साल बाद साल 1900 में पेरिस में हुए ओलंपिक में भी कोई बड़ी तब्दीली नहीं आई थी. महिलाओं को कुछ खेलों में हिस्सा लेने की अनुमति मिली. बाकी ज्यादा कुछ नहीं बदला था. अभाव इतने थे कि तैराकी प्रतिस्पर्धा गंदी नदी में करवाई गई थी. लेकिन ओलंपिक गेम हर चार साल वाले पड़ाव से गुज़रते हुए अब 2021 तक पहुंच चुके हैं. और कल से ओलंपिक के इतिहास का एक और अध्याय लिखा जाना शुरू हो जाएगा.

ओलंपिक के आयोजन में इस बार क्या अलग हो रहा है, इसकी बात करेंगे. और बात करेंगे भारत की तरफ से इस बार मेडल की उम्मीदें किन पर टिकी हैं. लेकिन पहले ओलंपिक के कुछ बुनियादी तथ्य.

# टोक्यो ओलंपिक 23 जुलाई से शुरू हो रहा है और इसका समापन होगा 8 अगस्त को.

# आप जानते ही होगें कि ओलंपिक खेल हर चार साल में होते हैं. 2016 में ब्राज़ील के रियो में ओलंपिक गेम्स हुए थे. उसके 4 साल बाद जापान के टोक्यो में ओलंपिक होना था. लेकिन कोरोना की वजह से टालना पड़ा. अब 2021 में हो रहा है लेकिन इसका नाम ओलंपिक-2020 ही है.

ओलंपिक का नाम टोक्यो ओलंपिक है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि जापान के और शहरों में टूर्नामेंट्स का आयोजन नहीं हो सकता. कई शहरों में होगा, लेकिन मुख्य शहर है टोक्यो. टोक्यो शहर दूसरी बार ओलंपिक खेलों की मेजबानी कर रहा है. और ऐसा करने वाला एशिया का पहला शहर है. भारत में एक भी बार ओलंपिक खेल नहीं हुए.

ओलंपिक में इस बार 33 खेल शामिल  हैं. और 339 मेडल के लिए मुकाबला होगा. इस बार पांच नए खेलों को ओलंपिक में शामिल किया गया है. ये खेल हैं – सर्फिंग, स्केटबोर्डिंग, स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग, कराटे और बेसबॉल.

टोक्यो ओलंपिक के मैस्कट यानी शुभंकर को मिराइतोवा नाम दिया गया है. जापानी शब्द मिराइतोवा में मिराइ का अर्थ है भविष्य और तोवा का मतलब शाश्वत. एक जापानी कहावत से ये लिया गया है. उस जापानी का अर्थ है – अतीत से सीखकर नए विचार पैदा करिए. मिराइतोवा को जापानी सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिकता का प्रतिनिधि मान रहे हैं.

टोक्यो में जो पदक दिए जाएंगे वो कैसे बनाए हैं – इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान से. और पुराने मोबाइल फोन्स से. आयोजकों ने 2017 में ही जापान के लोगों से पुराने फोन्स और इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान दान करने की अपील की थी. 78 हजार 985 टन पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान से 5 हज़ार मेडल बनाए गए हैं. कोरोना की वजह से इस बार विजेता खिलाड़ियों को खुद ही उठाकर मेडल गले में डालने पड़ेंगे. मेडल पहनाने वाली रिवायत इस बार नहीं रखी गई है.

कोरोना की वजह से इस बार ओलंपिक में कई नए नियम हैं. खेलों में इस बार जापान से बाहर के दर्शकों को इजाज़त नहीं है. टोक्यो ओलंपिक आयोजन समिति ने आयोजन स्थल पर 10 हज़ार दर्शकों की मौजूदगी को अनुमति दी है. हालांकि जापान की सरकार ने कोरोना को देखते हुए इमरजेंसी लगा दी है.

ओलंपिक में हिस्सा लेने गए हर खिलाड़ी और उनके साथ आने वाले स्टाफ की कोरोना जांच होगी. खिलाड़ियों को रोज़ कोरोना जांच कराई जाएगी. खिलाड़ियों को स्थानीय आबादी से घुलने-मिलने की इजाजत नहीं है.

23 जुलाई से ओलंपिक शुरू हैं. तस्वीर टोक्यो की है. (फोटो- PTI)

अब भारत के हिस्से पर आते हैं. भारत की तरफ से टोक्यो ओलंपिक में 127 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं. भारत के लिहाज से ये अब तक का हाइएस्ट नंबर है. इससे पहले भारत की तरफ से खिलाड़ियों का इतना बड़ा दल किसी ओलंपिक में शामिल नहीं हुआ. सभी खिलाड़ियों से मेडल की उम्मीद है, लेकिन हम प्रबल दावेदारों की थोड़ी सी चर्चा कर लेते हैं.

बजरंग पूनिया

ओलंपिक खेलों में भारत को हॉकी के बाद सबसे ज़्यादा मेडल कुश्ती में मिले हैं. आज़ाद भारत में पहली बार 1952 के ओलंपिक खेलों में केडी जाधव के ब्रॉन्ज़ जीतने के साथ सिलसिला शुरू हुआ था. अब तक कुश्ती में भारत ने 5 मेडल जीते हैं. इस बार भी टोक्यो ओलंपिक की टैली में कुश्ती से भारत को बड़ी उम्मीदें हैं. भारत के 8 पहलवान टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेने गए हैं. यानी अब तक पहलवानों का सबसे बड़ा दल. बाकी पहलवानों के साथ ही बजरंग पूनिया मेडल के मजबूत दावेदार हैं. बजरंग वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में तीन मेडल्स जीतने वाले इकलौते भारतीय हैं. पिछले तीन साल में हर बड़े टूर्नामेंट में बजरंग ने मेडल जीता है. इसमें 2018 के एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और 2018-2019 की वर्ल्ड चैंपियनशिप के सिल्वर और ब्रॉन्ज़ मेडल्स शामिल हैं. टोक्यो ओलंपिक के लिए बजरंग को दूसरी रैंकिंग मिली है. बजरंग बड़े स्टेज पर हर बार अपना बेस्ट देते हैं. और इस बार भी उनसे बेस्ट की उम्मीद है.

ट्रेनिंग सेशन के दौरान बजरंग पूनिया. (फाइल फोटो- PTI)

विनेश फोगाट

महिला कुश्ती में भारत के लिए गोल्ड की उम्मीद. विनेश 53 किलो वर्ग में खेलती हैं. 2016 ओलंपिक में वो 48 किलो वर्ग में थीं. रियो ओलंपिक में क्वार्टर फाइनल में उनके घुटने में चोट आई थी. जिसके बाद लंबे वक्त तक वो अखाड़े से दूर रहीं. 2017 में एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर जीतकर वापसी की. साल 2018 में वह एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला रेसलर भी बन गईं. विनेश ने 2014 और 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडल भी जीते हैं. विनेश ने 2019 तक आते-आते 53किलो कैटेगरी में ही खेलने का फैसला किया. साल 2019 से अब तक विनेश ने वर्ल्ड चैंपियनशिप समेत कई सारे मेडल अपने नाम किए हैं. तो हरियाणा की छोरी विनेश के हालिया प्रदर्शन को देखते हुए उनके हिस्से का मेडल भी भारत के खाते में जोड़ा जा रहा है.

विनेश फोगाट से मेडल की बड़ी आस है. (फोटो- India Today)

मीराबाई चानू

वेटलिफ्टिंग में भारत के लिए मेडल की उम्मीद. मीराबाई चानू मणिपुर की राजधानी इम्फाल से 20 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी गांव में पली बढ़ी हैं. बचपन में तीरंदाज बनने का सपना था. लेकिन फिर कक्षा आठ की किताब में मणिपुर की वेटलिफ्टर कुंजरानी देवी के बारे में पढ़ा तो इरादा बदल गया. कक्षा आठ में ही तय हो गया कि वजन उठाकर ही मेडल लाने हैं. 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स की सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता. इन कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई ने कुल 196 किलो वजन उठाया. स्नैच में 86 जबकि क्लीन एंड जर्क में 110 किलो. यह उनका पर्सनल बेस्ट भी था. साल 2021 के अप्रैल महीने में मीराबाई ने ताशकंद में हुई एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.

मीराबाई ने रैंकिंग के आधार पर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई किया है. वो अभी वर्ल्ड रैंकिंग में दूसरे नंबर पर हैं. मीराबाई इस साल के बेस्ट वेटलिफ्टर्स में से एक हैं. इस साल सिर्फ चाइनीज वेटलिफ्टर्स ही उनसे ज्यादा वजन उठा पाई हैं. तो टोक्यो में भारत का एक मेडल मीराबाई चानू के हिस्से का भी गिना जा रहा है.

दीपिका कुमारी

झारखंड की राजधानी रांची से आने वाली दीपिका. पिता ऑटो रिक्शा चलाते हैं और मां नर्स हैं. घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी. सुविधाओं के अभाव से लड़ते हुए दीपिका जब 12 साल की हुईं तो इन्हें किसी ने तीरंदाज़ी के बारे में बताया. और उस अकेडमी के बारे में भी, जहां खाना और कपड़े भी फ्री मिलते थे. लेकिन पिता उसे अकेडमी लेकर गए तो कोच ने दाखिले से मना कर दिया, क्योंकि शुरू में दीपिका दुबली-पतली थीं. जैसे-तैसे दीपिका को अकेडमी में एडमिशन मिल गया. 12 की उम्र में दीपिका ने धनुष उठाया और उसके 4 साल बाद सिर्फ 16 की उम्र में कॉमनवेल्थ चैंपियन बनीं. 18 साल की उम्र में वर्ल्ड नंबर वन तीरंजदाज़ बन गईं.  वर्ल्ड कप, वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स. आप नाम लीजिए, दीपिका उस इवेंट में जीता हुआ मेडल दिखा देंगी. बस एक कसक रही ओलंपिक में. दीपिका ओलंपिक्स में कभी मेडल नहीं जीत पाईं. 2012 लंदन ओलंपिक में पहले ही राउंड में हार गईं. 2016 के रियो ओलंपिक में उन्हें अंतिम-16 में हार मिली. उम्मीद लगाई जा रही है कि ओलंपिक वाली कमी दीपिका इस बार पूरी कर देंगी.

पीवी सिंधु

बैडमिंटन में भारत के लिए मेडल की सबसे बड़ी उम्मीद सिंधु हैं. पीवी सिंधु इस दौर में भारत की बेहतरीन खिलाड़ी हैं. अपने एक दशक के करियर में सिंधु ने लगभग हर उस इवेंट में मेडल जीता है, जहां भारत के लिए सालों से सूखा ही चला आ रहा था. फिर चाहे वो ओलंपिक्स हो, वर्ल्ड चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स, एशियन चैंपियनशिप, उबर कप… यानी बैडमिंटन का लगभग हर बड़ा टूर्नामेंट. पीवी सिंधु वर्ल्ड चैंपियनशिप में पांच मेडल जीतने वाली पहली भारतीय और विश्व की सिर्फ दूसरी महिला हैं. वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिंधु के नाम एक गोल्ड, दो सिल्वर और दो ब्रॉन्ज़ मेडल्स हैं.

साल 2016 रियो ओलंपिक्स के फाइनल में सिंधु गोल्ड से चूक गई थी. रियो में हारने के बाद सिंधु कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स जैसे और टूर्नामेंट्स में भी हारती गईं. 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर उन्होंने वापसी की. इस साल सिंधु ने अपने 62.5 परसेंट मैच जीते हैं. और वो वर्ल्ड चैंपियन की हैसियत से ओलंपिक्स में गई हैं. उनसे गोल्ड की भारत को पूरी उम्मीद है.

अमित पंघाल

बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल के प्रबल दावेदार. हरियाणा के रोहतक ज़िले से आते हैं. कद सिर्फ 5 फुट 2 इंच, लेकिन बॉक्सिंग रिंग में इनकी फुर्ति और चालाकी ग़जब की है. ओलंपिक में गए सभी भारतीय बॉक्सर्स में से पंघाल का हालिया रिकॉर्ड सबसे अच्छा है. उन्होंने साल 2019 से अब तक कई इंटरनेशनल इवेंट्स में मेडल्स जीते हैं. 2019 में वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप का फाइनल खेला था. फाइनल में उज़्बेकिस्तान के बॉक्सर शाखोबिदिन ज़ोरोव से हार गए तो सिल्वर मेडल मिला. और इस तरह से अमित पंघाल बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बॉक्सर बने. पंघाल ने दिसंबर 2020 में बॉक्सिंग वर्ल्ड कप का गोल्ड मेडल भी जीता था. 52Kg कैटेगरी में दुनिया के नंबर एक बॉक्सर हैं. इसके साथ ही उन्हें टोक्यो ओलंपिक के लिए भी नंबर वन की रैंकिंग मिली है. पंघाल इन ओलंपिक्स गेम्स में रैंकिंग पाने वाले इकलौते भारतीय पुरुष बॉक्सर हैं.

ट्रेनिंग सेशन के दौरान अमित पंघाल (दाएं). (फाइल फोटो- PTI)

नीरज चोपड़ा

भाला फेंक यानी जैवलिन थ्रो में भारत के लिए मेडल के दावेदार. नीरज वर्ल्ड रैंकिंग में 16वें नंबर पर हैं. उन्होंने 87.86 मीटर तक भाला फेंककर ओलंपिक का टिकट हासिल किया है. लगातार 80 मीटर से ज्यादा दूर तक भाला फेंक रहे नीरज इस ओलंपिक में भारत के लिए मेडल की बड़ी उम्मीद हैं.

यहां सारे 127 खिलाड़ियों का जिक्र करना संभव नहीं है. इसलिए हमने कुछ ही खिलाड़ियों की बात की है. इनके अलावा जो खिलाड़ी भारत की तरफ से गए हैं उनसे भी मेडल की उतनी ही उम्मीदें हैं. ओलंपिक में भारत ने अब तक 28 मेडल जीते हैं. इनमें 9 गोल्ड हैं, 7 सिल्वर और 12 ब्रॉन्ज़ मेडल हैं. भारत ने सबसे ज्यादा 11 मेडल हॉकी में जीते हैं. इनमें 8 गोल्ड शामिल हैं. अब हॉकी में भारत का वो दबदबा नहीं रहा. 2008 के बाद से गोल्ड मेडल भी भारत नहीं आया है.  पिछले ओलंपिक में भारत को सिर्फ सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़ मेडल मिला था. उम्मीद है इस बार हमारे खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करेंगे. खूब सारे मेडल लाएंगे. तिरंगा का मान ऊंचा करेंगे. हम सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हैं.

पीवी सिंधु का इस बार ओलिंपिक में गोल्ड पक्का है?

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