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होली पर लड़कों का साड़ी पहनकर नाचना मज़ाक नहीं, इसके पीछे एक इतिहास है

होली है! हमारी, आपकी हम सबकी होली. लेकिन हमारे बीच एक समुदाय ऐसा है जिसे हम ‘हमारा’ कहने से कतराते हैं, बचते हैं उन्हें अपने में से एक मानने से. इस बिरादरी के लिए हमारे पास कई संबोधन हैं. हिजड़ा. छक्का. किन्नर. ट्रांसजेंडर.

इतिहास की किताबों में थर्डजेंडर का पर्याप्त उल्लेख है. ये राज दरबारों का हिस्सा होते थे. मुगल काल में हरम के सुरक्षा में इन्हें लगाया जाता था. अलाउद्दीन और जहांगीर के दौर में सेना और प्रशासन में ये जागीरदार होते थे. लेकिन वक्त के साथ वो समाज की मुख्यधारा से गायब होते गए. उनकी पहचान जो उन्हें खास बनाती थी, उनके लिए खास जिम्मेदारियां तय करती थी, उसी के चलते समाज ने उन्हें खुद से अलग कर दिया. और उन्हें हास्य का विषय बना दिया गया. होली के मौके पर हम बता रहे हैं उस परंपरा के बारे में जो पहले किन्नरों के बिना अधूरी होती थीं, लेकिन अब होली के जश्न में वो नज़र ही नहीं आते.

तस्वीर साभार-युट्यूब
होली जैसे जैसे पुरुषों का त्योहार बनी, पहले महफिलों से और फिर गीतों से थर्डजेंडर धीरे धीरे बाहर हो गए

होली और शिव का कनेक्शन

पूर्वी उत्तर प्रदेश में होली की शुरुआत शिवरात्रि से ही हो जाती है. और होली की शुरुआत का मतलब गुलाल से खेलना ही नहीं है. होली की शुरुआत का मतलब है होली गीतों की शुरुआत. शिव की आराधना के गीत सबसे पहले गाए जाते हैं. मंगलाचरण की तरह. होली के पारंपरिक गीतों में शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप का जिक्र आता है. शिव के इस रूप से ट्रांसजेंडर्स खुद को आईडेंटिफाई करते हैं. पहले होली के कार्यक्रमों में ट्रांसजेंडर्स खुद शामिल होते थे, पारंपरिक गीतों पर डांस करते थे. उनके बिना ये परंपरा पूरी नहीं मानी जाती थी. लेकिन वक्त के साथ इन परंपराओं से वो गायब हो गए और उनकी जगह उनकी मिमिक्री करने वाले पुरुषों ने ले ली. मर्द साड़ी पहनकर होली के पारंपरिक गीतों पर नाचने लगे, परंपरा से इतर वो प्रहसन करने लगे. ‘बुढ़वा मंगल’ और ‘झुमटा’ में साड़ी पहना कर डांस कर रहे किसी लड़के या बुढ़े को देखकर हंसी छुट जाती है. जानकार बताते हैं कि कम से कम सौ साल से ऐसा ही होता आ रहा है.

झुमटा और बुढ़वा मंगल क्या है

#झुमटा- होली के दिन से शुरू होने वाला सेलिब्रेशन. सप्ताह भर चलता है. गांव या कॉलोनी के लोग किसी देव स्थल पर या सार्वजनिक जगह पर इकट्ठा होते हैं और फिर वहां से टोली बनाकर हरेक घर के बाहर जाकर होली के पारंपरिक गीत और जोगीरा गाते हैं. जोगीरा पॉलिटिकल होते हैं. कंटेंपरेरी होते हैं. नए समय में अश्लील भी होते हैं. झुमटा के गीत इसके बाद शुरू होते हैं. झुमटा के वक्त महिलाएं नहीं होती हैं. लेकिन गाए जा रहे गीत महिलाओं पर भी होते हैं. उस वक्त उन गीतों पर ट्रांसजेंडर के भेस में कोई पुरुष डांस करते हैं.

#बुढ़वा मंगल- होली के अगले मंगलवार को बुढ़वा मंगल होता है. बुढ़वा मंगल पूरी तरह पुरुषों पर केंद्रित होता है. इसमें भी महिलाएं शरीक नहीं होती. इलाके के किसी सार्वजनिक स्थान पर शाम से ही पुरुष इकट्ठा होते हैं और फिर देर रात तक उत्सव मनाते हैं. इसके गीत भद्दे कहे जा सकते हैं. इसमें गाए जा रहे जोगीरा यौन अंगों और संवादों के इर्द-गिर्द घुमते रहते हैं. बुढ़वा मंगल में पहले थर्डजेंडर समुदाय के लोग शामिल होते थे, अब इसमें भी आदमी ही उनका भेष लेकर हिस्सा लेते हैं.

थर्ड जेंडर्स ‘लिंग विहीन' होने के बावजूद भी हमेशा से ‘सेक्स ऑब्जेक्ट' के रूप में देखा जाता रहा है, जिससे लोग उनसे घृणा करते हैं
थर्ड जेंडर को हमेशा से ‘सेक्स ऑब्जेक्ट’ के रूप में देखा जाता रहा है, इसी के चलते लोग उनसे घृणा करते हैं.

होली में थर्ड जेंडर समुदाय की उपस्थिति की परंपरा बेहद पुरानी है. पत्रकार और भोजपुरी साहित्य में काम कर रहे निराला बिदेसिया से हमने बात की. उन्होंने बताया,

काफी पहले से होली में थर्डजेंडर्स की उपस्थिति ठीक वैसे ही रही है जैसै शादी-ब्याह में रस्मों के लिए पंडित या माली की. यह जरूरत 100 साल में घटते-घटते ऐसी हुई है कि पुरुषों के इर्द-गिर्द घुम रहे गांव-गवनई में अब समझा जाता है कि थर्डजेंडर्स सिर्फ डांस करते हैं. जबकि इनकी अलग पहचान रही है. होली के गीत शिवरात्रि के बाद से गाए जाने लगते हैं. थर्डजेंडर्स शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप में विश्वास करते हैं. होली की कोई स्थापित वर्जना नहीं है. न ही किसी देवी-देवता की पूजा की बाध्यता है.

किस स्थिति में हैं थर्डजेंडर
2011 की जनगणना के अनुसार, देश में 4.50 लाख थर्डजेंडर हैं. मगर कई संस्थाओं की मानें तो इनकी वास्तविक संख्या 10 लाख के करीब है. शिक्षा का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है. क्योंकि पढ़ाई के लिए अगर ये स्कूल जाते भी तो वहां लंबे वक्त उनके लिए अलग कॉलम नहीं था. अभी तक उन्हें मेल अथवा फीमेल के कॉलम में खुद को रजिस्टर करना पड़ता था. अप्रैल, 2014 से हर सरकारी दस्तावेज़ में महिला और पुरुष के साथ-साथ थर्ड जेंडर का कॉलम आया. इन्हें आरक्षण देने की मुहिम चल रही है. दिसंबर, 2019 में देश का पहला किन्नर विश्वविद्यालय बना है. भारत में राजनीतिक तौर पर भी थर्डजेंडर्स के साथ न्याय नही दिखाई पड़ता. पहली बार 1994 में इन्हें वोट का अधिकार मिला. 1998 में मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के सोहागपुर विधानसभा से पहली थर्डजेंडर विधायक बनीं. शबनम मौसी. यात्रा में सुविधा, पेंशन, बच्चा गोद लेने का अधिकार, चिकित्सा वगैरह इनके बड़े मुद्दे हैं.

पहली थर्डजेंडर महिला विधायक शबनम मौसी
पहली थर्डजेंडर महिला विधायक शबनम मौसी

ट्रांसजेंडर्स का त्योहारों में सहभागिता पर हमारी बात JNU में ट्रांसजेडर्स पर रिसर्च कर रहीं हर्षिता से हुई. हर्षिता बताती हैं,

इनके ‘असामान्य’ होने की पुष्टि होते ही इन्हें गुरु के पास ला दिया जाता है. गुरु धर्म तय करते हैं. गुरुओं की अपनी परंपरा होती है, वह कई बार इस्लाम को मानने वाले भी होते हैं. लेकिन सामान्यत: ये सभी त्योहार मनाते हैं. होली मनाने को लेकर कोई खास तरीका नहीं होता है. हां, ये होली सबके साथ नहीं मनाते हैं. इन्हें समाज से कटा हुआ रखा गया है तो फिर वो इन त्योहारों में भी खुद को सबसे नहीं जोड़ पाते हैं. बीते कुछ सालों में अब जाकर खुद को आधुनिक तौर में स्थापित कर रहे हैं. टिक-टॉक पर दिखते हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लौंडा नाच या लड़के का लड़की जैसा गेट-अप करके होली वगैरह त्योहारों में शामिल होने का बड़ा कारण भी यही है.

होली को हिंदू वर्ण व्यवस्था के सबसे निचले स्तर पर स्थापित ‘शुद्रों’ का त्योहार भी कहा गया है. काफी हद तक थर्डजेंडर्स भी समाज में वैसे ही ट्रीट किये गये हैं. ऐसे में स्थापित वर्जनाओं को तोड़ने के लिए होली इनके लिए भी जरूरी त्योहार है.

थर्डजेंडर्स की होली के कुछ सवालों को लेकर हमने गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर, प्रमोद तिवारी से बात की. उन्होंने बताया,

ट्रांसजेंडर सामान्यत: सबसे अलग होकर होली मनाते हैं. जिस जगह यह होली मनाते हैं, वहां उनके आलावा किसी को आने की इजाजत नहीं होती. होली के गीतों में इसका जिक्र मिलता है कि पहले जमींदार या संभ्रांत कहे जाने वाले लोग अपने गांव के बाहर पत्नी की तरह थर्डजेंडर्स को रखते थे.

गिले शिकवे भूलकर, दुश्मनों को गले लगाने वाले होली के इस त्योहार में भी हम थर्ड जेंडर्स को पीछे छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं.


वीडियो देखें: पता चला कि बेटा ट्रांसजेंडर है, मां ने यूं किया सेलिब्रेट

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