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क्या अश्विन के बाहर बैठने पर इतना बवाल होना चाहिए?

भावनाएं…उमड़-घुमड़ करती हैं. और इनकी गति उस वक्त और ज्यादा हो जाती है जब टीम इंडिया हार रही हो. इंग्लैंड में भारतीय क्रिकेट टीम पांच मैचों की टेस्ट सीरीज़ खेल रही है. नॉटिंघम में पहला मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ. आखिरी दिन बारिश आई और भारतीय टीम आसान से दिख रहे लक्ष्य का पीछा करने नहीं उतर पाई.

सीरीज़ का दूसरा टेस्ट लॉर्ड्स में खेला गया. बुरी तरह से पिछड़ने के बाद भारत ने आखिरी दिन मैच जीत लिया. इसके बाद शुरू हुआ लीड्स टेस्ट. इस मैच में भारतीय टीम की ऐसी हार हुई कि उससे उबरना मुश्किल हो गया. टीम इंडिया महज़ 78 रन बनाकर ऑल-आउट हुई और मुकाबले को पारी और 76 रनों से हार गई.

टीम हारती है तो भावनाओं का सैलाब आ जाता है. सैलाब आया भी. किसी ने कहा पुजारा को हटाओ, किसी ने कहा रहाणे को हटाओ, किसी ने कहा राहुल को हटाओ तो किसी ने तो कोच शास्त्री को हटाने का फरमान ही जारी कर दिया. और इन सबके बीच एक बहस निरंतर चलती ही रही- रविचन्द्रन अश्विन को मौका क्यों नहीं मिल रहा?

सबने एक सुर में कहा, अब तो अश्विन को लाना ही होगा. और इस बहस के बीच हमने सोचा कि क्या, ये सवाल सही है? क्या सच में अश्विन के ना होने के चलते टीम इंडिया का बुरा हाल है? सच में इंग्लैंड में भी अश्विन गेंद से पूरा मामला पलट देते? क्या अश्विन को बाहर बिठाने पर इतना बवाल होना चाहिए? और ये सब सोचने के बाद हमें जो समझ आया, वो हम आपके साथ भी शेयर कर रहे हैं.

# बल्लेबाज़ी को मजबूती

ओवल टेस्ट की दूसरी पारी हटा दें तो हर कोई कह रहा है कि या तो ओपनर्स या टेल-एंडर्स ही टीम का थोड़ा-बहुत काम कर रहे हैं. क्योंकि मिडल ऑर्डर इस सीरीज़ में बिल्कुल भी फॉर्म में नहीं दिखा. ऐसे में रविन्द्र जडेजा पर ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है. 2017 से 2021 तक के आंकड़ों पर बात की जाए तो रविन्द्र जडेजा ने बल्लेबाज़ी में अश्विन से बेहतर योगदान दिया है. आंकडों से समझिए.

जडेजा:
2017: 41 का औसत, 328 रन, चार अर्धशतक.
2018: 45.60 का औसत, 228 रन, एक शतक, एक अर्धशतक.
2019: 62.85 का औसत, 440 रन, पांच अर्धशतक.
2020: 41 का औसत, 82 रन, एक अर्धशतक.
2021: 26.37 का औसत, 211 रन, एक अर्धशतक.

Ravindra Jadeja Batting
रविन्द्र जडेजा. फोटो: AP

विदेशों में रविन्द्र जडेजा के प्रदर्शन की बात करें तो उन्होंने सात अर्धशतकों के साथ 900 रन बनाए हैं. इंग्लैंड की बात करें तो यहां जडेजा ने 27 की औसत से तीन अर्धशतकों के साथ 459 रन बनाए हैं. इस सीरीज़ की भी बात की जाए तो मिडल ऑर्डर में जडेजा ने रहाणे और पंत जैसे बल्लेबाज़ों से ज़्यादा रन बनाए हैं.

अश्विन:
2017: 17.07 का औसत, 239 रन, एक अर्धशतक.
2018: 20.40 का औसत, 306 रन, कोई शतक-अर्धशतक नहीं.
2019: 12.00 का औसत, 24 रन, कोई शतक-अर्धशतक नहीं.
2020: 6.60 का औसत, 33 रन, कोई शतक-अर्धशतक नहीं.
2021: 29.66 का औसत, 267 रन, एक शतक.

वहीं विदेशों में अश्विन के प्रदर्शन की बात करें तो उन्होंने 26.46 की औसत से 1191 रन बनाए हैं. जिनमें दो शतक और चार अर्धशतक भी हैं. लेकिन ये दोनों शतक 2017 से पहले आए थे. इस लिहाज़ से पिछले पांच सालों में विदेशों में अश्विन ने कोई बहुत बड़ा प्रदर्शन नहीं किया है. जिससे कि भारत की बल्लेबाज़ी को मजबूती देने के लिए जडेजा की जगह उन पर दांव लगाया जाता.

हां ये ज़रूर कहा जा सकता है कि अगर भारत का बैटिंग ऑर्डर सही चल रहा होता और अश्विन का इंग्लैंड में प्रदर्शन बेमिसाल होता तो जडेजा से पहले अश्विन पर ही भरोसा जताया जाता. क्योंकि इंग्लैंड में उनके गेंदबाज़ी के आंकड़ें भी बहुत लाजवाब नहीं हैं.

इंग्लैंड में अश्विन ने कुल सात टेस्ट खेले हैं. जिसमें उन्होंने 28.11 की औसत से 18 विकेट निकाले हैं. जो कि इंग्लैंड में बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं है.

# चार पेसर उतारना मजबूरी

2021 में इंग्लैंड दौरे पर गई भारतीय टीम के सबसे सफल गेंदबाज़ पेसर्स ही रहे हैं. ओवल के मैदान पर पेस को मजबूती देना टीम इंडिया की मजबूरी थी. ईशांत शर्मा और मोहम्मद शमी पूरी तरह फिट नहीं थे. ऐसे में एक अतिरिक्त स्पिनर खिलाना भारत के लिए परेशानी का सबब बन सकता था. क्योंकि अब तक का रिकॉर्ड यही बताता है कि इंग्लैंड में पेसर्स का झंडा बुलंद रहा है. ऐसे में जडेजा के साथ अश्विन को भी उतारना एक मूर्खता भरा फैसला हो सकता था.

सीरीज़ में स्पिनर्स के योगदान की बात करें तो पहला टेस्ट नॉटिंघम में हुआ. वहां जडेजा को कोई विकेट नहीं मिला. जबकि इंग्लैंड ने तो स्पिनर इस्तेमाल ही नहीं किया. दूसरा टेस्ट, लॉर्ड्स में भारत जीता लेकिन पेसर्स की बदौलत. भारतीय स्पिनर जडेजा के खाते में एक भी विकेट नहीं आया. जबकि इंग्लैंड के लिए भी मोईन अली ने बहुत कुछ नहीं किया. दोनों पारियों में मिलाकर कुल तीन विकेट लिए.

तीसरा टेस्ट लीड्स. इंग्लैंड को इस मैच में जीत मिली. लेकिन स्पिनर मोईन अली को विकेट मिला सिर्फ एक. जबकि जडेजा को भी उस मैच में सिर्फ दो विकेट मिले. यहां भी पेसर्स का दबदबा रहा.

Root Jadeja
रविन्द्र जडेजा और जो रूट. फोटो: AP

चौथा टेस्ट, ओवल. सीरीज़ के चौथे मैच में ये रिपोर्ट लिखे जाने तक तीन दिन का खेल हो चुका है. इंग्लैंड ने पहली पारी में भारत को 191 रनों पर समेटा. लेकिन स्पिनर को एक भी ओवर नहीं मिला. वहीं इंग्लैंड की पारी की बात करें तो जडेजा ने दो विकेट निकाले ज़रूर. लेकिन पुछल्ले बल्लेबाज़ों के. दूसरी पारी में मोईन अली आखिरी अपडेट तक 15 ओवर फेंक चुके हैं, 63 रन लुटाए. लेकिन विकेट एक भी नहीं निकाल पाए. इस तरह से सीरीज़ में पेसर्स का बोलबाला रहा है.

# India vs England 2021, Pacers vs Spinners

विकेटों की बात से समझा जाए तो इस सीरीज़ में खेले गए चार टेस्ट मैचों के तीसरे दिन के अपडेट तक सबसे ज़्यादा विकेट पेसर ने ही निकाले हैं. नाम है ओली रोबिंसन. उन्होंने 21 विकेट चटकाए.

जबकि नंबर दो पर 16 विकेट्स के साथ जसप्रीत बुमराह हैं. जिमी एंडरसन के नाम 15, मोहम्मद सिराज के नाम 14 और मोहम्मद शमी ने 11 विकेट चटकाए हैं. टॉप-5 से बाहर जाने पर भी क्रेग ओवरटन हैं जिन्होंने सात विकेट निकाले हैं. वहीं शार्दुल, मार्क वुड और ईशांत शर्मा को पांच-पांच विकेट मिले हैं.

James Anderson Vs Ind
जेम्स एंडरसन. फोटो: AP

काफी नीचे, 10 गेंदबाज़ों के बाद किसी स्पिनर का नंबर आता है. बतौर स्पिनर चौथे मैच की पहली पारी तक जडेजा ने चार विकेट चटकाए हैं. मोईन के नाम भी चार ही विकेट हैं. इस तरह से ये सीरीज़ अब तक पेसर्स के मुफीद ही नज़र आई है. जहां पर स्पिनर्स के लिए विकेट से बहुत कुछ नहीं दिखा है.

ऐसे में जाहिर तौर पर कोई भी कप्तान एक्स्ट्रा स्पिनर लेकर नहीं उतरेगा. फिर चाहे वो स्पिनर दुनिया का बेस्ट स्पिनर ही क्यों ना हो.


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