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ईरान में चीन से आठ गुना तेज़ी से जान ले रहा कोरोना वायरस वहां कैसे पहुंचा?

‘विकसित और समृद्ध देश तो इस वायरस से लड़ लेंगे. लेकिन किसी कमज़ोर मुल्क पहुंचकर ये तबाही मचा देगा.’

कोरोना वायरस को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित करते वक्त WHO को यही चिंता थी. और अब ये चिंता सही साबित हो रही है.

चीन के बाद ईरान में कोरोना वायरस से सबसे ज़्यादा लोगों की मौत हो रही है. पड़ोसी मुल्क यानी टर्की, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और आर्मीनिया ने ईरान के साथ अपनी बॉर्डर सील कर दी है. इस डेंजर अच्छे से समझने के लिए एक नज़र आंकड़ों पर –

चीन

केस – 78,064
मौत – 2,715

ईरान

केस – 95
मौत – 16

ये आंकड़े आपको हल्के लग सकते हैं. लेकिन थोड़ा गुणा-भाग देकर आप इसकी मॉर्टैलिटी रेट देखिए. चीन में कोरोना वायरस का मॉर्टैलिटी रेट 2% है. जबकि ईरान में इसका मॉर्टैलिटी रेट लगभग 16% है. मतलब ईरान में कोरोना वायरस इन्फेक्शन के शिकार हर 100 मरीज़ों में 16 लोग मर जाते हैं.

ईरान कैसे पहुंचा कोरोना वायरस?

ईरान के चीन से मज़बूत ट्रेड लिंक्स हैं. जब कोरोना वायरस की बढ़ती रफ्तार देख ज़्यादातर देश चीन से एयर ट्रेवल सस्पेंड कर रहे थे. ईरान ने भी आधिकारिक रूप से ऐसा ही किया. लेकिन ट्रेवल बैन होने के बावजूद ईरान और चीन के बीच फ्लाइट सर्विस जारी होने की खबरें आईं.

ईरान की सड़कों पर मास्क बेंचता स्ट्रीट वेंडर. इन्फेक्शन रोकने में केवल N95 ही कारगर होते हैं. (सोर्स - रॉयटर्स)
ईरान की सड़कों पर मास्क बेंचता स्ट्रीट वेंडर. इन्फेक्शन रोकने में केवल N95 ही कारगर होते हैं. (सोर्स – रॉयटर्स)

पिछले हफ्ते तक ईरान ये कहता रहा कि हमारे यहां कोरोना वायरस का कोई इन्फेक्शन नहीं है. 19 फरवरी को कोम शहर में दो बुज़ुर्गों की मौत हो गई. कोम ईरान की राजधानी तेहरान से लगभग 150 किलोमीटर दूर है. इस वक्त ये शहर ईरान में कोरोना वायरस का एपिसेंटर बना हुआ है.

25 फरवरी तक यहां मौत का आंकड़ा 15 तक पहुंच गया. इसी दिन कोम के एक अधिकारी अहमद अमीराबादी ने ये दावा किया कि 15 नहीं 50 से ज़्यादा मौत हुई हैं. साथ ही ये भी कहा कि सरकार ने इस आउटब्रेक की घोषणा करने में बहुत देर कर दी. और ये शहर (कोम) पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी से निबटने में नाकाबिल है. कोम की मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के हेड ने स्टेट टेलीविज़न पर कहा कि हेल्थ मिनिस्ट्री ने कोरोना वायरस के आंकड़ों को जारी करने पर रोक लगा रखी है.

बाद में ईरान के डिप्टी हेल्थ मिनिस्टर स्टेट टेलीविज़न पर आए और कहा कि अगर मरने वालों कि संख्या उनके बताए से ज़रा भी ज़्यादा है तो वो इस्तीफ़ा दे देंगे. लेकिन आयरनी देखिए, वो खुद कोरोना वायरस संक्रमण का शिकार हो गए. उन्होंने ये बात इस प्रेस कॉन्फ्रेंस एक दिन बाद ज़ाहिर की. लेकिन जब वो प्रेस से मुखातिब थे तब खांस रहे थे और उन्हें पसीना आ रहा था.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के वक्त पसीना पोंछते ईरान के डेप्यूटी हैल्थ मिनिस्टर इराज हरिर्ची. (सोर्स - ट्विटर)
प्रेस कॉन्फ्रेंस के वक्त पसीना पोंछते ईरान के डेप्यूटी हैल्थ मिनिस्टर इराज हरिर्ची. (सोर्स – ट्विटर)

पहले ऐसा अंदेशा था कि ईरान तक कोरोना वायरस चीनी मज़दूरों और पाकिस्तानी तीर्थयात्रियों से आया है. लेकिन बाद में ईरान के हेल्थ मिनिस्टर ने कहा, “संभवत: ये संक्रमण कोम के एक व्यापारी से फैला है. ये व्यापारी चीन और ईरान के बीच लगातार सफर कर रहा था.” जिस मरीज़ की मौत हुई है, वो ईरान और चीन के बीच कई इनडायरेक्ट फ्लाइट्स से आ-जा रहा था.

ईराने में ज़्यादा मौतें क्यों?

ईरान से आ रही रिपोर्ट्स ये अंदेशा जता रही हैं कि असली आंकड़ों को छुपाया जा रहा है. ईरान में अब तक किसी शहर को क्वारंटीन भी नहीं किया गया है. ईरानी ऑफिशियल्स क्वारंटीन को ओल्ड फैशन मानते हैं.

दरअसल ईरान में कई धार्मिक साइट्स हैं, जहां हर साल लाखों तीर्थयात्री पहुंचते हैं. कोम शहर के शिया धार्मिक स्थल अब भी खुले हैं. इन जगहों पर कई लोग इकट्ठे होते हैं. इन जगहों को बंद करने से कट्टरपंथी मौलवी नाराज़ हो सकते हैं. ईरान इस वक्त धर्म और विज्ञान की लड़ाई का शिकार हो रहा है.

क़ोम शहर में मौजूद हज़रते मौसमहे की दहगाह. (सोर्स - रॉयटर्स)
क़ोम शहर में मौजूद हज़रते मौसमहे की दहगाह. (सोर्स – रॉयटर्स)

ईरान में ढंग के मेडिकल इक्विपमेंट की भारी कमी है. मास्क और हैंड सैनिटाइज़र का शॉर्टेज झेल रहे ईरान के पास दस दिन में हॉस्पिटल खड़ा करने जितनी क्षमता नहीं है. अगर ईरान वक्त रहते उचित कदम नहीं उठाता है तो वो मिडिल-ईस्ट में कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट बन सकता है. जैसे यूरोप मे इटली इस वायरस का केंद्र बना हुआ है.

इटली में क्या हो रहा है?

यूरोप में इटली कोरोना वायरस से सबसे ज़्यादा प्रभावित है. इटली के उत्तरी इलाके का कोडोग्नो शहर. यहां कोरोनावायरस का पहला केस आया. जिस अस्पताल में ये केस आया, वहां इसे लेकर लापरवाही बरती. और अब उत्तरी इलाके में संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है. इटली के प्रधानमंत्री ने भी ये बात मानी. एक नज़र इटली के आंकड़ों पर –

केस – 323
मौत – 11

इटली में मरीज़ों को अस्पताल ले जाते कर्मचारी. मास्क की सबसे ज़्यादा ज़रूरत स्वास्थ कर्मचारियों को ही होती है, क्योंकि ये इन्फेक्शन के सबसे नज़दीक होते हैं. (सोर्स - रॉयटर्स)
इटली में मरीज़ों को अस्पताल ले जाते कर्मचारी. मास्क की सबसे ज़्यादा ज़रूरत स्वास्थ कर्मचारियों को ही होती है, क्योंकि ये इन्फेक्शन के सबसे नज़दीक होते हैं. (सोर्स – रॉयटर्स)

इटली के उत्तरी इलाके के कई शहर इस वक्त बंद हैं. करीब एक लाख लोग क्वारंटीन में हैं. इटली के आसपास दूसरे देश – जैसे कि ऑस्ट्रिया, क्रोएशिया, स्विट्जरलैंड और एल्जीरिया – ने अपने पहले केस दर्ज किए हैं. ये सारे वो लोग थे, जो इटली होकर लौटे थे. इटली के पड़ोसी देशों ने अपनी सरहदें खुली ज़रूर रखी हैं, लेकिन सरहदों से आ रहे लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है.

दूसरी तरफ साउथ कोरिया, जापान में चीन के बाद सबसे ज़्यादा केस हैं, लेकिन इन देशों ने मॉर्टैलिटी रेट कम है.

कुछ दिन पहले ही पता चला कि कोरोना वायरस एसिंप्टोमैटिकली यानी बिना लक्षणों के फैल रहा है. इसका मतलब एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग से भी कोरोना के मरीज़ों की पहचान नहीं की जा सकती. और इससे ग्रसित लोगों की संख्या जारी किए जा रहे आंकड़ों से ज़्यादा है.


वीडियो – जानिए कोरोनावायरस के बारे में सबकुछ, जो चीन के बाद भारत में भी आ सकता है

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