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69000 शिक्षक भर्ती: पेपर लीक होने का आरोप, टॉपर मुंह छुपा रहे मगर UP सरकार भर्तियां करने में लगी है

69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती. गाहे-बगाहे अकसर हमारे सामने सुर्खियों के रूप में आता रहता है. कभी इस भर्ती को जल्दी से पूरा कराने को लेकर प्रोटेस्ट होते हैं तो कभी इसे रद्द करने की मांग को लेकर. हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के फैसले भी इस भर्ती परीक्षा को कई बार सुर्खियों में लेकर आए. बीते 6 मई को भी हाईकोर्ट का एक फैसला आया. जिसमें 3 महीने के भीतर इस भर्ती को पूरी करने का आदेश दिया गया. जिसके बाद भर्ती को पूरी करने के लिए सरकारी मशीनरी तेजी से सक्रिय हुई. लेकिन इसके बावजूद इस भर्ती पर इतनी आपत्तियां आई हैं कि इसके जल्द पूरा होने के आसार नजर नहीं आते.

क्या है 69 हज़ार शिक्षकों की भर्ती का मामला?

# दिसंबर, 2018 में यूपी की योगी सरकार ने सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए वैकेंसी निकाली.

# 6 जनवरी को करीब चार लाख कैंडिडेट्स ने लिखित परीक्षा में हिस्सा लिया. एक दिन बाद सरकार की तरफ से कट ऑफ मार्क्स की घोषणा हुई.

# 150 नंबर का पेपर था. कहा गया कि सामान्य वर्ग के कैंडिडेट्स को 150 में 97 और आरक्षित वर्ग के कैंडीडेट्स को 150 में 90 नंबर लाने होंगे. यानी जनरल कैंडिडेट 65 प्रतिशत और रिजर्व्ड कैंडिडेट का 60 प्रतिशत कट ऑफ तय किया गया.

# इस परीक्षा के पहले भी शिक्षकों की एक परीक्षा हुई थी, 68 हज़ार 500 पदों के लिए. तब पासिंग मार्क्स 50 और 45 प्रतिशत तय किया गया था. जिसे इस बार बढ़ाकर 65 और 60% कर दिया गया.

# 60-65 प्रतिशत कट ऑफ पर कुछ लोगों को असंतोष हुआ. यहां से सीन में दो गुट आए, एक शिक्षामित्रों का ग्रुप, और दूसरा बीएड-बीटीसी वालों का ग्रुप. शिक्षामित्रों ने 60-65 प्रतिशत कट ऑफ का विरोध करना शुरू कर दिया. और हाईकोर्ट चले गए. इनका तर्क था कि पहली परीक्षा किसी और कट ऑफ पर और दूसरी परीक्षा किसी और कट ऑफ पर क्यों?

# 11 जनवरी, 2019 को मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के पास गया. सरकार हाईकोर्ट में हार गई. हाईकोर्ट ने कट ऑफ को 45 और 40% कर दिया.

# सिंगल बेंच के ऑर्डर के खिलाफ 22 मई, 2019 को सरकार की तरफ़ से डिवीजन बेंच में अपील की गई. बीएड और बीटीसी वाले कैंडिडेट्स ने भी सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील की.

# 22 मई से 19 सितंबर तक सात सुनवाई हुई. लेकिन इस बीच एक भी बार यूपी सरकार के महाधिवक्ता कोर्ट नहीं आए. इसे लेकर कोर्ट ने सरकार को फटकार भी लगाई. कोर्ट में महाधिवक्ता को बुलाने की मांग करते हुए उम्मीदवारों ने लखनऊ में धरना भी दिया और जिसमें उन पर लाठीचार्ज भी हुआ.

# 3 मार्च, 2020 को सुनवाई पूरी हुई और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था. 6 मई, 2020 को जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल और जस्टिस करुणेश सिंह पवार की बेंच ने फैसला सुनाया.

# 6 मई 2020 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 69 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती के मामले में अपना फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने योगी सरकार को राहत देते हुए सरकार द्वारा तय किए गए कट ऑफ(90-97) पर ही भर्ती कराने का आदेश दिया. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भर्ती की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया.

# उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र एसोसिएशन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई. इस याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने या उसे रद्द करने की मांग की गई. हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट कई अन्य शिक्षामित्रों ने भी व्यक्तिगत तौर पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली.  

 # उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया.12 मई 2020 को लिखित परीक्षा का रिजल्ट जारी किया गया. इस परीक्षा में कुल 146060 कैंडिडेट पास हुए. यानी कि रिक्त पदों की संख्या 69 हजार के दो गुने से भी ज्यादा. इस परीक्षा में पास होने वालों में 8018 शिक्षामित्र भी हैं. परीक्षा नियामक प्राधिकारण ने माना कि 3 प्रश्न कोर्स के बाहर से पूछे गए थे इसलिए इन पर सभी को नंबर दिए जाएंगे.

 # 17 मई 2020 को लिखित परीक्षा में सफल कैंडिडेट्स की नियुक्ति के लिए विज्ञप्ति जारी की गई. 18 मई से 26 मई 2020 तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए. इस विज्ञप्ति में 6 जून तक नियुक्ति पत्र जारी कर देने की बात कही गई. 

 # 21 मई 2020. शिक्षामित्रों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. शिक्षामित्रों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 6 जुलाई 2020 से पहले राज्य सरकार से अपना पक्ष भेजने को कहा. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि अनारक्षित के लिए 45 और आरक्षित के लिए 40 फीसदी के आधार को क्यों बदला गया? 6 जुलाई तक सरकार कोर्ट चार्ट के जरिए भर्ती के सारे चरण और डिटेल्स बताए. तब तक शिक्षा मित्र, जो सहायक शिक्षक के तौर पर कार्यरत हैं, उनको छेड़ा न जाए. सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई की तारीख अगली सुनवाई के लिए तय की. 

# 25 मई 2020 को सरकार ने कैंडिडेट्स को अपने मोबाइल नंबर बदलने की छूट दी. भर्ती प्रक्रिया 2018 में शुरू हुई थी और उस समय आवेदन करने वाले कई कैंडिडेट्स के मोबाइल नंबर बदल गए थे. नियुक्ति के लिए आवेदन करते समय कैंडिडेट्स के मोबाइल पर ओटीपी जाता है.

# 26 मई 2020 को सरकार ने नियुक्ति के लिए आवेदन की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 28 मई कर दिया. 26 मई की शाम तक लगभग 1.35 लाख कैंडिडेट्स नियुक्ति के लिए आवेदन कर चुके थे.

यूट्यूब पर अपलोड ऑन्सर की (दाएं) जिसे 5 जनवरी 2019 को अपलोड करने की बात कही जा रही है, बाएं तरफ ऑफिशियल ऑन्सर की.
यूट्यूब पर अपलोड ऑन्सर की (दाएं) जिसे 5 जनवरी 2019 को अपलोड करने की बात कही जा रही है, बाएं तरफ ऑफिशियल ऑन्सर की.

आपत्तियां-

1. धांधली- 6 जनवरी 2019 को लिखित परीक्षा हुई. और इससे एक दिन पहले ही पेपर आउट होने का हल्ला मचा. यूपी पुलिस और एसटीएफ ने पूरे प्रदेश में छापेमारीकर 28 लोगों को गिरफ्तार भी किया. यूट्यूब-व्हाट्सएप पर ऑन्सर की वायरल होने का दावा भी किया गया. परीक्षा होने के अगले दिन से ही कुछ कैंडिडेट्स ने धांधली का आरोप लगाते हुए इसे कैंसल करने की मांग शुरू कर दी. इलाहाबाद के सुनील मौर्य बताते हैं, 

लिखित परीक्षा होती है 6 जनवरी को. 7 जनवरी से हम लोगों ने प्रोटेस्ट करना शुरू किया. 5 जनवरी को ही एक यूट्यूब चैनल के ऑन्सर की वायरल किया. उसमें आप समझिए 135 के लगभग सही जवाब है. इसे तुक्का नहीं कह सकते हैं. उस वीडियो के डिस्क्रिप्शन में वीडियो अपलोड होने की तारीख 5 जनवरी साफ साफ दिखाई दे रही है. इसके बाद जिस तरह से ऑन्सर की पकड़ा गया. एसटीएफ ने पकड़ा. लोग जेल गए. उससे धांधली होने की बात साफ-साफ पता चलती है. लेकिन इस पर कहीं कोई जांच सरकार ने नहीं की. 7 जनवरी से हम लोगों ने दो महीने तक प्रोटेस्ट किया. इलाहाबाद हाईकोर्ट में हमने याचिका भी दाखिल की. हाईकोर्ट ने इस पर सरकार से जवाब भी मांगा, लेकिन सरकार की ओर से जवाब नहीं आया. 

धांधली के मुद्दे ने एक बार फिर जोर पकड़ा रिजल्ट आने के बाद. जब रिजल्ट आया तो कई कैंडिडेट्स की मार्कशीट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी. 150 में से 143 से लेकर 130 नंबर तक पाने वाले ये कैंडिडेट अंडरग्राउंड होने लगे. मीडिया या अन्य कैंडिडेट्स से बात करने से बचने लगे. इन कैंडिडेट्स का एकेडमिक बैकग्राउंड भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा. जिसे देखने पर पता चलता है कि किसी को हाईस्कूल के बाद इंटर पास करने में 4 साल लग गए तो किसी ने ग्रेजुएशन पूरा करने में 7 साल लगा दिए. कई ऐसे लोग हैं जिनके 5 विषय की परीक्षा TET में नंबर आए 100 में 40, 35. जबकि उससे ज्यादा कठिन और 14 विषयों वाले लिखित परीक्षा में 90-95 प्रतिशत अंक आए. जबकि इन दोनों परीक्षाओं के बीच लगभग एक महीने का गैप था.

सोशल मीडिया पर वायरल गोरख सिंह के परिवार के 3 सदस्यों की मार्कशीट
सोशल मीडिया पर वायरल गोरख सिंह के परिवार के 3 सदस्यों की मार्कशीट

सोशल मीडिया पर ऐसी भी कई मार्कशीट वायरल है जिनमें एक ही परिवार के कई लोग पास हुए हैं. सबके लगभग बराबर ही नंबर हैं. जैसे नन्हू यादव के परिवार में तीन लोगों ने परीक्षा दी और तीनों के नंबर हैं, 132, 131 और 128. गोरख सिंह के परिवार में  2 लोगों को 127 और तीसरे को 126 नंबर मिले हैं. 127 नंबर वाले दोनों कैंडिडेट्स का रोल नंबर भी आगे-पीछे ही था.

नन्हू यादव के परिवार के 3 सदस्यों की मार्कशीट. इसी तरह एक ही परिवार में कई सदस्यों के लगभग बराबर नंबर वाले कई मार्कशीट वायरल हैं.
नन्हू यादव के परिवार के 3 सदस्यों की मार्कशीट. इसी तरह एक ही परिवार में कई सदस्यों के लगभग बराबर नंबर वाले कई मार्कशीट वायरल हैं.

IPS अमिताभ ठाकुर ने भी एक ऑडियो क्लिप शेयर किया है. जो कथित तौर पर राजू पटेल का है. राजू पटेल को लिखित परीक्षा में 140 नंबर मिले हैं. इस ऑडियो में राजू जुगाड़ के जरिए अपना और अपनी बहन के पास होने की बात करते हैं. अमिताभ ठाकुर ने इस पेपर लीक होने  होने तथा अन्य अनियमितताओं के संबंध में एफआईआर दर्ज करने के लिए थाना हजरतगंज, लखनऊ में प्रार्थनापत्र भी दिया है.

लिखित परीक्षा में सबसे ज्यादा नंबर पाने वाले 10 कैंडिडेट्स से हमने बात करने की कोशिश की. लेकिन एप्लिकेशन फार्म पर दिया गया उनका नंबर स्विच्ड ऑफ ही मिला. सुनील मौर्य कहते हैं,

रिजल्ट जैसे ही आया ये बात स्वत: साबित हो गई कि परीक्षा में धांधली हुई है. 14 सब्जेक्ट्स के पेपर में 143 नंबर पाना लगभग असंभव ही है. पीएनपी (परीक्षा नियामक प्राधिकरण) खुद सारे सवालों का सही जवाब नहीं दे पा रही है. ढेर सारा ऑडियो वायरल हो रहा है. आश्चर्य की बात है ये कि देखिए अब तक किसी कोचिंग वाले ने ये नहीं कहा कि टॉपर हमारी कोचिंग का है. जबकि आमतौर पर रिजल्ट आते ही टॉपर्स के पोस्टर लगने लगते हैं. दूसरी बात ये है कि मीडिया और कई अन्य लोगों ने भी इन टॉपर्स से बात करने की कोशिश की. लेकिन वे बात करने को तैयार नहीं होते. अगर आपने टॉप किया है तो फिर आपको मीडिया से या दूसरे कैंडिडेट्स से बात करने में डर कैसा है?

2. ओवरलैपिंग

2017 में जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस एएम खानविल्कर की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने स्पष्ट कर दिया था कि एक बार रिजर्व्ड कैटेगरी की छूट और अन्य रियायतें लेने के बाद कैंडिडेट रिजर्व्ड कैटेगरी में ही नौकरी का हकदार होगा. उसे जनरल कैटेगरी में समायोजित नहीं किया जा सकता. यानी कि अगर कोई कैंडिडेट एप्लिकेशन भरते समय खुद को रिजर्व्ड कैटेगरी में बताता है और इसके तहत मिलने वाला लाभ लेता है. लेकिन बाद में जनरल कैटेगरी के बराबर या ज्यादा नंबर पाता है तो भी उसका सेलेक्शन रिजर्व्ड सीटों के लिए ही होगा. उसे जनरल कैटेगरी की सीटें नहीं मिलेगी. इसी फैसले को आधार बनाते हुए रोविन सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल की. 27 मई को इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार को 3 हफ्ते का समय जवाब दाखिल करने के लिए दिया है. रोविन सिंह कहते हैं,

जो कैंडिडेट लिखित परीक्षा में रिजर्व्ड कैंडिडेट के लिए तय किए गए मानकों के अंतर्गत पास हुए हैं. अब अगले स्टेज में एकेडमिक गुणांक को साथ में जोड़ते हुए जब मेरिट बनेगी तब वे अनरिजर्व्ड कैटेगरी में भी अप्लाई कर सकते हैं. जनरल की सीट ओवरलैप कर सकते हैं. इससे जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट्स को सीधा-सीधा नुकसान होगा. हमारी मांग यही है कि रिजर्वेशन का लाभ लेने वाले कैंडिडेट्स को उन्हीं की कैटेगरी में समायोजित किया जाए. 

ओवरलैपिंग को समझने से पहले मेरिट बनने की प्रक्रिया को समझिए. मेरिट लिखित परीक्षा और एकेडमिक गुणांक के आधार पर तय होगी. इसमें एकेडमिक गुणांक 40 प्रतिशत और लिखित परीक्षा का गुणांक 60 प्रतिशत होगा. एकेडमिक गुणांक में 10वीं, 12वीं, ग्रेजुएशन और टीचर्स ट्रेनिंग (बीटीसी, डीएलएड या बीएड) के 10-10 फीसदी अंक जोड़े जाएंगे. जैसे हाईस्कूल में किसी ने 70 प्रतिशत नंबर पाए हैं तो उसका 7 नंबर जोड़ा जाएगा. इसी तरह 12वीं, ग्रेजुएशन और टीचर्स ट्रेनिंग के नंबर जुड़ेंगे. और लिखित परीक्षा में जितने प्रतिशत नंबर मिले हैं उसका 60 प्रतिशत जोड़ा जाएगा.

इस तरह तैयार होगी मेरिट
इस तरह तैयार होगी मेरिट

जैसे कि अगर लिखित परीक्षा में 90 नंबर मिला है तो 150 के पूर्णांक में प्रतिशत होगा 60. इस 60 प्रतिशत का 60 प्रतिशत गुणांक होगा 36. अब लिखित परीक्षा और एकेडमिक गुणांक दोनों को जोड़ दिया जाएगा और मेरिट लिस्ट तैयार होगी. शिक्षामित्रोंं को यहां छूट दी गई है. उन्हें अनुभव के आधार पर प्रति वर्ष के हिसाब से 2.5 अंकों का भारांक दिया गया है. ये भारांक अधिकतम 25 अंकों का हो सकता है. यानी कि जब मेरिट बनाई जाएगी तो शिक्षामित्रों के लिखित परीक्षा और एकेडमिक गुणांक तो जुडे़ेंगे साथ ही भारांक के रूप में 25 नंबर और जोड़ दिए जाएंगे. इन कुल अंकों के आधार पर ही उम्मीदवारों का चयन होगा. इसी के आधार पर उन्हें सीट एलॉट की जाएगी.

अब ओवरलैपिंग की प्रक्रिया को समझाते हुए रोविन सिंह कहते हैं

जैसे किसी जनरल कैटेगरी के 98 नंबर हैं लिखित परीक्षा में. तो उसका परसेंटेज होगा 65.3. इसका 60 परसेंट होगा 39.2. ये लिखित परीक्षा का गुणांक हो गया. अब इसमें एकेडमिक का गुणांक जोड़ा जाएगा. मान लीजिए एकेडमिक का गुणांक है 28. इन दोनों को जोड़ने पर फाइनल गुणांक बनता है 67.2. 

अब किसी रिजर्व्ड कैटेगरी के कैंडिडेट को लेते हैं. लिखित परीक्षा को पास करने का कट ऑफ रिजर्व्ड कैटेगरी के कैंडिडेट के लिए 90 यानी 60 प्रतिशत है. जबकि जनरल कैटेगरी के लिए 97 नंबर है यानी कि 65 प्रतिशत. यानी कि जो कैंडिडेट 90-96 नंबर पाकर लिखित परीक्षा पास किए हैं, उन्होंने रिजर्वेशन का लाभ लिया है. लेकिन नियुक्ति के लिए आवेदन करते समय वे जनरल कैटेगरी की सीट में अप्लाई कर सकते हैं. 90 नंबर पाने वाले का प्रतिशत होगा 60. और लिखित परीक्षा का गुणांक होगा 36. अगर एकेडमिक गुणांक 32 मान लें तो फाइनल गुणांक होता है 68. और इस तरह से वो कैंडिडेट जनरल कैंडिडेट की सीट ओवरलैप कर जाएगा. जबकि लिखित परीक्षा के हिसाब से देखें तो वो काफी पीछे है. 

3. नियुक्त हो चुके लोगों को मौका न दिया जाए

68500 वाली भर्ती में सेलेक्ट हो चुके लोग जो अभी नौकरी कर रहे हैं. वो भी इस भर्ती में अप्लाई कर रहे हैं. ताकि उन्हें अपने गृह जनपद में तैनाती मिल सके. एक वर्ग इनका विरोध कर रहा है और मांग कर रहा है कि एक बार सेलेक्ट हो चुके अभ्यर्थियों को दोबारा भर्ती में शामिल होने से रोका जाए.

 

4. गलत सवाल 

लिखित परीक्षा में पूछे गए सवालों के जवाब ही सवालों के घेरे में हैं. इन सवालों पर आपत्तियों की भरमार है. 6 जनवरी 2019 को एग्जाम होने के बाद 8 जनवरी को इसकी ऑन्सर की जारी की गई तो 150 में से 142 सवालों पर आपत्ति आ गई. बाद में तीन सवालों को परीक्षा नियामक प्राधिकरण ने आउट ऑफ कोर्स माना. और उनके मार्क्स सभी को बांट दिए. लेकिन कैंडिडेट्स को इनके अलावा भी कई सवालों पर आपत्ति थी. जिसे पीएनपी ने नहीं माना तो वे कोर्ट गए.

प्रश्नों के उत्तर विकल्प गलत होने को लेकर हजारों अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट याचिका दायर की है. ये कैंडिडेट्स एक या दो अंक से पीछे रह गए हैं. याचिका दायर करने वाले कैंडिडेट्स का कहना है कि कई सवालों के उत्तर विकल्प गलत होने के कारण सही जवाब देने के बावजूद उन्हें मेरिट में स्थान नहीं मिला है. जबकि गलत उत्तर देने वालों को सेलेक्ट कर लिया गया है. इन कैंडिडेट्स की मांग है कि गलत उत्तर वाले प्रश्न हटाकर नए सिरे से मेरिट लिस्ट बनाई जाए और लिखित परीक्षा के घोषित रिजल्ट को रद किया जाए. इन याचिकाओं पर 27 मई को सुनवाई होगी.

तीन कैंडिडेट्स ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेन्च में याचिका दाखिल कर विवादित उत्तरों के संबंध में एक समिति गठित किए जाने और उसकी रिपोर्ट के आधार पर पुनर्मूल्यांकन की मांग की है. साथ ही अंतरिम राहत के तौर पर चयन प्रक्रिया पर रोक लगाने की गुजारिश की है. याचियों को 8 मई 2020 को जारी ऑन्सर की में चार उत्तरों को लेकर आपत्ति है. कोर्ट ने विवादित प्रश्नों पर विशेषज्ञों की राय के साथ 27 मई तक हलफनामा पेश करने का आदेश दोनों पक्षों यानी राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं को दिया है.

लिखित परीक्षा का पेपर आउट होने का आरोप लगाते हुए 2019 में भर्ती को रद किए जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद में प्रदर्शन करते अभ्यर्थी.
लिखित परीक्षा का पेपर आउट होने का आरोप लगाते हुए 2019 में भर्ती को रद किए जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद में प्रदर्शन करते अभ्यर्थी.

तारीख पर तारीख

डेढ़ साल बीत चुके हैं और ये भर्ती कोर्ट-कचहरी में ही फंसकर रह गई है. कभी इलाहाबाद हाईकोर्ट, कभी लखनऊ खंडपीठ तो कभी सुप्रीम कोर्ट. सिंगल बेन्च, फिर डबल बेन्च और फिर आगे ऊपरी कोर्ट. एक मामला खत्म होता है तो दूसरा शुरू हो जाता है. इस भर्ती को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट और इसी की लखनऊ खंडपीठ में सैकड़ों याचिकाएं दायर की गईं हैं.

6 मई को जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कट ऑफ के मसले पर अपना फैसला सुनाया तो लगा था कि ये मसला अब सुलझने वाला है. सरकार की ओर से भी कहा गया कि 6 जून तक सारी प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति पत्र भेज दिया जाएगा. सरकारी मशीनरी ने भी तेजी से काम करना शुरू किया. लेकिन रिजल्ट जारी होने के बाद इतनी सारी आपत्तियां सामने आ रही हैं कि एक बार फिर से इस भर्ती के लटकने की संभावना बढ़ गई है. हर स्तर पर गड़बड़ी है. और ये हर रोज नए-नए रूप में सामने आ रही हैं.

6 मई 2020 के फैसले में हाईकोर्ट ने 40/45 की बजाय कट ऑफ 60/65 प्रतिशत रखने का आदेश दिया था. ताकि योग्य अभ्यर्थी चुने जा सकें. लेकिन कितना हास्यास्पद है कि इस परीक्षा को टॉप करने वालों पर ही धांधली करने के आरोप लग रहे हैं.  लिखित परीक्षा को टॉप करने वाले कैंडिडेट्स संदेह के घेरे में है, अगर उन्होंने कोई गड़बड़ी नहीं की है तो उन्हें आगे आना चाहिए. अपनी बात को रखना चाहिए. इस तरह से उनका अचानक से अंडरग्राउंड होना भर्ती में धांधली के आरोप को मजबूत करता है. उन पर संदेह को मजबूत करता है. बाकी समय-समय पर यूपी के स्कूलों का वीडियो तो वायरल होता ही रहता है जिसमें किसी अधिकारी के सामने कोई टीचर एक पैरा अंग्रेजी नहीं पढ़ पाता तो कोई गणित के सवाल नहीं हल कर पाता.

और इन सबके बीच अगर कोई पिस रहा है तो वो है योग्य अभ्यर्थी. जिन्होंने पूरी मेहनत के साथ तैयारी की. परीक्षा पास की. इसके बावजूद उन्हें नहीं पता कि नियुक्ति के लिए कितना इंतजार करना पड़ेगा. नियुक्ति मिलेगी भी या नहीं?


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