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मेहसाणा ग्राउंड रिपोर्टः जहां पुलिस की गोली से पाटीदार 'शहीद' हुए थे

उस घर में सर्टिफिकेट-नुमा तीन चीजें टंगी हुई हैं. तीनों पर वीरता, शहीद जैसे शब्द गुजराती में लिखे हुए हैं. तीनों पर एक बीस-बाइस साल के लड़के की फोटो है.

मरने के बाद मयूर पटेल को दिए गए वीरता के सर्टिफिकेट. शहीद होने के सर्टिफिकेट.

मेरे सामने उस लड़के की मां, दादा-दादी थे. मैं जानना चाहता था कि अब वो लोग आंदोलन के बारे में क्या सोचते हैं. लेकिन उनसे कुछ पूछना नहीं चाहता था.

वीडियो में देखेंः क्या सोचता है वो परिवार, जिनके बेटे की पाटीदार आंदोलन में मौत हो गई

मयूर पटेल की मौत पाटीदार अनामत आंदोलन में हुई. 26 अगस्त, 2015 को पुलिस की गोली लगी. चार महीने बाद 25 दिसंबर, 2015 को मौत हुई. दो साल में तीन सर्टिफिकेट दीवार पर टंगे हैं. अगर पाटीदार आंदोलन से जुड़े लोग सत्ता में पहुंचे, तो हो सकता है कि उसी चौराहे पर मयूर की मूर्ति भी लग जाए.

आखिरकार वो आंदोलन की बड़ी खुराक है.


1984 में भाजपा ने पहली बार दो सीटें जीती थीं. कांग्रेस को छोड़कर किसी भी पार्टी के लिए वो मुश्किल दौर था, क्योंकि उस वक्त इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी. कांग्रेस के साथ लोगों की सहानुभूति थी. फिर भी भाजपा ने पहली बार दो सीटें जीतीं. एक आंध्र प्रदेश के हनमगोड़ा से चंदूपाटला जंगा रेड्डी और दूसरे मेहसाणा से एके पटेल.

मयूर पटेल के दादाजी अब भी आरक्षण की मांग पर अडिग हैं
मयूर पटेल के दादाजी अब भी आरक्षण की मांग पर अडिग हैं

मेहसाणा आज के समय में भी प्रतीक के तौर पर बीजेपी के लिए ज्यादा अहम सीट है. ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह जिला है और ये उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल की सीट भी है. 1990 से भाजपा यहां से लगातार जीत रही है. नितिन भाई पटेल के सामने कांग्रेस के जीवा भाई पटेल हैं.

मेहसाणा पाटीदार आंदोलन के गढ़ों में से एक रहा है. यहां सड़कों पर बीजेपी के खिलाफ लोगों का गुस्सा दिखता है. नितिन पटेल कद्दावर नेता हैं, अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई रैलियां होनी बाकी हैं, अभी कई चुनावी गोटियां सेट होनी बाकी हैं. लेकिन इतना तय है कि नितिन पटेल के लिए इस बार ये सीट हलुआ नहीं है.

 

पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के मेहसाणा संयोजक सतीश पटेल भाजपा से खासे नाराज़ हैं
पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के मेहसाणा संयोजक सतीश पटेल भाजपा से खासे नाराज़ हैं

ऐसा नहीं कि सारे पाटीदार भाजपा के खिलाफ हों. पिछली रात मिले लल्लनटॉप के एक रीडर/व्यूअर (जिन्होंने बहुत कहने पर भी डिनर का बिल हमें नहीं देने दिया) नरेंद्र मोदी की वजह से भाजपा को वोट देने की बात कहते हैं. लेकिन वो ये भी मानते हैं कि विपक्ष में कांग्रेस या कोई पार्टी मजबूत होगी, तो सत्ताधारी बीजेपी ज्यादा अच्छा काम करेगी, वरना वो भी तानाशाही की तरफ चल देगी. इस इलाके में पाटीदार ज्यादा हैं.

वो बताते हैं कि अपनी सोसायटी के बाकी पाटीदारों से उनकी अक्सर बहस हो जाती है. वो कहते हैं कि नोटबंदी ऐसी चीज है, जिसे बड़े से बड़ा भाजपा भक्त भी डिफेंड करने में पीछे हटने लगता है. GST की बात पूछने पर कहते हैं कि इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं है. उदाहरण अपने एक दोस्त का देते हैं कि पहले भी उसका आधा सामान बिना किसी कागज के आता था और अब भी.

वीडियो देखेंः यहां चली गोली गुजरात में भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है

पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) के मेहसाणा के नेता (कन्वीनर) सतीश पटेल से मैंने कहा कि कांग्रेस ने भी तो आरक्षण पर अभी स्टैंड क्लियर नहीं किया है. सतीश ने कहा कि अभी आरक्षण की बात पीछे छूट गई है. बात इस पर आ गई है कि पाटीदारों ने भाजपा को गुजरात में बनाया और भाजपा ने उनके साथ ऐसा सलूक किया, इसलिए उसे सबक सिखाना है.

हम ये बातचीत कर ही रहे थे कि दारू पिए हुए एक भाई आ गए और कुछ-कुछ बोलने लगे.

गुजरात से बाहर के लोगों को भले पता हो कि गुजरात में शराबबंदी है, लेकिन यहां हर जगह शराब मिल जाती है. रेट से महंगी मिलती है. जो सस्ती मिलती है, उसे पीकर लोग मर जाते हैं. थोड़ा जल्दी.

हार्दिक पटेल कह चुके हैं कि वो चुनाव में कांग्रेस का साथ देंगे. (फोटोःपीटीआई)
हार्दिक पटेल कह चुके हैं कि वो चुनाव में कांग्रेस का साथ देंगे. (फोटोःपीटीआई)

सतीश से जब मैंने पूछा कि कई पाटीदार भाजपा में चले गए, क्या इससे आंदोलन और चुनाव में उनका बीजेपी विरोध कमजोर नहीं होगा, उन्होंने कहा कि अगर आज हार्दिक पटेल भाजपा में चले जाएं, तो वो खुद ज़ीरो हो जाएंगे, कोई और पाटीदार उनके साथ नहीं जाएगा.
मुझे पिछले दिन किसी की कही एक बात याद आ गई कि अगर नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी रैली में एक बार भी हिंदू-मुस्लिम का जरा सा हिंट दिया, तो हार्दिक पटेल खुद भाजपा को वोट देकर आएगा.


मैं इन दो पंक्तियों को एकसाथ रखकर देखना चाहता हूं:

“अगर आज हार्दिक पटेल भाजपा में चले जाएं, तो वो खुद ज़ीरो हो जाएंगे, कोई और पाटीदार उनके साथ नहीं जाएगा.”
“अगर नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी रैली में एक बार भी हिंदू-मुस्लिम का जरा सा हिंट दिया, तो हार्दिक पटेल खुद भाजपा को वोट देकर आएगा.”


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