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जम्मू जैसे ड्रोन अटैक को रोकने के लिए भारत का डिफेंस कितना मजबूत?

एक ड्रोन होता है जो हवा में उड़ सकता है. एक बम होता है, जो विस्फोट कर सकता है. दोनों को एक साथ मिला दें तो एक हवा में उड़ने वाला बम तैयार हो जाता है. ना ड्रोन नई खोज है ना बम. लेकिन ड्रोन और बम को मिलाकर हमला करना कम से कम भारत के लिए तो नई चीज़ है. जम्मू के एयरबेस पर हमला कैसे हुआ, इसकी अभी जांच चल रही है. लेकिन आशंका ये ही है कि ड्रोन से एयरफोर्स बेस पर बम गिराए गए होंगे.

शनिवार रात जम्मू के एयरफोर्स स्टेशन के अंदर दो धमाके हुए. पहला धमाका रात 1 बजकर 37 मिनट पर और दूसरा 1 बजकर 42 मिनट पर हुआ. वायुसेना की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक एक धमाका छत पर और दूसरा जमीन पर हुआ. धमाके के कारण केवल बिल्डिंग की छत को ही नुकसान पहुंचा है. लेकिन असल चिंता ये नहीं है कि नुकसान कितना हुआ. चिंता वाली बात ये है कि एयरफोर्स स्टेशन जैसी अहम जगह पर रात को कोई बम गिरा देता है. और हमें ये तक मालूम नहीं चल पाता कि बम कहां से आया, कैसे गिराया. इसके आतंकी हमला था, इस एंगल से केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. तो बम ड्रोन से ही गिराया गया या किसी और तरीके से, इसकी पुष्टि होना अभी बाकी है. कौनसा विस्फोटक इस्तेमाल हुआ, ये मालूम चल गया है. हमले के लिए खास इंपैक्ट आईईडी का इस्तेमाल हुआ था. इसमें जमीन या किसी सतह से संपर्क होते ही धमाका होता है. दोनों हमलों में विस्फोटक का वजन करीब 2-2 किलो था. नुकसान ज़्यादा हो, इसके लिए धातु के टुकड़े भी भरे गए थे. ये शुरुआती जानकारी है अभी फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट आना बाकी है.

पर विस्फोटक में क्या था?

इससे ज़्यादा फोकस इस बात पर है कि विस्फोटक कैसे गिराया गया. इस पर ड्रोन वाले कयास चल ही रहे थे कि रविवार को जम्मू के इलाके में दो और ड्रोन दिख गए. सुरक्षाबलों को रत्नाचक-कालूचक इलाके में दो ड्रोन नजर आए. पहला ड्रोन रात करीब 11.45 बजे देखा गया. दूसरा ड्रोन रात करीब पौने तीन बजे नजर आया. हाई अलर्ट पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें देखते ही गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. जिसके बाद वो ओझल हो गए. और जम्मू कश्मीर वाले इलाके में ड्रोन दिखना कोई नहीं बात नहीं है. पिछले दो तीन साल में हमें ऐसी कई खबरें देखने को मिली जिसमें पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन से हथियार गिराए गए, या ड्रग्स के लिए ड्रोन इस्तेमाल हुआ.

अगस्त 2019 से अब तक पाकिस्तान से ड्रोन आने के 5 बड़े मामले

#1
13 अगस्त 2019 को पंजाब के अमृतसर में एक गांव में पुलिस को ज़मीन पर गिरा ड्रोन मिला.

#2
सितंबर 2019 में पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तान की तरफ से 8 बार ड्रोन से हथियार गिराए गए. तरनतारण से गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ में ये बात मालूम चली थी.

#3
जून 2020 में जम्मू के कठुआ में बीएसएफ ने एक जासूसी ड्रोन को मार गिराया था.

#4
19 सितंबर 2020 में जम्मू कश्मीर में लश्कर के कुछ आतंकी हथियारों के साथ गिरफ्तार हुए थे. उनसे ये जानकारी मिली थी कि ड्रोन से उनके लिए हथियार गिराए गए थे.

#5
22 सितंबर 2020 को जम्मू के अखनूर सेक्टर में कुछ हथियार मिले थे, जिन्हें ड्रोन से गिराए जाने का संदेह था.

यानी ड्रोन्स का इस्तेमाल पाकिस्तान की तरफ से लंबे वक्त से हो रहा था. इसीलिए ये थ्योरी मजबूत होती है कि एयर बेस पर ड्रोन से बम गिराए गए होंगे.

ड्रोन से बम गिराना भी कोई अभिनव प्रयोग नहीं है. ऐसा दुनिया में लंबे वक्त से हो रहा है. 14 सितंबर 2019 को सऊदी अरब के अबकैक में कच्चे तेल के प्लांट में भयंकर आग लग गई थी. ये दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल प्रोसेसिंग प्लांट था. और इसमें आग लगने की वजह कोई हादसा नहीं था, हमला था. ड्रोन से हमला हुआ था. सऊदी अरब से यमन की सीमा लगती है. यमन के हूथी विद्रोहियों ने एक दर्जन से ज़्यादा ड्रोन्स एक साथ उड़ाकर तेल के प्लांट पर हमला किया था. एक दर्जन ड्रोन्स से सऊदी अरब का बहुत बड़ा नुकसान हो गया था. कई दिनों तक प्लांट को बंद रखना पड़ा. दुनिया में तेल की सप्लाई कम हुई. पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में 10 फीसदी का उछाल आया.

यानी ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने कुछ लाख रुपये के ड्रोन्स से सऊदी अरब का हज़ारों करोड़ का नुकसान कर दिया था. ये ही ड्रोन की खासियत है. बड़ी आसानी से ड्रोन से हमला हो सकता है. ना ज़्यादा खर्चा, ना ज़्यादा रिस्क. मिलिट्री एनालिस्ट बहुत पहले से आगाह कर रहे हैं कि फ्यूचर के वॉरफेयर में हथियारों के साथ ड्रोन्स का इस्तेमाल किया जा सकता है. अभी हमारे लिए ये विदेश की चीज़ थी. लेकिन अब ये खतरा हमारे दरवाजे तक आ पहुंचा है.

ड्रोन को पकड़ क्यों नहीं पाते?

ड्रोन से अगर कोई जम्मू के एयरबेस पर बम गिरा सकता है, तो वो कहीं भी बम गिरा सकता है. अगली जगह कोई हथियार डिपो हो सकता है, कोई महत्वपूर्ण इमारत हो सकती है. किसी भी स्तर पर इस्तेमाल हो सकता है. इसीलिए ये सवाल उठते हैं कि हम इससे कैसे निपटेंगे.

तो कैसे निपटेंगे वाले सवाल से पहले ये सवाल आता है कि ड्रोन को पकड़ क्यों नहीं पाते. हमारे रडार सिस्टम में भी ड्रोन डिटेक्ट नहीं होता है.
इसकी कुछ वजह हैं. जैसे-

#1
ड्रोन की साइज़ छोटी होती है इसलिए रडार के पकड़ में आना आसान नहीं है.

#2
18 – 20 किलोमीटर तो राडार का ब्लाइंड जोन ही होता है. इतनी कम दूरी से उड़कर आता ऑब्जेक्ट रडार की पकड़ में आना मुश्किल होता है.

#3
ड्रोन बहुत ही कम ऊंचाई पर उड़ान भर रहा होगा। ये भी एक कारण है कि राडार की पकड़ में नहीं आएगा.

तो इसका मतलब क्या हम ड्रोन को डिटेक्ट ही नहीं कर सकते?

अभी हमारे पास ड्रोन से निपटने के लिए कोई फुल प्रुफ तरीका नहीं है. इसका मतलब ये है कि आतंकी या आतंकियों के सहारे हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान कमज़ोरी का फायदा उठा सकता है. और पहले भी ये बात आई थी कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकी गुटों के साथ मिलकर ड्रोन हमलों की तैयारी में है. तो क्या जम्मू में हमले से इसकी शुरुआत हो गई… कैसा होगा फ्यूचर वॉरफेयर.

तो कुल मिलाकर दुश्मन के पास ड्रोन से हमले का विकल्प था. इतने दिन उसने इस्तेमाल नहीं किया तो नहीं, अब कर रहा है तो हमें रोकने की तैयारी करने पड़ेगी. अभी हमारी सुरक्षा व्यवस्था इस मॉडल पर है कि दुश्मन ज़मीन के रास्ते से आएगा. सैन्य ठिकानों पर इसलिए जवानों की भारी तैनाती होती है. लेकिन अब आसमान से आने वाले दुश्मन से भी निपटने की तैयारी करनी पड़ेगी.


विडियो- जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर ड्रोन से गिरे ‘खास’ बम ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद क्यों उड़ा दी?

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