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क्यों इस अफ़्रीकी 'रॉकस्टार' के कत्ल के बाद देश में दंगे शुरू हो गए?

ये कहानी है एक चरवाहे की. एक चरवाहा, जिसके पिता उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे. मगर उसको क़िताबों में कोई दिलचस्पी नहीं थी. वो अपनी गायें चराता और पेड़ के नीचे बैठकर गाने गाता. तब किसने सोचा था कि एक दिन वो चरवाहा अपने देश का सबसे बड़ा संगीतकार, सबसे बड़ा जनकवि बन जाएगा. उसके गाने क्रांति सुलगाएंगे. वो बन जाएगा आज़ादी का चेहरा. इतना बड़ा चेहरा कि एक रात जब गोली मारकर उसकी हत्या कर दी जाएगी, तो हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आएंगे. देश में दंगा छिड़ जाएगा. उस नेता की गद्दी ख़तरे में आ जाएगी, जिसे प्रधानमंत्री बनवाने के लिए इसी भीड़ ने महीनों तक संघर्ष किया था. इस संघर्ष का नारा, इसका ऐंथम उसी संगीतकार के गाए गीत थे.

कौन था ये म्यूज़िशन? इस संगीतकार का नाम था- हक्कालू हुनदिस्सा. 34 साल के हुनदिस्सा इथियोपिया के रहने वाले थे. इथियोपिया की राजधानी है आदिस अबाबा. 29 जून को रात करीब साढ़े नौ बजे की बात है. हुनदिस्सा अपनी कार में कहीं जा रहे थे. रास्ते में कुछ हमलावर आए और उन्होंने हुनदिस्सा को गोली मार दी. इथियोपिया की अगली सुबह इसी ख़बर के साथ शुरू हुई. हज़ारों हथियारबंद लोग सड़कों पर उतर आए. दंगा शुरू हो गया. इन दंगों में अब तक 80 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. मारे गए लोगों में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. लाखों की संपत्ति बर्बाद हो गई है. राजधानी की सुरक्षा के लिए सेना बुलानी पड़ी है. देश के कई हिस्सों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है.

हक्कालू हुनदिस्सा की हत्या से लोग इतना गुस्सा क्यों हैं?

हक्कालू हुनदिस्सा की हत्या से इतनी नाराज़गी क्यों है लोगों में? इस सवाल का जवाब छुपा है, हुनदिस्सा की पहचान में. ये पहचान बताने से पहले आपको थोड़ा इथियोपिया का बैकग्राउंड भी जानना होगा.

इथियोपिया बसा है पूर्वी अफ्रीका में. इसके उत्तर में है एरट्रिया. पूरब में हैं जिबूती और सोमालिया. पश्चिम की दिशा में बसा है सूडान, साउथ सूडान. और इसके दक्षिण में पड़ता है केन्या. इथियोपिया का इतिहास समझिए कि इंसानी सभ्यता का इतिहास है. जितनी पुरानी हमारी कहानी, उतना ही पुराना है इथियोपिया. ये वही हिस्सा है अफ्रीका का, जहां से इंसानों के शुरुआती पूर्वज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचे. इथियोपिया शब्द ग्रीक भाषा से आया है. इसका मतलब होता है, सुलगती आंखों वाला. इथियोपिया के लोग कहते हैं कि उन्हें ये नाम मिला है इथियोपिस नाम के एक प्राचीन राजा से. इस देश का एक पुराना नाम एबिसिनिया भी है.

Ethiopia
पूर्वी अफ्रीका का एक देश है इथियोपिया. (स्क्रीनशॉट: गूगल मैप्स)

इथियोपिया का गृह युद्ध

इथियोपिया में सदियों से राजशाही सिस्टम चला आ रहा था. इसका अंत हुआ सितंबर 1974 में. इसके बाद कुछ आई सैन्य तानाशाही. इसकी वजह से इथियोपिया के भीतर शुरू हुआ सिविल वॉर. ये आंतरिक युद्ध ख़त्म हुआ 1991 में. अब सत्ता आई इथियोपियन पीपल्स रेवॉल्यूशनरी डेमोक्रैटिक फ्रंट के पास. इसको हम शॉर्ट में कहेंगे, EPRDF.

सत्ता में आकर इन्होंने इथियोपिया में एक फेडरल सिस्टम बनाया. ये सिस्टम कहलाया- एथनिक फेडरलिज़म. इस सिस्टम का मूल था, इथियोपिया की सांस्कृतिक पहचान को ताकत देना. करीब 80 एथनिक ग्रुप्स की बसाहट है यहां. जैसे, अरुणाचल प्रदेश में कई सारे अलग-अलग कबीले हैं न. उसी तरह से समझिए इनको. कुछ बड़े समुदाय, कुछ छोटे समुदाय. अलग-अलग भाषाएं. अलग संस्कृति.

ओरमो समुदाय की दिक्कतें?

नए सिस्टम ने इथियोपिया को कई यूनिट्स में बांट दिया. यहां हो गए कुल नौ प्रांत और दो शहरी प्रशासनिक यूनिट्स. इस सिस्टम में एक बड़ी परेशानी देखी गई. कई ऐसे प्रांत थे, जहां एक से ज़्यादा एथनिक ग्रुप्स रहते थे. लेकिन सिस्टम फेवर करता सबसे बड़े ग्रुप का. ज़मीन के अधिकार से लेकर सरकारी नौकरियां, ज़्यादातर जगहों पर उस इलाके में रहने वाले सबसे बड़े एथनिक ग्रुप को तवज्जो मिलती. ऐसे में अलग-अलग एथनिक ग्रुप्स के बीच टेंशन बढ़ता गया. इस एथनिक बंटवारे के कारण इथियोपिया में राष्ट्रीय भावना कमज़ोर रही. एथनिक आइडेंटिटी सबसे मज़बूत, सबसे इमोशनल पहचान बन गई.

EPRDF आया था तानाशाही हटाकर. लेकिन वो तानाशाही की जगह लोकतंत्र नहीं लाया. उसने भी निरंकुश तरीके से सेंटर की सत्ता अपने पास बनाए रखी. साथ ही, उन्होंने एथनिसिटी वाला मामला भी ख़ूब भुनाया. वो बहुसंख्यकों के मुकाबले अल्पसंख्यक वर्ग को तरजीह देने लगे. प्रांतों में भी वो अपने हिसाब की लीडरशिप चुनते. इससे कई बड़े एथनिक ग्रुप्स ख़ुद को उपेक्षित महसूस करने लगे. इनमें से ही एक था- ओरमो समुदाय. ये इथियोपिया का सबसे बड़ा एथनिक समुदाय है. इथियोपिया की कुल आबादी है करीब 11 करोड़. इसमें करीब पांच करोड़ लोग ओरमो समुदाय से है.

Oromo People
ओरमो समुदाय के लोग (फोटो: एएफपी)

इनकी बसाहट का मुख्य इलाका है- ओरोमिया. ये पूरे उत्तरपूर्वी अफ्रीका का सबसे संपन्न इलाका माना जाता है. खेती. प्राकृतिक संसाधन. हर मामले में भरा-पूरा. इथियोपिया की समूची इकॉनमी में ओरोमिया की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत है. बावजूद इसके सिस्टम में उनका उतना प्रभाव नहीं था. कई छोटे ग्रुप्स ज़्यादा बड़ा शेयर पाते थे. मसलन, टिगरायन ग्रुप. जो आबादी में बस छह फीसद थे. मगर इकॉनमी से लेकर पॉलिटिक्स तक, हर जगह दबदबा रखते थे.

17 साल की उम्र में पहली बार जेल गए हक्कालू

ये था शिकायतों का बैकग्राउंड. अब हम वापस लौटते हैं हक्कालू हुनदिस्सा पर. वो संगीतकार, जिनकी हत्या से हमने एपिसोड की शुरुआत की. हुनदिस्सा भी ओरमो थे. ये बात है नई सदी आने के बाद की. उन दिनों ओरमा स्कूल में पढ़ते थे. ओरमो आबादी ने स्वशासन के अधिकार के लिए बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू किया. बड़ों से लेकर स्कूली बच्चे तक, सब प्रोटेस्ट में शामिल होने लगे. इनमें से एक हुनदिस्सा भी थे. सैकड़ों अन्य प्रोटेस्टर्स की तरह 17 बरस के हुनदिस्सा को भी जेल में डाल दिया गया.

2003 से 2008 तक हुनदिस्सा जेल में रहे. जेल की इस सज़ा ने दो असर दिखाया हुनदिस्सा पर. एक तो ये कि राजनैतिक मुद्दों के प्रति उनका रुझान बढ़ा. दूसरा असर ये हुआ कि हुनदिस्सा ने इस मूवमेंट को अपना संगीत बना लिया. जेल में बंद हुनदिस्सा ने कई गाने लिखे. 2008 में जेल से रिहा होने के एक साल बाद इन्हीं गानों से बना उनका पहला अल्बम रिलीज़ हुआ. इसका नाम था- मूटी. ये अल्बम सुपरहिट हो गया.

Hachalu Hundessa 2015 Maalan Jira
मूटी अल्बम ने हक्कालू हुनदिस्सा को नई पहचान दी. (स्क्रीनशॉट: यूट्यूब)

असल में इस अल्बम के हिट होने की बड़ी वजह थी, इसकी ओरमो पहचान. ओरमो समुदाय के लिए संगीत बस रोमांस या मनोरंजन नहीं था. वो संगीत के ज़रिये अपने राजनैतिक अधिकार मांगते थे. संगीत उन्हें मोबलाइज़ करता था. दशकों का शोषण, शिकायतें, भविष्य के सपने, सबके इज़हार का ज़रिया था म्यूज़िक. हुनदिस्सा का प्रोटेस्ट करते हुए अरेस्ट होना. पांच साल जेल में बिताना. जेल में गाने लिखना. ऐसे गाने, जिनके बोल ओरमो लोगों को फेसिनेट करते थे. मसलन- मैं एक लड़की से मिला. उसे ओरमो होने पर गर्व है. वो अपनी ओरमो पहचान की ख़ातिर जान देने को भी तैयार है. मैं उसपर मर मिटा हूं.

इंटिग्रेटेड मास्टर प्लैन ऑफ आदिस अबाबा ऐंड द नियरबाय ओरोमिया टाउन्स योजना ने काफी कुछ बदल दिया

इस पूरे बैकग्राउंड ने हुनदिस्सा को बड़ा स्टार बना दिया. उनका दूसरा अल्बम आया 2013 में. इसका नाम था- वाई कीनया. ये उस वक़्त पूरे अफ्रीका का सबसे ज़्यादा बिकने वाला म्यूज़िकल अल्बम था. हुनदिस्सा का सबसे मशहूर गाना आया 2015 में. इसके बोल थे- मालान जिरा. ये गाना बना था, सरकार के एक फैसले के खिलाफ. कौन सा फैसला? ये फैसला जुड़ा था, राजधानी आदिस अबाबा के विस्तारीकरण की योजना से. योजना का नाम था- इंटिग्रेटेड मास्टर प्लैन ऑफ आदिस अबाबा ऐंड द नियरबाय ओरोमिया टाउन्स.

Untitled Design
वाई कीनया उस वक़्त पूरे अफ्रीका का सबसे ज़्यादा बिकने वाला म्यूज़िकल अल्बम था. (फोटो: सोशल मीडिया)

इस योजना के तहत राजधानी आदिस अबाबा को करीब 15 लाख हेक्टेयर का विस्तार देना तय हुआ. इस विस्तार के लिए ज़मीन चाहिए थी. वो ज़मीन ओरोमिया प्रांत की थी. इसे लेकर पूरे ओरोमिया में बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू हो गए. ये प्रदर्शन सिर्फ़ भूमि अधिग्रहण तक नहीं रहे. पिछले 25 बरसों का जमा गुस्सा सब साथ आ गया. इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे सबसे बड़ा हाथ था अंडरग्राउंड ऐक्टिविस्ट्स का. इनको कहते थे- क्विर्रू. इनमें ज़्यादातर सदस्य ओरमो युवा थे. स्कूलों और यूनिवर्सिटियों में पढ़ने वाले युवा.

ओरमो vs टिगरायन

इस समय इथियोपिया के प्रधानमंत्री थे हेलेमारियम देसालेगन. ये अल्पसंख्यक टिगरायन समुदाय की सरकार के मुखिया थे. टिगरायन समुदाय के साथ ओरमो की पुरानी दुश्मनी थी. इस दुश्मनी का अतीत जुड़ा है 90 के दशक से. याद है, हमने आपको बताया था 1991 में EPRDF ने सरकार बनाई थी. इस गठबंधन सरकार में ओरमो का भी प्रतिनिधित्व था. मगर 1992 में टिगरायन ग्रुप ने उन्हें सरकार से निकाल दिया. इसके बाद से ही ओरमो की आंखों में टिगरायन चुभते रहे. वो सवाल पूछते कि संख्याबल में इतने कम होकर भी टिगरायन उनसे आगे क्यों हैं.

Ethiopian People's Revolutionary Democratic Front Supporters
इथियोपियन पीपल्स रेवॉल्यूशनरी डेमोक्रैटिक फ्रंट के समर्थक (फोटो: एएफपी)

इसी वजह से आदिस अबाबा मास्टरप्लान का विरोध सरकार के विरोध में तब्दील हो गई. ओरमो समुदाय डेमोक्रैटिक गवर्नमेंट लाने की मांग करने लगा. जल्द ही बाकी कई एथनिक ग्रुप्स भी उनके साथ आ गए. ये विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे. लेकिन सरकार ने हिंसा के सहारे इसे कुचलने की कोशिश की. मार्शल लॉ लगा दिया. हज़ारों ओरमो गिरफ़्तार कर लिए गए. सैकड़ों ओरमो यातना देकर मार डाले गए. सरकार जितनी क्रूर होती गई, विरोध उतना बढ़ता गया. ओरमो समुदाय की मांगों, उन पर हो रहे ज़ुल्म को इंटरनैशनल कवरेज़ मिलने लगी.

पीएम को देना पड़ा इस्तीफ़ा

हुनदिस्सा के लिखे गाने प्रदर्शनकारियों का ऐंथम बन गए. इतना बढ़ा विरोध, इतना बढ़ा कि फरवरी 2018 में प्रधानमंत्री हेलेमारियम देसालेगन को इस्तीफ़ा देना पड़ा. देश के नए प्रधानमंत्री बने- ऐबी अहमद. ऐबी ओरमो समुदाय से आते हैं. ऐबी ने देश में राजनैतिक सुधारों की शुरुआत की. इथियोपिया में हालात सुधरने की उम्मीद जगने लगी.

Hailemariam Desalegn
इथियोपिया के पूर्व प्रधानमंत्री हेलेमारियम देसालेगन (फोटो: एएफपी)

आप कहेंगे, अच्छा हुआ. ओरमो जो चाहते थे, उन्हें मिल गया. लेकिन फिर सवाल है कि हुनदिस्सा की हत्या क्यों हुई? जब वो भी ओरमो और PM भी ओरमो, तो हुनदिस्सा की हत्या पर सरकार से इतनी नाराज़गी क्यों.

हुनदिस्सा ने ऐरट्रिया के राष्ट्रपति के सामने ओरमो मसला उठाया

इसकी वजह समझने के लिए आपको पिछले दिनों का थोड़ा हालचाल जानना होगा. ये बात है मई 2018 की. पड़ोसी देश ऐरट्रिया के राष्ट्रपति इसाइस अफेवोरकी इथियोपिया आ रहे थे. मौका था, ऐरट्रिया और इथियोपिया के बीच ख़त्म हुआ दशकों पुराना सीमा युद्ध. इथियोपिया की नई सरकार ने ऐरट्रियन राष्ट्रपति के सम्मान में म्यूज़िकल प्रोग्राम का आयोजन करवाया. इसके लिए न्योता भेजा गया हुनदिस्सा को. हुनदिस्सा आए, मगर यहां भी स्टेज पर वो एथनिक टेंशन वाली बातें करने लगे. हुनदिस्सा ने कहा कि अभी तो लोगों के जख़्म ताज़ा हैं. ऐसे में सरकार म्यूज़िकल कॉन्सर्ट कैसे कर सकती है. इस वजह से ऐबी अहमद सरकार की बड़ी किरकिरी हुई.

Isaias Afwerki With Abiy Ahmed
ऐरट्रिया के राष्ट्रपति इसाइस अफेवोरकी और इथियोपिया प्रधानमंत्री ऐबी अहमद (फोटो: एएफपी)

सरकार ने हुनदिस्सा की आलोचना की. कहा कि हुनदिस्सा ने प्रोग्राम में जो गाने गाए, वो उस मौके के लिए सूटेबल नहीं थे. बाद के महीनों में भी इस तरह की बयानबाजियां होती रहीं. हुनदिस्सा अपने बग़ावती तेवर दिखाते रहे. वो ओरमो समुदाय के लिए और अधिकारों की मांग करते रहे. इससे एक तरफ हुनदिस्सा की लोकप्रियता बढ़ती रही. दूसरी तरफ, उनके राजनैतिक विरोधी भी बढ़ते गए. हुनदिस्सा ने कई बार कहा कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. हुनदिस्सा ने ये भी कहा कि इन धमकियों के पीछे राजनैतिक असहमतियां रखने वाले लोगों का हाथ है.

हुनदिस्सा की हत्या की जांच

अब हुनदिस्सा दुनिया में नहीं हैं. उनके प्रशंसक सड़कों पर हिंसा कर रहे हैं. प्रशंसक चाहते थे कि हुनदिस्सा को पूरे मान-सम्मान के साथ आदिस अबाबा में दफ़नाया जाए. लेकिन सुरक्षा कारणों से सरकार इसके लिए राज़ी नहीं थी. सरकार का कहना था कि हुनदिस्सा ऐम्बो शहर के रहने वाले हैं. ऐसे में उन्हें वहीं दफ़नाया जाना चाहिए. लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक, हुनदिस्सा का अंतिम संस्कार ऐम्बो में ही हुआ. सरकार ने काफी टाइट सिक्यॉरिटी बिठाई है यहां.

हर कोई सवाल कर रहा है कि हुनदिस्सा को मारा किसने? PM ऐबी अहमद ने संकेत दिया है कि इसके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है. उनके मुताबिक, ये शायद इथियोपिया को अस्थिर करने की साज़िश है. कई लोग ख़ुद इथियोपियन सरकार पर उंगली उठा रहे हैं. कई उंगलियां एथनिक वॉइलेंस की तरफ इशारा कर रही हैं. कुल मिलाकर, इथियोपिया में अभी कई उंगलियां एक-दूसरे पर तनी हैं. दशकों से एक-दूसरे के साथ लड़ते आए इथियोपिया की यूनिटी के लिए ये कतई अच्छी ख़बर नहीं है.


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