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मोदी सरकार के 6.28 लाख करोड़ वाले इकॉनमिक पैकेज से रोजगार, कारोबार को कितना फायदा?

पिछले साल कोरोना महामारी के आते ही अर्थव्यवस्था की सेहत बताते सूचकांकों ने पाताल का रुख कर लिया था. बस पेट्रोल और डीज़ल के भाव नियमित रूप से आकाश की ओर जाते रहे. आज भी पेट्रोल के भाव में 35 पैसे तो डीजल में 28 पैसे प्रति लीटर का इज़ाफा हुआ है. सरकार के नुमाइंदों से जब पेट्रोल-डीज़ल के भाव पर सवाल पूछा जाता है, तो एक रटा-रटाया सा जवाब मिलता है. कि पेट्रोल-डीज़ल की कमाई से ही तो गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चला रहे हैं, पेट्रोल-डीज़ल पर टैक्स नहीं लेंगे तो अर्थव्यवस्था कैसे सुधरेगी. यानी महंगाई से आम लोगों की अर्थव्यवस्था बिगाड़ कर सरकार देश की अर्थव्यवस्था सुधारने में लगी है. टैक्स के नाम पर गरीबों की ज़ेब से पैसा निकाला जाता है और फिर राहत पैकेज की शक्ल में सरकार कुछ घोषणाएं कर देती है. इसी क्रम में कल एक बार फिर देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक राहत पैकेज का ऐलान किया. लाखों करोड़ रुपये के आंकड़े देकर वित्त मंत्री ने बताया कि इससे रोज़गार बढ़ेगा, तरक्की आएगी, उद्योग-धंधे शुरू होंगे. ऐसे ही एक आर्थिक राहत पैकेज से जुड़े ऐलान सरकार ने पिछले साल भी किए थे. तब से अब तक आपके हाथ क्या लगा.

आने वाले दिनों में सरकार आपके लिए क्या करने के दावे कर रही है?

सरकार ने 6 लाख 28 हज़ार करोड़ के पैकेज का ऐलान किया है. हमारी 200 लाख करोड़ की जीडीपी के 3 फीसदी के बराबर है. इस आंकड़े को एक और तरह से देखा जा सकता है. ये रकम भारत सरकार के एक साल के बजट के करीब 16 फीसदी के बराबर है. तो ये साफ है कि 6 लाख 28 हज़ार करोड़ रुपये वाला आंकड़ा बड़ा है. लेकिन सरकार ये पूरा पैसा अपनी तिजोरी से खर्च नहीं करेगी. कुछ पैसा सरकार खर्च करेगी. बाकी सारा पैसा बैंकों के मार्फत लोन में दिया जा सकता है. हमने दिया जा सकता है इसलिए कहा क्योंकि कर्ज के ऐलान से पैसा लोगों के हाथ में नहीं पहुंचता. किसी को जाकर कर्ज लेना पड़ता है. उसकी शर्तों को पूरा करना पड़ता है और फिर लौटाना भी होता है. महामारी की दो लहरों के बाद ये कर्ज कौन लेगा, देखने वाली बात होगी. लेकिन अभी के लिए सरकार ने कर्ज को भी मदद वाले कॉलम में गिन लिया है. अगर आपने ऐसी किसी कंपनी में काम किया है जहां साल के आखिर में मिलने वाले वेरिएबल पे या PLI को CTC में जोड़ लिया जाता है, तो आप हमारी बात का मर्म आसानी से समझ जाएंगे.

खैर, मुद्दे पर लौटते हैं. गरीबों को नवंबर तक फ्री राशन, भारतनेट योजना और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्चा. इन चीज़ों में सीधे सरकार का पैसा लगेगा. हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार 50 हज़ार करोड़ रुपये खर्च करेगी. इसके अलावा भारत नेट योजना के तहत ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने के लिए 19 हज़ार करोड़ रुपये खर्च होंगे. फ्री राशन पर खर्च मिलाकर सरकार को कुल 1 लाख 20 हज़ार करोड़ अपने पा से खर्च करने हैं. बाकी का लगभग 5 लाख करोड़ लोन की गारंटी के रूप में हैं, जैसा पहले के राहत पैकेजों में होता आया है. कोरोना महामारी शुरू होने के बाद सरकार पिछले साल आत्म निर्भर भारत पैकेज लाई थी जिसमें इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम को बढ़ाया गया था. इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी योजना यानी सरकार बैंकों और नॉनबैंकिंग फाइनेंस इंस्टिट्यूशंस को 100 फीसदी गारंटी देती है. ताकि बैंक इंडस्ट्रीज़ को लोन दें, जिनके पहले से लोन चल रहे हैं उन्हें भी सरकार की गारंटी से और लोन मिलें. पिछले साल 20 लाख करोड़ के आत्मनिर्भर भारत अभियान वाले पैकेज में क्रेडिट गारंटी वाली स्कीम 3 लाख करोड़ की रखी गई थी. उद्देश्य था सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों को आर्थिक मदद देना. इसमें ये प्रावधान था कि अगर किसी उद्योग का पहले से कोई और लोन चल रहा है तो उसके 20 फीसदी तक और लोन मिल सकता था.

होटल मालिक कितना कर्ज ले सकते हैं?

इसके बाद नवंबर 2020 में निर्मला सीतारमण ने क्रेडिट गारंटी स्कीम के नाम पर एक और ऐलान किया. ये 26 तरह के उद्योगों के लिए 3 लाख करोड़ की क्रेडिट गारंटी का ऐलान था. इसमें पावर सेक्टर, कंस्ट्रक्शन, आयरन, टेक्सटाइल, रियल एस्टेट जैसे सेक्टर शामिल थे. फिर 31 मार्च 2021 को सरकार ने तीसरी बार क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम का ऐलान किया. हॉस्पिटैलिटी, टूरिज़्म जैसे कई सेक्टर्स के लिए 3 लाख करोड़ की क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम का ऐलान हुआ. इस तीन लाख करोड़ वाली क्रेडिट गारंटी में सरकार ने एक टॉप अप किया है. डेढ़ लाख करोड़ रुपये और जोड़कर इसे साढ़े चार लाख करोड़ की स्कीम बना दिया है.

इसके साथ ही सरकार ने टूरिज़्म सेक्टर के लिए भी करीब 1 लाख 10 हज़ार करोड़ की क्रेडिट स्कीम का ऐलान किया है. इसके तहत केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय या राज्य सरकारों के पास रजिस्टर्ड टूर गाइड्स 1 लाख रुपये तक का लोन ले सकते है. ट्रेवल और टूरिज़्म उद्योग में शामिल और स्टेकहोल्डर्स जैसे होटल मालिक 10 लाख तक का लोन ले सकते हैं.

सरकार को मांग बढ़ाने वाले कदम उठाने चाहिए?

इस तरह से कोरोना से प्रभावित उद्योगों को सरकार आर्थिक मदद के नाम पर लोन कर्ज बांट रही है. लेकिन लोन स्कीम की अपनी दिक्कतें हैं. सरकार कह रही है कि जिनके पहले से लोन चल रहे हैं या जो डिफॉल्टर हो गए हैं उन्हें भी और लोन मिले. पर ये बैकों पर निर्भर करता है कि वो किसे कितना लोन देते हैं. लोन को लेकर बैंकों की अपनी चिंताएं हैं. इस तरह की लोन स्कीम से बैंक अपना भार बढ़ाने के पक्ष में नहीं रहते हैं. बैंक के लोन डूबने की पूरी आशंका रहती है. इसीलिए सरकार के इस राहत पैकेज में विपक्ष भी कमियां गिना रहा है. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने लिखा कि क्रेडिट गारंटी क्रेडिट नहीं है, क्रेडिट से अधिक कर्ज है, कर्ज में डूबे कारोबार को कोई बैंक कर्ज नहीं देगा. नकदी की कमी से जूझ रहे कारोबारियों को ज्यादा कर्ज़ नहीं, गैर क्रेडिट पूंजी की ज़रूरत होती है. सादी भाषा में – बिना शर्त रोकड़ा. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा कि आर्थिक पैकेज से कोई परिवार अपने रहने-खाने-दवा या फीस पर खर्च नहीं कर सकता. पैकेज नहीं एक और ढकोसला है.

पार्टी लाइन से इतर कई आर्थिक विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि सरकार को मांग बढ़ाने वाले कदम उठाने चाहिए. मांग बढ़ाने के लिए लोगों के हाथों में पैसा होना ज़रूरी है.


विडियो- निर्मला सीतारमण के स्टिमुलस पैकेज की ख़ास बातें जान लीजिए!

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