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12वीं के बोर्ड एग्जाम को लेकर कंफ्यूजन; स्टूडेंट्स, पैरेंट्स और टीचर्स क्या सोच रहे हैं?

CBSE Class 12th Board Exam 2021. कोरोना के दौर में बोर्ड एग्जाम को लेकर छात्रों, अभिभावकों और टीचर्स के मन में कई तरह के डाउट हैं. न केवल CBSE, बल्कि कई राज्यों के बोर्ड एग्जाम को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है. 12वीं के बोर्ड एग्जाम होंगे कि नहीं होंगे? और अगर होंगे तो कब होंगे? अगर नहीं हुए तो क्या होगा? इस तरह के तमाम सवाल लोगों के मन में हैं. खबरों के मुताबिक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक CBSE बोर्ड एग्जाम को लेकर सोमवार, 17 मई को मीटिंग करने वाले थे. हालांकि मीटिंग को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है.

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सोशल मीडिया पर इस तरह के मीम चल रहे हैं.

वहीं सोशल मीडिया पर बोर्ड एग्जाम कैंसिल करने को लेकर हैशटैग चल रहे हैं. हमने बोर्ड एग्जाम से जुड़े छात्रों, उनके माता-पिता, टीचर्स और शिक्षाविद से जानने की कोशिश कि वो क्या चाहते हैं?

पहले बात उनकी जिन्हें परीक्षा देनी है.

पंजाब के होशियारपुर जिले के तलवाड़ा में रहने वाले सत्यम का सपना इंजीनियर बनने का है, 12वीं में उन्होंने मैथ्स लिया है, उनका कहना है,

बहुत कंफ्यूजन है, हमने सालभर मेहनत की है. हम चाहते हैं कि एग्जाम हो, भले थोड़ा डिले हो, लेकिन एग्जाम तो होना ही चाहिए. हालांकि सुरक्षा को लेकर भी कुछ किया जाना चाहिए.

वहीं बिहार के बेतिया के रहने वाले निखिल का कहना है,

एग्जाम होना चाहिए. क्योंकि एग्जाम नहीं होगा, तो पता कैसे चलेगा. ऐसे तो किसी को कुछ भी नंबर मिल सकते हैं.

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एग्जाम को लेकर कोई फैसल नहीं होने से स्टूडेंट्स असमंजस में हैं. (सांकेतिक फोटो)

माता-पिता क्या सोचते हैं?

दिल्ली की रहने वाली नीतू आर्य का कहना है,

एक पैरेंट होने के नाते मैं चाहती हूं कि बच्चों के एग्जाम हों, लेकिन जो स्थिति चल रही है, जैसे हालात हैं उसमें कुछ समझ नहीं आ रहा है. क्योंकि बच्चों की लाइफ से बढ़कर कुछ नहीं होता. दुविधा वाली स्थिति है. सरकार की तरफ से जल्दी फैसला लिया जाना चाहिए. बच्चे परेशान हैं, हम लोग भी परेशान है. सरकार को क्लियर करना चाहिए.

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एग्जाम को लेकर कोई फैसला नहीं होने का असर माता-पिता पर भी पड़ रहा है. (सांकेतिक फोटो)

वहीं प्रताप चौहान का कहना है,

मुझे लगता है कि बच्चों को एवरेज बेस पर प्रमोट कर देना चाहिए. क्योंकि जो साल रहा है, वो ये देखने के लिए रहा ही नहीं है कि ये कॉम्पटिटिव बच्चे हैं या एवरेज बच्चे हैं. कॉम्पटिटिव बच्चे भी परेशान रहे हैं पूरे साल. अभी उन्हें भी एग्जाम में बैठा दो तो वो वैसे नंबर नहीं ला पाएंगे जैसे सामान्य हालात में लाते हैं. सभी के साथ कुछ ना कुछ समस्याएं रही हैं, जिसका अंदाजा नहीं लगा सकते हैं.

लक्ष्मी जोशी एक टीचर और अभिवावक दोनों हैं, उनका कहना है,

एक पैरेंट के तौर पर भी और एक टीचर होने के नाते भी मैं सोचती हूं कि एग्जाम होना चाहिए. अगर हम 10वीं की तरह नंबर देते हैं तो वो जस्टिफाई नहीं होगा, कल को अगर मेरे बच्चे को किसी अच्छी यूनिटवर्सिटी या कॉलेज में जाना है तो किस बेस पर एडमिशन होगा. हम चार-पांच कॉलेज टारगेट करके बैठे हैं, अगर सबको सेम नंबर दे दिए जाएं तो कैसे होगा. मान लीजिए कि कल को एंट्रेस टेस्ट हो तो उसकी तैयारी तो मेरे बच्चे ने नहीं की है, ऐसे में तो दिकक्त होगी.

टीचर्स का क्या सोचना है?

सर्वोदय बाल विद्यालय वेस्ट विनोद नगर दिल्ली के प्रिंसिपल एलके दूबे का कहना है,

जिस तरह का माहौल है उसे लेकर हम लोग असमंजस में हैं, एक प्रिंसिपल के तौर पर मेरा अपना व्यू ये है कि एग्जाम होना चाहिए. कोई बच्चा मेडिकल में जाना चाहता है, कोई बच्चा इंजीनियरिंग में जाना चाहता है, कोई LLB करना चाहता है तो काफी कुछ होना है. लेकिन हालात सामान्य नही हैं. जहां जक 10वीं की तरह नंबर देने की बात है, तो दोनों में बड़ा अंतर होता है. 12वीं करियर के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है. मुझे लगता है कि CBSE को एग्जाम कराना चाहिए. मुझे लगता है कि 10वीं का भी एग्जाम होना चाहिए था. 10वीं के पैरामीटर से रिजल्ट बनने लगे तो उन बच्चों के साथ न्याय नहीं होगा तो पढ़ाई में अच्छे हैं. लेट एग्जाम हो जाए, लेकिन बच्चों को 20 से 25 दिन पहले बताना चाहिए. अभी वो पढ़ाई से डिसकनेक्टेड हैं. तो उन्हें पहले जानकारी देना जरूरी है.

खाली क्लास में टीचर की सांकेतिक तस्वीर (PTI)
सांकेतिक तस्वीर (PTI)

वहीं एक और टीचर वेद प्रकाश त्रिवेदी का कहना है,

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए CBSE को ऐसा माहौल बनाना चाहिए ताकि बच्चे किसी ना किसी तरह से एग्जाम दे सकें. भले थोड़ा लेट हो जाए, या एग्जाम का फॉर्मेट बदल दिया जाए, ताकि बच्चों की सेफ्टी भी हो और एग्जाम भी हो जाए. करियर के लिहाज से 12वीं का एग्जाम बहुत महत्वपूर्ण है. हालांकि अगर यही माहौल रहा, तो कुछ कहना मुश्किल है. सेफ जोन में एग्जाम हो पाए, इसका इंतजाम करना चाहिए.

शिक्षाविद का क्या कहना है?

भारत के प्रमुख शिक्षा शास्त्री और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के निदेशक रह चुके जगमोहन सिंह राजपूत का कहना है,

बोर्ड एग्जाम को लेकर आजकल में फैसला लेना जरूरी नहीं है. कोई नहीं जानता कि कल को क्या स्थिति हो सकती है. मेरा बहुत सिंपल सा वाक्य है कि हर एक जीवन महत्वपूर्ण है.बच्चों के जीवन से बड़ा कुछ नहीं है. इसलिए हमें थोड़ा और इंतजार करना चाहिए. उसके बाद हम निर्णय ले सकते हैं. अगर एग्जाम कराने में कुछ दिनों, कुछ महीनों की देर हो जाती है तो कोई बड़ी समस्या नहीं है.

उन्होंने आगे बताया,

अगर हमारी व्यवस्था सही होती. सतत मूल्यांकन यानी इंटरनल असेसमेंट सही होता, स्कूल ठीक होते, तो समस्या होती ही नहीं.इंटरनल असेसमेंट के आधार पर नंबर दे सकते थे. लेकिन दुर्भाग्य से व्यवस्था ठीक नहीं है. 

10वीं वाला विकल्प क्या 12वीं को मिल सकता है? इस सवाल के जवाब में जगमोहन सिंह राजपूत का कहना है,

12वीं के बाद स्टूडेंट्स को बहुत सी प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठना होता है, कॉलेज में एडमिशन लेना होता है, तो 10वीं वाला विकल्प आसान नहीं होगा. लेकिन अगर हमारी स्थिति नहीं सुधरती है तो करना पड़ेगा. स्कूलों से नंबर लेकर उसको एक फॉर्मूले में फिटकर बच्चों से कहा जाएगा कि ये नंबर है, विश्वविद्यालय को तैयार रहना चाहिए इसे स्वीकार करने के लिए. बाकी प्रतियोगी परीक्षाएं कराने वालों को भी इसके लिए तैयार रहना चाहिए.

उन्होंने आगे बताया,

मैं समझता हूं कि इस समय इसका कोई मतलब नहीं है कि शिक्षा सत्र शुरू हो जाए, माता-पिता तनाव में हैं, बच्चे उनसे ज्यादा तनाव में हैं. ऐसे में हमें ऐसे निर्णय लेने होंगे जो सामान्य समय से अलग होंगे. जो भी निर्णय हो सरकार की तरफ से बच्चों को साफ तौर पर बताना चाहिए. लेकिन परीक्षा के बारे में भी सबके सहयोग से, तनाव की स्थिति रोकी जा सकती है. बाकी देखिए सरकार क्या फैसला लेती है.

यूपी बोर्ड को लेकर क्या खबर है?

वहीं यूपी में भी बोर्ड एग्जाम को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है. पहले पंचायत चुनाव और फिर बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए उत्तर प्रदेश में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा दो बार स्थगित हो चुकी है. खबरों के मुताबिक, परीक्षाओं को लेकर माध्यमिक शिक्षा विभाग कई विकल्पों पर विचार कर रहा है. मई के अंतिम सप्ताह तक सरकार इस पर निर्णय ले सकती है. ये भी खबर है कि जुलाई के पहले सप्ताह से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट दोनों की परीक्षा कराई जाए. एक विकल्प हाई स्कूल की परीक्षा रद्द कर इंटरमीडिएट की परीक्षा कराने का है. तीसरा विकल्प स्कूलों की ओर से भेजे गए आंतरिक मूल्यांकन के अंकों के आधार पर बोर्ड परीक्षा के अंक देकर प्रमोट करने का है. CBSE के फैसले का इंतजार हो रहा है.

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(तस्वीर: पीटीआई)

MLC और शिक्षक दल के नेता सुरेश त्रिपाठी का कहना है,

जो भी फैसला लेना है सरकार को लेना है, लेकिन एक टीचर के तौर पर मैं चाहता हूं कि एग्जाम होना चाहिए. भले थोड़ा डिले हो जाए. हालांकि सबकुछ इस बात पर निर्भर करता है कि महामारी का प्रभाव कैसा रहता है. सत्र विलंबित हो जाएगा. हालांकि सही मायने में सत्र जुलाई से जून ही था. अगर जून में परीक्षा करा लें, तो भी लेट नहीं होगा. महामारी में कुछ कहने लायक कुछ बचा नहीं है.

वहीं उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा का कहना है कि 20 मई के बाद बैठक कर मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार फैसला लिया जाएगा.


बिना एग्ज़ाम के CBSE 10वीं के स्टूडेंट्स का असेसमेंट किस सिस्टम से करेगा?

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