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जिस गैरसैंण को उत्तराखंड सरकार ने समर कैपिटल के लिए चुना है उसकी कहानी क्या है?

उत्तराखंड. पहाड़ों से घिरा राज्य. यहां के चमोली जिले में एक जगह है. गैरसैंण. ये एक नगर पंचायत है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसे ‘समर कैपिटल’ या ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा की है. 4 मार्च को बजट पेश करने के बाद विधानसभा में उन्होंने ये ऐलान किया. बहुत लोगों ने सीएम के इसे समर कैपिटल बनाने के फैसले का स्वागत किया है, वहीं, बहुत से लोग विरोध भी कर रहे हैं. लेकिन इसे स्थायी राजधानी बनाने की मांग करने वालों का कहना है कि ये एक झुनझुना भर है. उनका कहना है कि गैरसैंण की इतनी ही चिंता है तो उसे स्थायी राजधानी बना दें.

उत्तराखंड में गैरसैंण की लोकेशन. ये कुमाऊं और गढ़वाल डिविजन के बीच पड़ता है. देहरादून से इसकी दूरी करीब 250 किलोमीटर है. फोटो: Google Maps
उत्तराखंड में गैरसैंण की लोकेशन. ये कुमाऊं और गढ़वाल डिविजन के बीच पड़ता है. देहरादून से इसकी दूरी करीब 250 किलोमीटर है. फोटो: Google Maps

गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के समर्थक ऐक्टिविस्ट चारू तिवारी ने बीजेपी-कांग्रेस दोनों पर राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा,

मुख्यमंत्री ने अपनी टोपी बचाने के लिए और पार्टी में उपज रहे असंतोष से खुद को बाहर निकालने के लिए ये कदम उठाया है. ये जनता के सवालों को दरकिनार करने और जनता की भावनाओं के ख़िलाफ अलोकतांत्रिक समझ को दिखाता है. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. गैरसैंण (चंद्रनगर) को खारिज करने और उसे उलझाए रखने का काम बीजेपी की अंतरिम सरकार राज्य बनने के बाद ही कर चुकी थी. उसने ही स्थायी राजधानी की घोषणा करने की जगह दीक्षित आयोग का गठन कर इसे हमेशा उलझाए रखा. बाद में कांग्रेस ने भी इसे आगो बढ़ाया. जिस दीक्षित आयोग को छह महीने में अपनी रिपोर्ट देनी थी, वो 11 बार बढ़ाई गई. 9 सालों तक जनता के पैसों का दुरुपयोग होता रहा. कुल मिलाकर बीजेपी-कांग्रेस ने राजधानी के सवाल को फुटबॉल की तरह इस्तेमाल किया.

गैरसैंण को समर कैपिटल बनाए जाने का विरोध भी हो रहा है. फोटो: फेसबुक/चारू तिवारी
गैरसैंण को समर कैपिटल बनाए जाने का विरोध भी हो रहा है. फोटो: फेसबुक/चारू तिवारी

स्थानीय पत्रकार राजीव लोचन कहते हैं,

केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ और झारखंड को स्थायी राजधानी तो दी, लेकिन उत्तराखंड को छोड़ दिया. पहाड़ी क्षेत्रों को विकसित करने में हिमाचल प्रदेश तो सफल हो गया, लेकिन उत्तराखंड पीछे रह गया. अभी गैरसैंण को समर कैपिटल बनाने की घोषणा के बाद भी सारे काम देहरादून से ही होंगे. वहां सचिवालय हैं. विधानसभा भवन का आर्किटेक्चर भी पहाड़ी परंपरा के हिसाब से नहीं है. सिर्फ सीमेंट का एक टीला खड़ा कर दिया है.

समर कैपिटल क्या होती है

समर कैपिटल या ग्रीष्मकालीन राजधानी गर्मियों में प्रशासन चलाने वाली जगह होती है. भारत में ब्रिटिश राज के दौरान हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को समर कैपिटल बना दिया जाता था. गर्मियों में अंग्रेज अफसरों को मैदानी इलाकों में दिक्कत होती थी. सरकारी अमले को लाने ले जाने में होने वाली झंझट को देखते हुए ये प्रैक्टिस रोक दी गई थी. जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर समर कैपिटल है. इसके अलावा विश्व के कई देशों में ऐसी व्यवस्था रही है.

शिमला अंग्रेजों की समर कैपिटल हुआ करती थी. फोटो: India Today
शिमला अंग्रेजों की समर कैपिटल हुआ करती थी. फोटो: India Today

गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग पुरानी है

गैरसैंण गढ़वाली शब्द है. ये दो शब्दों से बना है. गैर और सैंण. गैर का मतलब गहरा स्थान होता है और सैंण शब्द का मतलब मैदानी इलाका होता है. मतलब गैरसैंण यानी गहरे में समतल मैदानी इलाका. उत्तराखंड में प्रशासन के स्तर पर दो मंडल हैं. कुमाऊं और गढ़वाल. ब्रिटिश काल में 1839 में गैरसैंण को कुमाऊं से ट्रांसफर कर नए बने गढ़वाल में शामिल कर लिया गया. बाद में 20 फरवरी 1960 को चमोली के रूप में नया ज़िला बना दिया गया और गैरसैंण इस जिले में आ गया.

गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग पुरानी है. इसे लेकर आंदोलन भी होते हैं. जब उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने का आंदोलन चल रहा था, तभी ये मांग भी उठी. 9 नवंबर, 2000 को उत्तर प्रदेश से कटकर जब उत्तराखंड (तत्कालीन नाम उत्तरांचल) अलग राज्य बना, तब देहरादून अस्थायी राजधानी बना दी गई. इसके बाद से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग उठती रही है.यहां पहाड़ी बनाम मैदानी इलाके का मामला भी है. पहाड़ी लोगों की अवहेलना का आरोप लगाकर ही अलग राज्य की मांग हुई थी. गैरसैंण के स्थानीय लोगों को लगता है कि पहाड़ी लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं है. उनकी समस्याएं नहीं सुनी जा रही हैं. बहुत से आंदोलनकारियों की मांग है कि पहाड़ी राज्य की राजधानी पहाड़ी ही होनी चाहिए, जबकि देहरादून तराई क्षेत्र है. उनका कहना है कि सरकारें बदलती हैं लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं होती. इसी वजह से गैरसैंण विकास से भी दूर है.

90 के दशक में अलग राज्य का आंदोलन और…

1960 के दशक में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग की थी. लेकिन 90 के दशक में अलग राज्य की मांग के साथ आंदोलन शुरू हुआ. 1992 में उत्तराखंड क्रांति दल ने प्रस्तावित राज्य की राजधानी गैरसैंण को घोषित भी कर दिया. उत्तराखंड क्रांति दल ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के नाम पर राजधानी का नाम ‘चंद्रनगर’ करने की भी मांग की. 1994 में उत्तराखंड आंदोलन चरम पर पहुंच गया. गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग के साथ सरकार पर दबाव बनाने के लिए 1994 में 157 दिनों की भूख हड़ताल हुई. तब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार थी. सरकार ने रमाशंकर कौशिक की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई. इसने अलग राज्य के साथ गैरसैंण को इसकी राजधानी बनाने की सिफारिश की. 9 नवंबर, 2000 को उत्तराखंड उत्तर प्रदेश से अलग हुआ.

उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की मांग 90 के दशक में शुरू हुई, जो 1994 तक चरम पर पहुंच गई. फोटो: Quora
उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की मांग 90 के दशक में शुरू हुई, जो 1994 तक चरम पर पहुंच गई. फोटो: Quora

दीक्षित कमिटी की सिफारिश और देहरादून

अलग राज्य बनने के बाद गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग और तेज हो गई. रैलियां हुईं. मार्च निकले. गैरसैंण राजधानी आंदोलन समिति बनी. इन सबको देखते हुए राज्य की बीजेपी सरकार ने जस्टिस वी दीक्षित की अध्यक्षता में दीक्षित कमिटी बनाई. ताकि वो स्टडी करे और बताए कि कौन सी जगह राजधानी के लिए सही है. दीक्षित कमीशन ने पांच जगहें चुनीं: देहरादून, काशीपुर, रामनगर, ऋषिकेश और गैरसैंण. इसके बाद 17 अगस्त 2008 को कमिटी ने 80 पेजों की एक रिपोर्ट सौंपी. बताया कि देहरादून राजधानी के लिए सही जगह है.

गैरसैंण में बना है विधानसभा भवन

2012 में तब के सीएम विजय बहुगुणा ने गैरसैंड़ में कैबिनेट मीटिंग की. 2013 में GIC ग्राउंड में उत्तराखंड विधानसभा बिल्डिंग के लिए फाउंडेशन स्टोन रखा गया. इसके बाद गैरसैंण से 14 किमी दूर भराणीसैंण में भूमि पूजन हुआ. 2014 में बिल्डिंग बनकर तैयार हुई. 9 जून से 12 जून, 2014 तक उत्तराखंड विधानसभा का तीन दिवसीय सत्र गैरसैंण में हुआ था. इससे शोर तेज हुआ कि गैरसैंण भविष्य में स्थायी राजधानी बन सकती है. मई, 2014 में उत्तराखंड सरकार ने चमोली जिले के गैरसैंण और अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया ब्लॉक को मिलाकर गैरसैंण डेवलपमेंट काउंसिल बनाई. इसी साल के अंत तक निर्णय हुआ कि इसे समर कैपिटल की तरह विकसित किया जाएगा.

गैरसैंण में बनी विधानसभा बिल्डिंग. फोटो: यूट्यूब
गैरसैंण में बनी विधानसभा बिल्डिंग. फोटो: यूट्यूब

किन राज्यों की दो राजधानियां हैं

आंध्र प्रदेश में 3 राजधानियों का प्रस्ताव है तो हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में 2-2 राजधानियां हैं. मुंबई और नागपुर. जम्मू-कश्मीर में भी 2 राजधानी थी, लेकिन पिछले साल इसे राज्य से हटाकर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था.


क्या उत्तराखंड को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के दावे सही हैं?

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