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क्या भारत ने कोरोना संक्रमण के ग्राफ को फ्लैट कर लिया है?

5 मई, 2020 तक भारत में कोरोना वायरस के 32 हज़ार से ज्यादा एक्टिव केस हैं. 13 हज़ार से ज्यादा लोग ठीक होकर डिस्चार्ज कर दिए गए हैं. 1600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. 1 से 5 मई के बीच 13 हज़ार से ज्यादा नए केस आये हैं. इस बीच कुछ लोग कह रहे हैं कि भारत ने कोरोना के कर्व को फ्लैट कर दिया है. आसान भाषा में इसका मतलब ये है कि भारत में कोरोना के मामले एक सामान गति से बढ़ रहे हैं. कोई उछाल नहीं रही. आइए जानते हैं कि क्या भारत ने वाकई कोरोना के कर्व को फ्लैट कर दिया है?

सबसे पहले जान लेते हैं कि हाल के दिनों में भारत में कोरोना वायरस के कितने केस देखे गए हैं. नीचे लाइन चार्ट के जरिए पिछले दो हफ्ते में कोरोना के केस हर दिन कितने बढ़े.

ग्राफ अभी नीचे गिरता नहीं दिख रहा

भारत में अभी तक लॉकडाउन के दो राउंड पूरे हो चुके हैं. तीसरा राउंड 4 मई से शुरू हुआ है, जो 17 मई तक जारी रहेगा. कई मेडिकल एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर भारत ने लॉकडाउन न किया होता, तो अभी तक कोरोना वायरस के लाखों केस होते. एक्सपर्ट्स को अब भी डर है कि कोरोना के मामले और बढ़ सकते हैं, क्योंकि कोरोना केस का ग्राफ अभी नीचे गिरता नहीं दिख रहा. कुछ एक्सपर्ट्स यह भी कह रहे हैं भारत ने अब तक 12 लाख टेस्ट भी नहीं किए. हाल के दिनों में टेस्ट होने थोड़े से बढ़े, तो कोरोना संक्रमण के मामले भी बढ़ गए. ऐसे में भारत को लगातार टेस्ट करना चाहिए.

‘अगले चार-छह सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण’

AIIMS के डायरेक्टर हैं रणदीप गुलेरिया. कोरोना की कोर टीम का हिस्सा हैं, जो भारत में इस महामारी की निगरानी और समीक्षा कर रही है. वह कोरोना के रोकथाम, मैनेजमेंट टीम आदि में भी शामिल हैं. इंडियन एक्सप्रेस  ने इनसे लम्बी बातचीत की है. भारत में कोरोना के केस को फ्लैट होने को लेकर गुलेरिया कहते हैं-

लॉकडाउन ने कोरोना वायरस के ग्राफ को समतल करने में मदद की है, लेकिन ग्राफ अभी तक नीचे की ओर नहीं जाता दिखा है. यह चिंता का कारण है. ऐसे में अगले चार-छह सप्ताह बहुत महत्वपूर्ण रहने वाले हैं, क्योंकि लॉकडाउन हमेशा के लिए नहीं रह सकता. सबसे बेहतर तो ये होगा कि कोरोना संक्रमण के शून्य मामले हों. लेकिन अभी ये होता नहीं दिख रहा. हर दिन कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं. लेकिन मामले ऐसे भी नहीं बढ़ रहे कि हम संभाल न सकें.

तीसरे चरण के लॉकडाउन में केंद्र और राज्य सरकारों ने ढील देनी शुरू की है. जिलों को रेड, ऑरेंज और ग्रीन में बांटकर अलग-अलग जोन में हालत देखकर छूट दी गई है. ढील के साथ लॉकडाउन बढ़ाए जाने और कोरोना के बढ़ते केस को लेकर गुलेरिया बताते हैं-

जहां से सबसे ज्यादा मामले आ रहे हैं, वहां सही तरीके से काम करके रोकथाम की जाए. ऑरेंज जोन को ग्रीन जोन में ले जाने की कोशिश की जानी चाहिए. ग्रीन जोन, ग्रीन जोन में ही रहें, इसके लिए भी विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है. कोशिश रहनी चाहिए कि रेड जोन से ग्रीन जोन में कोई न जाए.

कम्युनिटी ट्रांसमिशन को लेकर उन्होंने बताया-

कई जिलों में बहुत कम मामले हैं. कइयों में एक भी मामले नहीं. ऐसे में लगता नहीं कि भारत में कम्युनिटी ट्रांसमिशन होगा. पूरे जिले को रेड जोन बनाए जाने के बदले हमें लोकल हॉटस्पॉट पर विशेष ध्यान देना चाहिए. माइक्रो प्लानिंग करने की जरूरत है. आप एक लेवल पर पूरे भारत को नहीं देख सकते. भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले और वायरस से हो रही मौत तुलनात्मक रूप से कम है. हमें कुछ समय के लिए कोरोना के साथ संभलकर जीना सीखना होगा.

‘सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती दिखीं’

लॉकडाउन के दूसरे चरण के आख़िरी में बढ़ते मामले के बाद भी तीसरे चरण में ढील दी गई. शराब के ठेके खोल दिए गए. लोग सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क को ताक पर रखकर पागलों की तरह ठेके की ओर भागे. शराब के दुकान खुलने से क्या कोरोना के मामले में बढ़ोतरी दिखेगी? इस सवाल पर लाइवमिंट  से बात करते हुए फोर्टिस मलार हॉस्पिटल, चेन्नई के कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट के. राजकुमार बताते हैं-

शराब की बिक्री और मिसमैनेजमेंट ने वाकई सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा दी हैं. हमने 4 मई को दुकानों में बहुत ज्यादा भीड़ देखी. इससे वायरस और फैलेगा ही. मुझे अगले एक-दो हफ्ते में कोरोना वायरस के मामलों में विस्फोट होने का डर है.

भीड़ का अंदाजा इस वीडियो को देखकर लगा सकते हैं.

कोरोना के लक्षण पहले दिन से नहीं दिखते हैं. औसतन चार दिन तक लगते हैं. कई बार तो हफ्ते से भी ज्यादा. ऐसे में जो लोग अभी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, वे कुछ दिन पहले ही संक्रमित हो गए थे. ऐसे में सेकंट वेब को लेकर गुलेरिया बताते हैं-

स्पेनिश फ्लू से भारत में अधिकतर 70 लाख मौत सेकंड वेव में हुई. माने एक बार मामला करीब-करीब संभल गया था. फिर दोबारा महामारी फैल गई. चीजें सामान्य होते ही लोगों को लगा कि खतरा टल गया है. सभी खुश हो गए. हमें इतिहास से सीखना होगा. लॉकडाउन के कारण हमें वक्त मिला. मामले तेजी से नहीं बढ़े. हम पहले से ही तैयार थे. इस महामारी से समुदाय के स्तर पर लड़ना होगा, न कि हॉस्पिटल में.


विडियो- साइंसकारी: कोरोना वायरस कितनी गर्मी झेल पायेगा?

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