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बैंकों से गोल्ड लोन लेने के लिए क्या-क्या करना होता है?

साल 1957. कल्ट क्लासिक फिल्म आई थी ‘मदर इंडिया’. डायरेक्ट किया था महबूब ख़ान ने. इस फिल्म में एक परिवार साहूकार से लिए कर्ज के बोझ तले इस कदर दब जाता है कि ब्याज चुकाते-चुकाते सब बर्बाद हो जाता है. साहूकार राधा के सोने के कंगन रख लेता है, जिसे फिल्म के अंत में डाकू बना बिरजू (राधा का बेटा) साहूकार सुखीलाल को मारकर वापस ले लेता है.

फिल्म 1957 में आई थी. और अब मां के कंगन काफ़ी घिसे हुए फ़िल्मी एलिमेंट बन चुके हैं. लेकिन आज भी लोग सोने के बदले लोन लेते हैं. जैसे सुनीता देवी (काल्पनिक नाम).

सुनीता देवी गांव में रहती हैं. कोरोना और लॉकडाउन की वजह से उनके घर का बजट गड़बड़ा गया है. घर-गृहस्थी चलाना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में सुनीता देवी अपनी शादी के गहने लेकर साहूकार के पास गईं. साहूकार ने मोटे ब्याज पर उन्हें पैसे दे दिए. उनके सोने के गहने गिरवी रख लिए. अगर सुनीता देवी साहूकार के पैसे वापस नहीं कर पाईं, तो उनके गहने साहूकार के पास ही रह जाएंगे.

गहने गिरवी रखने के बाद ब्याज पर पैसा लेकर जब वो लौट रही थीं, तो रास्ते में उन्हें गांव का ही राजेश मिला. बातों-बातों में उन्होंने पूरी बात राजेश को बता दी. राजेश ने सुनीता देवी को बताया कि अब तो बैंक भी सोने के गहने पर लोन देते हैं, वो भी कम ब्याज पर. और गहना भी सुरक्षित रहता है.

लेकिन सुनीता देवी को नहीं पता कि बैंक सोने के गहने पर लोन कैसे देते हैं. सुनीता देवी की तरह बहुत लोगों को नहीं पता होगा कि बैंक से लोन कैसे ले सकते हैं. कितना ले सकते हैं. कितने समय के लिए ले सकते हैं. लोन नहीं चुकाने पर आपके गहने का बैंक क्या करेगा. हम ये सब समझेंगे आसान भाषा में.

आज के दिनों में सोने के जेवर बेचना या गिरवी रखना, ‘बहुत बड़ी विपत्ति’ का पर्यायवाची है.
एक दौर में सोने के जेवर बेचना या गिरवी रखना, ‘बहुत बड़ी विपत्ति’ का पर्यायवाची माना जाता था.

आरबीआई. यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया. बैंकों के इस सरपंच ने 6 अगस्त को गोल्ड लोन से जुड़ा एक ऐलान किया. आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि बैंक सोने के गहने पर अब 90 प्रतिशत तक लोन दे सकते हैं. 31 मार्च, 2021 तक ये नया नियम लागू रहेगा. इस ऐलान से पहले यह सीमा 75 प्रतिशत थी. यानी बैंक सोने की मार्केट वैल्यू का 90 प्रतिशत तक लोन दे सकते हैं. उदाहरण के लिए अगर सुनीता देवी के सोने की मार्केट वैल्यू एक लाख रुपए है, तो बैंक उन्हें 90 हजार तक लोन दे सकता है. बैंकों के अलावा एनबीएफसी यानी नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन, जैसे मुथूट फाइनेंस, मणप्पुरम फाइनेंस जैसी संस्थाएं भी गोल्ड लोन देती हैं. हालांकि आरबीआई का 90 प्रतिशत वाला ऐलान एनबीएफसी पर लागू नहीं होगा.

सुनीता देवी बैंक से लोन कैसे ले सकती हैं?

सुनीता देवी के पास सोने के गहने हैं, जो उन्होंने अपनी शादी के मौके पर बनवाए थे. उस गहने को लेकर लोन के लिए अगर वो बैंक के पास जाती हैं, तो बैंक सबसे पहले ये देखेगा कि सुनीता देवी के पास जो सोने के गहने हैं, उसकी मार्केट वैल्यू कितनी है. बैंकों के पास वैल्यूअर होते हैं. वैल्यूअर मतलब वो लोग, जो ये बताते हैं कि सोना कितना ‘सोणा’ है. सोने की करंट वैल्यू कितनी है. सोने के गहने कितने कैरेट के हैं. कैरेट यानी जिससे सोने की शुद्धता मापी जाती है. ये भी बता दें कि 10 कैरट को सबसे छोटी इकाई माना जाता है. 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है. लेकिन 24 कैरेट से गहने नहीं बनते. गहने बनाने के लिए दूसरे मेटल मिलाए जाते हैं. अमूमन लोग 22 कैरेट और 18 कैरेट के बीच शुद्धता वाले सोने के गहने बनवाते हैं.

कोरोना वायरस महामारी में लोगों की वित्तीय स्थिति गड़बड़ हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गोल्ड लोन लेने वालों की संख्या इस महामारी में बढ़ी है. (फोटो-पीटीआई)
कोरोना वायरस महामारी में लोगों की वित्तीय स्थिति गड़बड़ हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोल्ड लोन लेने वालों की संख्या इस महामारी में बढ़ी है. (फोटो-पीटीआई)

ये पता करने के बाद कि सुनीता देवी के सोने के मार्केट वैल्यू कितनी है, बैंक उस हिसाब से उन्हें लोन दे देगा. लेकिन एक और बात है. मान लीजिए कि सुनीता के गहने 22 कैरेट के हैं, लेकिन बैंक ने 20 कैरेट का भाव लगाया है लोन देने के लिए, ऐसे में सुनीता के गहने की वैल्यू 20 कैरट में मापी जाएगी. बैंक उसी हिसाब से गोल्ड लोन देगा.

फिर क्या समस्या आई?

सुनीता की शादी के समय उनकी मां ने गहने बनवाए थे, जो अब इस दुनिया में नहीं है. सुनीता के पास गहने तो हैं, लेकिन बिल नहीं है. क्या सुनीता को लोन मिल सकता है? ये जानने के लिए हमने एक बैंक के मैनेजर से बात की. उन्होंने बताया कि पहली बात ये कि जो व्यक्ति उस गहने पर लोन लेना चाहता है, उसे ये साबित करना होगा कि गहने उसी के हैं. बैंक जब ये पक्का कर लेगा कि हां गहने उसी के हैं, तो फिर उसकी वैल्यू तय करने के बाद लोन दे देगा.

मगर सुनीता देवी के पास गहने हैं. बिल नहीं है. ऐसी स्थिति में गहने का बिल नहीं होने पर भी बैंक उन्हें गोल्ड लोन दे सकता है. लेकिन उसके लिए सुनीता देवी का उस बैंक में खाता होना चाहिए, जिस बैंक से वो लोन लेना चाहती हैं. इसके बाद केवाईसी (Know Your Customer) वाला फॉर्म कंप्लीट होना चाहिए. इन सबके के बाद सुनीता को गोल्ड लोन वाला फॉर्म भरना होगा. लोन का प्रोसेस एक या दो दिन में पूरा हो जाता है. कई मामलों में सेम-डे भी लोन अमाउंट खाते में ट्रांसफर हो जाता है.

कितने लाख तक लोन मिल सकता है?

ये सोने की मार्केट वैल्यू के हिसाब से तय होता है. इसके अलावा लोन देने वाले बैंक और दूसरी संस्थाओं पर निर्भर करता है कि वो कितना लोन देती हैं. आम तौर पर 10 हजार से लेकर 20 लाख तक लोन मिल सकता है, जबकि कुछ संस्थाएं करोड़ों रुपए तक का लोन देती हैं.

लोन चुकाने का क्या सीन है?

हर बैंक का अलग-अलग फंडा है. लेकिन सामान्य तौर पर एक साल के लिए लोन दिया जाता है, जो आगे रिन्यू किया जा सकता है. अधिकतम 36 महीने यानी तीन साल तक के लिए लोन लिया जा सकता है. लोन लेने वाला एक बार में लोन चुका सकता है. नहीं तो हर महीने की ईएमआई बंधवा सकता है.

प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फोटो

कितना ब्याज लगता है?

गोल्ड लोन यानी सोने के लोन पर ब्याज अलग-अलग होता है. सरकारी बैंक एसबीआई की बात करें, तो सात से साढ़े सात प्रतिशत तक सालाना ब्याज लगता है. वहीं पंजाब नेशनल बैंक में 8.60 से 9.15 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होता है. अन्य बैंकों के अलग-अलग रेट हैं. जो सात से लेकर 15 प्रतिशत तक हैं.

 सुनीता देवी लोन नहीं चुका पाईं, तो गहने का क्या होगा?

और अगर सुनीता देवी की अचानक मौत हो गई तो? अरे सेंटी मत होइए. किरदार काल्पनिक है और सवाल प्रैक्टिकल.

कोई भी लोन लेते समय एक नॉमिनी का नाम देना पड़ता है. लोन लेने वाले की अगर डेथ हो जाती है, तो नॉमिनी को लोन चुकाना होगा. अगर नॉमिनी नहीं है, तो उस व्यक्ति के जो भी लीगल वारिस हैं, वो लोन अमाउंट चुकाने के बाद गोल्ड वापस ले सकते हैं.

नॉर्थ इंडिया में लोग बड़ी मजबूरी में ही सोना गिरवी रखकर लोन लेते हैं. (सांकेतिक फोटो)
नॉर्थ इंडिया में लोग बड़ी मजबूरी में ही सोना गिरवी रखकर लोन लेते हैं. (सांकेतिक फोटो)

चलते-चलते ये भी जान लीजिए कि सोने की कीमत रोज घटती-बढ़ती रहती है. ऐसे में बैंक रोज के हिसाब से चीजें तय नहीं कर सकते. बैंक के लिए रोज का कोटेशन लेना मुश्किल काम है. ऐसे में वो एक मोटा-मोटी अनुमान लगाते हैं. किस सीजन में गोल्ड का रेट क्या रहेगा, उस हिसाब से सोने के गहने की वैल्यू तक करते हैं.

आम तौर पर सोना गिरवी रखकर लोन लेना अच्छा नहीं माना जाता, क्योंकि हमारे कल्चर में गहनों को महिलाओं की इज्ज़त और परिवार की नाक के साथ जोड़कर देखा जाता रहा है. लेकिन सैकड़ों साल से लोग ऐसा करते आए हैं. ये सिलसिला अब ज्यादा व्यवस्थित तरीके से चलने लगा है.


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