Submit your post

Follow Us

संकल्प शक्ति : जो रफाल BJP को डुबो सकता था, उसी को राजनाथ सिंह ने कलावा बांधा

5
शेयर्स

फाइनली भारत को अपना पहला रफाल फाइटर प्लेन मिल गया है. इसे लेने के लिए खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फ्रांस के बॉडो पहुंचे थे. फ्रांस की दसॉ एविएशन ने रफाल का निर्माण किया है. भारत को जिस दिन ये रफाल मिला, वो विजयादशमी का दिन था. लिहाजा रक्षा मंत्री ने रफाल की शस्त्र पूजा की, रफाल पर ॐ लिखा, कलावा बांधा और उसे हैंगर से निकालने से पहले पहियों के नीचे नींबू भी रखे गए. रक्षा मंत्री ने कुछ देर तक इस फाइटर प्लेन में उड़ान भी भरी. अब मई, 2020 तक भारत को रफाल के 36 फाइटर प्लेन की पूरी खेप मिल जाएगी.

भारतीय वायुसेना को मिले पहले रफाल के उड़ान भरते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह.
भारतीय वायुसेना को मिले पहले रफाल में उड़ान भरते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह.

देखने-पढ़ने में कितना अच्छा लग रहा है कि भारत को अपना पहला रफाल मिल गया है. रक्षा मंत्री उसमें उड़ान भर रहे हैं, उसकी पूजा कर रहे हैं और लोग रफाल की तारीफों के पुल बांध रहे हैं. लेकिन बीजेपी और केंद्र सरकार के लिए इस अंजाम तक पहुंचना कभी आसान नहीं था. ये डील शुरुआत से ही विवादों में रही. दसॉ एविएशन का रिलायंस के साथ करार होने के बाद विवाद और भी बढ़ गया. और जब 2019 में लोकसभा के चुनाव हुए तो कांग्रेस ने रफाल को ही सबसे बड़ा मुद्दा बनाया. इतना बड़ा मुद्दा कि ये बीजेपी को डुबो सकता था. लेकिन केंद्र और बीजेपी की संकल्प शक्ति ऐसी दिखी कि बीजेपी तो नहीं डूबी, कांग्रेस ज़रूर डूब गई. दोबारा सत्ता में आने के पांच महीने से भी कम वक्त में केंद्र सरकार को पहला रफाल मिल गया है.

ये भारतीय वायु सेना को मिले पहले रफाएल की तस्वीर है (फोटो: JP DEWAM)
ये भारतीय वायु सेना को मिले पहले रफाल की तस्वीर है (फोटो: JP DEWAM)

सरकार बदली तो शुरू हुआ विवाद

रफाल पर विवाद तब शुरू हुआ, जब 2014 में केंद्र में सरकार बदल गई और मनमोहन सिंह की जगह ले ली नरेंद्र मोदी ने. मनमोहन सरकार ने एयरफोर्स के लिए 126 जेट लेने का टेंडर निकाला था साल 2007 में. कई कंपनियां आईं. अमेरिका, रूस और फ्रांस तक ने अपनी-अपनी कंपनियों के फाइटर प्लेन भारत को बेचने की पेशकश की. जनवरी, 2012 में टेंडर खुला और कंपनियों ने बोली लगानी शुरू की. बात फाइनल हुई फ्रांस की कंपनी दसॉ रफाल से. 126 रफाल जेट्स की डील हुई.  तय हुआ कि 18 रफाल दसॉ एविएशन बनाएगा, जबकि 108 रफाल को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड बनाएगी.

2014 के लोकसभा चुनाव के बाद मनमोहन सिंह की जगह नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनए गए.
2014 के लोकसभा चुनाव के बाद मनमोहन सिंह की जगह नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनए गए.

अभी मनमोहन सरकार फ्रांस से रफाल खरीदने की शुरुआत करती, उससे पहले ही सरकार चली गई. नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए. और जब वो प्रधानमंत्री बने तो उनकी सरकार ने रफाल सौदे पर खर्च होने वाले पैसे को लेकर आपत्ति कर दी. कहा कि बहुत महंगा है. तब रक्षा मंत्री थे मनोहर पर्रिकर. बोले कि हम रफाल नहीं लेंगे, सुखोई एम 30 से काम चला लेंगे. उस वक्त एयर चीफ मार्शल थे अरूप साहा. बोले- नहीं, हमें तो रफाल ही चाहिए.

अप्रैल, 2015 में पीएम मोदी गए फ्रांस. वहां घोषणा की कि भारत फ्रांस से 36 रफाल खरीदेगा. रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने जुलाई, 2015 में राज्यसभा में बताया, ‘फ्रांस से 126 रफाल का जो सौदा यूपीए सरकार में हुआ था, उसे कैंसिल कर दिया गया है. अब नए सिरे से 36 रफाल खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.’ सितंबर, 2016 में भारत और फ्रांस के बीच 36 रफाल का सौदा पक्का हो गया.

अनिल अंबानी की कंपनी से साझेदारी हुई और हंगामा हो गया

3 अक्टूबर, 2016 को भारत की अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस ग्रुप और दसॉ एविएशन ने एक जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट जारी किया.  कहा कि दोनों कंपनियों में 51:49 फीसदी के अनुपात में साझेदारी हुई है और अब दोनों कंपनियों के मिलने के बाद नया नाम होगा दसॉ रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड.

जॉइंट स्टेटमेंट के आते ही बवाल शुरू हो गया. अगले ही दिन कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने सरकार पर आरोप लगाए कि कांग्रेस सरकार जिस रफाल को 715 करोड़ रुपये में खरीद रही थी, मोदी सरकार उसी रफाल को 1600 करोड़ रुपये में खरीद रही है और ये सब अनिल अंबानी की कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है. कुछ दिनों के बाद नवंबर, 2016 में लोकसभा में रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने कहा कि मोदी सरकार ने फ्रांस के साथ जो डील साइन की है, उसके मुताबिक, एक रफाल की कीमत 670 करोड़ रुपये है.

जब पता चला कि राफेल में दसा एविएश की पार्टनर एचएएल नहीं, अनिल अंबानी की कंपनी है तो बवाल ज्यादा बढ़ गया.
जब पता चला कि रफाल में दसॉ एविएशन की पार्टनर HAL नहीं, अनिल अंबानी की कंपनी है तो बवाल ज्यादा बढ़ गया.

नवंबर, 2017 में कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के जमाने में जिस एयरक्राफ्ट की कीमत 526.1 करोड़ रुपये थी, अब वो बढ़कर 1570 करोड़ रुपये हो गई है. तब की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब दिया कि आरोप गलत हैं. कांग्रेस जो 126 रफाल खरीद रही थी और बीजेपी सरकार जो 36 रफाल खरीद रही है, उसमें बड़ा अंतर है, लिहाजा दोनों की तुलना नहीं होनी चाहिए.

एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा ने भी कांग्रेस के आरोपों का खंडन किया. यूपीए सरकार के समय एयर चीफ मार्शल रहे अरूप राहा ने भी एक इंटरव्यू में कहा कि बीजेपी सरकार जो 36 रफाल खरीद रही है, वो यूपीए सरकार की तुलना में भारत को सस्ता पड़ रहा है. फ्रांस की सरकार ने भी मोदी सरकार का साथ दिया और कहा कि इस डील में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है.

अऩिल अंबानी समूह ने राहुल गांधी पर पलटवार किया.
अऩिल अंबानी समूह ने राहुल गांधी पर पलटवार किया.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ये आरोप भी लगाए कि मोदी सरकार ने अनिल अंबानी की कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को इस डील से बाहर करवा दिया. उस वक्त राहुल गांधी ने भी रणदीप सुरजेवाला की बात को आगे बढ़ाया और कहा कि मोदी सरकार ने नियमों को तोड़कर अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाया है.

इन आरोपों पर अनिल अंबानी ने जवाब दिया कि ऐसा कुछ नहीं है. उनकी कंपनी की ओर से कांग्रेस पर मानहानि का केस करने की भी धमकी दी गई और कहा गया कि कांग्रेस को आरोप वापस लेने होंगे. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि रफाल प्रोजेक्ट लंबे समय से अटका हुआ है और इसे जल्दी से जल्दी पूरा करने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पास क्षमता नहीं है. इसके बाद एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा से लेकर अनिल अंबानी तक ने इस डील का बचाव किया और कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया. लेकिन विवाद चलते रहे और बढ़ते रहे.

गुजरात चुनाव में मुद्दा बना रफाल

दिसंबर, 2017 में जब गुजरात में विधानसभा के चुनाव थे, तो राहुल गांधी ने रफाल को मुद्दा बनाने की कोशिश की. रैलियों में बीजेपी पर खूब हमले किए. प्रधानमंत्री मोदी और अनिल अंबानी को सीधे निशाने पर रखा. लेकिन नतीजे आए बीजेपी के पक्ष में. राहुल गांधी को रफाल के जरिए चुनावी जीत नसीब नहीं हुई.

फरवरी, 2018 में जब कांग्रेस ने सरकार से इस डील की डिटेल सार्वजनिक करने की बात की, तो सरकार की ओर से रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब दिया. कहा कि डील की डिटेल नहीं बता सकते, क्योंकि मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा है. राहुल ने कहा कि सरकार डील के बारे में इसलिए नहीं बता रही है, क्योंकि अगर डिटेल सामने आएगी, तो बीजेपी का घोटाला सबके सामने आ जाएगा.

बीजेपी की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जवाब दिया और कहा कि यूपीए सरकार में भी ऐसा ही हुआ था और तब भी राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर जानकारियां नहीं दी गई थीं. फिर राहुल गांधी ने कहा कि नहीं, यूपीए सरकार ने जानकारियां दी थीं. बवाल बढ़ा तो सीपीएम भी कांग्रेस के साथ आ गई और बीजेपी से डील की डिटेल पब्लिक करने की मांग करने लगी. फिर बयान आया फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रो का. इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि कंपनियों के व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए डील की बातें गुप्त रखी गई हैं, लेकिन अगर भारत सरकार चाहे तो डील की डिटेल पब्लिक कर सकती है. इस पर फ्रांस को कोई ऐतराज नहीं है.

राहुल गांधी ने गुजरात के विधानसभा चुनाव में रफाल को मुद्दा बनाने की कोशिश की थी.
राहुल गांधी ने गुजरात के विधानसभा चुनाव में रफाल को मुद्दा बनाने की कोशिश की थी.

सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तक आ गया

फिर क्या हुआ. और बवाल हुआ. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और पूर्व रक्षा राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बयान दिया. कहा कि जो रफाल भारत 1670 करोड़ रुपये में खरीद रहा है, ठीक वही रफाल इजिप्ट और कतर 1319 करोड़ रुपये में खरीद चुके हैं. ये बवाल बढ़ते-बढ़ते इतना बढ़ा कि कांग्रेस ने तेलगु देशम पार्टी और वाइएसआर कांग्रेस के साथ मिलकर मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास मत का प्रस्ताव रख दिया.  इसके बाद राहुल गांधी मोदी सरकार के खिलाफ और ज्यादा मुखर हो गए.

मई, 2018 में राहुल गांधी ने फिर से कहा कि यूपीए सरकार 700 करोड़ रुपये में रफाल खरीदने वाली थी लेकिन पीएम मोदी ने अपने कारोबारी दोस्त को फायदा पहुंचाने के लिए डील की. 20 जुलाई, 2018 को अविश्वास प्रस्ताव पर बहस हुई. प्रस्ताव तो गिर गया, लेकिन राहुल गांधी ने कहा कि सीतारमण ने कहा है कि राफेल डील के पैसे नहीं बताए जा सकते, क्योंकि ये एग्रीमेंट है. राहुल ने दावा किया कि उनकी फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों से बात हुई है, जिन्होंने कहा है कि ऐसा कोई एग्रीमेंट हुआ ही नहीं है. राहुल ने कहा कि पीएम मोदी ने अनिल अंबानी को 45,000 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया. इसका जवाब दिया कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने. कहा कि राहुल बेवजह मैक्रों को इस मामले में घसीट रहे हैं.

फिर कांग्रेस की ओर से आए रणदीप सुरजेवाला. कहा कि रिलायंस की हथियार बनाने वाली जो कंपनी है, वो मोदी सरकार के राफेल खरीदने के फैसले के ठीक 14 दिन बाद बनी है. और जब ये सब चल ही रहा था कि वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा के साथ ही वकील प्रशांत भूषण ने CAG ऑडिट की मांग कर दी. CAG का ऑडिट आ गया. बताया कि कुल 11 मदों में से तीन मदों में पैसे कम खर्च हुए हैं, चार जगहों पर ज्यादा खर्च हुए हैं और तीन जगहों पर यूपीए और एनडीए के खर्च में कोई अंतर नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के जवाब दाखिल करने के बाद कहा कि रफाल खरीद में कोई गड़बड़ी नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के जवाब दाखिल करने के बाद कहा कि रफाल खरीद में कोई गड़बड़ी नहीं है.

और फिर मामला पहुंच गया सुप्रीम कोर्ट

इस मामले को लेकर कई रिट पिटिशन सुप्रीम कोर्ट पहुंची. सितंबर, 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा, सरकार ने जवाब दिया और फिर सुप्रीम कोर्ट ने रिट खारिज़ कर दी. कहा कि कोई गड़बड़ नहीं हुई है. लेकिन कांग्रेस नहीं मानी. कहा कि जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी बने, क्योंकि सरकार ने कोर्ट से झूठ बोला है. वहीं कोर्ट के इस फैसले के बाद बीजेपी के पास अपर हैंड था. दसॉ एविएशन ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया. फिर यशवंत सिन्हा, प्रशांत भूषण और अरुण शौरी ने प्रेस क़ॉन्फ्रेंस की. कहा कि केंद्र सरकार ने तो सीएजी की रिपोर्ट ही सुप्रीम कोर्ट को नहीं दिखाई है, क्योंकि उस वक्त तक तो सीएजी रिपोर्ट आई भी नहीं थी. केंद्र सरकार ने भी मान लिया कि मिसप्रिंट हो गया है. माने गलती हो गई है.

प्रधानमंत्री ने खुद संभाली जवाबी हमले की कमान

और फिर 16 दिसंबर, 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर हमला कर दिया. कहा कि कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश नहीं मान रही है. एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में अपील हुई. सुप्रीम कोर्ट ने फिर से याचिका स्वीकार कर ली. इस बीच लोकसभा के चुनाव भी आ गए थे. कांग्रेस-बीजेपी दोनों ही चुनाव प्रचार में जुटे थे. बीजेपी के प्रचार की कमान थी पीएम मोदी के हाथ में. कांग्रेस के चुनाव प्रचार की कमान थी राहुल गांधी के हाथ में. और फिर जब सुप्रीम कोर्ट ने रफाल पर दूसरी याचिका स्वीकार कर ली तो राहुल ने नारा दिया, ‘चौकीदार चोर है’. कहा, ‘अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है’. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने तो ऐसा कभी नहीं कहा, राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए. राहुल ने सुप्रीम कोर्ट का नाम लेने पर माफी मांगी. और फिर से चुनाव प्रचार में उतरे. नारे लगाने लगे कि चौकीदार चोर है.

मई, 2019 में बीजेपी दोबारा सत्ता में आ गई. कांग्रेस हार गई और इसी के साथ रफाल का मुद्दा भी खत्म हो गया.
मई, 2019 में बीजेपी दोबारा सत्ता में आ गई. कांग्रेस हार गई और इसी के साथ रफाल का मुद्दा भी खत्म हो गया.

चुनाव हार गई कांग्रेस और खत्म हो गया रफाल का मुद्दा

चुनाव हुए, नतीजा आया और कांग्रेस को ऐतिहासिक हार मिली. राहुल गांधी ने हार की जिम्मेदारी ली. कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. बीजेपी फिर से सत्ता में लौटी और देश को मिला पहला रफाल, जिसपर सवारी की रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने. अब अगले साल मई तक वायुसेना के बेड़े में 36 रफाल आ जाएंगे. लेकिन यहां तक पहुंचने में बीजेपी के नेताओं और केंद्र सरकार को जो मशक्कत करनी पड़ी है, वो बीजेपी की संकल्प शक्ति है. अगर ऐसा नहीं होता, तो वो रफाल जो बीजेपी को डुबा सकता था, जो नरेंद्र मोदी सरकार पर सबसे बड़ा धब्बा लगा सकता था, उसी रफाल की शस्त्र पूजा करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फ्रांस नहीं गए होते.


रफाल डील क्या बीजेपी का बोफोर्स स्कैम बन गया है! । दी लल्लनटॉप शो। Episode 35

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

अमिताभ बच्चन तो ठीक हैं, दादा साहेब फाल्के के बारे में कितना जानते हो?

खुद पर है विश्वास तो आ जाओ मैदान में.

‘ताई तो कहती है, ऐसी लंबी-लंबी अंगुलियां चुडै़ल की होती हैं’

एक कहानी रोज़ में आज पढ़िए शिवानी की चन्नी.

मोदी जी का बड्डे मना लिया? अब क्विज़ खेलकर देखो कितना जानते हो उनको

मितरों! अच्छे नंबर चइये कि नइ चइये?

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

इस क्विज़ में परफेक्ट हो गए, तो कभी चालान नहीं कटेगा

बस 15 सवाल हैं मित्रों!

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

इंग्लैंड के सबसे बड़े पादरी ने कहा वो शर्मिंदा हैं. जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

KBC क्विज़: इन 15 सवालों का जवाब देकर बना था पहला करोड़पति, तुम भी खेलकर देखो

आज से KBC ग्यारहवां सीज़न शुरू हो रहा है. अगर इन सारे सवालों के जवाब सही दिए तो खुद को करोड़पति मान सकते हो बिंदास!

क्विज: अरविंद केजरीवाल के बारे में कितना जानते हैं आप?

अरविंद केजरीवाल के बारे में जानते हो, तो ये क्विज खेलो.

क्विज: कौन था वह इकलौता पाकिस्तानी जिसे भारत रत्न मिला?

प्रणब मुखर्जी को मिला भारत रत्न, ये क्विज जीत गए तो आपके क्विज रत्न बन जाने की गारंटी है.

ये क्विज़ बताएगा कि संसद में जो भी होता है, उसके कितने जानकार हैं आप?

लोकसभा और राज्यसभा के बारे में अपनी जानकारी चेक कर लीजिए.