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इतिहास की सबसे बड़ी लूटों में एक ने हैती को कैसे बर्बाद कर दिया?

कोलंबस,कोलंबस,चिट्ठी है आई,आओ कोई नया मुल्क ढूंढें चल के भाई

1998में एक फ़िल्म आई थीजीन्स.इसी की हिंदी डबिंग वाले एक गीत के बोल हैं ये.इसमें गीतकार एक ख़्वाहिश करता है.वो ऐसी जगह खोजना चाहता है,जहां लड़ाई,भूख और गंदी राजनीति ना हो.ऐसी जगह,जहां हंसती गाती हुई ज़िंदगी हो बस.और उसके इस तलाश की प्रेरणा है,कोलंबस.जिसे कई लोगदी ग्रेट एक्सप्लोररकहते हैं. 

मगर क्या सच में कोलंबस ग्रेट था? जिस मुल्क का क़िस्सा सुना रहे हैं,उसकी कहानी सुनते हुए आपके आगे कई चेहरे बेनक़ाब होंगे.इनमें से एक चेहरा तो कोलंबस का ही है.दूसरा है,दुनिया के सबसे उदार और मानवीय देशों में गिना जाने वाला फ्रांस.जिसने इस देश में इतनी बड़ी डकैती की कि उसे इतिहास की सबसे बड़ी,सबसे क्रूर डकैतियों में गिना जाता है.इसी डकैती के चलते इस देश को तरक्की करने,फलनेफूलने का मौका नहीं मिला.वो दुनिया के सबसे गरीब,सबसे अराजक देशों में गिना जाने लगा. 

इसी देश में पिछले कई महीनों से भीषण गैंगवॉर छिड़ा हुआ है.इतनी हिंसा हो रही है कि सरकार से हालात संभाले नहीं संभल रहे.इसकी राजधानी जैसे किसी शरणार्थी कैंप में तब्दील हो गई है.क्या है ये पूरा मामला,विस्तार से बताते हैं. 

कोलंबस नॉट दी ग्रेट 

ये बात है– 3अगस्त, 1492की.इस रोज़ कोलंबस तीन जहाज़ और90आदमियों को साथ लेकर स्पेन से रवाना हुआ.मार्च1493में स्पेन वापसी के साथ उसकी ये यात्रा ख़त्म हुई.इस बीच कोलंबस ने कैरेबियन्स स्थित कई द्वीप देखे.वहां रहने वाले मूलनिवासियों को डराधमकाकर उसने ढेर सारा सोना और मसाले जमा किए. 

कोलंबस
स्कूल की किताबों में हम कोलंबस को एक महान खोजी के रूप में जानते. पर उसकी कहानी का एक क्रूर पक्ष हम सभी को नहीं पता.

इसी यात्रा के दौरान कोलंबस के साथ एक हादसा हुआ.क्या था ये हादसा?कोलंबस तीन जहाज़ लेकर स्पेन से रवाना हुआ था.इन जहाज़ों के नाम थेसेंटा मारिया,निना और पिंटा.इनमें सबसे चर्चित था,सेंटा मारिया.ये बात है24दिसंबर, 1492की.कोलंबस की टीम को एक नया द्वीप दिखा था.वो उसी की तरफ़ बढ़ रहे थे कि रास्ते में सेंटा मारिया मूंगे की एक चट्टान से जा टकराया.इस टकराव के चलते जहाज़ टूट गया.उसमें रखा सारा सामान नज़दीकी द्वीप पर उतारना पड़ा. 

कौन सा द्वीप था ये?कोलंबस के मुताबिक,ये द्वीप जापान था.उसने सोचा,मैं सबसे पहले यहां पहुंचा हूं.मैं स्पेन का प्रतिनिधि हूं,इसलिए आज से ये जगह हमारी हुई.अपने लोगों के बीच बैठकर कोलंबस ने उस द्वीप को स्पेन की कॉलोनी का दर्जा दे दिया.इसका नाम रखाला नवीदाद.ये स्पैनिश भाषा का शब्द है.हिंदी में इसका मतलब होता है,पैदाइश.ये ला नवीदादअमेरिकाज़में स्थापित किया गया पहला यूरोपियन सैटलमेंट था.अमेरिकाज़ का मतलब था,उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका.जिसका एक टर्मन्यू वर्ल्डभी है. 

ला नवीदाद है कहां? 

दुनिया में एक हिस्सा है,वेस्ट इंडीज़.ये करीब3,200किलोमीटर की परिधि में फैली द्वीपों की एक श्रृंखला है.इसी का एक भाग हैहिस्पैनियोला.ये शब्द स्पैनिश भाषा के एक शब्दइस्पानोलाका अंग्रेज़ी संस्करण है.इस्पानोला का अर्थ होता है,छोटा स्पेन.इस द्वीप को ये नाम कोलंबस ने दिया था.जिस जगह कोलंबस के जहाज़ का ऐक्सिडेंट हुआ,वो हिस्पैनियोला की उत्तरी तटरेखा के पास है. 

कोलंबस रेप्लिका
कोलंबस के प्रसिद्ध जहाज़ सेंटा मारिया का रेप्लिका जिसमें वो स्पेन से कैरेबियन्स पहुंचा था.

कोलंबस जब यहां पहुंचा,तब इस जगह परताइनोनाम के मूलनिवासियों की बसाहट थी.ये लोग तकरीबन400ईसा पूर्व से ही यहां रह रहे थे.हिस्पैनियोला के अलावा उनकी बसाहट जमैका,क्यूबा,प्यूरेटो रिको,वर्ज़िन आइलैंड्स और बहामास में भी थी.ताइनो एक आत्मनिर्भर सोसायटी थी.काफी उन्नत संस्कृति थी उनकी.आपनेबारबिक्यूऔरटोबैकोशब्द सुना है.ये शब्द ताइनो की ही शब्दावली का हिस्सा हैं. 

जिसे हम हिस्पैनियोला कहते हैं,उसे ताइनो पुकारते थेहेती.उनकी भाषा में हेती का मतलब थापहाड़ी भूमि.कोलंबस का जब पहली बार ताइनो से सामना हुआ,तो उसने अपनी डायरी में ताइनो का वर्णन कुछ इस तरह किया

इनके शरीर बहुत गठीले,चेहरा बहुत सुंदर होता है.ये हथियार नहीं रखते.न हथियारों के बारे में जानते हैं.इन लोगों को तो हमारा नौकर होना चाहिए. 

ये लाइन कोलंबस के घृणित इरादों की एक झलकी थी.आने वाले दिनों में उसने इन मूलनिवासियों पर भीषण अत्याचार किए.इन अत्याचारों की शुरुआत हुई1493से.आपकोला नवीदादयाद है?वो पहली कॉलोनी,कोलंबस ने1492में बसाया था.इसके बाद वो स्पेन लौट गया था.वो अपने पीछे काम संभालने के लिए अपने39आदमियों को वहां छोड़ गया था. 1493में कोलंबस यहां वापस लौटा.उसने देखा कि मूलनिवासियों ने उसके बनाए सैटलमेंट को उजाड़ दिया है.उसके छोड़े39लोग भी मर गए हैं. 

इस दफ़ा कोलंबस ज़्यादा बड़े बेड़े के साथ स्पेन से आया था.अपने साथ लाए स्पैनिश लड़ाकों और हथियारों के सहारे उसने फिर से यहां एक कॉलोनी बनाई.इसका नाम रखा,लाइसाबेला.इसकी राजधानी थी,सैंटो डोमिनगो.पहली कॉलोनीला नवीदादहिस्पैनियोला की उत्तरी कोस्ट पर थी.और ये दूसरी कॉलोनीलाइसाबेलाद्वीप के पूर्वी हिस्से में पड़ती थी. 

हेती और डोमिनिकन रिपब्लिक
हेती के उत्तरपूर्व किनारे पर कोलंबस ने जो सेटलमेंट बनाया था, उसका नाम रखा ला नवीदाद.

स्पेन ने कोलंबस को इस इलाके का गवर्नर बना दिया.वो1499तक इस पद पर रहा.कैसा था ये दौर?कोलंबस को हेती में सोने की ख़दानें मिली थीं.उसने मूलनिवासियों को सोना निकालने में झोंक दिया. 14बरस से ऊपर से हर मूलनिवासी को सोने की एक तयशुदा मात्रा प्रशासन को देनी पड़ती थी.जो ये नहीं दे पाते थे,मार दिए जाते थे.सोना देने की ये प्रति व्यक्ति मात्रा इतनी थी कि मूलनिवासी दिनरात इसमें लगकर भी उतना सोना जमा नहीं कर पाते.उनके पास खेती तक का समय नहीं था.अनाज की कमी से लोग भूखों मरने लगे.अत्याचार और भुखमरी से बचने के लिए मूलनिवासी आत्महत्या करने लगे. 

कभी ज़हर खाकर,कभी पहाड़ से कूदकर,सैकड़ों मूलनिवासियों ने जान दे दी. 1492में जब कोलंबस यहां पहुंचा,तब यहां करीब तीन लाख मूलनिवासी रहते थे. 1496आतेआते इनमें से एक लाख से ज़्यादा लोग मर गए.इनमें आधी से अधिक संख्या आत्महत्या करके मरने वालों की थी.संहार का स्केल इतना बड़ा था कि50बरस बीततेबीतते यहां केवल500मूलनिवासी बच गए. 

तो अगली बार जब कोई कोलंबस को ग्रेट कहे,तो इन मूलनिवासियों को याद कीजिएगा.कोलंबस ने उनका नरसंहार किया था.केवल हत्याएं नहीं की थीं उसने.मूलनिवासी महिलाओं का बलात्कार करवाना.नंगा करके उनकी परेड निकालना.वो लोगों को ग़ुलाम बनाकर उनके गले में जंज़ीर डलवा देता था.उसी अवस्था में भूखाप्यासा रखकर घंटों उन्हें खटाता.जब कोई बेदम होकर गिर पड़ता,तो कोलंबस के लोग उनकी गर्दन काट देते.ताकि जंज़ीर खोलने की मेहनत ना करनी पड़े.वो नौदस साल की बच्चियों को सेक्ल स्लेव बनाकर बेचता था.इसके बारे में एक दोस्त को बताते हुए कोलंबस ने अपनी चिट्ठी में लिखा था

नौदस साल की लड़कियां काफी डिमांड में है.उनकी अच्छी क़ीमत मिलती है. 

कोलंबस के दौर से आगे

 साम्राज्यवादी शक्तियों में स्पेन अकेला नहीं था.और भी कई देश दुनिया को ग़ुलाम बनाना चाहते थे.वर्चस्व की ये लड़ाई हिस्पैनियोला भी पहुंची. 1540का दशक आतेआते कई और यूरोपियन शक्तियां भी यहां घुसने की कोशिश में लग गईं.इनमें सबसे आगे थेफ्रेंच,अंग्रेज़ और डच.इनके साथ होने वाली लड़ाई से बचने के लिए स्पेन ने अपना बोरियाबिस्तर समेटा और द्वीप के पूर्वी हिस्से में केंद्रित हो गया. 

इसके चलते द्वीप के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से खाली हो गए.जगह पाकर ब्रिटिश,डच और फ्रेंच पाइरेट्स ने यहां अपने ठिकाने बना लिए.अब ये सब द्वीप पर कंट्रोल के लिए लड़ने लगे.इस लड़ाई में फ्रांस ने ब्रिटिश और डच को पीछे छोड़ दिया.अब द्वीप पर कब्जे की लड़ाई में मुख्य प्रतिद्वंद्वी बन गए स्पेन और फ्रांस.इनके बीच दशकों तक लड़ाई चलती रही. 

1697में आकर दोनों पार्टियों ने इस झगड़े को ख़त्म करने का फ़ैसला किया.दोनों के बीच द्वीप के विभाजन पर सहमति बनी.दोनों ने द्वीप को दो हिस्सों में बांट लिया.पूर्वी हिस्सा मिल गया फ्रांस को.पश्चिमी हिस्सा पहले से ही स्पेन के पास था.ये स्पेन के ही पास रहा. 1697में फ्रांस और स्पेन के बीच हुआ ये बंटवारा अब भी लागू है.इसी बंटवारे के आधार पर इस द्वीप में आज दो देश बसते हैं.स्पेन वाला हिस्सा कहलाता है,डॉमिनिकन रिपब्लिक.और,फ्रांस वाला हिस्सा कहलाता हैरिपब्लिक ऑफ़ हेती.चूंकि हमारा ये एपिसोड हेती पर आधारित है,इसीलिए हम अब उसी की बात करेंगे. 

फ्रांस की सत्ता

फ्रांस की सत्ता कैसी थी?वो भी क्रूरता में कोलंबस और स्पेन से कम नहीं था.फ्रांस के लिए हेती ग़ुलामों के मार्फ़त मुनाफ़ा कमाने का ज़रिया भर था.फ्रांस ने यहां कृषि आधारित इकॉनमी विकसित की.यहां वो ग़ुलामों से गन्ना,कॉफ़ी,नील,कपास और तंबाकू जैसी मुनाफ़े की फ़सलें उगवाता.सारी फसल जहाज़ों में भरकर फ्रांस पहुंचाई जाती.इन्हें वहां प्रॉसेस किया जाता,इनसे फाइनल प्रॉडक्ट तैयार होता.कमाई का दूसरा बड़ा ज़रिया था,ग़ुलामों की ख़रीदफ़रोख़्त.हेती दुनिया की सबसे अमीर कॉलोनियों में गिना जाने लगा. 

फ्रांस द्वारा विकसित की गई ग़ुलाम बेस्डइकॉनमी के चलते धीरेधीरे हेती के भीतर ग़ुलामों की संख्या काफी बढ़ गई. 1791में इन ग़ुलामों ने बड़े स्तर पर विद्रोह कर दिया.इस लड़ाई में फ्रांस की हार हुई. 1जनवरी, 1804को हेती के लोगों ने अपने देश की आज़ादी का ऐलान कर दिया.ये बना दुनिया का पहला ब्लैक रिपब्लिक. 

हेती आज़ाद हो गया,लेकिन ये आज़ादी उसके लिए एक बड़ी मुसीबत लाई.कैसे?फ्रांस लगातार हेती को वापस जीतने की कोशिश कर रहा था.जब उसकी सारी कोशिशें नाकाम हो गईं,तो उसने एक डकैती की योजना बनाई.क्या किया फ्रांस ने?ये बात है अप्रैल1825की.इस वक़्त फ्रांस का राजा था,चार्ल्स दशम.उसने फ़रमान निकाला.कहा,हम हेती की आज़ादी को मान्यता देंगे.मगर बदले में हेती को हमें जुर्माना देना होगा.कितना जुर्माना?करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए. 

चार्ल्ज़ X
चार्ल्स दशम 1824 से लेकर 1830 तक फ्रांस का राजा रहा

और ये जुर्माना मांगने का आधार क्या दिया फ्रांस ने?उसने कहा कि हेती की आज़ादी के चलते उसे बहुत नुकसान हुआ है.वहां लागू ग़ुलामी प्रथा के चलते फ्रांस को जो राजस्व मिलता था,वो ख़त्म हो गया.इसीलिए हेती को उस नुकसान की भरपाई करनी होगी. 

सोचिए.ये किस हद की बेशर्मी थी.कहां तो फ्रांस को चाहिए था कि वो हेती में की गई लूट का हर्जाना भरे.वहां किए गए अत्याचारों की माफ़ी मांगे.लेकिन यहां तो उल्टी गंगा बह रही थी.ग़ुलाम बनाने वाला शोषक ग़ुलाम बनाए गए शोषितों से जुर्माना मांग रहा था.फ्रांस ने500तोप और एक बड़ी फ़ौज भेजकर हेती को ये शर्त सुनाई.कहा,मुआवजा नहीं दिया तो युद्ध लड़ना होगा.हेती युद्ध जीतने की स्थिति में नहीं था.इसीलिए उसने मुआवजा देना स्वीकार किया.तय हुआ कि हेती पांच किस्तों में ये रकम चुकाएगा. 

मगर हेती पैसे देता कहां से?उसके पास इतने पैसे कहां से आते?इसके लिए फ्रांस ने ही एक और युक्ति निकाली.उसने हेती से कहा,तुम हमारे बैंक से लोन लो और किस्त भरो.आपने प्रेमचंद की कहानियों में क्रूर महाजनों के बारे में पढ़ा होगा.वैसी ही भूमिका थी फ्रांस की.उसके बिछाए चक्र में फंसकर हेती127बरस तक कर्जा भरता रहा,तब भी पूरा नहीं दे पाया.पता है,इस मामले में सबसे बड़ा स्कैंडल क्या है?लोन लेकर जुर्माना भरने के चलते केवल ब्याज़ चुकाने में हेती को मूल रकम की दोगुनी राशि भरनी पड़ी.इसीलिए कई जानकार इसे इतिहास की सबसे बड़ी लूट कहते हैं. 

आते हैं अपने मूल सवाल पर

हम आज क्यों बता रहे हैं ये इतिहास?इसकी वजह से हेती से आ रही हिंसा की ख़बरें.हेती की राजधानी है,पोर्टप्रिंस.यहां पिछले कई दिनों से गैंगवॉर चल रहा है.रिपोर्ट्स के मुताबिक,जून का महीना पहले से भी ज़्यादा हिंसक बीता.अकेले जून2021में गैंगवॉर की हिंसा के चलते राजधानी के13हज़ार लोग बेघर हो गए. 1जुलाई को सरकार ने इस हिंसा पर एक बयान जारी किया.इसमें कहा गया था

सरकार इस अंधी हिंसा की भर्त्सना करती है.इसने हेती की जनता का जीवना शोकमय कर दिया है.लोग बिलख रहे हैं.विलाप कर रहे हैं.हम अपराधियों से कहना चाहते हैं कि हमारे लोकतांत्रिक समाज में उन्हें उनकी दरिंदगी की पूरी सज़ा मिलेगी. 

सरकार का ये बयान पढ़कर लगता है कि मानो उसे लोकतंत्र की अच्छाइयों पर बड़ी आस्था हो.मगर सच ये नहीं है.हेती में हथियारबंद गिरोहों द्वारा की जा रही हिंसा के पीछे सबसे बड़ी वजह इस देश का राजनैतिक अतीत ही है.कैसे,बताते हैं. 

जुवेनेल मोइज़
2016 में राष्ट्रपति चुने गए जुवेनेल मोइज़ का कार्यकाल भ्रष्टाचार के आरोपों से भरा रहा है.

हेती भूकंप संभावित क्षेत्र में पड़ता है.बड़े भूकंपों के अलावा यहां विनाशकारी तूफ़ान और बाढ़ भी आते रहते हैं.इनसे जानमाल का काफी नुकसान होता है.पहले से अभावग्रस्त हेती के लिए ऐसी हर नई आपदा ज़्यादा त्रासद साबित होती है. 

एक तरफ़ प्राकृतिक आपदाओं की मार.और दूसरी तरफ है,देश की राजनैतिक अस्थिरता.यहां तानाशाही का लंबा अतीत रहा. 20वीं सदी के ज़्यादातर हिस्से में यहां तख़्तापलट होते रहे.करप्शन और राजनैतिक उदासीनता के खिलाफ़1986में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए.मगर ये जनविरोध भी तख़्तापलट की परंपरा ख़त्म नहीं कर सका.समझिए कि पूरी20वीं सदी इसी माहौल में बीत गई. 

राजनैतिक अस्थिरता और देश की गरीबी.ये दोनों चीजें अराजकता पैदा करने की परफ़ेक्ट रेसिपी साबित हुईं.मज़बूत राजनैतिक लीडरशिप के अभाव में देश के भीतर एक वैक्युम बना.इसका फ़ायदा उठाकर देश में कई हिंसक गैंग्स बन गए थे.इन गिरोहों ने आपसी प्रतिद्वंद्विता में ख़ूब हिंसा की. 

हेती से आने वाली ख़बरों का जैसे कोई पैटर्न सेट हो गया.गैंगवॉर में हुई हिंसा,तख़्तापलट,जन विरोध,प्राकृतिक आपदा से हज़ारों की मौत,महामारी,कुपोषण, …दशकों बीत गए,मगर हेती से आने वाली ख़बरों का स्वभाव नहीं बदला. 

लंबी राजनैतिक उठापटक के बाद नवंबर2016में यहां चुनाव हुए.धांधली की आशंका के कारण विपक्ष ने इसका बहिष्कार किया.केवल21पर्सेंट लोग ही वोट डालने गए.इस कमज़ोर चुनाव में जीतकर फरवरी2017में हेती के राष्ट्रपति बने जुवेनेल मोइज़.यही मोइज़ अब तक राष्ट्रपति बने हुए हैं.आरोप है कि वो भी देश की तानाशाही परंपरा को आगे बढ़ाने में लगे हैं. 

देश की इसी बदहाल राजनैतिक व्यवस्था ने हथियारबंद गिरोहों को पोषण दिया है.वो इतने ताकतवर हो गए हैं कि उन्हें कंट्रोल करना अब बहुत मुश्किल है.अकेले राजधानी में ही95से ज़्यादा गैंग सक्रिय हैं.ये सभी प्रभुत्व बनाने के लिए आपस में लड़ रहे हैं.अपराधियों के पास पुलिस से उन्नत हथियार हैं.इसके चलते पुलिस अपराधियों को रोक नहीं पाती.उल्टा अपराधी चुनचुनकर पुलिसवालों को मारते हैं. 

आम आबादी भी गैंग्स का निशाना बनती है.गैंग मेंबर्स द्वारा नागरिकों को मारना,लोगों के घरों में आग लगाना,ये घटनाएं यहां आम हैं.लोग सब्ज़ी लेने घर से बाहर जाते हैं,तो उनके ज़िंदा लौटने की गारंटी नहीं होती.गैंग्स इतने क्रूर हैं कि बेघर हो गए लोग जब जान बचाने के लिए राहत शिविर जाते हैं,तो अपराधी इन शिविरों को भी आग लगा देते हैं. 

देश के ज़्यादातर बड़े ट्रांज़िट पॉइंट्स पर अपराधियों का कब्ज़ा है.खाद्य और मेडिकल आर्पूति की सप्लाई चेन भी ठप हो गई है.आपनेगैंग्स ऑफ़ वसेपुरदेखी है?उस फ़िल्म को ज़िंदा करके उसमें हो रही हिंसा को हज़ारों गुना बढ़ा दीजिए.तब जो चीज बनेगी,वही है हेती.वो देश नहीं रह गया है.एक दर्दनाक कहानी का सबसे लाचार,सबसे बेचारा पात्र बन गया है.

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