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कोई कहे कि हमने पाकिस्तान में घुसकर मारा है, तो उस पर यकीन मत करना

‘हमने पाकिस्तान में घुसकर ठोंका है!’

‘पाकिस्तान को उसके घर में घुसकर मारा है!’

इस वक्त भारतीय न्यूजकमरों में एंकरों की ये आवाजें गूंज रही हैं. लेकिन ये बात भ्रामक है. जो ऐसा कह रहे है, वो अतिउत्साह में एक भयंकर भूल कर रहे हैं.

कल रात इंडियन आर्मी ने एलओसी के पार जाकर आतंकी कैंपों पर हमला किया और उन्हें बड़ा नुकसान पहुंचाया. हम कह रहे हैं कि हमने घुसपैठ की फिराक में बैठे आतंकी मार गिराए. पाकिस्तान कह रहा है कि उसकी आर्मी पर हमला किया गया, जिसमें उसके दो सैनिक मारे गए और 9 जख्मी हो गए.

लेकिन माफ कीजिएगा, हमने पाकिस्तान में घुसकर नहीं मारा. हमने LOC के पार जाकर मारा है, लेकिन हमारा यानी भारत का ये स्टैंड है कि वो इलाका हमारा ही है.

फिर भी जमीन पर हालात ये हैं कि कश्मीर का 65 परसेंट हमारे पास है और 35 परसेंट पर पाकिस्तान का अनधिकृत कब्जा है. जहां भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक किया, वो इलाके हैं भीमबर और केल. ये दोनों जगहें उस जमीन पर हैं, जिस पर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है, जिसे हम पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) कहते हैं. पाकिस्तान इसे ‘आजाद कश्मीर’ कहता है. खुशी के मारे PoK को पाकिस्तान कह देना, इस बात की स्वीकारोक्ति है कि PoK पाकिस्तान का ही है. जबकि हम ऐसा नहीं मानते. हर मोर्चे पर हम इसे अपना ही इलाका मानते हैं.

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ये कूटनीतिक और संवेदनशील मामले हैं. इसलिए शब्दों को बरतना जरूरी है. हम इसे एलओसी के पार जाकर किया गया हमला कह सकते हैं. PoK में घुसकर मारना भी कह सकते हैं. लेकिन पाकिस्तान में घुसकर मारा है, ऐसा कहना भारतीय नजरिये से गलत है. इसी PoK के एक हिस्से (शक्सगम घाटी) को पाकिस्तान ने चीन को गिफ्ट कर दिया है.

 

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जम्मू-कश्मीर का इतिहास ब्रिटिश इंडिया के इतिहास से अलग है 

1. 1846 में ये स्टेट अस्तित्व में आया. उसके पहले जम्मू का एरिया सिख साम्राज्य का हिस्सा था. महाराजा रणजीत सिंह की सिख सेना के सिपाही गुलाब सिंह को 1822 में जम्मू का राजा बनाया गया. कश्मीर घाटी के लिए अलग गवर्नर था. गुलाब सिंह ने उनसे लड़ाई की. 1821 में गुलाब सिंह ने राजौरी और किश्तवाड़ पर कब्ज़ा कर लिया. 1835 में सुरु और कारगिल. 1834-40 में लद्दाख. 1840 में बालटिस्तान पर कब्ज़ा कर लिया.

2. 1846 में अंग्रेज और सिखों के बीच पहली लड़ाई हुई. उसके पहले तक रणजीत सिंह की चतुराई से लड़ाई होती नहीं थी. गुलाब सिंह अंग्रेजों के साथ मिल गए. सिख हार गए. गुलाब सिंह को स्वतंत्र महाराजा बना दिया गया. फिर कुछ दिन के बाद इनाम में गुलाब को कश्मीर भी मिल गया. उसके बाद गुलाब सिंह जम्मू-कश्मीर दोनों का महाराजा बन गया. और उसके वंश को डोगरा वंश कहा गया.

3. 1856 में गुलाब के बेटे रणबीर सिंह राजा बने. उसने 1857 की लड़ाई में अंग्रेजों का ही साथ दिया. फिर उसने 1857 में गिलगिट को भी अपने राज में मिला लिया.

4. उसके बाद प्रताप सिंह राजा बना 1885–1925 तक. फिर 1925 से महाराजा हरि सिंह रजा बने जो 1952 तक रहे.

5. जम्मू और कश्मीर कभी भी ब्रिटिश राज में नहीं आया. उन्होंने कभी कोशिश भी नहीं की. स्वतंत्रता के समय जम्मू-कश्मीर में महाराजा हरि सिंह का शासन था. 1946 में जब एक कश्मीरी पंडित नेहरू अपने लोगों के साथ वहां गए तो कोहाला ब्रिज पर हरि सिंह ने उनको अरेस्ट करवा लिया था. फिर पार्टिशन के समय हरि सिंह को ये आप्शन दिया गया कि चाहे तो भारत या पाकिस्तान के साथ जा सकते हैं. चाहे तो अलग देश बना सकते हैं. हरी सिंह ने अलग देश बनाना कबूल किया.

6. 15अगस्त 1947 को भारत आज़ाद हुआ. उस समय जम्मू-कश्मीर भारत का अंग नहीं था. उसके बाद अगस्त में कबायलियों के साथ मिलकर पाकिस्तान ने इन पर हमला कर दिया . ये लोग लूट-पाट करते हुए श्रीनगर तक आ गए.

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7.तब महाराजा हरि सिंह ने लार्ड माउंटबेटन को चिट्ठी लिखी कि पठान हमलावर मेरे दरवाजे पर आ गए हैं. माउंटबेटन ने जवाब दिया कि ठीक है. पर जब मामला सेटल हो जाये तब लोगों से पूछकर ये तय किया जायेगा कि कश्मीर इंडिया या पाकिस्तान किसके साथ जायेगा. और माउंटबेटन की यही बात भारत-पाक झंझट की वजह बनी.

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8. फिर हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को भारत के साथ इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन पर साइन किया. जम्मू-कश्मीर में 26 अक्टूबर का दिन छुट्टी का दिन होता है. इसी की याद में. वहीं कश्मीरी अलगाववादी इसे काले दिन के रूप में मानकर मातम मनाते हैं.

9. उस वक़्त के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू इस मुद्दे को यूएन में ले गए. क्योंकि उस वक़्त राजनीति के आदर्श यही कहते थे. 1948 में यूएन ने इंडिया-पाक के बीच बात करते हुए कहा कि यहां जनमत संग्रह होना चाहिए. पर ये हो नहीं पाया. इसके बदले दोनों देशों में झंझट और बढ़ गयी. 1 जनवरी 1949 को सीजफायर का ऐलान हुआ. मतलब गोली नहीं चलेगी. बहुत लोग ऐसा मानते हैं कि नेहरू अगर इस मुद्दे को यूएन नहीं ले जाते तो भारत कश्मीर रख चुका होता. ये एरिया बहुत ज्यादा फायदे वाला नहीं है. पर दोनों देशों के लिए ये अब इज्जत का मसला है.

10. वहीं पाकिस्तान ने 1963 में चीन के साथ एग्रीमेंट कर नार्थ कश्मीर(गिलगिट-बालटिस्तान) और लद्दाख का एक हिस्सा उनको दे दिया. इसी रास्ते से चीन पाकिस्तान में रोड बना रहा है. इसी से इंडिया को खतरा है.

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11. 1970 के दशक में दोनों तरफ एटम बम की तैयारी हो गई. उसके बाद मामला और जटिल हो गया. 3 जुलाई 1972 को शिमला एग्रीमेंट हुआ जिसमें लाइन ऑफ़ कंट्रोल तय कर लिया गया. वही बॉर्डर तब से चल रहा है.

12. 1988 में पाकिस्तान ने तय किया कि अब डायरेक्ट लड़ाई करके कश्मीर तो ले नहीं पाएंगे. तो अब इंडिया को हज़ार जगह से कट लायेंगे. इसलिए आतंकवादियों को ट्रेनिंग देने की शुरुआत हुई. एक समय कश्मीर में कश्मीरी पंडित, तिब्बती, बौद्ध, सुन्नी मुस्लिम, शिया मुस्लिम, सिख सब रहते थे. पर धीरे-धीरे इस कल्चर को तोड़ दिया गया.

13. इंडिया के पास कश्मीर का 65% हिस्सा है. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद है. पाकिस्तान अधिकृत ये एरिया अपने आप को स्वतंत्र देश कहता है पर इसको पाकिस्तान के कंट्रोल में ही माना जाता है. क्योंकि यही सच्चाई है. हालांकि भारत इस कब्जे को अवैध मानता है. मसूद खान इसके प्रेसिडेंट और फारुख हैदर खान इसके प्रधानमंत्री हैं. इस इलाके में पाकिस्तान के किसी भी इलाके से ज्यादा साक्षरता दर है.


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