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गोपालगंज 'ट्रिपल मर्डर' केस के पीछे अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने में जुटे लालू के लाल!

बिहार के गोपालगंज में 24 मई रात अंधाधुंध गोलियां चलीं. इस गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता जेपी यादव के पिता महेश चौधरी, उनकी मां संकेशिया देवी और उनके छोटे भाई शांतनु. इस गोलीबारी में जेपी यादव भी ज़ख्मी हुए, जिनका इलाज पटना में चल रहा है. इस ट्रिपल मर्डर ने बिहार में भयानक राजनीतिक रंग ले लिया है.

जेपी यादव जो कि आरजेडी के नेता हैं, उन्होंने हत्या के पीछे चार लोगों के हाथ होने की बात की है. गोपालगंज से जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायक अमरेंद्र कुमार पांडे उर्फ पप्पू पांडे, उनके भाई सतीश पांडे, विधायक के भतीजे और जिला परिषद अध्यक्ष मुकेश पांडे और चौथे नंबर पर बटेसर पांडे का नाम है.

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24 मई की रात जेपी यादव के परिवार के तीन लोगों की हत्या कर दी गई. (तस्वीर- सोशल मीडिया)

इस मामले में चार नाम सामने आने के बाद गोपालगंज पुलिस ने 25 मई के दिन जेडीयू विधायक के बड़े भाई सतीश पांडे और उनके भतीजे मुकेश पांडे को गिरफ्तार कर लिया. लेकिन विधायक पप्पू पांडे और चौथे शख्स बटेसर पांडे की गिरफ्तारी नहीं हो पाई. क्योंकि दोनों अंडरग्राउंड हो गए. इस बात को लेकर आरजेडी भड़का हुआ है. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के मुताबिक, पुलिस विधायक को गिरफ्तार नहीं कर रही, क्योंकि वो नीतीश कुमार की पार्टी के विधायक हैं. उन्होंने 27 मई के दिन विधायक की गिरफ्तारी की मांग करते हुए पुलिस को दो दिनों का अल्टिमेटम भी दे दिया था.

29 मई के दिन अल्टिमेटम खत्म होने के बाद तेजस्वी पटना से गोपालगंज के लिए निकले. उनके साथ आरजेडी के दूसरे विधायक भी मौजूद थे, लेकिन उन्हें उनके घर के बाहर ही रोक लिया गया. पुलिस ने तेजस्वी को लॉकडाउन के नियमों का हवाला देते आगे नहीं जाने दिया.

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ट्रिपल मर्डर केस में गोपालगंज जाने से पहले तेजस्वी यादव को पटना में ही रोक लिया गया (तस्वीर- वीडियो स्क्रीन ग्रैब)

आजतक से बात करते हुए पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी ने कहा,

‘अगर सरकार काम न कर रही हो, लोग मर रहे हों, भूख से, गोलियों से, अपराधी लोगों को मार रहे हैं, ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि पीड़ित के आंसू को पोंछे और सरकार की जिम्मेदारी है कि अपराधी को पकड़े. इस मामले में आरोपी विधायक की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही, उस पर आईपीसी की एक भी धारा क्यों नहीं लगाई गई है, जबकि वो आदतन अपराधी है. नीतीश सरकार में अपराधियों को छूट है और विधायकों को पीड़ित के परिवार से मिलने से रोका जा रहा है.’

तेजस्वी यादव के साथ बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव और बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी भी थीं, जिन्हें गोपालगंज जाने से रोक दिया गया.

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राबड़ी देवी और तेज प्रताप को भी गोपालगंज जाने से रोक दिया गया. (तस्वीर- वीडियो स्क्रीन ग्रैब)

पुलिस का साफ कहना था कि वो किसी हाल में लॉकडाउन का उल्लंघन नहीं होने देंगे. हालांकि इसके बाद आरजेडी समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई. काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच झूमा-झटकी हुई, लेकिन दोनों टस से मस नहीं हुए और ऐसे में कोरोना का डर और सोशल डिस्टेंसिंग भी हवा हो गए. क्योंकि आरजेडी के जितने समर्थक तेजस्वी की गाड़ी के आसपास मौजूद थे, उनमें से शायद ही किसी ने मास्क पहना था. सोशल डिस्टेंसिंग के खयाल को तो छोड़ ही दीजिए.

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तेजप्रताप के समर्थन में आरजेडी समर्थकों की भीड़ जमा हो गई और सोशल डिस्टेंसिंग हवा हो गई. (तस्वीर-वीडियो ग्रैब)

इस मामले का बैकग्राउंडर समझिए

24 मई को जो ट्रिपल मर्डर हुआ, उसकी खूब चर्चा हो रही है. लेकिन इसी मर्डर के 36 घंटे के भीतर ही जिस मुन्ना तिवारी की हत्या हुई, उसकी कोई चर्चा नहीं कर रहा. आरजेडी के नेता भी ट्रिपल मर्डर-ट्रिपल मर्डर की रट लगा रहे हैं, लेकिन चौथे मर्डर की कहीं कोई बात नहीं कर रहा. मुन्ना तिवारी जेडीयू विधायक पप्पू पांडे के ही फुफेरे भाई थे. और कहा गया कि ट्रिपल मर्डर का बदला लेने के लिए विशाल सिंह के गैंग ने विधायक के फुफेरे भाई की हत्या करवा दी.

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25 मई को दिनदहाड़े मुन्ना तिवारी की हत्या के बाद बिलखते परिजन. (तस्वीर-सोशल मीडिया)

अब इस मामले में विशाल सिंह गैंग की एंट्री कहां से हो गई? इसे समझने के लिए हमने ‘आजतक’ के गोपालगंज के संवाददाता सुनील तिवारी से बात की. उन्होंने हमें जो ज़मीनी जानकारी दी, उससे समझ में आया कि वर्चस्व की लड़ाई में शह और मात का खेल कई साल से जारी था, और गोपालगंज में हुई चार लोगों की हत्या उसी का हिस्सा था.

जेपी यादव कई साल पहले सतीश पांडे के साथ ही काम किया करता था. उसका किसी मामले में जेल जाने के बाद सतीश पांडे के साथ मनभेद हो गया, दोनों अलग हो गए थे. जेपी यादव को लगा था कि उसे जेल भिजवाने के पीछे सतीश पांडे का ही हाथ है. वो जेल से निकलने के बाद विशाल सिंह गुट में शामिल हो गया और उसी के लिए साथ मिलकर काम करने लगा.

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हमले के बाद पटना में भर्ती आरजेडी नेता जेपी यादव. (तस्वीर-सोशल मीडिया)

कौन है सतीश पांडे?

ये तो सभी जानते हैं कि सतीश पांडे विधायक पप्पू पांडे का बड़ा भाई है, लेकिन इसके बारे में और भी जानना ज़रूरी है. सतीश पांडे का नाम विधायक के बड़े भाई होने के साथ बिहार के कुख्यात अपराधियों में भी लिया जाता है. गोपालगंज के अलावा कई दूसरे ज़िलों में कई बड़े अपराध कर चुका सतीश पिछले कई साल से अंडरग्राउंड रह रहा था. उसका गोपालगंज में अच्छा खास वर्चस्व है. कहा जाता है कि अपने भाई पप्पू पांडे को विधायक बनाने में सतीश पांडे के वर्चस्व का बड़ा योगदान था. इसके साथ ही बेटे मुकेश पांडेय को भी जिला पार्षद अध्यक्ष की कुर्सी सतीश पांडे ने ही दिलायी थी.

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सतीश पांडे (बीच में) अपने छोटे भाई पप्पू पांडे (दाएं) और अपने बेटे मुकेश पांडे (बाएं) के साथ. (तस्वीर सोशल मीडिया)

कौन है विशाल सिंह?

इसे भी समझना ज़रूरी है. विशाल सिंह का पूरा नाम विशाल सिंह कुशवाहा है. गोपालगंज के मटिहानी गांव का रहने वाला विशाल सिंह 2012 के बाद अपराध की दुनिया में आया. कहा जाता है चोरी की बाइक के मामले में जेल जाने के बाद उसने अपराध की दुनिया में एंट्री मारी, उसके बाद फिर कभी पलट कर पीछे नहीं देखा. जेल से निकलने के साथ विशाल ने लूट, हत्या, रंगदारी समेत कई ताबड़तोड़ वारदात को अंजाम दिए, इसके बाद उसका नाम बिहार की हेडलाइन्स में आ गया. इस दौरान विशाल पर ये भी आरोप लगे कि साल 2019 में उसने सतीश पांडे के वर्चस्व को खत्म करने के लिए कई व्यापारियों से रंगदारी मांगी और इनकार करने पर पांच लोगों की हत्या भी की. जेडीयू नेता उपेंद्र सिंह कुशवाहा के साथ चार कारोबारियों की हत्या उसी सीरीज़ का हिस्सा थी.

विशाल जेडीयू विधायक के साथ-साथ पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुका था, जिसके बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर 26 अक्टूबर 2019 के दिन विशाल सिंह को उसके चार गुर्गों के साथ गिरफ्तार कर लिया.

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26 अक्टूबर 2019 को पुलिस की टीम ने विशाल सिंह को गिरफ्तार किया. (तस्वीर- सोशल मीडिया)

दूसरी तरफ सतीश पांडे चार साल से जमानत पर जेल से बाहर था. लेकिन कहा जाता है बाहर आकर भी उसने अपराध की दुनिया का पीछा नहीं छोड़ा. सतीश पांडे अपने घर से ही पूरे गैंग को चलाता था. सतीश पांडे और गैंगेस्टर विशाल सिंह के बीच कई गैंगवार हुए, जिसमें 2019 में ही दोनों तरफ से 11 लोगों की जान गई. मौजूदा समय में जेपी यादव की तरफ से ट्रिपल मर्डर केस में नाम लिए जाने के बाद पुलिस ने सतीश पांडे और उसके बेटे मुकेश पांडे को गिरफ्तार कर लिया.

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2015 में ज़मानत पर रिहा सतीश पांडे अपने समर्थकों और भाई पप्पू पांडे के साथ. (तस्वीर-सोशल मीडिया)

अब ज़मीनी थ्योरी यही बनाई जा रही है कि सतीश पांडे और विशाल सिंह की वर्चस्व की लड़ाई, और जेपी यादव का विशाल गुट के साथ मिल जाना इस ट्रिपल मर्डर की मुख्य वजह है, जिसकी जड़ में पुलिस जाने की कोशिश कर रही है.

अब वापस मुन्ना तिवारी पर चलते हैं. मुन्ना तिवारी, जो विधायक पप्पू पांडे का फुफेरा भाई था, उसकी हत्या के मामले में मनु तिवारी का नाम मुख्य रूप से सामने आया है, जिसका कनेक्शन भी विशाल सिंह के गैंग से है. कहा जा रहा है कि सतीश पांडे और विधायक पप्पू पांडे से बदला लेने के के लिए मुन्ना तिवारी की हत्या करवाई गई.

दद्दू मियां उर्फ वजीर गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस ने दद्दू मियां उर्फ वजीर को भी गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, दद्दू मियां ने जेपी यादव के परिवार की हत्या की बात कबूली भी है. साथ ही ये भी कबूला कि हत्या की कोशिश जेपी यादव की थी, लेकिन बीच बचाव में पिता-मां और भाई की जान चली गई. लेकिन जेपी यादव दद्दू मियां को पहचानने ने इनकार कर रहा है. और लगातार विधायक के साथ बाकी के तीन लोगों का नाम ले रहा है. हालांकि पुलिस सूत्र के अनुसार, विधायक का हाथ अभी तक जांच में नहीं आया है. बावजूद इसके, वो अंडरग्राउंड चल रहे हैं.

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जेडीयू के बाहुबली विधायक पप्पू पांडे अभी अंडर ग्राउंड चल रहे हैं. (तस्वीर-सोशल मीडिया)

अब मामले में राजनीति की एंट्री

जेपी यादव, जो अभी आरजेडी के नेता बताए जा रहे हैं, उन्होंने छह महीने पहले ही आरजेडी की सदस्यता ली थी. इससे पहले वो भाकपा माले के स्टूडेंट विंग से जुड़े हुए थे. अब बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं. गोपालगंज जिले की राजनीति आरजेडी के लिए हमेशा से टेढ़ी खीर रही है. गोपालगंज में आरजेडी कितना कमज़ोर है, इस बात का अंदाजा इसी बात से भी लगाया जा सकता है कि लालू यादव जो खुद इसी ज़िले से आते हैं, उन्होंने कभी विधानसभा या फिर लोकसभा में से कोई चुनाव यहां से नहीं लड़ा.

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पटना में भर्ती जेपी यादव से मिलने तेजप्रताप और तेजस्वी यादव दोनों पहुंचे. (तस्वीर- सोशल मीडिया)

आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव चारा घोटाले में अभी जेल में बंद हैं. पिता की गैरमौजूदगी में बेटे तेजस्वी यादव पार्टी का झंडा बुलंद करने की कोशिश में जुटे हैं. कई दिनों से कई मुद्दे हाथ से निकल जाने के बाद तेजस्वी इस ट्रिपल मर्डर कांड को हाथ से निकले नहीं देना चाह रहे. वो इस मुद्दे के सहारे नीतीश को भी घेरना चाह रहे हैं, साथ ही गोपालगंज में आरजेडी की पकड़ भी मजबूत करना चाह रहे हैं.

वैसे चलते-चलते ये जान लीजिए कि गोपालगंज में अपराध का इतिहास पुराना रहा है, जिसके शिकार यहां ज़िलाधिकारी रहे दो आईएएस अधिकारी भी हो चुके हैं.


वीडियो- पटना: DTO के पीटने का वीडियो वायरल हुआ, लेकिन इस कारण से FIR भी न हो सकी

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