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क्या होता है गिलोटिन, जो बजट सत्र में सरकार के लिए जादू की छड़ी का काम करता है

31 जनवरी, 2020 को संसद का बजट सत्र शुरू हुआ. 1 फरवरी को साल 2020-21 के लिए सरकार ने बजट पेश किया. 11 फरवरी को संसद को ब्रेक दिया गया. दूसरा चरण शुरू हुआ 2 मार्च से. कायदे से देखा जाए तो दूसरे चरण में बजट पर चर्चा होनी थी. किस मंत्रालय को कितना पैसा मिलना है, कितनी कटौती हुई है…वगैरह पर चर्चा करना था. लेकिन हुआ नहीं. क्योंकि फरवरी की 23-25 तारीख के बीच दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके में हिंसा हो गई. और जैसे ही सत्र शुरू हुआ दिल्ली हिंसा पर चर्चा को लेकर विपक्ष ने हो हल्ला करना शुरू कर दिया. सरकार ने होली यानी 10 मार्च के बाद दिल्ली हिंसा पर चर्चा कराने की बात कही. लेकिन विपक्ष अड़ा रहा. जिसकी वजह से संसद का कामकाज प्रभावित हुआ. मंत्रालयों के अनुदानों पर चर्चा नहीं हो पाई. बजट सत्र 3 अप्रैल को समाप्त होगा. सरकार के सामने इससे पहले लोकसभा और राज्यसभा दोनों जगह से बजट पास कराना आवश्यक है. ऐसे में सरकार ने एक ट्रिक अपनाई. ट्रिक जिसे संसदीय कामकाज की भाषा में ‘गिलोटिन’ कहा जाता है.

क्या होता है गिलोटिन?
हमारे यहां 50 से अधिक मंत्रालय हैं. बजट में सभी के लिए अनुदान होता है. लेकिन सत्र की सीमित अवधि में सभी पर चर्चा करा पाना संभव नहीं हो पाता है. ऐसे में जिन मांगों पर चर्चा नहीं हो पाती है उसे बिना चर्चा के ही मतदान कराकर पास कर दिया जाता है. इसी प्रक्रिया को गिलोटिन कहते हैं. एक लाइन में कहें तो-

बजट सत्र में मंत्रालयों की अनुदान मांगों को बिना चर्चा पारित कराने की प्रक्रिया को ‘गिलोटिन’ कहा जाता है.

एक सामान्य प्रक्रिया में मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा होती है. सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के सदस्य अपनी राय रखते हैं. इसके बाद संशोधन की जरूरत होती है तो संशोधन के साथ अन्यथा इसके बिना ही सदन इसे पास कर देता है. ऐसा नहीं है कि गिलोटिन की प्रक्रिया कोई पहली बार अपनाई गई है. हर साल एक बड़ी संख्या में अनुदान मांगों को बिना किसी चर्चा के पास कर दिया जाता है. इस साल रेल, सामाजिक न्याय और आधिकारिता और पर्यटन मंत्रालय से जुड़ी मांगों पर चर्चा की गई. इनके अलावा बाकी अनुदान मांगों को बिना चर्चा के ही पास करा दिया गया.

पिछले 15 सालों का रिकॉर्ड देखकर समझ सकते हैं कि गिलोटिन का कितना उपयोग हुआ है. (स्रोत- PRS)
पिछले 15 सालों का रिकॉर्ड देखकर समझ सकते हैं कि गिलोटिन का कितना उपयोग हुआ है. (स्रोत- PRS)

मोदी सरकार ने 2018-19 में सारे अनुदान मांग बिना किसी चर्चा के पास करा लिये थे. 2004-05 और 13-14 में यूपीए ने भी बिना किसी चर्चा के सारे अनुदान मांग पारित करा लिए थे.

अब आगे क्या?

गिलोटिन के जरिए अनुदान मांगों के पारित होने के बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने विनियोग विधेयक पेश किया. विनियोग विधेयक के जरिए ही संसद में देश के खजाने से पैसा निकालने के प्रस्ताव पर मुहर लगती है. 2020-21 के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 110.4 लाख करोड़ रुपए देश के खजाने से निकालने के लिए संसद में विनियोग विधेयक पेश किया. लोकसभा ने इसे ध्वनिमत से मंजूरी दे दी. अब लोकसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा की जाएगी. वित्त विधेयक के पारित होने के साथ बजट की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.


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