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'हारे' हुए मैच के बीच राहुल द्रविड़ ने दीपक चाहर को क्या संदेसा भिजवाया?

IPL 2019 की एमएस धोनी की एक तस्वीर यादों में हैं. धोनी मैदान पर गुस्से में खड़े हैं. उनके साथ सुरेश रैना हैं और गुस्से का शिकार बन रहे हैं CSK के तेज़ गेंदबाज़ दीपक चाहर. वही दीपक चाहर जिन्होंने श्रीलंका में जाकर इतिहास रच दिया है. भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए दूसरे वनडे में दीपक चाहर ने भारत को हार के मुंह से जीत दिलाई और श्रीलंका के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज़ में भी जीत दिला दी.

दीपक चाहर ने नंबर आठ पर बैटिंग करते हुए 82 गेंदों में 69 रनों की नॉट-आउट पारी खेली और मैच पलट दिया. टीम इंडिया की इस शानदार जीत के बाद दीपक चाहर ने क्या कुछ कहा पहले ये जानिए.

”बहुत ज़्यादा गर्मी थी. हमने अच्छी गेंदबाज़ी की और उन्हें 270 पर रोक लिया. इस विकेट पर चेज़ करने के लिए ये ठीकठाक स्कोर था. मेरे दिमाग में बस एक ही बात चल रही थी कि मैं इस तरह की पारी खेल सकता हूं. देश के लिए मैच जीतने का इससे बेहतर तरीका नहीं हो सकता.

राहुल सर ने मुझे सभी गेंदें खेलने को कहा था. मैंने भारत ए के लिए भी ऐसी कुछ पारियां खेली हैं, मुझे लगता है कि उनका मुझपर विश्वास है. उन्होंने मुझसे कहा है कि उन्हें लगता है कि मैं नंबर 7 का प्लेयर बन सकता हूं.

उम्मीद है कि आने वाले मैचों में मुझे बल्लेबाजी नहीं करनी पड़ेगी. जब लक्ष्य 50 रनों से कम का रह गया तो हमें लगने लगा कि हम जीत सकते हैं.”

राहुल द्रविड़ का विश्वास. ये बड़ा शब्द है. लेकिन विश्वास एक दिन में नहीं बनता. ये विश्वास बना है चाहर की मेहनत से. क्योंकि भारतीय टीम के स्टार ऑल-राउंडर दीपक चाहर का इंडियन टीम तक का सफर इतना आसान नहीं था.

ग्रेग चैपल को नहीं पसंद आए थे चाहर:

बात 2008 की है. राजस्थान क्रिकेट असोसिएशन ट्रायल ले रहा था. प्रदेश के कायदे वाले क्रिकेटरों को छांटने के लिए. एक से एक धाकड़ लड़के आए थे. दे बॉलिंग, दे बैटिंग करे पड़े थे. इन्हीं में एक दीपक चाहर भी आजमाइश कर रहे थे. उम्र थी 16 साल. ट्रायल दिया. कई गेंदें डालीं पर वहां खड़े मास्टर साहब को मजा नहीं आ रहा था. ये मास्टर साहब थे ग्रेग चैपल. भारतीय टीम का खून चूसने वाले ग्रेग चैपल. महाशय उस वक्त राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन अकेडमी के डायरेक्टर थे. पर चैपल साहब की खून चुसनी यहां भी लगी थी. शिकार बना ये 16 साल का खिलाड़ी. दीपक को रिजेक्ट कर दिया गया. टॉप 50 में भी नहीं चुना गया. दीपक को लगा कि वो अच्छा खेल रहा है. और लड़कों से ज्यादा अच्छी कद-काठी है. तो उसने सोचा चैपल से पूछ तो लिया ही जाए कि मुझमें क्या कमी है. जवाब मिला –

मुझे नहीं लगता कि आप हायर लेवल तक क्रिकेट खेल सकते हैं. आपमें क्रिकेटरों वाली बात नहीं है.

सौरव गांगुली के साथ ग्रेग चैपल का पंगा दुनिया जानती है.
सौरव गांगुली के साथ ग्रेग चैपल का पंगा दुनिया जानती है.

इससे कड़वी बात दीपक ने पहले कभी नहीं सुनी थी. आंखों में आंसू थे पर उन्होंने खुद को संभाला. खून का घूंट पीकर वहां से लौट गए. लौटे इसलिए ताकि वापस आ सके. जवाब दे सके. और जवाब दिया. दो साल बाद. सिर्फ चैपल को ही नहीं. पूरी दुनिया को. हर उस आदमी को जिसने उसे नकारा था. कैसे, जान लीजिए –

बात 2010 की है. महीना नवंबर का. दीपक अब 18 साल के हो चुके थे. जिन्हें क्रिकेटर न बन पाने की तोहमत मिली थी वो अब राजस्थान की रणजी टीम का हिस्सा बन चुके थे. पहला मैच खेलने जा रहे थे. स्टार बनने जा रहे थे. हैदराबाद के खिलाफ खेले गए इस मैच में दीपक ने 8 विकेट चटकाए. मात्र 7.3 ओवर में. रन दिए खाली 10. उसमें भी 2 ओवर मैडन. हैदराबाद की लंका लग गई थी. पूरी टीम 21 रनों के स्कोर पर पवेलियन लौट चुकी थी. 78 मिनट भी नहीं लगे थे इस घटना के घटने में. इतिहास बनने में. ये रणजी ट्रॉफी का तब तक का किसी टीम का सबसे कम स्कोर था. 76 साल बाद ये रिकॉर्ड टूटा था. माने पहले ये रिकॉर्ड बना था 1934-35 के रणजी सीजन में. भाग्य फूटा था दक्षिण पंजाब का. उसने नॉर्थ इंडिया के खिलाफ 114 रनों का पीछा करते हुए 22 रन बनाए थे.

आईपीएल में अब तक का सीजन दीपक के लिए अच्छा रहा है.
आईपीएल में अब तक का सीजन दीपक के लिए अच्छा रहा है.

उस साल राजस्थान का भाग्योदय किया दीपक चाहर ने. 77 साल में पहली बार राजस्थान को रणजी ट्रॉफी जितवाने में अहम रोल निभाया. सीजन में 30 विकेट लेकर दूसरे नंबर पर रहे.

दीपक चाहर को 2016 में पहली बार IPL में साइन किया गया. ऐसा बताया जाता है कि दीपक चाहर के टैलेंट को पहचानने वाले शख्स उस वक्त के राइज़िंग पुणे सुपरजाएंट्स के कोच स्टीफन फ्लेमिंग थे. उन्होंने दीपक को एक प्रेक्टिस मैच में फिफ्टी लगाते देखा और टीम के लिए बतौर बैटिंग ऑल-राउंडर चुन लिया.

हालांकि दीपक चाहर को पहचान दिलाने वाला आईपीएल सीज़न आया 2018 में. चेन्नई सुपरकिंग्स की तरफ से. 2018 आईपीएल में उन्होंने शानदार बॉलिंग की. धोनी ने उन पर जो भरोसा जताया, उसे बचाए रखा. अब सोचने वाली बात ये है कि दीपक ने 2010 में इतना शानदार तरीके से डेब्यू किया. टीम को रणजी ट्रॉफी जितवाई तो वो 2018 में जाकर क्यों सबकी नजरों में आए. इतने साल कहां गायब थे. इसका जवाब है उनकी फिटनेस. 2011 से 2014 के बीच वो कई बार चोटिल हुए. कुछ ऐसे बिगड़ा उनका खेल –

# 2011-12 के रणजी सीजन के 6 मैच ही वो खेल पाए थे कि दीपक को जॉन्डिस हो गया. वो तीन महीने बिस्तर से नहीं उठ पाए. इसका असर उनके शरीर पर काफी पड़ा. उनकी स्पीड जो 140 की थी, 120 पर आकर अटक गई. पर उन्होंने कमबैक किया.

दीपक की फिटनेस उनकी मुश्किल बढ़ाती रही है.
दीपक की फिटनेस उनकी मुश्किल बढ़ाती रही है.

# 2012-13 के सीजन में फिर कुछ ऐसा ही हुआ. वो इस बार चोटिल हो गए और आधे से ज्यादा सीजन बाहर रहे. जो खेलने को आखिर में मिले, उसमें चले नहीं.

# 2013-14 में रणजी से पहले उनके हाथ में चोट लग गई. इस हाथ की चोट से उबरने के लिए उन्हें मार्शियल आर्ट्स की ट्रेनिंग लेनी पड़ी. 

एक वक्त तो लगने लगा कि धमाकेदार तरह से करियर का आगाज करने वाले दीपक का करियर खत्म होने वाला है. मगर ऐसा नहीं हुआ. दीपक ने वापसी की और शानदार की. फिलहाल धोनी सेना में उनका सिक्का चल ही रहा है. दीपक को 2011 और 2012 में राजस्थान रॉयल्स ने अपनी टीम में जगह दी, मगर उन्हें एक भी मैच में खेलने का मौका नहीं दिया. अगले दो साल वो फिटनेस के चलते किसी भी टीम में जगह नहीं बना सके. 2016-17 के सीजन में वो राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स का हिस्सा रहे. मगर उन्हें ज्यादा मैच खेलने को नहीं मिले. जो 4-5 मैच खेलने को मिले, उसमें वो कुछ खास नहीं कर सके. पर 2018 में उनकी किस्मत चमकी. उन्हें चेन्नई सुपरकिंग्स ने 80 लाख में खरीदा. चेन्नई के लिए ये फायदे वाला सौदा भी साबित हुआ. वो पूरे टूर्नामेंट में छाए रहे. चाहर खुद बताते हैं कि धोनी उनको काफी मोटिवेट करते थे. उनपर भरोसा जताते थे. उसी की बदौलत वो अच्छा खेल पाए.

दीपक 2016-17 में पुणे की टीम में थे.
दीपक 2016-17 में पुणे की टीम में थे.

एयरमैन पिता ने छोड़ दी थी नौकरी

दीपक के क्रिकेटर बनने की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू उनको चैपल का रिजेक्ट करना नहीं है. दिलचस्प है उनके और उनके पिता लोकेंद्र चाहर के बीच का रिश्ता. उनके पिता कि जिद कि अपने बेटे को क्रिकेटर बनाकर ही दम लेनी है. दीपक का जन्म 7 अगस्त 1992 को आगरा में हुआ था. जब दीपक 10 साल के थे, तब से ही लोकेंद्र ने उनको जयपुर की जिला क्रिकेट अकेडमी में एडमिशन दिलवा दिया था. बाद में लोकेंद्र को लगा कि उनके बेटे के कैरियर और उनके सपने के बीच में एयरफोर्स की उनकी नौकरी आ रही है तो वो उसे छोड़ बैठे. अब उनका पूरा ध्यान बेटे के कैरियर पर था. वो रोज दीपक को बाइक से खुद ट्रेनिंग करवाने ले जाते और साथ वापस आते. दीपक खुद भी कहते हैं कि उनका सबसे बड़ा कोच उनके पिता ही हैं.

दीपक फिलहाल धोनी के टॉप बॉलर्स में हैं.
दीपक फिलहाल धोनी के टॉप बॉलर्स में हैं.

क्रिकेट कैरियर पर एक नजर

# फर्स्ट क्लास – 45 मैच खेले हैं. 126 विकेट लिए हैं. बेस्ट परफॉर्मेंस वही 10 रन देकर 8 विकेट वाली है. 2010 में हैदराबाद के खिलाफ. डेब्यू मैच में. 965 रन भी बनाए हैं.

# लिस्ट ए – 48 मैच खेले हैं. 62 विकेट लिए हैं. बेस्ट 27 रन देकर 5 विकेट लेने का है.

धोनी चहर का काफी मनोबल बढ़ाते रहे हैं.
धोनी चाहर का काफी मनोबल बढ़ाते रहे हैं.

# टी20 – 103 मैच खेले हैं. 120 विकेट लिए हैं. बेस्ट 7 रन देकर 6 विकेट लेने का है.

दीपक चाहर के श्रीलंका के खिलाफ ऑल-राउंड प्रदर्शन के बाद अब भारतीय टीम मैनेजमेंट के सामने एक पॉज़ीटिव टेंशन खड़ी हो गई है.


 

इस स्टोरी के लिए रिसर्च किया है सौरभ त्रिपाठी ने.


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