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किन कमजोरियों को दूर कर टीम इंडिया जीत सकती है दूसरा वनडे?

भारत और साउथ अफ्रीका (IND vs SA) के बीच दूसरा वनडे मुकाबला 21 जनवरी को बोलैंड पार्क में खेला जाएगा. तीन मैच की वनडे सीरीज में मेजबान साउथ अफ्रीका 1-0 से आगे है. भारत के लिए ये मुकाबला करो या मरो जैसा है. क्योंकि अगर हारे तो टेस्ट के बाद इस दौरे पर टीम इंडिया वनडे सीरीज भी गंवा देगी. इससे पहले टेस्ट सीरीज में टीम इंडिया को 2-1 की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी. रोहित शर्मा की गैरमौजूदगी में केएल राहुल टीम इंडिया की कप्तानी कर रहे हैं. और पहले ही मैच में भारत को 31 रन से हार का सामना करना पड़ा है.

दूसरे वनडे में क्या करना है. वो बताएं उससे पहले बता देते हैं पहले वनडे में क्या हुआ था. पहले मैच में टॉस जीतकर साउथ अफ्रीकी कप्तान तेम्बा बवुमा ने बल्लेबाजी करने का फैसला किया था. बवुमा और रसी वान डर दुसें के शतक के दम पर साउथ अफ्रीका ने भारत के सामने 297 रन का लक्ष्य रखा. बवुमा ने 143 गेंदों का सामना करते हुए आठ चौकों की मदद से 110 रन बनाए. वहीं वेन डर दुसें ने 96 गेंदों में नौ चौके और चार छक्कों की मदद से 129 रन बनाए.

जवाब में टीम इंडिया 265 रन ही बना सकी. शिखर धवन ने 79 रन और विराट कोहली ने 51 रन की पारी खेली. निचले क्रम में शार्दुल ठाकुर ने पचासा ज़रूर लगाया. लेकिन बाकी बल्लेबाजों का साथ नहीं मिला. इससे पहले कि हम आगे बढ़े और दूसरे वनडे की बात करें. सबसे पहले आपको बताते हैं टीम इंडिया की हार की चार बड़ी वजह के बारे में.

# भुवी-शार्दुल की खराब गेंदबाज़ी

जसप्रीत बुमराह ने 2019 वनडे विश्व कप के बाद पहली बार पावरप्ले में विकेट चटकाया. उन्होंने जानेमन मलान को आउट किया. लेकिन दूसरे एंड से भुवनेश्वर कुमार से उन्हें साथ नहीं मिला. भुवी विकेट नहीं निकाल सके. और दस ओवर्स में उन्हें 64 रन भी पड़े. तीसरे तेज़ गेंदबाज के रूप में खेल रहे शार्दुल ठाकुर ने 10 ओवर्स में एक मेडन सहित 72 रन लुटा डाले. मतलब तेज गेंदबाज पूरी तरह नाकाम रहे.

# स्पिनर्स का फ्लॉप होना

पिछली बार जब भारत ने साउथ अफ्रीका में वनडे सीरीज जीती थी. तो उसमें कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल का सबसे बड़ा रोल था. दोनों स्पिनर्स ने खूब विकेट चटकाए थे. जब शुरुआत के 10 ओवर में तेज गेंदबाजों से विकेट नहीं निकलते थे. तो कुलदीप यादव और चहल विकेट निकालकर देते थे. अश्विन और चहल को इसी उम्मीद से खिलाया भी गया. अश्विन ने क्विंटन डी कॉक को जरूर आउट किया. लेकिन वह प्रभावशाली नहीं दिखे. 10 ओवर में 53 रन लुटाए. वहीं चहल ने बिना विकेट निकाले इतने ही रन खर्च किये. यानि मिडिल ओवर्स में साउथ अफ्रीकी बल्लेबाज़ हावी रहे. इसी वजह से तेम्बा और रसी वान डर दुसें ने 204 रन की साझेदारी भी कर डाली.

#बल्लेबाजों का घटिया प्रदर्शन

धवन और विराट कोहली को छोड़ दें तो सारे बल्लेबाजों ने निराश किया. न केएल राहुल चले और न ही टीम इंडिया के मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़. सबके सब धराशायी. पुरानी कहानी फिर रिपीट हुई. ऋषभ पंत ने 16, श्रेयस अय्यर ने 17 और वेंकटेश अय्यर ने दो रन बनाए. अगर इन तीनों में से किसी एक बल्लेबाज़ ने भी अंत तक खेला होता और एक छोर को पकड़ा होता. तो परिणाम कुछ और भी हो सकता था. वो तो शार्दुल का शुक्रिया अदा करना चाहिए जिन्होंने अंत में तेज तर्रार 50 रन ठोककर हार के अंतर को कम किया.

# केएल राहुल की खराब कप्तानी

राहुल की कप्तानी पर ज्यादा आलोचना करना बनता नहीं है. क्योंकि वह स्थायी कप्तान नहीं हैं. फिर भी इतना कॉमनसेन्स तो आम पब्लिक को भी है कि अगर आपके पांचवें गेंदबाज की धुनाई हो रही है. तो छठे गेंदबाज के रूप में वेंकटेश अय्यर से कुछ ओवर्स कराए जा सकते हैं. अय्यर को ऑलराउंडर के तौर पर शामिल किया गया. लेकिन उनसे गेंदबाजी नहीं कराई गई. गेंदबाजी न कराने का आइडिया किसका था? भगवान जाने.

टीम इंडिया की हार के बाद केएल राहुल ने अपने बयान में कहा भी,

‘हमारे लिए हर गेम अहम है. हम चाहते हैं कि मैदान पर अपना बेस्ट प्रदर्शन दें. वनडे क्रिकेट हम लोग काफी समय से नहीं खेले हैं. 2023 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए हम बेस्ट प्लेइंग इलेवन देखना चाहते हैं. हम गलतियां करेंगे लेकिन उससे सीखने की कोशिश भी करेंगे.’

खैर, अब आते हैं दूसरे वनडे पर. बोलैंड पार्क में ही दूसरा वनडे भी खेला जाएगा. बारिश की कोई आशंका नहीं है. धूप खिली रहेगी. रही पिच की बात तो पहले वनडे की तरह ही रहेगी. एकदम फ्लैट विकेट. स्पिनर्स को हल्की टर्न मिलने की संभावना है.

वही प्लेइंग कॉम्बिनेशन की बात की जाए तो भारतीय टीम में एक बदलाव देखा जा सकता है. दूसरे वनडे में जसप्रीत बुमराह को आराम दिया जा सकता है. बुमराह टेस्ट सीरीज में भी खेले थे. इसके अलावा बदलाव की कोई संभावना नहीं है. साउथ अफ्रीका भी अपनी विनिंग प्लेइंग इलेवन से कोई छेड़खानी नहीं करना चाहेगा.

भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन :

केएल राहुल, शिखर धवन, विराट कोहली, ऋषभ पंत, श्रेयस अय्यर, वेंकटेश अय्यर, आर अश्विन, शार्दुल ठाकुर, भुवनेश्वर कुमार, युजवेंद्र चहल, बुमराह/ सिराज.

और आखिर में कुछ दिलचस्प आंकड़ें : 

#किसी भी एशियाई बल्लेबाज़ द्वारा SENA यानी साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा फिफ्टी प्लस स्कोर करने का रिकॉर्ड कुमार संगकारा के नाम दर्ज है. श्रीलंका के दिग्गज खिलाड़ी ने 126 पारियों में 38 फिफ्टी प्लस स्कोर किया था.

विराट कोहली ने 89 पारियों में 37 मर्तबा SENA देशों में फिफ्टी प्लस स्कोर किया है. संगकारा के रिकॉर्ड की बराबरी के लिए कोहली को सिर्फ एक पचासा लगाने की जरूरत है. वैसे भारतीय फैन्स चाह ही रहे हैं कि कोहली पचासा नहीं बल्कि शतक लगाएं.

#टीम इंडिया के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ने 57 वनडे में 27.48 की एवरेज से 97 विकेट झटके हैं. उन्हें 100 विकेट पूरे करने के लिए तीन विकेट की दरकार है.

इस तरह से जब भारत और साउथ अफ्रीका के बीच दूसरा वनडे खेला जाएगा तो इन रिकॉर्ड्स और इन सारी बातों पर फैंस का ध्यान रहेगा.


भारत-साउथ अफ्रीका मैच के बाद फैन्स को क्यों याद आए हार्दिक पंड्या?

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