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इस वायरोलॉजिस्ट की बातों पर मोदी सरकार अमल कर ले तो कोरोना से निपटना आसान हो जाए!

देश इन दिनों कोरोना की बेरहम मार झेल रहा है. इस संकट से बाहर आने के लिए भारत को क्या-क्या करने की जरूरत है, देश के नामी वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर शाहिद जमील (Shahid Jameel) ने बताया है. शाहिद जमील सरकार की ओर से बनाए उस खास सलाहकार ग्रुप के सदस्य हैं, जिनके ऊपर वायरस के जीनोम स्ट्रक्चर की पहचान करने की जिम्मेदारी है. अशोका यूनिवर्सिटी में त्रिवेदी स्कूल ऑफ बायोसाइंस के डायरेक्टर जमील ने अमेरिका के मशहूर अखबार न्यू यॉर्क टाइम्स में लेख लिखा है. उन्होंने तफ्सील से समझाया है कि भारत किस तरह से इस संकट से निकल सकता है. उन्होंने मोदी सरकार को सलाह दी है कि वो वैज्ञानिकों की बात सुने. पॉलिसी बनाने में अड़ियल रवैया छोड़ें. डॉ. जमील ने लेख में और क्या-क्या लिखा है, आइए जानते हैं.

‘भारत में कई तरह के कोरोना वैरिएंट’

शाहिद जमील ने कोरोना के संक्रामक वैरिएंट की तरफ ध्यान दिलाया और लिखा कि एक वायरोलॉजिस्ट के तौर पर मैं पिछले साल से ही संक्रमण और वैक्सीनेशन पर नजर बनाए हुए हूं. मेरा ऑब्जर्वेशन है कि कई वैरिएंट्स फैल रहे हैं. ये कोरोना की अगली लहर के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं. उन्होंने कहा है-

भारत में वायरस नए साल के आसपास म्यूटेंट हुआ, तेजी से फैला. इस वायरस ने पहले से मिली इम्यूनिटी को भी छका दिया. सीक्वेंसिंग का डेटा बताता है कि जिस वैरिएंट ने कोरोना की दूसरी लहर को ताकत दी है, वो B.1.617 है. यह भारत में पहली बार दिसंबर 2020 में पाया गया था. भीड़ भरे कार्यक्रमों की वजह से ये फैल गया. भारत में सबसे ज्यादा संक्रमण इसी वैरियंट का है.

WHO भी B.1.617 वैरिएंट को लेकर चिंता जता चुका है. जब इस वैरिएंट को बीमारी के एक भरोसेमंद हैमस्टर मॉडल पर टेस्ट किया गया तो दिखा कि ये मूल वायरस के B.1 वैरिएंट के मुकाबले ज्यादा वायरस पैदा करता है. फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है. दुनियाभर का डेटा दिखाता है कि वैरिएंट B.1.617 तीन अलग तरह के वायरस में बंट गया है.

9 मई को ब्रिटेन और भारत के वैज्ञानिकों की प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के अस्पतालों में वैक्सीन लगने के बाद संक्रमित हुए लोगों में B.1.617.2 नाम का वैरिएंट भी पाया गया है. 10 मई को अमेरिकी शोधकर्ताओं ने पाया कि B.1.617.1 नाम के वैरिएंट से सीरम, फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन के जरिए निपटा जा सकता है. 

ये वैरिएंट भारत में ऐसी बड़ी आबादी में पनप रहे हैं, जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी है. ऐसे में पब्लिक हेल्थ से जुड़े एक्सपर्ट्स ये पता लगाने में जुटे हैं कि सेकेंड वेव का पीक कब आएगा, और ये कब खत्म होगी.

Corona Virus Second Wave Covid Instructions Guidelines Remdesivir
डॉक्टर जमील ने लिखा है कि बिना वैक्सीन ली हुई भारत की बड़ी जनसंख्या में कोरोना वायरस घूम रहा है. फोटो – पीटीआई

‘कब आएगा पीक, अलग-अलग अनुमान’

शाहिद जमील ने बताया कि भारत सरकार के मॉडल और दुनिया के दूसरे मॉडल कोरोना की दूसरी लहर के पीक को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं. दोनों के डेटा में काफी फर्क है. उन्होंने लिखा है-

दूसरी लहर के पीक के अनुमानों में बहुत अंतर दिख रहा है. भारत सरकार जिस सुपरमॉडल ग्रुप को प्राथमिकता देती है, उसके अनुसार मई के पहले हफ्ते में 3,80,000 केसों के साथ पीक आ चुका है. भारत के साइंटिस्ट्स का दूसरा सिम्युलेशन मॉडल कहता है कि पीक मई के मध्य तक आएगा. उसकी भविष्यवाणी है कि पीक पर पहुंचने के बाद रोज 5 से 6 लाख कोरोना संक्रमित आएंगे.

यूनिवर्सिटी ऑफ मिशीगन के COV-IND-19 स्टडी ग्रुप का आकलन कहता है कि पीक मई के मध्य तक आएगा, लेकिन एक दिन में मरीजों की संख्या 8 से 10 लाख तक हो सकती है. सभी मॉडल बता रहे हैं कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर जुलाई-अगस्त तक खत्म होगी. तब तक 3.5 करोड़ कंफर्म केस आ चुके होंगे. 50 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके होंगे.

तीसरी लहर की भयावहता कई बातों पर निर्भर करेगी. इनमें शामिल हैं – कितने लोगों को वैक्सीन लगती है, वायरस के कितने नए वैरिएंट्स मिलते हैं, भारत में शादियों और त्योहारों जैसे कितने सुपर स्प्रेडर कार्यक्रम होते हैं.

मेरी चिंता यह है कि हम इस बात का सटीक अंदाजा नहीं लगा पाएंगे कि असल में अधिकतम कितने केस आ सकते हैं. डाटा दिखा रहा है कि जिस रफ्तार से केस बढ़ रहे हैं, उतनी रफ्तार से टेस्टिंग नहीं बढ़ रही है. इस तरह से कुछ दिनों में कोरोना संक्रमण के नंबर स्थिर हो जाएंगे. इसका कारण यह नहीं होगा कि केस कम हो रहे हैं बल्कि यह होगा कि टेस्टिंग कम हो गई है.

भारत का टेस्ट पॉजिटिविटी रेट, मतलब टेस्ट किए गए कुल लोगों में से पॉजिटिव आने की दर 22 फीसदी से ऊपर है. लेकिन कुछ राज्यों में हालात चिंताजनक हैं. मिसाल के तौर पर गोवा में 46.3 फीसदी पॉजिटिविटी रेट है. उत्तराखंड जहां कुंभ मेला लगा था, वहां पॉजिटिविटी रेट 36.5 है. 

Coronavirus Hospital
कोरोना पीक पर कब पहुंचेगा इसे लेकर भी डॉक्टर जमील ने अनिश्चितता जताई है. (तस्वीर: एपी)

‘वैक्सीन ड्राइव लड़खड़ा गई’

डॉ. जमील ने भारत में वैक्सीनेशन की तैयारी और उसमें आने वाले अड़ंगे पर भी बात की. उन्होंने वैक्सीनेशन के धीमे पड़ने को चिंताजनक बताते हुए लिखा-

वैक्सीन पब्लिक हेल्थ का सबसे असरदार औजार बना रहेगा. देखने में आया है कि तेजी से वैक्सीनेट करने पर कोरोना के संक्रमण को रोका जा सकता है. भारत ने अपनी वैक्सीनेशन ड्राइव जनवरी के मध्य में शुरू की. शुरुआत में 3 करोड़ हेल्थकेयर वर्कर, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 60 साल या 45 साल से ऊपर के गंभीर बीमारी वाले लोगों को वैक्सीनेट करने का प्लान समझदारी भरा था. पूरे भारत को 40 फीसदी वैक्सीन सप्लाई करने वाली सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक कंपनियां ऐसा कर दिखाने में पूरी तरह सक्षम थीं.

लेकिन मार्च के मध्य में सिर्फ 1.5 करोड़ डोज़ ही डिलीवर हुईं. इससे सिर्फ 1 फीसदी जनसंख्या को ही वैक्सीनेट किया जा सकता था. वैक्सीनेशन की ड्राइव भारतीय नेतृत्व के उस मेसेज से लड़खड़ा गई, जिसमें कहा गया था कि भारत ने कोरोना पर विजय पा ली है. इसके अलावा, यूरोप से एस्ट्राजेनेका वैक्सीन से खून के थक्के जमने की खबर ने भी रुकावट पैदा की. एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन भारत में कोविशील्ड के नाम से दी जा रही है. 

ऐसे में जब दूसरी वेव आई, तब सिर्फ 3.3 करोड़ लोगों को ही वैक्सीन की पहली डोज़ मिल पाई थी. यह कुल जनसंख्या का सिर्फ 2.4 फीसदी था. सिर्फ 70 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज़ दी जा सकी थीं. 1 मई को 18 साल से ऊपर वालों के लिए वैक्सीनेशन शुरू करने की घोषणा कर दी गई. लेकिन कई राज्यों ने वैक्सीन की कमी बताते हुए हाथ खड़े कर दिए. इससे वैक्सीनेशन धीमा पड़ गया. लोकल सप्लाई के स्थिर होने में जुलाई तक का वक्त लगेगा.

भारत में वैक्सीन की बहुत कम पहुंच कोरोना संक्रमण और मौत की वर्तमान लहर को रिवर्स नहीं कर सकती. कोरोना की वैक्सीन बीमारी को कम कर सकती है, लेकिन यह इंफेक्शन को रोक नहीं सकती. खासतौर पर तब, जब इंफेक्शन रेट बहुत ज्यादा हो, जैसा कि इस वक्त है. हालांकि ये कहने के लिए डाटा कम है, लेकिन वैक्सीन लगवाने वालों में हुए संक्रमण में वायरस के उस वैरिएंट की भूमिका हो सकती है, जो बच निकला है.

Vaccine
डॉक्टर जमील के अनुसार भारत ने शुरुआत में तो वैक्सीनेशन का बेहतरीन प्लान बनाया लेकिन वह लड़खड़ा गया.

‘टेस्टिंग और ट्रेसिंग के साथ वैक्सीनेशन सेंटर बढ़ाएं’

जमील ने कहा है कि भारत को अभी युद्धस्तर पर टेस्टिंग और ट्रेसिंग करनी चाहिए. इसके साथ ही वैक्सीनेशन के ज्यादा सेंटर खोलने चाहिए. शाहिद लिखते हैं-

अभी सबसे जरूरी है कि टेस्टिंग को बढ़ाया जाए. जिन्हें इंफेक्शन हुआ है, उन्हें आइसोलेट किया जाए. कई राज्यों में लॉकडाउन की स्थिति है. इससे कोरोना संक्रमण का कर्व ऊपर जाने से रुकेगा. इससे हेल्थकेयर सुविधाओं और सप्लाई को जुटाने का वक्त मिलेगा. तेजी से चिकित्सकीय संसाधन बढ़ाने से भी जान बचाने में मदद मिलेगी. भारत को चाहिए कि हॉस्पिटल बेड बढ़ाने के लिए अस्थायी अस्पताल बनाएं. रिटायर हो चुके डॉक्टरों और नर्सों को जुटाएं. ऑक्सीजन और जरूरी दवाओं की सप्लाई चेन सुधारें.

भारत धीमी वैक्सीनेशन को सहन नहीं कर सकता. ये समय भारी संख्या में वैक्सीनेट करने का है. रोज 70 लाख से 1 करोड़ लोगों को वैक्सीनेट करने का लक्ष्य रखना होगा. इसके लिए न सिर्फ वैक्सीन की सप्लाई बढ़ाई पड़ेगी, बल्कि वैक्सीन देने के डिलीवरी पॉइंट्स भी बढ़ाने होंगे. अभी भारत में सिर्फ 50 हजार साइट्स हैं, जहां वैक्सीन ली जा सकती है. हमें इससे बहुत ज्यादा की जरूरत है. चूंकि अभी इनमें सिर्फ 3 फीसदी ही प्राइवेट हैं, उन्हें बढ़ाए जाने की बहुत गुंजाइश है.

Coronavirus
वायरोलॉजिस्ट जमील ने ज़ोर देकर कहा कि टेस्टिंग और आइसोलेशन को मुस्तैद किया जाए. (तस्वीर: पीटीआई)

‘वैज्ञानिक अड़ियल रवैया झेल रहे हैं’

डॉ. जमील ने भारत में पॉलिसी बनाने के तरीके पर भी सवाल उठाए. उनका आरोप है कि वैज्ञानिकों की डाटा आधारित बातें नहीं सुनी जाती. उन्होंने पीएम मोदी से वैज्ञानिकों को डाटा उपलब्ध कराने की भी गुहार लगाई. उन्होंने लिखा-

कोरोना से लड़ने के सभी उपायों का हमारे साथी वैज्ञानिकों ने बहुत सहयोग किया है. लेकिन उन्हें साक्ष्य आधारित नीति निर्माण को लेकर बहुत अड़ियल प्रतिरोध झेलना पड़ रहा है. 30 अप्रैल को भारत के वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री से अपीलकी थी कि उन्हें डाटा उपलब्ध कराया जाए, ताकि वो आगे की स्टडी, अनुमान और इस वायरस से निपटने के उपाय बता सकें. भारत में जब से महामारी बेकाबू हुई है, डाटा के आधार पर फैसला लेना भी इसकी बलि चढ़ गया है. हम इसके लिए जो मानवीय कीमत अदा कर रहे हैं, वह स्थायी निशान छोड़ जाएगा.


वीडियो – ऑक्सीजन के बाद अब पीएम केयर्स से आए वेंटीलेटर और वैक्सीन की कमी पर घिरी मोदी सरकार

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