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स्वेज नहर का जाम खुल गया, इसमें चंद्रमा का क्या रोल था?

आखिरकार मिस्र की स्वेज नहर में फंसे विशालकाय जहाज को निकाल लिया गया. एवर गिवेन (Ever Given) नाम का ये कंटेनर शिप यहां एक हफ्ते से फंसा था. इसके चलते इस जलमार्ग पर सैकड़ों अन्य जहाज भी फंस गए थे. क्योंकि इस वाटर-वे पर इतने बड़े जहाज के खराब होने से तगड़ा जाम लग गया था. सोमवार (29 मार्च) को समुद्री सेवाओं से जुड़ी डच कंपनी SMIT की एक विशेषज्ञ टीम ने कई टग बोट्स (Tug Boats) यानी जहाज को खींचने वाली नाव की मदद से इसे सीधा कर लिया. अब दुनियाभर में आम लोग के मन में ये सवाल जरूर होगा कि आखिर इतने बड़े और भारी-भरकम जहाज को सीधा किया कैसे गया?

एक नहीं कई चुनौतियां आईं

इस जहाज को यहां से निकालने के लिए उस जगह से हजारों टन रेत को हटाना पड़ा और इसके लिए एक हफ्ते तक मशक्कत करनी पड़ गई. इस कंटेनर शिप को दोबारा सीधा करने में इतनी मेहनत और समय क्यों लगा. इसके कई कारण हैं.

# इसका वजन बहुत ही ज्यादा था.

# इतने बड़े शिप के लिहाज से देखें तो यह नहर कोई बहुत ज्यादा चौड़ी भी नहीं है.

# बहुत ज्यादा तेज खींचने पर यह भी डर था कि कहीं उसका कोई हिस्सा टूट ना जाए.

# इस बात का भी डर था कि कहीं इसमें कोई छेद वगैरह ना हो जाए, क्योंकि इस जहाज में ढेर सारा महत्वपूर्ण सामान था और इसके अंदर पानी जाने से ये सामान खराब हो सकते था.

लेकिन तमाम सावधानियों के बाद भी इसके अगले हिस्से के अंदर पानी घुसने के की शुरुआत हो चुकी थी. कुछ लोग तो यहां तक सोच रहे थे की अब जहाज पर से कुछ सामानों को उतारना पड़ेगा, जिससे कि वह हल्का हो सके और आसानी से निकाला जा सके. लेकिन कैसे इस पूरे मिशन को अंजाम दिया गया ये समझते हैं.

सबसे शक्तिशाली नाव को भी बुलाना पड़ा

सबसे पहले आपको टास्क समझाते हैं- यह भारी-भरकम जहाज स्वेज नहर में तिरछा होकर जाम हो गया था. और मिशन ये था कि इसको सीधा करके बाहर ले जाया जाए. इस शिप को सीधा करने के लिए बड़े-बड़े ड्रेजर्स (Dredgers) बुलाए गए. ड्रेजर्स वे नाव होती हैं, जिनका प्रयोग पानी के अंदर की रेत, कीचड़ आदि निकालने में किया जाता है. इन्हीं सब मशीनों और ढेर सारे मजदूरों की मदद से दिन-रात खुदाई की गई. खुदाई शिप के अगले और पिछले हिस्से के पास ज्यादा की गई, जिससे कि नहर के किनारों में फंसे जहाज को आसानी से किनारों से अलग किया जा सके और वह जल्दी से सीधा हो जाए. इसमें से एक ड्रेजर था- Mashhour, जिसको दुनिया का सबसे शक्तिशाली ड्रेजर माना जाता है.

Suez Canal Block
जाम की वजह से 193 किलोमीटर लंबी नहर बंद पड़ी थी.. (तस्वीर: एपी)

बता दें कि स्वेज नहर की चौड़ाई औसतन 200 से 300 मीटर ही है, जबकि इस जहाज की लंबाई 400 मीटर थी. इसलिए एक बार इस जहाज का तिरछा होकर फंस जाने के बाद इसे वापस सही ठिकाने पर लाना कोई आसान काम नहीं था. इसे हटाने के लिए लगभग 30,000 घन मीटर कीचड़ और रेत को निकालना पड़ा. आप यह जानकर चौक जाएंगे कि इतनी रेत से ओलंपिक साइज के लगभग एक दर्जन स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं. इस प्रकार पहले पिछले हिस्से अर्थात स्टर्न को और फिर अगले हिस्से अर्थात् ‘बो’ को धीरे-धीरे किनारे से अलग किया गया.

तो ड्रेजर्स थे नहर के किनारे के हीरो. क्योंकि इन्होंने अपना ज्यादातर काम नहर के किनारे ही किया. लेकिन नहर के बीच में जो हीरो थे, वे थे- शक्तिशाली टग बोट्स. टग बोट्स एक शक्तिशाली और अपेक्षाकृत छोटी नाव होती हैं, जिनका मुख्य काम होता है-बड़े-बड़े जहाजों को बंदरगाहों पर आसानी से पार्क कराने में मदद करना. ये शक्तिशाली टग बोट्स बड़े-बड़े पानी के जहाजों को खींच सकते हैं और घुमा सकते हैं. इस मिशन में लगभग 14 टग बोट्स को लगाया गया था.

चंद्रमा की भी मदद मिल गई

यह सुनकर आप चौक सकते हैं, लेकिन इस मुश्किल के समय चंदा मामा ने भी इस मिशन में ठीक-ठाक सहायता की है लेकिन सवाल है कैसे? रविवार (28 मार्च) की रात पूर्णिमा की रात थी और उस रात एक बड़ा ज्वार भाटा आया जो कि अधिक शक्तिशाली था. जिसे ‘spring tide’ कहते हैं. इसे वृहत्-ज्वार या बसंत-ज्वार भी कहते हैं. इस स्थिति में सूर्य और चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल एक सीध में काम करता है. जिसके कारण यह ज्वार, सामान्य ज्वार की तुलना में अधिक प्रबल होता है. इतने बड़े ज्वार के आने के बाद पानी का स्तर उठने लगा. इससे जहाज को सीधा करने में बहुत मदद मिली. अब इस नाव को ‘ग्रेट बिटर झील’ के पास ले जाया गया है. जहां इसकी अच्छे से जांच होगी.

Suez Canal
23 मार्च से जहाज स्वेज़ नहर में तिरछा होकर फंसा हुआ था. (तस्वीर: एपी)

आपको बता दें कि जहाज के चालक दल के सभी 25 व्यक्ति भारतीय थे. सभी लोग सुरक्षित हैं और इन्होंने अथक मेहनत भी की है. Bernhard Schulte Shipmanagement(BSM) ने उनकी मेहनत और चतुराई की तारीफ की है. एवर गिवेन शिप की ऑपरेटर कंपनी का नाम एवरग्रीन मरीन कोर्पोरेशन है. ये ताइवान की कंपनी है. एवर गिवेन शिप का मालिक जापान के शोई किसेन कैशा हैं.

इस ट्रैफिक जाम से दुनिया को क्या नुकसान हुआ?

जानकारों का कहना है कि इस भयंकर ट्रैफिक जाम के कारण 300 से अधिक जहाज इस नहर के दोनों तरफ फंसे थे. इसलिए बेशक ‘एवर गिवेन’ को सीधा कर लिया गया हो, लेकिन रास्ते को पूरी तरह से खाली होने में लगभग 5 से 7 दिन लग सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इस ट्रैफिक जाम के लगने से हर दिन लगभग 10 अरब डालर का नुकसान हो रहा है.एडमिरल ओसामा राबी, जो कि स्वेज नहर प्राधिकरण के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. उनका कहना है- कि जाम की वजह से उनके देश यानी मिस्र को हर दिन लगभग 14 से 15 मिलियन डॉलर का घाटा हुआ है. ट्रैफिक जाम खुलने के बाद मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी ने भी सोशल मीडिया पर इस नहर को जाम से मुक्त कराने के मिशन में शामिल लोगों के प्रयासों की सराहना की.

इंश्योरेंस की क्या है समस्या?

इस ट्रैफिक जाम की वजह से होने वाले इंश्योरेंस क्लेम की कीमत सैकड़ों मिलियन डॉलर हो सकती है. वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार यह कीमत लगभग 3 बिलियन डॉलर हो सकती है, क्योंकि इस जाम को हटाने में बहुत पैसा खर्च हुआ है और इस जाम की वजह से बहुत ज्यादा घाटा भी हुआ है. इतना बड़ा इंश्योरेंस क्लेम इसलिए हो रहा है. क्योंकि केवल इसी एक जहाज की वजह से पूरी दुनिया के कई उद्योग में कच्चे माल की सप्लाई कम हो गई. और इसी जहाज की वजह से सैकड़ों जहाज कई दिनों से इसी नहर में पडे़ रहे. इस तरीके से यह एवर गिवेन के मालिक के लिए ये एक बड़ा सिरदर्द हो सकता है.

इस जाम का भारत पर क्या हुआ असर?

इस जाम से पूरी दुनिया का व्यापार प्रभावित हुआ है. अभी तक भारत के व्यापार पर कोई सीधा प्रभाव तो नहीं पड़ा है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इतने लंबे जाम से भारत मे आयात होने वाले सामानों की कीमत बढ़ सकती है. इसके अलावा भारत के विनिर्माण उद्योग के लिए आवश्यक सामानों के आने में भी 10 से 12 दिनों की देरी हो सकती है. आपको बता दें कि भारत में दो तिहाई से भी अधिक कच्चा तेल खाड़ी क्षेत्र से आता है और यह तेल मुख्य रूप से स्वेज नहर के रास्ते से आता है. इसलिए स्वेज नहर में एक लंबा जाम भारत में तेल की कीमतों को भी प्रभावित कर सकता है.

संजय भाटिया जोकि ‘फ्राइटवाला’ नामक एजेंसी के सह-संस्थापक हैं, उन्होंने ‘कंस्ट्रक्शन वर्ल्ड’ नामक वेबसाइट को बताया- “भारत में होने वाले आयात मार्च में बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं होंगे, लेकिन इसका असर मई-जून में सामने आएगा और हमको अभी इंतजार करना होगा और देखना होगा की शिपिंग लाइन्स किस तरीके से इस चुनौती पर अपनी प्रतिक्रिया देती हैं.”


ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे नीलोत्पल ने लिखी है.


वीडियो: स्वेज़ नहर में फंसे जहाज से दुनिया को कितना नुकसान हो रहा है? 

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