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एयर इंडिया को बेचने की दूसरी कोशिशः रुतबा ‘महाराजा’ का और कर्ज़ 60 हजार करोड़ रुपए

1932 का साल था, जब भारत ने टेस्ट प्लेइंग नेशन के तौर पर अपना पहला मैच खेला. लॉस एंजिलिस ओलिंपिक में हॉकी का गोल्ड जीता. जब इंडियन एयरफोर्स बनी. यश चोपड़ा, अमरीष पुरी जैसी सिनेमाई शख़्सियत भी इसी साल पैदा हुईं.

इसी साल का अप्रैल महीना था. भारत के पहले लाइसेंसी पायलट और मशहूर बिज़नेसमैन जेआरडी टाटा ने कराची से मुंबई के बीच फ्लाइट उड़ाई. ‘टाटा एयरलाइंस’ की शुरुआत हो चुकी थी, जो आगे चलकर 1946 में पब्लिक लिमिटेड कंपनी बनी. नाम मिला- ‘एयर इंडिया’.

1932 से हिसाब लगाएं तो एयर इंडिया देश की 88 साल पुरानी सर्विस है. 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण भी हो गया था. मैस्कॉट ही नहीं, एयर इंडिया का रुतबा भी महाराजा का रहा है. लाल-सफेद रंगों में सजी प्रतिष्ठित कंपनी.

इतना सब इसलिए बता रहे हैं, क्योंकि एयर इंडिया अब बिक रही है.

पूरी 100% हिस्सेदारी बेचेगी सरकार

एयर इंडिया करीब एक दशक से लगातार घाटे में चल रही है. इसलिए सरकार अब इसे नीलाम कर रही है. सरकार कंपनी में अपनी पूरी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी.

एयर इंडिया को खरीदने में दिलचस्पी रखने वाली कंपनियों को 17 मार्च तक सरकार के पास एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (EOI) नाम का डॉक्यूमेंट जमा कराना होगा. यानी लिखित में बता देना होगा कि वे नीलामी की प्रोसेस में शामिल होना चाहती हैं.

अच्छा अब EOI देने वाली हर कंपनी को नीलामी में शामिल होने का मौका मिले, ये जरूरी नहीं. कुछ पैरामीटर हैं. उन पर ख़री उतरने वाली कंपनियों को 31 मार्च तक बता दिया जाएगा कि वे बोली लगा सकती हैं. इसके बाद तारीख निकलेगी कि नीलामी होनी कब है. फिर तो आप जानते ही हैं..जिसकी बोली ऊंची, एयर इंडिया उसकी.

क्यों बिक रही है एयर इंडिया

एयर इंडिया करीब एक दशक से लगातार घाटे में चल रही है. फाइनेंशियल ईयर 2018-19 में उसे करीब साढ़े आठ हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ. लगातार हो रहे इस घाटे का ही असर रहा कि एयर इंडिया पर अब करीब 60 हजार करोड़ रुपए का कर्ज़ हो चुका है.

कंपनी की इसी हालत को देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाले ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने इसकी नीलामी, प्राइवेटाइजेशन का सुझाव दिया था. इसी की प्रक्रिया अब शुरू हुई है.

2018 में भी नीलामी खोली गई थी

इससे पहले सरकार 2018 में भी एयर इंडिया को बेचने की कोशिश कर चुकी है. तब एक भी खरीददार नहीं मिला था. इसकी दो बड़ी वजहें थीं.

पहली- सरकार के पास एयर इंडिया की 100% हिस्सेदारी है, लेकिन नीलामी सिर्फ 76% हिस्सेदारी की हो रही थी. बाकी 24% शेयर सरकार अपने पास रखने वाली थी. इस वजह से बड़ी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई ही नहीं.

दूसरी वजह- खरीददार को एयर इंडिया पर लदे कर्ज़ में से 33,392 करोड़ रुपए की जिम्मेदारी लेनी थी. यानी एयर इंडिया खरीदने वाले को सबसे पहले तो इतना बड़ा अमाउंट चुकाना पड़ता.

Air India 2
सरकार की तरफ से एयर इंडिया की नीलामी के लिए जारी किया गया विज्ञापन. (फोटो- ट्विटर)

इस बार शर्तें आसान कर दी गई हैं

2018 से सबक लेते हुए केंद्र सरकार ने इस बार नीलामी की शर्तें आसान कर दी हैं. दो बदलाव हैं.

पहला- सरकार इस बार पूरी 100% हिस्सेदारी की नीलामी कर रही है. कोई शेयर अपने पास नहीं रखेगी.

दूसरा बदलाव- इस बार खरीददार को 23,286 करोड़ रुपए के कर्ज़ की ही जिम्मेदारी लेनी होगी. बाकी बचे करीब 37 हजार करोड़ रुपए का उधार सरकार चुकाएगी.
एयर इंडिया के यूं तो तमाम चीजों से जुड़े कर्ज़ हैं. लेकिन सिर्फ एयरक्राफ्ट से जुड़े जितने कर्ज़े हैं, उनका हिसाब कुल मिलाकर 23,286 करोड़ रुपए का है. इसीलिए अब नए मालिक को इतना कर्ज़ तो चुकाना ही होगा.

नीलामी की कुछ और शर्तें…

# खरीददार को एयर इंडिया नाम रिटेन करना होगा. माने- जो भी पार्टी एयर इंडिया को खरीदेगी, वो इसका नाम नहीं बदल सकेगी.
# ये शर्त कुछ समय के लिए है. उसके बाद नाम बदला जा सकेगा. कितने समय बाद? इसका ज़िक्र नीलामी से पहले दिए जाने वाले रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) में होगा.
# दिल्ली में एयर इंडिया का कॉर्पोरेट ऑफिस है, मुंबई में हेड ऑफिस है. ये दोनों बिल्डिंग नहीं बेची जाएंगी. नीलामी की शर्तों में ये साफ लिखा है कि- दिल्ली और मुंबई के दफ्तर नीलामी की प्रोसेस से बाहर हैं.
# हालांकि नए खरीददार को कुछ समय तक दिल्ली और मुंबई के दफ्तरों से काम करने की परमिशन जरूर रहेगी.

एयर इंडिया की दो सब्सिडियरीज़ भी बिकेंगी

नीलामी सिर्फ एयर इंडिया की ही नहीं, बल्कि इसकी दो सब्सिडियरी कंपनियों की भी होगी. AI Express में सरकार अपनी 100% हिस्सेदारी बेचेगी. ये एक लो-कॉस्ट एयरलाइन सर्विस है. वहीं AISATS में 50% हिस्सेदारी बेची जाएगी. ये एक गेटवे एंड फूड सर्विस प्रोवाइडर कंपनी है.

बीजेपी नेता स्वामी ने कहा- ये एंटी-नेशनल डील

एयर इंडिया की नीलामी का फैसला आते ही 27 तारीख को सुबह-सुबह बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी का ट्वीट भी आ गया. स्वामी ने लिखा- ‘ये डील पूरी तरह से एंटी-नेशनल है. मैं इसके खिलाफ कोर्ट जाने के लिए मजबूर हैं. हम अपने परिवार की संपत्तियों को बेच नहीं सकते.’

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने भी कहा है कि सरकार की खराब पॉलिसी का असर है कि अब उसके पास पैसे ही नहीं बचे हैं. इसी वजह से एसेट्स को बेचकर पैसे जुटाने की कोशिश हो रही है.

खरीददार के मामले में भी शर्तों में ढील

सरकार ने इस बार खरीददार के मामले में भी शर्तों में ढील दे दी है. 2018 में नियम था कि बोली लगाने वालों की नेटवर्थ कम से कम 5 हजार करोड़ रुपए होनी चाहिए. इस बार ये लिमिट घटाकर साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए कर दी गई है.
इसके अलावा एंप्लॉई बेनेफिट का भी ख्याल रखा जाएगा. नए मालिक को 3% शेयर एयर इंडिया के कर्मचारियों के लिए रिजर्व रखने होंगे.

एयर इंडिया के पास चार हजार से ज्यादा लैंडिंग स्लॉट

एयर इंडिया के पास डोमेस्टिक फ्लाइट लैंडिंग के चार हजार से ज्यादा स्लॉट, इंटरनेशनल फ्लाइट के 1500 से ज्यादा स्लॉट हैं. एयर इंडिया के पास करीब सौ जहाज हैं. इसमें बोइंग से लेकर एयरबस तक शामिल हैं. इनकी कीमत 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है. नए मालिक को एयर इंडिया खरीदने पर इतना कुछ मिलेगा. इसके अलावा करीब 20 हजार एंप्लॉई एयर इंडिया के साथ काम करते हैं.


बीएसएनएल और एयर इंडिया से भी ज्यादा घाटे में चल रही है इंडिया पोस्ट

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