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कहानी कोच गौरव खन्ना की, जिनकी वजह से टोक्यो पैरालंपिक्स में भारत ने जीते 4 मेडल्स

‘शहर के अंधेरे को इक चराग़ काफी है,
सौ चराग़ जलते हैं इक चराग़ जलाने से’

एहतिशाम अख्तर का लिखा ये शेर पैरा बैडमिंटन कोच गौरव खन्ना पर फिट बैठता है. गौरव खन्ना वो चराग़ हैं. जिनकी लौ से कई चराग़ रौशन हुए. द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित गौरव खन्ना ने देश को कई चैंपियन खिलाड़ी दिए हैं. और इन चैंपियंस में नए नाम जुड़े हाल ही में खत्म हुए टोक्यो पैरालंपिक्स से.

इस बार पैरालंपिक्स में पहली बार बैडमिंटन को शामिल किया गया था. भारत ने टोक्यो पैरालंपिक्स में कुल 19 मेडल्स जीते. और इनमें से चार मेडल्स बैडमिंटन से आए. दो गोल्ड, एक सिल्वर मेडल और एक ब्रॉन्ज. प्रमोद भगत और कृष्णा नागर ने गोल्ड मेडल जीता. सुहास यतिराज ने सिल्वर और मनोज सरकार ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.

प्रमोद भगत अपने कोच गौरव के बारे में कहते हैं,

‘हमलोग परिवार की तरह हैं. सालों से ट्रेनिंग कर रहे हैं. वे मेरे लिए पिता, बड़े भाई और दोस्त की तरह हैं. मैं जीत का जश्न गौरव सर के साथ मनाना चाहता था.’

वहीं मनोज सरकार कहते हैं,

‘वो गौरव सर ही थे, जिन्होंने मुझे पैरा गेम्स के बारे में बताया. उससे पहले मुझे पता तक नहीं था कि ऐसा भी कुछ होता है.’

# कौन हैं Gaurav Khanna? 

गौरव खन्ना की ज़िंदगी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है. गौरव पहले नेशनल बैडमिंटन प्लेयर थे. बाद में उन्होंने फिजिकल डिसएबिलिटी वाले खिलाड़ियों को सपने देखने और उसे पूरा करने की राह दिखाई. सबसे पहले गौरव खन्ना ने उन युवाओं को चुना, जो सुन नहीं सकते थे. और उन्हें बैडमिंटन खेलने के लिए प्रेरित किया.

हालांकि, गौरव के लिए डीफ प्लेयर्स को इशारों में समझाना बड़ी चुनौती थी. लेकिन वे इससे जल्द ही पार पा गए. इसके बाद गौरव को डीफ बैडमिंटन टीम का कोच बनाया गया. और फिर उन्हें कॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप के लिए एशियन टीम के कोच पद के लिए नॉमिनेट भी किया गया था. साल 2015 में गौरव खन्ना को पैरा बैडमिंटन टीम का कोच बनने के लिए ऑफर किया गया. और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

जानने लायक है कि जब गौरव कोच बने. तो उनके पास नेशनल कैंप में एक भी खिलाड़ी नहीं था. और न ही कोई स्पॉन्सर. पिछले साल टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान गौरव ने कहा था,

‘2015 वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले SAI गांधीनगर में हमने एक कैंप आयोजित किया. उस साल हमने 13 मेडल्स जीते थे. नेशनल के लिए सिर्फ 40-50 ही खिलाड़ी मिले थे. लेकिन 2017 में हमारे पास 150 खिलाड़ी थे. और 2019 में 235 खिलाड़ियों ने नेशनल कैंप में हिस्सा लिया. धीरे-धीरे खिलाड़ियों की संख्या बढ़ी.’

पैरा टीम के लिए स्पॉन्सर मिलना बड़ी चुनौती थी. क्योंकि हमारे देश में पैरा बैडमिंटन टीम को लेकर वैसे भी क्रेज नहीं है. और फिर गौरव खन्ना इन खिलाड़ियों के लिए खुद स्पॉन्सर लेकर आए. साथ ही सरकार की भी मदद मिली. पैरा बैडमिंटन कोच के इस सफर के बारे में गौरव कहते हैं,

‘सरकार अब हमारी मदद कर रही है. व्यक्तिगत तौर पर भी स्पॉन्सर मिल रहे हैं. go स्पोर्ट्स फाउंडेशन ने काफी मदद की है. जबकि हमारे 75 खिलाड़ी खेलो इंडिया प्रोग्राम का हिस्सा हैं.’

जब देश भर में लॉकडाउन लगा था, तो गौरव खन्ना के पास सबसे बड़ी चुनौती खिलाड़ियों की ट्रेनिंग की थी. ऐसे में उन्होंने लखनऊ शहर से थोड़ी दूरी पर 2500 स्क्वायर फ़ीट की जमीन खरीदी. इसके लिए एक करोड़ का लोन लिया. जब गौरव को द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. तो उन्होंने प्राइज मनी में मिले 10 लाख रुपये अकैडमी बनाने में लगा दिए. जहां खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दी गयी.

और उसी का नतीजा है कि देश को टोक्यो पैरालंपिक्स में बैडमिंटन से चार मेडल्स मिले. प्रमोद भगत, कृष्णा नागर, पलक कोहली, मनोज सरकार जैसे कई खिलाड़ी अब देश का नाम रोशन कर रहे हैं. और उस रोशनी के पीछे गौरव खन्ना हैं. जो आज कई फिजिकल डिसएबिलिटी वाले युवाओं को सपने पूरे करने की हिम्मत दे रहे हैं.


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