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CM रहते हुए चुनाव हारने वाले हेमंत सोरेन दूसरी बार मुख्यमंत्री बने

झारखंड. अर्थ होता है जंगल वाला क्षेत्र. छोटा नागपुर पठार पर बसा. 19 साल की उम्र में इस राज्य ने 6 मुख्यमंत्री देख लिए हैं. 10 बार सीएम की कुर्सी पर बैठने वाले बदल गए. तीन बार राष्ट्रपति शासन की वजह से सीएम की कुर्सी खाली रही.

अलग झारखंड स्टेट बनाने की लड़ाई दशकों पुरानी है. अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है. 1912 में हज़ारीबाग़ में सेंट कोलंबस कॉलेज के छात्रों ने पहली बार अलग झारखंड स्टेट बनाने का प्रस्ताव दिया था. आज़ादी के बाद ये क्षेत्र बिहार का हिस्सा बना. लंबी लड़ाई चली कि बिहार सरकार झारखंड के विकास पर खर्चा करे. लेकिन अलग झारखंड का आंदोलन चलाने वाले लगातार बिहार सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते रहे.

एक बार लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि अलग झारखंड उनकी लाश के ऊपर बनेगा. लेकिन सरकार की कीमत पर वो मान गए. 2000 के बिहार विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. कांग्रेस ने शर्त रख दी कि अगर लालू अलग झारखंड की मांग में रुकावट नहीं बनेंगे तो उन्हें बिहार में सरकार बनाने का मौका दिया जाएगा. लालू मान गए. आखिरकार साल 2000 में अगस्त के महीने में संसद में बिहार राज्य पुनर्गठन कानून बना और झारखंड राज्य बनने का रास्ता साफ हुआ. 15 नवंबर, 2000 को पूरे रीति-रिवाज के साथ झारखंड बिहार से अलग हो गया. 

इस राज्य के नए मुख्यमंत्री का नाम हेमंत सोरेन हैं. उन्होंने 29 दिसंबर को राज्य के 11वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हेमंत सोरेन. दिशोम गुरु शिबू सोरेन के दूसरे बेटे. मुख्यमंत्री रहते हुए चुनाव हारने वाले हेमंत सोरेन. 10 अगस्त 1975 को इमरजेंसी के दौरान पैदा हुए हेमंत सोरेन.

झारखंड मुक्ति मोर्चा

शिबू सोरेन इमरजेंसी के दौर में पुलिस से भागे फिर रहे थे. उसी दौरान उनके दूसरे बेटे हेमंत सोरेन पैदा हुए थे.
शिबू सोरेन इमरजेंसी के दौर में पुलिस से भागे फिर रहे थे. उसी दौरान उनके दूसरे बेटे हेमंत सोरेन पैदा हुए थे.

अगस्त 1972 का किस्सा है. छोटा नागपुर के तीन बड़े नेता. पहला नाम शिबू सोरेन. दूसरा नाम बिनोद बिहारी महतो और तीसरे ए.के. रॉय. इन तीनों की मुलाकात होती है. और एक पार्टी निकलकर सामने आती है. पार्टी का नाम झारखंड मुक्ति मोर्चा. 1971 में शेख मुज़ीबुर्रहमान के नेतृत्व में पूर्वी पाकिस्तान में मुक्तिवाहिनी ने लड़कर नया देश बांग्लादेश बनाया था. वहीं से झारखंड मुक्ति मोर्चा का नाम ख्याल में आया था.

साल था 2000 का. तारीख 15 नवंबर. बिरसा मुंडा का जन्मदिन. आदिवासियों के देवता. उसी दिन झारखंड राज्य की नींव रखी गई. शिबू सोरेन को उम्मीद थी कि उनके नाम के आगे झारखंड के पहले चीफ़ मिनिस्टर का प्लेट लगेेगा. शिबू सोरेन रांची में शक्ति प्रदर्शन करते रह गए. कुर्सी पर भारतीय जनता पार्टी ने बाबूलाल मरांडी को बिठा दिया गया.

बाद में शिबू सोरेन तीन बार सीएम की कुर्सी पर पहुंचे. लेकिन कभी 6 महीने से ज्यादा सरकार चला नहीं पाए. पहली बार में उनकी सरकार 10 दिनों में ही गिर गई थी.

एक्सीडेंटल पॉलिटिशियन

25 अप्रैल 2009 की द टेलीग्राफ की रिपोर्ट है. शिबू सोरेन बड़े आहत थे. खफ़ा थे. किससे? अपने बड़े बेटे से. नाम दुर्गा सोरेन. दुर्गा ने पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था. फुरक़ान अंसारी के खिलाफ. कांग्रेस प्रत्याशी और उस वक्त के लोकसभा सांसद. शिबू सोरेन का वरदहस्त था उसपर.

शिबू सोरेन को दिशोम गुरु का दर्जा प्राप्त है.
शिबू सोरेन को दिशोम गुरु का दर्जा प्राप्त है.

26 दिनों के बाद. 21 मई 2009. शिबू सोरेन दिल्ली से एक चार्टर्ड प्लेन में लौट रहे थे. रांची पहुंचने के बाद उन्होंने किसी से बात नहीं की. सीधा अपने घर गए. खबर सुनी और अपने बिस्तर पर निढाल होकर पड़ गए. खबर दिल तोड़ने वाली थी. उनका बड़ा बेटा अब इस दुनिया में नहीं था.

हेमंत सोरेन उस वक्त राजनीति से कोसों दूर थे. पिता की खराब तबियत और भाई की अचानक मौत. हेमंत सोरेन को खाली जगह भरनी पड़ी. एक्सिडेंटल पॉलिटिशियन. संजय गांधी की दुर्घटना में मौत. इंदिरा गांधी की हत्या. पायलट राजीव गांधी को पॉलिटिशियन का चोला पहनना पड़ा. कांग्रेस की कमान संभालनी पड़ी. नेशनल पॉलिटिक्स का वो चक्र झारखंड की राजनीति में दुहराया जा रहा था.

बीजेपी गठबंधन की सरकार गिराकर सीएम बन गए

हेमंत सोरेन 2009 में एक्टिव पॉलिटिक्स में आए. और पार्टी की पॉलिटिक्स में ऊपर चढ़ते गए. 24 जून 2009 से 10 जनवरी 2010 तक राज्यसभा के सांसद रहे. 2009 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी, जनता दल यूनाइटेड और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने साथ में चुनाव लड़ा. बीजेपी और JMM को 18-18 सीटें मिलीं. JMM ने सीएम पद पर अपनी दावेदारी ठोक दी. 25 दिसंबर 2009 को शिबू सोरेन ने सीएम पद की शपथ ले ली. बीजेपी के समर्थन से.

इस सरकार का नक्शा लगातार बदलता रहा. मई 2010 में बीजेपी ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया. 1 जून 2010 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया. अगस्त में BJP-JMM एक बार फिर से राज्य में सरकार बनाने पर राजी हुए. रोटेशन के आधार पर. सितंबर 2010 में बीजेपी के अर्जुन मुंडा ने सीएम पद की शपथ ली. हेमंत सोरन ने डिप्टी-सीएम की.

झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हैं हेमंत सोरेन. (फोटो: पीटीआई)
झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हैं हेमंत सोरेन. (फोटो: पीटीआई)

साल 2011 में सबकुछ ठीकठाक चला. दिसंबर 2012 में डिप्टी सीएम हेमंत सोरेन ने अर्जुन मुंडा से रोटेशन फॉर्मूले पर स्थिति साफ करने के लिए कहा. 3 जनवरी 2013 को अर्जुन मुंडा ने लिखित में जवाब दिया कि रोटेशन फॉर्मूले जैसा कोई समझौता हुआ ही नहीं था.

अब हेमंत सोरेन का असली कद देखने को मिला. उनके कहने पर पार्टी ने 7 जनवरी 2013 को बीजेपी सरकार से समर्थन वापस ले लिया. हेमंत सोरेन कांग्रेस के साथ लगातार बातचीत कर रहे थे, ताकि राज्य में कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई जा सके. लेकिन कांग्रेस से बात नहीं बनी. 18 जनवरी को झारखंड में राष्ट्रपति शासन लग गया. हेमंत सोरेन की खूब आलोचना हुई. पार्टी के अंदर भी हेमंत सोरेन का मजाक उड़ाया गया. लेकिन उनकी नज़र निशाने पर टिकी रही.

6 महीने बाद हेमंत सोरेन झारखंड के नौंवे सीएम के तौर पर शपथ ले रहे थे. कांग्रेस के समर्थन से. एक और सहयोगी उनके साथ जुड़ा था. राष्ट्रीय जनता दल. हेमंत सोरेन ने निर्दलीय विधायकों को भी समर्थन देने के लिए मना लिया था. बिना सरकार में शामिल किए.

सीएम रहते चुनाव हार गए

2014 में झारखंड में चौथी विधानसभा के चुनाव हुए. इस बार झारखंड मुक्ति मोर्चा की कमान हेमंत सोरेन के हाथों में थी. लोकसभा चुनावों में मोदी लहर ने झारखंड को भी अपनी चपेट में लिया था. झारखंड विधानसभा चुनाव में भी लहर कायम रही. बीजेपी ने सरकार बनाई. 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाली पहली सरकार. 

पीएम मोदी ने दुमका और बरहैट, दोनों स्थानों पर चुनावी रैली की.(फोटो: पीटीआई)
पीएम मोदी ने दुमका और बरहैट, दोनों स्थानों पर चुनावी रैली की.(फोटो: पीटीआई)

2014 में हेमंत सोरेन दो सीटों से चुनाव लड़े. झारखंड की उप-राजधानी दुमका और बरैहट से. दुमका शिबू सोरेन की कर्मस्थली रही है. लेकिन हेमंत सोरेन वो सीट बचा नहीं पाए. दुमका में उनको बीजेपी के लुइस मरांडी ने हरा दिया था. बरहैट में उनको जीत मिली. हेमंत सोरेन एक बार फिर से दोनों सीटों से मैदान में थे और दोनों ही सीटों पर उन्होंने जीत दर्ज की. और सूबे के 11वें मुख्यमंत्री बन गए.


वीडियो : झारखंड चुनाव: दुमका में PM मोदी की रैली से हेमंत सोरेन की राह कितनी मुश्किल हुई है

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