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जब छापेमारी के विरोध में कारोबारियों ने एक्साइज अधिकारियों पर एसिड फेंक दिया था

गुजरात फ्लैश बैक: आने वाले विधानसभा चुनाव की वजह से गुजरात पूरे देश में चर्चा में बना हुआ है. इन चर्चाओं में आज के नेता, आज के मुद्दे और आज के वोटरों की बातें हैं. हम आपके लिए गुजरात के इतिहास से कुछ किस्से लेकर आए हैं, जो आपको जानने चाहिए.

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1985 का साल गुजरात के लिए कई मायनों में अलग रहा है. एक तरफ आरक्षण को लेकर दंगे हुए और सैकड़ों जानें गईं, तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस को चुनाव में पूर्ण बहुमत मिला था. लेकिन इन सबसे इतर इस साल देश ने सूरत के कारोबारियों का गुस्सा भी देखा था. वो वक्त जून का था.

सेंट्रल एक्साइज टैक्स के कुछ अधिकारियों को खबर मिली थी कि सूरत की मिलों में अवैध तरीके से कपड़ा बनाया जा रहा है. कारोबारी बिना टैक्स चुकाए ही कपड़ा बना रहे हैं और कारोबार कर रहे हैं. जानकारी मिली तो अधिकारियों का एक दस्ता छापेमारी के लिए सूरत पहुंच गया. जब अधिकारियों ने मिलों पर छापेमारी शुरू की, तो व्यापारी नाराज हो गए. जल्दी ही उनकी नाराजगी हिंसक हो गई और उन्होंने सेंट्रल एक्साइज के अधिकारियों पर हमला कर दिया. सेंचुरी मिल में तो एक एक्साइज अधिकारी पर कारोबारियों और मजदूरों ने एक केमिकल फेंक दिया, जिसकी वजह से उसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा. अलग-अलग मिलों में टैक्स अधिकारियों की पिटाई हुई और कम से कम 40 एक्साइज अधिकारियों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती करवाना पड़ा.

Surat century mill
सूरत की सेंचुरी मिल आज कुछ ऐसी दिखती है.

जब टैक्स अधिकारियों पर कारोबारियों का गुस्सा फूटा, तो टैक्स अधिकारियों का गुस्सा फूटना भी स्वाभाविक था. छापेमारी के दौरान पूछताछ के लिए अधिकारियों ने जिन कारोबारियों को उठाया था, उनके साथ हिंसा की गई और फिर एक हिंसा का दौर शुरू हुआ, जो लंबे वक्त तक जारी रहा. उस वक्त में वो सब कुछ हुआ, जिसे सिर्फ फिल्मों में देखा जा सकता है.

दरअसल नई दिल्ली स्थित डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस के अधिकारी सूरत की टेक्सटाइल मिलों और कारोबारियों की ओर से की जा रही कर चोरी की रिपोर्ट बना रहे थे. उसी दौरान स्थानीय अखबारों के साथ ही राष्ट्रीय अखबारों में खबरें छपने लगी कि सूरत में तकरीबन 500 करोड़ रुपये की कर चोरी की जा रही है. बताया गया कि कपड़े पर बेहद कम एक्साइज या स्टांप ड्यूटी देकर कारोबारी मोटा मुनाफा कमा रहे हैं और सरकार को नुकसान पहुंचा रहे हैं. ऐसे में सरकार ने इन मिलों पर छापा मारने का आदेश दिया. उस वक्त हुई छापेमारी एक्साइज डिपार्टमेंट के इतिहास की सबसे बड़ी छापेमारी थी. 435 अधिकारियों की टीम को 48 हिस्सों में बांटा गया. 48 टीमों के इन अधिकारियों ने तीन ओर से सूरत की घेराबंदी की और उनकी नजर पर था सूरत का रिंग रोड, जहां करीब 1200 दुकानें थीं.

Surat ring road
सूरत का रिंग रोड, जहां 1985 में एक्साइज टीम ने छापेमारी की थी. तस्वीर पिछले दिनों की है. (फोटो: Youtube)

सतर्कता इतनी बरती गई थी कि स्थानीय एक्साइज अधिकारियों को भी इस बात की भनक नहीं लगने दी गई. एक अधिकारी ने बताया था कि उन्हें लगा था कि उनके पास छापेमारी के लिए पर्याप्त संख्याबल है, लेकिन बाद में वो गलत साबित हुए. जब छापेमारी शुरू हुई तो किसी ने भी विरोध नहीं किया और आत्मसमर्पण की मुद्रा अख्तियार कर ली. लेकिन जैसे-जैसे छापेमारी की कार्यवाही आगे बढ़ती रही और हकीकत सामने आती रही, सैकड़ों दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद करनी शुरू कर दीं.

छापेमारी करने वाली टीम जब तक समझ पाती कि दुकानदार क्या कर रहे हैं, दुकानदारों के समर्थन में आए लोगों ने छापेमारी करने वाली टीम पर हमला कर दिया. टीम ने दुकानदारों से जो कागजात सील किए थे, भीड़ ने उन्हें छीन लिया और उन्हें जला दिया, जिससे कोई सबूत ही न बच पाए. भीड़ का बढ़ता गुस्सा देखकर अधिकारियों को उल्टे पांव भागना पड़ा. इस दौरान भीड़ ने उनके पर्स, घड़ियां, सोने की अंगूठी और चेन तक छीन लिए.

इस घटना के वक्त राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे, जबकि विश्वनाथ प्रताप सिंह वित्त मंत्री और माधव सिंह सोलंकी गुजरात के मुख्यमंत्री थे.
इस घटना के वक्त राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे, जबकि विश्वनाथ प्रताप सिंह वित्त मंत्री और माधव सिंह सोलंकी गुजरात के मुख्यमंत्री थे.

भीड़ एक्साइज डिपार्टमेंट हाय-हाय और राजीव गांधी मुर्दाबाद, राजीव गांधी ये नहीं चलेगा के नारे लगाने लगी. जान बचाकर भागी टीम ने पंडासेरा पुलिस स्टेशन में शरण ली, लेकिन पुलिस भी उनकी शिकायतों को दर्ज करने के लिए पहले से तैयार नहीं थी. उस वक्त सूरत के एसपी रहे मनमोहन मेहता ने कहा था कि स्थानीय पुलिस आरक्षण विरोधी आंदोलन में हुई हिंसा को शांत करने के लिए लगी है, इसलिए टीम ने छापेमारी के लिए गलत वक्त चुना. एसपी ने छापेमारी करने वाली टीम पर ही दोषारोपण करते हुए कहा था कि छापा मारने से पहले उन्हें पुलिस को सूचना देनी चाहिए थी. जब तक वित्त मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह मुख्य मंत्री माधव सिंह सोलंकी को फोन करते, एक्साइज के अधिकारी अपने घायल शरीर के साथ घरों की ओर लौट चुके थे.

Surat traders
जब अप्रैल 2017 में जीएसटी लागू हुई, तो इसके विरोध में सूरत के कारोबारियों ने कई दिनों तक बाजार बंद रखे थे.

बाद में शहर के कारोबारी दो हिस्सों में बंट गए. गुजरात के कारोबारियों ने हिंसा के लिए मारवाड़ी कारोबारियों को जिम्मेदार ठहराया. ये भी सामने आया कि जो छापेमारी हुई थी, उनमें भी अधिकांश मारवाड़ी कारोबारी ही थे. गुजरात के कारोबारियों ने छापेमारी का विरोध करना बंद कर दिया, जिसके बाद एक्साइज के अधिकारियों ने कई कारोबारियों को कर चोरी और हिंसा के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था.


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