Submit your post

Follow Us

दोबारा फ़ैल रहे कोरोना वायरस से वियतनाम कैसे लड़ कर रहा है?

आज के एपिसोड में बात करेंगे कोरोना से निपटने में नंबर वन रहे एक देश की. कोरोना प्रभावित सबसे शुरुआती देशों में नाम था इसका. मगर अपनी बढ़िया रणनीति से इस देश ने अपने एक भी नागरिक को कोरोना से नहीं मरने दिया. बाहर के देश कोरोना के आगे हाथ-पैर मारते रहे. मगर यहां जीवन सामान्य हो चुका था. बाज़ार खुल गए. सड़कों पर भीड़ लौट आई. लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में छुट्टियां मनाने जाने लगे. इतनी बेफ़िक्री थी कि मास्क तक लगाना ज़रूरी नहीं रह गया था. मगर फिर आया एक वीकेंड और कहानी बदल गई. पता चला कि आप चाहे कितनी भी बेहतर रणनीति बना लें. मगर कोरोना की तलवार तब भी आपके सिर पर लटकती रहेगी.

कहां की बात कर रहे हैं हम?

ये ज़िक्र है चीन की दक्षिणी दिशा में बसे छोटे से देश वियतनाम की. यहां कोरोना का पहला केस मिला था 23 जनवरी को. वियतनाम ने बिना समय गंवाए युद्ध स्तर पर तैयारियां की. मरीज़ों की जल्द-से-जल्द जांच करना. बीमार हुए लोगों को आइसोलेट करना. संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग. प्रभावित लोगों के लिए 14 दिन का अनिवार्य क्वारंटीन. मोबाइल और सोशल मीडिया के रास्ते जनता तक नियमित अपडेट पहुंचाना. ये सारी चीजें वियतनाम की प्रभावी कोरोना रणनीति का हिस्सा थीं. इसकी मदद से अप्रैल ख़त्म होते-होते यहां लोकल ट्रांसमिशन के मामले भी बंद हो गए. कोरोना के कुल मामलों को भी 459 पर समेट लिया गया. जानकारों ने इसे वियतनाम की ‘लेज़र फोकस स्ट्रेटजी’ का नाम दिया. लेज़र फोकस यानी, एकदम सटीक.

Vietnam
वियतनाम (गूगल मैप्स)

मगर इतनी सावधानी के बावजूद अब एक बार फिर वियतनाम कोरोना से जूझ रहा है. तीन महीने बाद अब फिर से वहां दनादन कोरोना फैलने की ख़बर आ रही है. कोरोना के इन नए मामलों की शुरुआत हुई 25 जुलाई को. वियतनाम में दानांग नाम का एक शहर है. यहां पर एक 57 साल के आदमी को बुखार हुआ. अस्पताल में जांच हुई तो पता चला, उन्हें कोरोना है. इस केस से वियतनामी अथॉरिटीज़ परेशान हो गईं. परेशानी की वजह ये थी कि पिछले 99 दिनों से वियतनाम में लोकल ट्रांसमिशन का एक भी केस नहीं आया था. न ही संक्रमित बुजुर्ग की कोई ट्रैवल हिस्ट्री थी. न उनके परिवार और न ही उनके संपर्क में आए किसी इंसान को कोरोना था.

कोरोना की ये दूसरी लहर, पहली लहर के मुकाबले ज़्यादा घातक?

इससे पहले कि प्रशासन कुछ समझ पाता, दानांग शहर में तीन और लोग संक्रमित मिले. 27 जुलाई आते-आते 11 और इन्फेक्टेड लोग सामने आए. प्रशासन ने शहर सील करने का फैसला किया. शहर में करीब 80 हज़ार पर्यटक थे. उन्हें निकालने के लिए फौरन फ्लाइट की व्यवस्था की गई. 28 जुलाई की सुबह शहर में लॉकडाउन लगा दिया गया. प्रशासन को लगा, एक ही शहर की बात है. लेकिन 30 जुलाई आते-आते राजधानी हनोई समेत देश के छह हिस्सों में संक्रमण के नए केस मिले. एक हफ़्ते के भीतर वहां कोरोना के करीब 100 नए केस सामने आए हैं. आपको शायद ये संख्या कम लगे. मगर सोचिए, कोरोना की पहली लहर में यहां कुल मामले 500 भी नहीं पहुंचे थे. ऐसे में एक हफ़्ते के भीतर 100 नए केस आना बड़ी बात है.

Corona Cases In Vietnam
वियतनाम में 31 जुलाई को कोरोना के 135 एक्टिव केस हैं.

वियतनाम में करीब दो दर्जन इलाकों को हॉट-स्पॉट घोषित कर दिया गया है. आशंका है कि कोरोना की ये दूसरी लहर पहली लहर के मुकाबले ज़्यादा घातक है. ऐसा इसलिए कि एक ही साथ देश के कई हिस्सों में संक्रमण के क्लस्टर मिल रहे हैं. 31 जुलाई को ही वियतनाम से एक और बुरी ख़बर आई है. वहां कोरोना के कारण पहली मौत हुई है.

कोरोना की इस दूसरी लहर से निपटने के लिए वियतनाम क्या कर रहा है?

वही जो पहले कर रहा था. स्ट्रेटजी वही है. बस इस बार हबड़-तबड़ और बढ़ गई है. सबकुछ ठीक करने में जुटा वियतनाम अपने हेल्थ एक्सपर्ट्स के अलावा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भी मदद ले रहा है. इसी मदद के संदर्भ में हम आपको एक दिलचस्प ऐंगल बताते हैं. पता है, अमेरिका की एक सरकारी संस्था है. जिसकी अपने देश में नहीं सुनी जा रही. मगर उसी संस्था की सलाह पर अमल करके वियतनाम अपनी कोरोना स्ट्रेटजी बना रहा है.

ये मामला बताने के लिए हमको 2013 का एक घटनाक्रम बताना होगा. उस वक़्त कई स्वास्थ्य जानकार बड़े स्तर पर महामारी फैलने की आशंका जता रहे थे. एक्सपर्ट कह रहे थे कि आने वाले दिनों में दुनिया को किसी बड़ी संक्रामक बीमारी से जूझना पड़ सकता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सहयोग ज़रूरी होगा.

ग्लोबल हेल्थ सिक्यॉरिटी अजेंडा

इसी सोच के तहत अमेरिका की नैशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल ने एक पहल की. उसने संक्रामक रोगों पर रणनीति बनाने के लिए अलग-अलग अमेरिकी विभागों और हेल्थ एजेंसियों को इकट्ठा किया. फिर इस मुहिम में दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भी जोड़ा गया. कुछ महीनों की बातचीत के बाद फरवरी 2014 में लॉन्च हुआ- ग्लोबल हेल्थ सिक्यॉरिटी अजेंडा. शॉर्ट में, GHSA.क्या करना था GHSA को? इसको अपने पार्टनर देशों के साथ मिलकर एक मुकम्मल योजना बनानी थी. ताकि किसी महामारी की चुनौती से वक़्त रहते निपटा जा सके. कई देश GHSA के साथ जुड़े. इन देशों में वियतनाम भी था.

Nsc Ghsa
अमेरिकी नैशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल ने संक्रामक रोगों पर रणनीति बनाने के लिए 2014 में GHSA बनाया.

GHSA के तहत तय हुआ कि संक्रामक बीमारियों की रोकथाम में वियतनाम की मदद करेगा अमेरिका. इस मदद का मुख्य जिम्मा मिला एक अमेरिकी संस्था को. इस संस्था का नाम है- सेंटर्स फॉर डिजिज़ कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन. शॉर्ट में इसे कहते हैं CDC. ये अमेरिका की राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी है. CDC की पहले से वियतनाम में मौजूदगी थी. पिछले करीब दो दशक से CDC की एक शाखा वियतनाम में काम कर रही थी. अब जब GHSA आया, तो CDC और वियतनाम में सहयोग बढ़ गया. CDC की मदद से वियतनाम में एक लंबा-चौड़ा अडवांस मेकनिज़म तैयार किया गया. महामारी की स्थिति में क्या किया जाएगा, इसका ब्लू प्रिंट भी तैयार हुआ.

अब कहानी को फास्ट फॉरवर्ड करके आते हैं 2020 पर

इस साल जनवरी महीने में वुहान से कोरोना की ख़बरें आने लगीं. वियतनाम को पता था कि अगर चीन में कोई महामारी फैली, तो उसके यहां ज़रूर पहुंचेगी. ऐसे में वियतनाम को सबसे पहले ध्यान आया CDC द्वारा तैयार किया गया वो पुराना ब्लू प्रिंट. वियतनाम के प्रधानमंत्री हैं वेन स्वान फुक. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वो कोरोना रणनीति तैयार करते हुए इस ब्लू प्रिंट की भी मदद लें.

Nguyen Xuan Phuc
वियतनाम के पीएम वेन स्वान फुक (फोटो: एपी)

पुरानी योजना के साथ-साथ CDC के नई गाइडलाइन्स पर भी अमल किया गया. इसी सतर्कता के सहारे वियतनाम ने कोरोना की पहली लहर को काबू किया. वियतनाम खुलकर अपनी इस कामयाबी में CDC को भी भागीदार मानता है. अब कोरोना की सेकेंड वेव के आगे भी वियतनाम CDC की मदद ले रहा है. यहां स्वास्थ्य मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार हैं ट्रान डैक फू. उन्होंने CDC की तारीफ़ करते हुए ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ से कहा-

CDC हमारे साथ मिलकर काम कर रही है. कोरोना महामारी से लड़ने के लिए हमने जो योजना बनाई, उसमें CDC ने बहुत मदद की हमारी. हमारी सरकार कोरोना की सेकेंड वेव को लेकर बहुत चिंतित है. इससे पार पाने के लिए हम इस बार भी CDC से मशविरा कर रहे हैं.

जिस CDC को वियतनाम ने इतनी तवज़्जो दी, उसके साथ अमेरिका में क्या सलूक हो रहा है?

वहां आज तक सरकार मास्क पहनने जैसा बुनियादी नियम लागू नहीं कर सकी. CDC चीख-चीखकर कोरोना से आगाह करता रहा. मगर चेतावनियों पर अमल करना तो दूर, अमेरिका में उसे झूठा तक बताया गया. CDC को झूठा कहने वालों में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भी शामिल हैं. 13 जुलाई को ट्रंप ने चक वूलरी नाम के आदमी का ट्वीट रीट्वीट किया. इस ट्वीट में लिखा था-

सबसे ज़्यादा झूठ कोविड-19 पर बोले जा रहे हैं. हर कोई झूठ बोल रहा है. CDC, मीडिया, डेमोक्रैटिक पार्टी, हमारे डॉक्टर सब झूठ बोल रहे हैं. जिन लोगों पर भरोसा करने को कहा जाता है, वही झूठ बोल रहे हैं. मुझे लगता है कि ये सारी बातें चुनाव से जुड़ी हैं. इसका मकसद है अर्थव्यवस्था को पटरी पर न आने देना. ताकि चुनावी मकसद पूरा हो सके.

अपने घर का चिराग और पड़ोसी के यहां रोशनी

अब सोचिए. जिस अमेरिका ने महामारी की रोकथाम के लिए अर्ली वॉर्निंग सिस्टम बनाया, वहीं पर कोरोना सबसे घातक साबित हुआ. अब तक अमेरिका में कोरोना से डेढ़ लाख के ऊपर लोग मर चुके हैं. 46 लाख लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं. और CDC? वो अमेरिकी फंड से वियतनाम में काम कर रहा है. वियतनाम के उसके ऑफिस में 58 लोग काम करते हैं. इनमें आठ अमेरिकी हैं. इस ऑफिस के मुखिया हैं डॉक्टर मैथ्यू मूर. वो और उनकी टीम अमेरिका के पैसों से वियतनाम के लिए कोरोना प्रोटोकॉल बना रही है. वियतनामी स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग दे रही है. CDC की ये छोटी सी टीम अमेरिका में CDC के लंबे-चौड़े स्ट्रक्चर से कहीं ज़्यादा प्रभावी साबित हो रही है. ऐसी ही स्थितियों के लिए शायद वो कहावत चली होगी- अपने घर का चिराग और पड़ोसी के यहां रोशनी.

Matthew Moore Cdc Vietnam
CDC की वियतनाम ऑफिस के मुखिया हैं डॉक्टर मैथ्यू मूर ने वाशिंगटन पोस्ट से बातें शेयर की हैं.

जहां तक बात है कोरोना के लौटने की, तो वियतनाम इसकी अकेली मिसाल नहीं है. चीन में भी ऐसा ही हो रहा है. शिनजियांग समेत उसके कई हिस्सों में कोरोना के नए मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. 18 जुलाई से हॉन्ग कॉन्ग में भी कोरोना के केस रफ़्तार पर हैं. रोज़ 100-150 नए केस आ रहे हैं वहां. जापान का भी यही हाल है. पिछले एक हफ़्ते में करीब छह हज़ार नए केस आए हैं सामने. ऑस्ट्रेलिया भी इसी कैटेगरी में है. जानकारों का कहना है कि ये सारी मिसालें कोरोना की ख़तरनाक प्रवृत्ति की रिमाइंडर हैं. जब तक वैक्सीन नहीं आती, तब तक शायद ऐसे ही कोरोना रह-रहकर सिर उठाता रहेगा.


विडियो- अमेरिका में फेसबुक, गूगल, ऐमज़ॉन और ऐपल क्यों लपेटे में है?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

सौरव गांगुली पर क्विज़!

सौरव गांगुली पर क्विज़. अपना ज्ञान यहां चेक कल्लो!

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

'हिटमैन' रोहित शर्मा को आप कितना जानते हैं, ये क्विज़ खेलकर बताइए

आज 33 साल के हो गए हैं रोहित शर्मा.

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

बजट का कितना ज्ञान है, ये क्विज़ खेलकर चेक कर लो!

कितना नंबर पाया, बताते हुए जाना. #Budget2020

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.

QUIZ: देश के सबसे महान स्पोर्टसमैन को कितना जानते हैं आप?

आज इस जादूगर की बरसी है.

इन नौ सवालों का जवाब दे दिया, तब मानेंगे आप ऐश्वर्या के सच्चे फैन हैं

कुछ ऐसी बातें, जो शायद आप नहीं जानते होंगे.