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#बचाओ_पवित्र_तीर्थ_शिखरजी ट्विटर पर क्यों ट्रेंड हुआ?

#बचाओ_पवित्र_तीर्थ_शिखरजी. ट्विटर पर पिछले कुछ दिनों से ये हैशटैग चल रहा है. इसके साथ ट्वीट करने वालों का आरोप है कि जैन समुदाय के सबसे पवित्र स्थल को पिकनिक स्पॉट बना दिया गया है, जहां खुलेआम मांसाहार और शराब का सेवन हो रहा है. कुछ ट्वीट्स देखिए.

आईपीएस अधिकारी अरुण बोथरा ने लिखा,

शिखरजी जैनियों का सबसे पवित्र स्थान है. 24 में से 20 तीर्थंकरों ने यहीं मोक्ष प्राप्त किया था. आज ये मात्र पिकनिक स्थल बन गया है, जहां लोग खुलेआम मांसाहार और शराब का सेवन करते हैं. जैन पवित्र स्थान को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. वास्तविक अल्पसंख्यक होने के खतरे.

पीयूष मेहता नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा,

शिखरजी सिर्फ एक तीर्थ नहीं, महातीर्थ है. इसे जैनियों द्वारा शाश्वत गिरिराज माना जाता है. हम नंगे पांव 27 किलोमीटर की वंदना करते हैं और इसे पूरा करने तक भोजन और पानी से परहेज करते हैं. और आप इसे टूरिस्ट स्पॉट और मीट बेचने की तरह विकसित करना चाहते हैं.

CA मयंक नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा,

शिखरजी जैनियों के लिए सबसे पवित्र स्थान है. जितना महत्व मक्का/वेटिकन/अयोध्या का है, उतना हमारे लिए शिखरजी का है. सबसे अहिंसक महात्मा जो पृथ्वी पर कृपा करते हैं, उस भूमि पर अतिक्रमण, मांस और शराब की खपत की खबरें दुखद हैं.

देवेंद्र भाईजी ने ट्वीट किया,

हमारा पहला कर्तव्य है अपने धर्म और तीर्थों की रक्षा करना. और हम सभी को एकता और अखंडता दिखानी होगी. तभी हम अपने तीर्थ और धर्म की सही तरीके से रक्षा कर पाएंगे. #बचाओ_पवित्र_तीर्थ_शिखरजी

क्या है पूरा मामला?

झारखंड का एक जिला है गिरिडीह. यहां पारसनाथ पहाड़ी है. मान्यता है कि 23वें जैन तीर्थंकर के नाम पर पहाड़ी का नाम पारसनाथ रखा गया. जैन धर्म में 24 तीर्थंकर हुए. वर्धमान महावीर आखिरी तीर्थंकर थे. इस पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी 1350 मीटर है. इसे सम्मेद शिखरजी के नाम से जाना जाता है. यहां कितने जैन तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया, इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं. कुछ लोगों का कहना है कि 24 जैन तीर्थंकरों ने इस पहाड़ी पर मोक्ष प्राप्त किया. कुछ के अनुसार, 20 तीर्थकारों ने तो कुछ लोग 9 तीर्थकारों के यहां मोक्ष प्राप्त करने की बात कहते हैं. उनमें से हरेक के लिए पहाड़ी पर एक मंदिर (गुमटी या तुक) है. यहां के कुछ मंदिर 2,000 साल से अधिक पुराने माने जाते हैं. इसकी तलहटी में मधुबन बसा है. पर्वत की तलहटी में हजारों लोग रहते हैं.

पारसनाथ पहुंचने के कई साधन हैं. फ्लाइट से आने वालों को झारखंड की राजधानी रांची उतरना पड़ता है. पारसनाथ यहां से 103 किलोमीटर दूर है. इसके अलावा पारसनाथ के साथ स्थित दूसरा हवाई अड्डा है बिहार का गया, जहां से ये 117 किलोमीटर दूर है. हालांकि यहां रेलवे स्टेशन है. सड़क मार्ग की बात करें तो ये हजारीबाग से 38 तो बोकारो से 54 किलोमीटर दूर है.

यहां के एक स्थानीय नवीन कुमार जैन दी लल्लनटॉप को बताते हैं कि ये पर्वत 20 तीर्थंकरों की मोक्ष भूमि है. इसे मधुबन के नाम से भी जानते हैं. हर जैन की तमन्ना रहती है कि वो जितना अधिक शिखरजी की वंदना कर सके करे. दिगंबर और श्वेतांबर दोनों के लिए ये बहुत महत्वपूर्ण है. दिगंबर और श्वेतांबर दोनों ही मुनि शिखरजी में लंबा प्रवास करते हैं. साल दो साल, तीन साल. नवीन जैन बताते हैं,

24 में से 20 तीर्थंकर ने इस पर्वत पर मोक्ष प्राप्त किया. हम लोगों के लिए ये वैसा ही है जैसे मुस्लिम समुदाय के लिए मक्का-मदीना. पूरा इलाका मांस-मदिरा प्रतिबंधित क्षेत्र है. लेकिन नए साल पर 3 तारीख को बंगाल के मेदिनापुर से कुछ यात्री आए थे शिखरजी में. ये लोग मेन रोड से घुसकर शिखरजी के एक-डेढ़ किलोमीटर में ही पार्टी कर रहे थे. मुर्गा, मछली बना खा रहे थे. समाज के लोगों ने देखा, विरोध हुआ. थाना प्रभारी की मौजूदगी में वहां से उन लोगों को निकाला गया. इस मामले को लेकर गिरडीह प्रशासन को आवेदन दिया गया. कार्रवाई की मांग की गई है.

नवीन कुमार बताते हैं कि पिछले कुछ समय में इस तरह की चीजें बढ़ी हैं. वो इसके पीछे का कारण भी बताते हैं. उनका कहना है,

शिखरजी को पिकनिक स्पॉट के रूप में देखा जा रहा है, जबकि वो पिकनिक स्पॉट नहीं है. शिखरजी के साथ आस्था जुड़ी हुई है. दिगंबर जैन लोग यहां पद यात्रा करते हैं. रात के दो बजे पदयात्रा चालू करते हैं. शाम को 4 बजे वापस आते हैं. कुल 27 किलोमीटर की यात्रा होती है. 9 किमी चढ़ना, 9 किमी उतरना और 9 किमी की परिक्रमा. जो लोग इस पर्वत पर चढ़ने में सक्षम नहीं थे, उनके लिए डोली का इंतजाम था.

नवीन कुमार बताते हैं कि डोली से लोगों को लाना-ले जाना स्थानीय लोगों के लिए रोजीरोटी का जरिया था. लेकिन पिछले कुछ समय से यहां बाइक्स का चलन बढ़ा है. राज्य सरकार के प्रतिबंध के बावजूद बाइक से लोग आ जा रहे है. उनका कहना है,

बाइक से जाने वाले ऐसी चीजें लेकर जाते हैं जो सही नहीं हैं. इनमें नॉनवेज और शराब भी शामिल है.

स्थानीय मीडिया की खबरें बताती हैं कि डोली मजदूर लगातार इसका विरोध कर रहे हैं. उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन दोपहिया वाहनों को परमिशन देने के लिए पैसा लेता है. जबकि राज्य सरकार द्वारा पर्वत के ऊपर वाहनों का परिचालन प्रतिबंध है. इसके लिए सूचना पट्ट भी लगाया हुआ है. बावजूद इसके स्थानीय प्रशासन सरकार के आदेश का उल्लंघन कर परमिशन देता है. समय-समय पर ये लोग विरोध प्रदर्शन भी करते रहते हैं.

जैन धर्म के गुरु क्या कह रहे हैं?

मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा,

मोटरसाइकिल जाने से आम लोगों का पहुंचना सरल हो गया है. बाइक की वजह से लोग 20 मिनट में पहाड़ पर पहुंच जा रहे हैं और जाकर मस्ती कर रहे हैं. कई बार बाइक को बंद कराया गया है, लेकिन 8-10 दिन पहले फिर से ये शुरू हो गया. समाज में जागरूकता होनी चाहिए. डोली से जाएं, पैदल जाएं, ना कि बाइक से जाएं.

एक और जैन धर्म गुरु श्री विवेक मुनि जी महाराज का कहना है,

ये जैन तीर्थंकरों की तपो भूमि है, निर्वाण भूमि है. जैन समाज की आस्था, श्रद्धा का केंद्र है. इस पावन तीर्थ की पवित्रता को सुरक्षित रखना हम सभी का परम कर्तव्य है. किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, नशा, मांसाहर की घटना, दुखद है. यूनिवर्सिल अहिंसा फाउंडेशन आचार्य सुशील मुनि मिशन की ओर से हम इस घटना का विरोध करते हैं.

वहीं आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी गुरुदेव का कहना है,

शिखर जी, गिरनार जी आदि सैकड़ों तीर्थ युवा शक्ति का इंतजार कर रहे हैं कि वे आएं और आकर हमारा संरक्षण करें. अन्यथा हमारी धरोधर अन्य हाथों में चली जाए तो हमें आश्चर्य नहीं करना चाहिए. अगर ऐसा हुआ तो आने वाली पीढ़ी माफ नहीं करेगी. मैं बार-बार कहूंगा कि हर व्यक्ति को सोचना होगा अपने धर्म के संरक्षण के लिए.

इनके अलावा क्षुल्लक योगभूषण महाराज का कहना है,

समग्र जैन समाज की आस्था का केंद्र शिखरजी, जो कि सुप्रसिद्ध अहिंसक जैन तीर्थ है, ऐसे तीर्थ की पावन वसुंधरा पर आए दिन अनर्गल गतिविधियां देखी जा रही हैं. मैं भारत सरकार और झारखंड सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि शिखरजी पर किसी भी पशु की हत्या या बलि प्रतिबंधित है, लेकिन हाल ही में मांस और मदिरा की खुलेआम बिक्री देखी गई है. ऐसे लोगों का जमावड़ा देखा गया है जो मांस मदिरा का सेवन करते हैं. साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना हुई है. जो अतिक्रमण हो रहा है अन्य संप्रदाय के लोगों का ये जैन समाज स्वीकार नहीं करेगा. मैं जैन समाज से आह्वान करता हूं कि वो अपने तीर्थ की रक्षा करें.

प्रशासन क्या कह रहा है?

दी लल्लनटॉप ने गिरडीह के डीसी से फोन पर बात करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो पाई है. डीसी ऑफिस में फोन करने पर पता चला कि डीसी राहुल सिन्हा किसी मीटिंग में हैं. हमने उनके पर्सनल नंबर पर कई बार फोन किया, लेकिन फोन स्विचऑफ रहा. जैसे ही बात होती है हम प्रशासन का पक्ष भी बताएंगे.


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