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गर्मी की भेंट चढ़ा टोक्यो ओलंपिक, कई खिलाड़ी हुए बेहोश

इस वक़्त दुनिया के सबसे बड़े कीवर्ड्स में से एक है, टोक्यो ओलिंपिक्स. टोक्यो और ओलिंपिक्स, ये दोनों शब्द अगर एक साथ मिलाइए, तो जो चीज तैयार होगी, उसका नाम है- नॉस्टैलजिया. 57 बरस पहले की एक शाम की हसीन यादें. तारीख़ थी- 23 अक्टूबर, 1964. वेन्यू, टोक्यो स्थित कोमाज़ावा हॉकी फ़ील्ड.

छह बार लगातार ओलिंपिक्स हॉकी का गोल्ड मेडल जीत चुका भारत. उसके सामने थी, पाकिस्तान की हॉकी टीम. जिसने 1960 के रोम ओलिंपिक्स में भारत को हराकर सोना जीता था. इस मैच के पात्र, इसके लम्हे तारीख़ में दर्ज हैं. पृथ्वीपाल सिंह का वो शॉट. गोल लाइन के पास बॉल का पाकिस्तानी कैप्टन मंज़ूर हसन के पांव से लगना. भारत को पैनल्टी स्ट्रोक मिलना. मोहिंदर लाल का बॉल को दिशा देकर सीधे नेट की ऊंचाई की तरफ दागना. उस रोज़ हमारी इंडियन टीम ने बस गोल्ड नहीं जीता था. हॉकी के सबसे यादगार पलों में से एक को गढ़ा था. पता है, 1964 के टोक्यो ओलिंपिक्स में पहली बार हमारे खिलाड़ियों को ट्रैक सूट्स और स्टड जूते मिले थे. इससे पहले तक खिलाड़ी या तो नंगे पांव खेलते. या फिर चमड़े से बने फुटबॉल शूज़, जो बारिश होने पर पत्थर जैसे भारी हो जाते थे.

खेल-खिलाड़ियों की तमाम अपडेट्स तो आप तक पहुंच ही रही होंगी. मगर हमने सोचा, क्यों ना आपको टोक्यो ओलिंपिक्स की वो ख़बरें बताई जाएं, जो खेलों से इतर हैं. तो यहां हम आपके लिए ऐसी ही पांच ख़बरें लेकर आए हैं.

1. पहली ख़बर एक विवादित नाम से जुड़ी है. योशिरो मोरी. ये जनाब जापान के पूर्व प्रधानमंत्री हैं. ये टोक्यो ओलिंपिक्स कमिटी के अध्यक्ष भी थे. फरवरी 2021 में इन्होंने बड़े भारी मन से इस्तीफ़ा दिया था. इस्तीफ़ा दिया क्या था, देना पड़ा था. वजह थी, महिला-विरोधी टिप्पणी. हुआ ये था कि एक दफ़ा कमिटी की मीटिंग हो रही थी. इसमें सवाल उठा कि क्या कमिटी के बोर्ड में और भी महिलाओं को शामिल किया जाना चाहिए. इसके जवाब में योशिरो मोरी बोले कि अगर बोर्ड सदस्यों में और महिलाओं को लिया गया, तो ये सुनिश्चित करना होगा कि उनके बोलने के समय पर पाबंदी लगाई जाए. इसलिए कि महिलाएं बोलती बहुत हैं. अपनी बात ख़त्म नहीं कर पातीं. इससे उन्हें, यानी योशिरो को, बहुत चिढ़ होती है.

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योशिरो मोरी. फोटो सोर्स- गेटी इमेजिज

ये टिप्पणी जब पब्लिक में लीक हुई, तो ख़ूब हंगामा मचा. लोगों ने कहा, और बिल्कुल वाज़िब कहा कि योशिरो ने सेक्सिस्ट टिप्पणी की है. ऐसे इंसान को ओलिंपिक्स कमिटी के अध्यक्ष पद पर बने रहने का कोई हक़ नहीं है. मगर योशिरो मोरी ने इस्तीफ़ा देने से इनकार कर दिया. बहुत हो-हल्ले के बाद फरवरी 2021 में उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा. अब ख़बर आ रही है कि योशिरो मोरी की ओलिंपिक्स कमिटी में वापसी हो सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमिटी उन्हें सलाहकार बनाने की सोच रही है. इस नियुक्ति के अंतर्गत योशिरो मोरी को टोक्यो आए विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात का जिम्मा सौंपा जाएगा.

इस बारे में 23 जुलाई को सबसे पहले ख़बर छापी जापानी अख़बार ‘दी अशाही शिम्बुन’ ने. 24 जुलाई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ओलिंपिक्स गेम्स के एक प्रवक्ता मासा तकाया से इस ख़बर पर स्पष्टीकरण मांगा गया. मगर उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया. बोले कि वो इंडिविज़ुअल अपॉइंटमेंट्स पर कोई कॉमेंट नहीं कर सकते हैं. मासा तकाया ने ये भी कहा कि ये मामला टोक्यो ओलिंपिक्स के आयोजन में योगदान देने वालों से जुड़ा है.

2. लिस्ट की दूसरी ख़बर जुड़ी है गर्मी से. जापान में जुलाई और अगस्त में बहुत भीषण गर्मी होती है. उमस इतनी कि जान बेहाल. राजधानी टोक्यो में तो उमस और ज़्यादा असहनीय होती है. वहां जुलाई में औसत ह्यूमिडिटी होती है 78 पर्सेंट. और अगस्त में औसत उमस होती है 83 पर्सेंट. इस गर्मी और उमस के चलते लगता है कि आप पिघल जाएंगे. इस मौसम के चलते एथलीट्स बेहाल हैं. मसलन, आज सुबह यानी 26 जुलाई की सुबह मेन्ज़ ट्रायथलॉन का इवेंट था. ये बड़ा मुश्किल खेल होता है. एक ही साथ खिलाड़ियों को तैरना, साइकल चलाना और दौड़ना होता है. आज सुबह ट्रायथलॉन इवेंट के फिनिश लाइन का नज़ारा ही अलग था. खिलाड़ी इधर-उधर ज़मीन पर निढाल पड़े थे. कुछ खिलाड़ी तो इतने बेदम हो गए थे कि उनके ट्रेनर्स उन्हें सहारा देकर ले गए.

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जापान में इस वक्त काफी गर्मी है. फोटो- गेटी

ये इकलौता इवेंट नहीं था, जहां ऐसा नज़ारा हो. वहां गर्मी के कारण कई खिलाड़ी, अधिकारी और गेम वॉलंटियर्स बेहोश तक हो गए हैं. ट्रायथलॉन, टेनिस, बीच वॉलिबॉल, साइक्लिंग जैसे खुले में होने वाले गेम्स के खिलाड़ियों का हाल सबसे बुरा है. दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी हैं नोवाक जोकोविच. उन्होंने 24 जुलाई को बयान दिया कि टोक्यो की उमस ‘ब्रूटल’ है. ज़ोकोविक बोले कि टेनिस कोर्ट गर्मी को सोख लेती है.

दुनिया के नंबर दो टेनिस प्लेयर डेनिल मेदवेदेव तो गर्मी से निजात पाने के लिए मैदान के किनारे एक चलायमान एयर कंडीशनर का सहारा लेते दिखे. गेम ख़त्म होने के बाद मेदवेदेव बोले कि उन्होंने इतनी बुरी गर्मी नहीं देखी थी. मेदवेदेव ने ये सलाह भी दी कि टेनिस गेम्स का प्रोग्राम शाम को रखा जाना चाहिए. ज़ोकोविक ने तो ये तक कहा कि उन्हें इतनी गर्मी में बीच दोपहर गेम रखने का तुक ही समझ नहीं आ रहा है.

ज़्यादातर खिलाड़ी इसी तरह असहनीय गर्मी की शिकायत कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि जापान की ओलिंपिक्स ऑर्गनाइज़िंग कमिटी को माफ़ी मांगनी चाहिए. क्यों? क्योंकि उन्होंने मौसम के बारे में झूठ कहा. क्या झूठ कहा जापान ने? जापान ने जब 2020 के समर ओलिंपिक्स की मेजबानी का दावा पेश किया, तो उसकी एक पंक्ति थी-

माइल्ड और सनी वेदर के चलते हमारे यहां खिलाड़ियों को अपना बेहतरीन प्रदर्शन देने के लिए आदर्श मौसम मिलेगा.

जापान ने अपने प्रपोज़ल में ये भी लिखा था कि ओलिंपिक्स के प्रस्तावित समय के हिसाब से टोक्यो का मौसम वाज़िब होगा. मौसम की असलियत इन दावों से बिल्कुल अलग है. इसीलिए लोग कह रहे हैं कि जापान ने झूठ बोला. लोगों का कहना है कि टोक्यो में ओलिंपिक्स होस्ट बनने के तमाम गुण हैं. विकसित इन्फ्रास्ट्रक्चर, साफ़-सुथरा शहर, दोस्ताना लोग, आधुनिक सेट-अप. बस एक चीज आड़े आती है. वो है, जुलाई-अगस्त का असहनीय मौसम. इसीलिए लोगों का कहना है कि इन दो महीनों के दौरान गेम्स के आयोजन के लिए टोक्यो मुफ़ीद जगह नहीं थी. इसीलिए लोग जापान के साथ-साथ इंटरनैशनल ओलिंपिक्स कमिटी की भी आलोचना कर रहे हैं. उनका कहना है कि जापान ने तो झूठ कहा, वो कहा ही लेकिन IOC ने क्यों ऐसा होने दिया.

3. तीसरी ख़बर जुड़ी है, असंवेदनशील बयानों के अंतहीन क्रम से. यहां एक पैटर्न में चीजें हो रही हैं. पहले गेम से जुड़ा कोई इंसान आपत्तिजनक बयान देगा. उसपर हो-हल्ला मचेगा. माफ़ी मांगी जाएगी. फिर भी जब चीजें शांत नहीं होंगी, तो उस इंसान को बर्ख़ास्त कर दिया जाएगा. इसी पैटर्न से जुड़े कुछ ऑफ़ेंडर्स के बारे में बताते हैं.

एक सज्जन हैं, केनतारो कोबायाशी. वो जापान के थियेटर वर्ल्ड का जाना-माना नाम हैं. इसी वजह से उन्हें टोक्यो ओलिंपिक्स के उद्घाटन समारोह का डायरेक्टर बनाया गया. ओपनिंग सेरमनी से ठीक एक दिन पहले उन्हें डिसमिस कर दिया गया. क्यों? क्योंकि एक टीवी शो के दौरान उन्होंने कहा था, लेट्स प्ले दी होलोकॉस्ट. केनतारो ने ये बात कही थी 1998 में. उस बयान ने सिर उठाया अब. ओपनिंग सेरमनी से पहले. बहुत आलोचना हुई, तो ऑर्गनाइज़िंग कमिटी ने केनतारो को बर्ख़ास्त कर दिया. मगर आलोचनाएं ख़त्म नहीं हुईं. लोगों का कहना है कि ऐसा इंसान जो यहूदी नरसंहार को चुटकुला समझता हो, सार्वजनिक तौर पर इसके ऊपर जोक मार चुका हो, उसको ओपनिंग कमिटी का डायरेक्टर बनाया ही क्यों गया.

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केनतारो कोबायाशी. फोटो- गेटी

इसके अलावा एक और बर्ख़ास्तगी हुई. इन महाशय का नाम है, केइगो ओयामादा. वो क्रिएटिव डायरेक्टर थे. किसके? टोक्यो ओलिंपिक्स के उद्घाटन समारोह में जो ओपनिंग संगीत बजना था, उसे कम्पोज़ किया था ओयामादा ने. उन्होंने अपने कुछ इंटरव्यू में डींगें हांकते हुए बताया कि जब वो टीनएज़र थे, तो अपनी क्लास के विकलांग बच्चों को तंग करते थे. उनपर दादागिरी झाड़ते थे. इसपर हंगामा हुआ, तो ओयामादा ने माफ़ी मांगी. लेकिन तब भी लोगों की नाराज़गी बनी रही. मजबूरन ओयामादा को भी इस्तीफ़ा देना पड़ा. उनका कम्पोज़ किया हुआ म्यूज़िक भी ओपनिंग सेरमनी में नहीं बजाया गया.

विवाद अभी ख़त्म नहीं हुए हैं. ओपनिंग सेरमनी के लिए बुलाए गए एक कमेडियन को भी इसी तरह हटाना पड़ा. क्योंकि उस कमेडियन ने सलाह दी थी कि उद्घाटन समारोह के एक प्रोग्राम के लिए प्लस-साइज़ वाली एक मॉडल को फैन्सी ड्रेस पहनाकर सुअर जैसा दिखाया जाए.

4. चौथी ख़बर जुड़ी है कोरोना वायरस से. टोक्यो ओलिंपिक्स बिना दर्शकों के हो रहा है. कोरोना के चलते इस दफ़ा स्टेडियम्स खाली हैं. खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के लिए भीड़ की तालियां नहीं हैं. स्टेडियम की कुर्सियों को सफ़ेद, काले और सुनहरे रंग के इस पैटर्न में रंगा गया है कि दूर से देखकर लगता है, लोग बैठे हैं. मतलब दर्शक नहीं, तो कम-से-कम दर्शकों के होने का भ्रम तो रहे. ऑनलाइन मोड पर गेम्स देख रहे दर्शक स्क्रीन पर दिए चीयर बटन को दबाकर संतोष करते हैं. ये सारा त्याग किसलिए? ताकि कोरोना ना फैले.

मगर तमाम एहतियातों के बावजूद कोरोना पीछे लगा हुआ है. टोक्यो में कोरोना के केसेज़ लगातार बढ़ रहे हैं. ओलिंपिक्स गेम्स से जुड़े लोगों में भी केसेज़ जंप हो रहे हैं. 26 जुलाई को ऐसे 16 नए केस सामने आए. इनमें डच टेनिस खिलाड़ी ज़्यॉ रोज़र भी शामिल हैं. कोविड पॉज़िटिव पाए जाने के चलते उन्हें गेम्स से हटना पड़ा. अकेले डच डेलिगेशन में अब तक छह लोग कोविड पॉज़िटिव हो चुके हैं. गेम्स से जुड़े लोगों में अबतक कुल 148 लोग पॉज़िटिव मिले हैं. ओलिंपिक्स गेम्स के भीतर भी एक दर्जन से ज़्यादा लोग पॉज़िटिव पाए जा चुके हैं. खिलाड़ियों के पॉज़िटिव होने के चलते चेक रिपब्लिक को बीच वॉलिबॉल और रोड साइक्लिंग इवेंट्स से हटना पड़ा.

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जापान के लोगों में बहुत पैनिक है. फोटो- गेटी

इन सबके चलते जापान के लोगों में बहुत पैनिक है. यहां एक धड़ा पहले से ही टोक्यो ओलिंपिक्स के आयोजन का विरोध कर रहा था. उनका कहना था कि ये गेम्स ही शापित हैं. इसका आयोजन ही नहीं होना चाहिए. ओपनिंग सेरमनी से पहले वाली रात को भी वहां प्रोटेस्ट चालू थे. हज़ारों लोग रैली निकालकर ओलिंपिक्स आयोजन समिति को कोस रहे थे. कह रहे थे, खेल के लिए लोगों की जान दांव पर लगाई जा रही है. इन रैलियों में ‘गो टू हेल IOC’ और ‘गो टू हेल, ओलिंपिक्स’ जैसे नारे भी लगे.

एक तरफ़ ये प्रोटेस्ट हो रहे थे, दूसरी तरफ़ एक धड़ा मायूस भी था. ये वो लोग हैं, जो पहले ही ओलिंपिक्स के टिकट्स ख़रीद चुके थे. मगर अब ये टिकट किसी काम का नहीं. कई लोगों ने इस बेचारगी को अपने उत्साह में आड़े नहीं आने दिया. वो दूर सड़क पर जमा होकर ओपनिंग सेरमनी की आतिशबाज़ियां देख रहे थे. अब टूर्नामेंट के साथ-साथ केसेज़ भी आगे बढ़ रहे हैं. इसका पहले से ही गंभीर जापान के कोरोना स्प्रेड पर कितना असर पड़ेगा, इसे लेकर काफी चिंताएं हैं लोगों को. आशंका है कि जापान में कोरोना की ये पांचवीं लहर अब तक की सबसे भीषण लहर साबित होगी.

इन चिंताओं पर जापान के एक महामारी विशेषज्ञ ने बड़ी दिलचस्प बात कही. इन एक्सपर्ट का नाम है, केनतारो इवाता. टाइम मैगज़ीन से बात करते हुए केनतारो बोले कि जापान में कोविड केसेज़ आउट ऑफ़ कंट्रोल न हों, इसके लिए ज़रूरी है कि जापानी ओलिंपिक्स खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन न करें. ओनतारो बोले कि अगर जापानी खिलाड़ी ख़ूब सारे गोल्ड मेडल जीतते हैं, तो जापानी जनता ख़ुश होगी. लोग पार्टी करने बाहर जाएंगे. कोविड प्रोटोकॉल्स तोड़ेंगे. लेकिन अगर जापानी खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन नहीं करते, और कोविड केसेज़ भी बढ़ते जाते हैं, तो जापानी जनता फ्रस्ट्रेट हो जाएगी. वो निराश होंगे, तो गेम्स के प्रति उदासीन रहेंगे. ये उदासीनता फिलहाल कोविड स्प्रेड को रोकने में मददगार होगी. सोचिए, कोविड का खौफ़ कितना ज़ियादा है कि अपने ही खिलाड़ियों के हारने की कामना करनी पड़ रही है.

5. लिस्ट की पांचवीं ख़बर है, रशियन खिलाड़ियों से जुड़ी. आपको पता ही है कि रशिया आधिकारिक तौर पर टोक्यो ओलिंपिक्स में हिस्सा नहीं ले रहा. मतलब, उसे हिस्सा लेने नहीं दिया जा रहा. इसकी वजह है, डोपिंग. रूस को सरकार-प्रायोजित डोपिंग स्कैंडल का दोषी पाया गया था. स्विट्ज़रलैंड स्थित ‘कोर्ट ऑफ़ अरबिट्रेशन फॉर स्पोर्ट’ ने 2020 में रशिया पर बैन लगाया था. इस बैन के तहत, 2022 के अंत तक रशिया किसी अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स आयोजन में भाग नहीं ले सकता.

बाद में डोपिंग टेस्ट में साफ़-सुथरे पाए गए रशियन एथलीट्स को टोक्यो ओलिंपिक्स में भागीदारी की अनुमति मिली. मगर रशिया के झंडे तले नहीं. वो ROC, यानी रशियन ओलिंपिक्स कमिटी की टीम बनकर टोक्यो गए हैं. इन्हें ओलिंपिक्स आयोजन स्थलों पर अपने देश का झंडा फहराने की इजाज़त नहीं है. न ही रूसी खिलाड़ियों के जीतने पर रशियन राष्ट्रगान बजाया जाएगा.

ऐसे में ओलिंपिक्स गेम्स शुरू होने से पहले रशियन अधिकारियों और IOC के बीच ख़ूब माथापच्ची चली. रशिया का कहना था कि चलो, हमारा राष्ट्रगान नहीं बजाओगे. मगर ये तो तय करो कि हमारे खिलाड़ियों के जीतने पर कौन सा संगीत बजेगा. ये भी बताओ कि हमारे खिलाड़ियों के यूनिफॉर्म का रंग क्या होगा? और ओलिंपिक्स गेम्स वेन्यू पर हमारा झंडा नहीं लगाओगे, लेकिन हमारे खिलाड़ी जहां ठहरे हैं, वहां तो हमको अपना झंडा लगाने दो. इन सवालों पर IOC और रशियन अधिकारियों में ख़ूब मतभेद रहा.

मसलन, रशिया की स्विमिंग टीम ने अपने कॉस्ट्यूम का स्कैच भेजा IOC को. IOC ने कहा- सॉरी ब्रो, कान्ट अलाउ दिस. क्यों? क्योंकि उस कॉस्ट्यूम पर एक भालू बना था. भालू रूस के राष्ट्रीय प्रतीकों में से एक है. इसीलिए IOC ने कहा, नो भालू. इसपर रशिया ने कहा- बड़े अज़ीब हो यार तुम, भालू बस हमारे यहां ही होते हैं क्या? उधर क्रेमलिन को भालू वाली बात में भी मुस्कुराने का बहाना मिल गया. वहां पुतिन के प्रवक्ता हैं, दिमित्री पेस्कोव. वो पत्रकारों से बोले- चलो, IOC ने माना तो सही कि भालू रशिया का प्रतीक है.

ऐसे ही म्यूज़िक पर भी मनमुटाव रहा. रशिया की आर्टिस्टिक स्विमिंग टीम ने IOC को एक गाना दिया. इसके बोल थे- विद रशिया फ्रॉम लव. टीम बोली, हमारे लिए ये गाना चला देना. IOC ने कहा- ओके, यही गाना चलाएंगे. मगर रशिया बीप करके. मतलब गाना यूं सुनाई देगा- विद बीप फ्रॉम लव.

मतलब रशिया और IOC का हाल ये है कि दोनों हेरा-फ़ेरी के अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी हो गए हैं. रशिया का रवैया ऐसा है कि ठीक है, बैन तो बैन सही, लेकिन हम शोर तो करेंगे. इसीलिए यूनिफॉर्म पर रशियन फ्लैग लगाने की इजाज़त भले न हो, मगर खिलाड़ी नीले, लाल और सफ़ेद रंग की ड्रेस पहनकर सबको रशियन झंडे की याद तो दिला ही देते हैं. इसीलिए रूस ऑफ़िशली न होकर भी गेम्स में भरपूर नज़र आ रहा है.


वीडियो- क्या टोक्यो ओलंपिक में प्रिया मलिक गोल्ड मेडल जीत गईं?

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