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क्या भारत में कोरोना वायरस की तीसरी लहर शुरू हो गई है?

बात शुरू करते हैं इस वीडियो से. पहले आप वीडियो देखिए फिर आगे की बात.

ओडिशा के गंजम ज़िले का वीडियो है. एक टीकाकरण केंद्र के बाहर लोगों की लंबी लाइनें लगी थी. टीके लगवाने के लिए दूर दूर से आकर लोग कई घंटों से लाइन में लगे थे. लेकिन टीके नहीं मिले तो लोगों ने हंगामा कर दिया. मेडिकल ऑफिसर की तरह से बताया गया कि उनके पास टीके ही पर्याप्त नहीं थे, तो लोग हिंसक हो गए.

टीकाकरण में ढिलाई?

ऐसे वीडियो देश के हर हिस्से में वैक्सीन की किल्लत की सच्चाई है. 21 जून से सरकार ने वैक्सीन पॉलिसी में बदलाव किया तो टीकाकरण के नए रिकॉर्ड बने. बड़े बड़े हॉर्डिंग-पोस्टर्स में मुफ्त टीकाकरण का श्रेय प्रधानमंत्री को दिया गया. टीकों की किल्लत वाले परसेप्शन को बदलने की कोशिश हुई. लेकिन ज्यादा टीके लगाने वाला ये सारा कार्यक्रम हफ्तेभर ही चला. अब फिर से पहले जितने ही टीके लग रहे हैं. टीकों का रोज़ाना वाला आंकड़ा लगभग 40 लाख ही रहता है. गुरुवार को देश में 40 लाख 23 हज़ार टीके लगाए गए. जुलाई महीने में औसतन 41 लाख 61 हज़ार टीके हर दिन लगे हैं. जून महीने में 39 लाख 89 हज़ार टीके औसतन हर दिन लगे थे. यानी पिछले महीने से अभी टीकों में कोई भारी बढ़ोतरी नहीं हुई है. रफ्तार अब भी उतनी ही मंदी चल रही है. अब तक देश में करीब 37 करोड़ डोज़ ही लग पाए हैं. इनमें से दोनों डोज़ सिर्फ 7 करोड़ लोगों को ही लगे हैं.

तो टीकाकरण की गति तो ज्यादा नहीं बढ़ पाई है लेकिन अब कोरोना के मामले कई राज्यों में चिंता बढ़ाने लगे हैं. महाराष्ट्र, केरल समेत देश के कई राज्यों में रोज़ाना वाले कोरोना के मरीजे फिर से बढ़ने लगे हैं. महाराष्ट्र में 6 जुलाई को 6740 मामले आए थे. सात जुलाई को 8418 मामले और 8 जुलाई को 9558 नए मामले आए. यानी नए मामलों को ग्राफ फिर से ऊपर की तरफ जाने लगा है. इसी तरह केरल में 6 जुलाई को 8 हजार नए मामले थे. 7 जुलाई को 14 हजार, 8 जुलाई को बढ़कर 15600 और आज 13772 नए मामले आए हैं.

केरल से तीसरी लहर के संकेत?

आपको याद होगा, पिछले साल कोरोना के शुरुआती मरीज केरल में ही आना शुरू हुए थे. कोरोना की दूसरी लहर में भी महाराष्ट्र के बाद केरल में ही ज्यादा मामले आ रहे थे. अब वैसा ही ट्रेंड केरल में फिर दिखने लगा है. जब पूरे देश में कोरोना के मामले घट रहे हैं तो केरल में ग्राफ ऊपर की तरफ जाने लगा है. पिछले एक महीने में देशभर में रोज़ाना वाले कोरोना मामले लगभग आधे हो गए हैं. एक महीने पहले 80 हज़ार केस रोज़ाना आ रहे थे अब घटकर लगभग 43 हजार हो गए हैं. लेकिन ये ट्रेंड केरल में नहीं दिखता है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में केरल के कोरोना वाले आंकड़ों का विश्लेषण मिलता है. रिपोर्ट के मुताबिक केरल में जनवरी में कोरोना के जितने नए मामले आ रहे थे वो देश के 60 मामलों के बराबर था. जनवरी में देश उस मोड में आ गया था कि अब कोरोना चला गया है. रोज़ाना वाले आंकड़े भी लगातार घट रहे थे. लेकिन जनवरी में जब देश में केस घट रहे थे तो केरल में ग्राफ ऊपर की तरफ जाने लगा था. जब कोरोना की दूसरी लहर आई और पूरे देश में अप्रैल और मई में रोज़ाना वाले आंकड़ों ने सारे रिकॉर्ड तोड़े. तब केरल का हिस्सा रोज़ाना वाले आंकड़ों में 10 फीसदी का था. और जैसा दूसरी लहर के पहले हुआ था, अब फिर वैसा ही होने लगा है. देश में कोरोना के केस घट रहे हैं लेकिन केरल में बढ़ रहे हैं. अभी देश में जितने कोरोना के मरीज़ रोज़ आ रहे हैं उसमें केरल की हिस्सेदारी करीब 32 फीसदी की है. इसीलिए चिंता जताई जा रही है कि क्या केरल से तीसरी लहर के संकेत मिलने लगे हैं.

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पहाड़ों में लोगों की भीड़ वाले वीडियो भी दिखाए गए. लव अग्रवाल ने कहा कि अगर ऐसे ही लापरवाही हुई, तो हालात और खराब हो जाएंगे.

राज्यों में बढ़ते कोरोना केसों को केंद्र की सरकार दूसरी लहर का ही हिस्सा मान रही है. यानी अभी तीसरी लहर की बात नहीं आई. और तीसरी लहर ना आए, इसे लेकर केंद्र की सरकार एक्शन के मोड में है. केंद्र सरकार ने केरल, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, और मणिपुर अपनी कमेटी भेजी हैं. ताकि हालात ज्यादा बिगड़ने से पहले काबू किया जा सके.

तीसरे लहर के लिए मोदी सरकार कितनी तैयार?

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ऑक्सीजन को लेकर एक बैठक की. बैठक में प्रधानमंत्री ने ऑक्सीजन का प्रोडक्शन बढ़ाने और सप्लाई का रिव्यू किया. मीटिंग के बाद प्रधानमंत्री के दफ्तर से एक प्रेस रिलीज जारी हुआ. इसके मुताबिक देश में 1500 से ज्यादा PSA ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं. इन ऑक्सीजन प्लांट्स के जरिए 4 लाख से अधिक ऑक्सीजन बेड को सपोर्ट मिलेगा. पीएम ने निर्देश दिए हैं कि इन प्लांट को जल्द शुरू किया जाए. ऑक्सीजन प्लांट्स के प्रबंधन के लिए अस्पताल स्टाफ को ट्रेनिंग देने के भी प्रधानमंत्री ने निर्देश दिए हैं.

तो कुल मिलाकर प्रधानमंत्री की ये सक्रियता दिखाती है कि सरकार इमेज मेकओवर में लगी है. दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठे थे. सरकार की खूब किरकिरी हुई थी. उस परसेप्शन को सरकार बदलने के लिए तीसरी लहर के लिए इंतजाम पुख्ता करना चाहती है.

लैम्बडा वेरिएंट कितना ख़तरनाक?

एक तरफ हमारे सामने तीसरी लहर की चुनौती है, तो कोरोना वायरस भी रूप बदलकर नई चुनौतियां पेश कर रहा है. अब लैम्बडा नाम के वैरिएंट की चर्चा है. दुनिया के महामारी विशेषज्ञों के लिए लैम्बडा वैरिएंट अब नई उलझन है. दुनिया के 25 देशों में इस वैरिएंट के मामले आए हैं. इस वैरिएंट को C.37 भी कहा जाता है. WHO ने इसे ‘वेरिएंट ऑफ इंटरेस्‍ट’ घोषित किया है. यानी अभी ये वैज्ञानिकों की जिज्ञासा का मामला है. अभी करीब 25 देशों में इस वैरिएंट के मामले आए हैं. पहला मामला पिछले लेटिन अमेरिकी देश पेरू में आया था. भारत में इस वैरिएंट को लेकर आज स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्प्रेंस में क्या कहा गया.

भारत में अभी इस वैरिएंट का एक भी मामला नहीं आया है. लेकिन लेटिन अमेरिका देशों में इसका संक्रमण बढ़ रहा है. और विदेश यात्राओं के ज़रिए भारत समेत पूरी दुनिया में ये वैरिएंट फैलने का खतरा है

लैम्बडा के अलावा डेल्टा वैरिएंट के मामले भी ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में बढ़ रहे हैं. यूके और रूस में कोरोना का संक्रमण कम होने के बाद अब फिर से बढ़ रहा है. ये ट्रेंड देखते हुए माना जा रहा है कि कोरोना का संक्रमण एक बार फिर बढ़ सकता है. एक बार फिर लॉकडाउन वाली स्थिति आ सकती है. उम्मीद है इस बार हमारी सरकार नई लहर के लिए बेहतर तैयारी करेगी. वैसा हाल नहीं होगा जैसा हमने अप्रैल और मई के महीने में देखा. पुरानी गलतियों से सबक लेकर सरकार ऑक्सीजन और बेड्स की बेहतर व्यवस्था करेगी. और सबसे ज़रूरी है टीकाकरण को रफ्तार देना.


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