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तीन विधानसभाओं का हाल, बतकही के अंदाज में

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देहरा

कांगड़ा जिले की सीट है. कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रही विप्लव ठाकुर लड़ रही हैं. उनके मुकाबले हैं प्रेम कुमार धूमल के खास रविंदर रवि. धूमल सरकार में मंत्री रहे. हिमाचल की सियासत के हिसाब से इन्हीं दोनों के बीच फाइट होनी चाहिए. मगर यहां एक निर्दलीय हैं होशियार सिंह राणा. ये मुकाबले में बने हुए हैं. राणा का मुंबई में तगड़ा कारोबार है, तो उनका टैंपो भी हाई बना हुई है. धूमल के सीएम फेस बन जाने के बाद रवि का चुनाव भी दुरुस्त हो गया है. विप्लव वीरभद्र सरकार के कामकाज के आधार पर वोट मांग रही हैं. हालांकि वह कभी वीरभद्र खेमे की खास नहीं रहीं.

विपल्व ठाकुर
विपल्व ठाकुर (दाएं; पीटीआई), विपल्व, होशियार सिंह राणा और रविंदर रवि के बीच देहरा में त्रिकोणीय मुकाबला है

ज्वालामुखी सीट

कांगड़ा जिले की की ही एक और सीट. सिटिंग विधायक कांग्रेस के संजय रत्न. वीरभद्र के खास. खूब प्रोजेक्ट लाए. हालांकि सभी मुकम्मल नहीं हो पाए हैं. एकमात्र कॉलेज जो ज्वालामुखी मंदिर ट्रस्ट के अधीन था, उसे सरकारी कॉलेज में तब्दील करवाया. नई बिल्डिंग भी दी. इसके अलावा दो और कॉलेज, आईटीआई, तहसील और रोजगार केंद्र की सौगत. इनके सामने हैं तीन बार विधायक रहे और पिछली मर्तबा हारे बीजेपी के रमेश ध्वाला. ध्वाला पहली मर्तबा 1998 में बीजेपी से बगावत कर निर्दलीय के तौर पर जीते थे. उनका समर्थन धूमल के लिए उस चुनाव के बाद के हाल में खासा अहम हो गया था. पहले कांग्रेस ने उनके समर्थन का दावा किया. मगर उसमें जबरई थी. जब धूमल को न्योता मिला तो वह बीजेपी में लौट आए. मंत्री पद मिला. उनका दावा है कि विधानसभा में जो पानी की बड़ी दिक्कत है, उसे दूर करने की कोशिशें कीं. पेयजल की समस्या यहां का सबसे बड़ा मुद्दा है. सड़कों की भी हालत खराब है. ज्वालामुखी डिग्री कॉलेज की लड़कियों ने इस बारे में हमें तफसील से बताया.

ज्वालामुखी डिग्री कॉलेज की लड़कियों ने लल्लनटॉप को ये बताया कि उनके यहां पानी हफ्ते भर से एक महीने अंतर पर आता है
ज्वालामुखी डिग्री कॉलेज की लड़कियों ने लल्लनटॉप को ये बताया कि उनके यहां पानी हफ्ते भर से एक महीने अंतर पर आता है

इलाकाई लोग ये तो मानते हैं कि संजय रत्न ने काम खूब करवाए, मगर फिर भी उनकी स्थिति अजेय नहीं बताते हैं. इस सीट पर ओबीसी वोटों की तादाद ज्यादा है. उसमें भी चौधरी बिरादरी सबसे ज्यादा है, जिसे ध्वाला आते हैं. राजपूत मतदाता जिस तरफ झुक जाएंगे, उसकी बल्ले बल्ले है, ये इलाकाई पोल पंडितों ने बताया. समर्थक कहते हैं कि सरकार बनने पर लाल बत्ती पक्की है और इसका वोटर ख्याल करेंगे. नड्डा ने यहां पर ट्रामा सेंटर बनाने का ऐलान किया है. बीजेपी संजय रत्न के दावों के मुकाबले इस ऐलान को पेश कर रही है.

नदौन सीट

हमीरपुर जिले की सीमा पर बसा एक कस्बा. खास क्यों. क्योंकि यहां से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू चुनाव लड़ रहे हैं. एनएसयूआई के रास्ते कांग्रेस की राजनीति में आए. वीरभद्र के एंटी खेमे के माने जाते हैं. और इसीलिए इलाकाई लोग कहते हैं कि राजा खुद नहीं चाहते कि सुक्खू जीतें. जीते तो वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य के लिए मुसीबत बनेंगे. सुक्खू कांग्रेस के घोषणापत्र के ऐलान के वक्त शिमला में नहीं थे. इसे भी उसी नजर से देखा जा रहा है. वीरभद्र तकरीबन हर सीट पर जा रहे हैं, मगर नदौन नहीं आ रहे.

सुखविंदर सिंह सुक्खो और वीरभद्र सिंह के बीच मनमुटाव की खबरें हैं
सुखविंदर सिंह सुक्खो और वीरभद्र सिंह के बीच मनमुटाव की खबरें हैं

सुक्खू 10 साल विधायक रहे, मगर पिछली मर्तबा भाजपा के विजय अग्निहोत्री से हार गए. अब वापसी की फिराक में हैं. उधर विजय अग्निहोत्री बागी के चलते हलकान हैं. भाजपा के नेता रहे लेखराज शर्मा ने यहां से पर्चा दाखिल किया है और वह भी जोरदारी में चुनाव लड़ रहे हैं. अग्निहोत्री के विरोध के बावजूद वह जिला परिषद चुनाव जीतने में सफल रहे और अब विधानसभा की राह तक रहे हैं. विजय को धूमल अपील का भरोसा है. यहां भी देहरा की तरह तिकोना मुकाबला.


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