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ये नुस्खे आजमाइए, घोड़े की तरह दौड़ेगा स्लो Wi-Fi

Wi-Fi और Wi-Fi राउटर बहुत कॉमन सा शब्द है. आपने सुना होगा और कोरोना में जब आपको वर्क फ्रॉम होम करना पड़ा तब इस डिवाइस की रंग बिरंगी टिम टिमाने वाली बत्तियां आपकी लाइफ लाइन रही होंगी. अब मान लो कि नहीं सुना है तो आपको पहली फुरसत में एक बार रोडीज का वो वाला एपिसोड देखने की जरूरत है, जब नेहा धूपिया Wi-Fi के बारे में बता रही थीं. क्या कहा? नहीं देखना है… क्योंकि लल्लनटॉप किसलिए है. आपकी इसी मोहब्बत पर तो हम फिदा हैं. चलिए फिर हम बताते हैं कि Wi-Fi क्या चीज है.

Wi-Fi बोले तो वायरलेस फ़िडिलिटी. दरअसल वायरलेस फ़िडिलिटी भी कोई नाम है नहीं, ये बस मार्केटिंग कंपनी की तरफ से एक नाम रख दिया गया क्योंकि इस तकनीक का असली नाम है IEEE 802.11. आम बोलचाल की भाषा में यूज करना सच में जंजाल है. सोचिए आप किसी इलेक्ट्रॉनिक दुकान पर जाकर कहते हैं कि एक IEEE 802.11 राउटर दे दो तो कैसा लगता, इसलिए शॉर्ट एण्ड स्वीट Wi-Fi. यहां पर शेक्सपियर भइया थोड़े गलत हो गए, क्योंकि वो तो कह गए “नाम में क्या रखा है’ पर यहां तो नाम में ही सब कुछ रखा है.

Misha Feshchak Sycxk9wndqq Unsplash

Wi-Fi का नाम तो पता चल गया, अब ये भी जान लेते हैं कि ये महाशय करते क्या हैं. Wi-Fi दरअसल इंटरनेट सिग्नल को एक राउटर की मदद से आपके घर या ऑफिस में फैला देता है. ये जो Wi-Fi राउटर होता है वो जुड़ा होता है इंटरनेट के मॉडम से. आजकल ये जो मॉडम है वो भी इस Wi-Fi राउटर के अंदर आने लगे हैं तो बस इंटरनेट का तार और Wi-Fi राउटर और सिग्नल फैल गया चारों तरफ लेकिन एक सीमित जगह में, जैसे घर या ऑफिस. सबसे बड़ा फायदा ये कि आपको तार के झंझट से मुक्ति मिल जाती है और एक साथ इंटरनेट कनेक्शन से बहुत से लोग अपने डिवाइस चला पाते हैं. आजकल तो आपके स्मार्टफोन तक में ये तकनीक पहुंच गई है जहां आप पर्सनल हॉट स्पॉट को यूज करके अपने फोन को Wi-Fi राउटर में बदल सकते हैं.

Wi-Fi में तकनीक का बहाव बहुत ज्यादा हो रहा है जैसे Tesla वाले एलन मस्क “स्टारलिंक” तकनीक लेकर आ रहे हैं जिससे सुदूर गांव में भी इंटरनेट चल सकेगा. एक खबर और आई थी कुछ दिन पहले कि ऐसे Wi-Fi राउटर आ रहे हैं जो एक किलोमीटर की रेंज तक कवरेज दे पाएंगे.

खैर ये तो तकनीक है, हमेशा उन्नत होती है. लेकिन हम अभी भी एक परेशनी से दो चार होते हैं. वो है Wi-Fi राउटर की कमजोर कवरेज से. आप ये सोचकर Wi-Fi लगवाते हैं कि बालकनी में चाय के घूंट लेते हुए लल्लनटॉप पर ‘आजादी 99 साल के लिए मिली है’ वाला वीडियो देखेंगे, लेकिन जब बैठे तो यूट्यूब गोल गोल घूमना चालू कर देता है.

आप मन मारकर सोचते हो कि चलो कोई और दमदार Wi-Fi राउटर लगा लेते हैं तो उसका जुगाड़ तो सर्विस देने वाली कंपनियों ने छोड़ा नहीं है. आजकल कंपनी कोई भी हो चाहे Airtel, Jio, Tata Sky या फिर कोई लोकल इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर सब अपना पहले से कॉन्फ़िगर किया Wi-Fi राउटर देते हैं. अब क्या करें कि बढ़िया स्पीड और कवरेज मिल जाए. कुछ तरीके हैं जिनसे आपकी समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है.

Wi-Fi राउटर की पोजीशन

एक बात समझिए कि Wi-Fi राउटर एक तरफ नहीं, बल्कि चारों तरफ सिग्नल फेंकता है तो उसकी पोजिशन एक दीवार के पास, दरवाजे के ऊपर नहीं बल्कि घर या ऑफिस के बीचों बीच हो तब बात बनेगी. कितने ही घरों में आप देखोगे कि Wi-Fi राउटर घर के मुख्य दरवाजे के ऊपर लगा रखा है और बालकनी या फिर दूसरे कमरे वहां से बहुत दूर हैं. कई लोग तो एक कदम आगे बढ़कर उसके ऊपर एक चाबी टांगने वाला बॉक्स भी लगा देते हैं. ऐसे में तो मिल गई स्पीड और कवरेज. Wi-Fi राउटर को घर या ऑफिस के ऐसे हिस्से में रखिए जो उसका सेंटर हो. यानी सिग्नल चारों तरफ बराबर जा सके.

अन्य डिवाइस से दूर रखें

आजकल Wi-Fi राउटर डुअल फ्रिक्वेंसी के साथ आते हैं. 2.4 गीगाहर्ट्ज और 5.0. आपके स्मार्टफोन या लैपटॉप तो दोनों फ्रिक्वेंसी पर चलते हैं, लेकिन ब्लूटूथ डिवाइस और कई अन्य गैजेट्स भी 2.4 गीगाहर्ट्ज इस्तेमाल करते हैं. आप इन सभी चीज़ों को Wi-Fi राउटर से दूर रखिए जिससे फ्रिक्वेंसी का झगड़ा न हो.

बड़े उपकरण से दूरी

टीवी हो, फ्रिज हो या फिर माइक्रोवेव, मतलब कोई भी बड़ा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जो सिग्नल रूट करते हैं या जिनकी सरफेस गर्म होती है, उनसे दूर ही रखना है. मतलब कोई समझौता नहीं. कितने घर में Wi-Fi राउटर अचार के डिब्बे की तरह फ्रिज पर रखे दिख जाते हैं.

Wi-Fi राउटर की हाइट

जैसे घर के बीचोंबीच रखने से फायदा होता है, वैसे ही जितनी ऊंचाई पर Wi-Fi Router रखेंगे उतनी बढ़िया कवरेज मिलेगी. आपको लगे कि ये तो Wi-Fi राउटर की पोजिशन के साथ बता सकते थे तो अलग से इसलिए बता रहे हैं, क्योंकि आजकल के आधुनिक घरों में ऊंचाई थोड़ा कम होती है. तो अगर जुगाड़ हो तो चढ़ा दीजिए Wi-Fi राउटर को चने के झाड़ पर.

रिफलेक्शन वाली चीजों से अलग रखिए

कोई भी चीज जिससे सिग्नल रुक सकता है या वापस आ सकता है. जैसे मोटी दीवार या बड़े मिरर. उसके सामने या आसपास Wi-Fi राउटर न रखें. छोटा फिश टैंक है तो कोई बात नहीं, लेकिन बड़ा फिश टैंक परेशानी है. कांच तो है ही, साथ में पानी भी सिग्नल अवरोध करने में कम नहीं.

Untitled Design (2)

Wi-Fi सिग्नल बूस्टर

इतनी सब माथापच्ची के बाद भी हो सकता है कि आपकी परेशानी बनी रहे. ऐसा Wi-Fi राउटर की गुणवत्ता की वजह से हो सकता है. अब आपके लिए एक ही उपाय है एक Wi-Fi सिग्नल बूस्टर लेना. Wi-Fi सिग्नल बूस्टर प्लग एंड प्ले वाले छोटे डिवाइस होते हैं जिनसे स्पीड और कवरेज बढ़ाई जा सकती है.

Untitled Design (1)
Image courtesy (tp link)

अब हमारे सुझावों पर अमल कीजिए. उम्मीद है बात बन जाएगी.


सेकेंड हेंड मोबाइल फोन लेने से पहले आपने ये नहीं किया तो पछताना पड़ सकता है!

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