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सुंदर भाटी, वेस्ट यूपी का वो गुंडा जिसके जेल से किए एक फ़ोन ने सरकार को फ़ंसा दिया था

साल था 2006. अगस्त का महीना. कुख्यात गैंगस्टर सुंदर भाटी बुलंदशहर जेल में बंद था. इस दौरान पुलिस के हाथ एक रिकॉर्डिंग लगी. जेल में बंद सुंदर भाटी की फोन रिकॉर्डिंग. इस रिकॉर्डिंग के मुताबिक वो कथित तौर पर तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्यमंत्री माणिक राव गावित से बात कर रहा था. पुलिस के पास से ये रिकॉर्डिंग एक टीवी चैनल के रिपोर्टर को लीक हो गई. बस फिर क्या था, टीवी चैनलों ने इस बातचीत को जोर-शोर से दिखाया. CBI जांच शुरू हो गई. हालांकि इस मामले में गावित को क्लीन चिट मिल गई. पता चला कि दो लोग खुद को गावित और उनका सेक्रेटरी बताकर सुंदर से बात कर रहे थे. लेकिन एक क्षेत्रीय बदमाश इतना हौंसला रख रहा था कि वो केंद्रीय गृह राज्यमंत्री तक से बात कर सके? इस मामले की चर्चा दूर-दूर तक हुई. पुलिस अधिकारियों से लेकर राजनीतिक गलियारों में लोग सुंदर भाटी की बातें करने लगे थे. अब 6 अप्रैल को सुंदर भाटी को एक मामले में उम्रकैद की सजा हुई है. चलिए आपको बताते हैं वेस्ट यूपी के सबसे बाहुबली और खतरनाक गैंगस्टर सुंदर भाटी की कहानी, जो शुरू हुई थी ग्रेटर नोएडा के छोटे से गांव से.

कहानी उस दौर की है, जब ना तो नोएडा हुआ करता था और ना ही ग्रेटर नोएडा. ये पूरा इलाका बुलंदशहर और गाजियाबाद के अंतर्गत ही आता था. उस दौर की कहानी जब कीकर के जंगलों को साफ किया जा रहा, सड़कों का जाल बिछाया जा रहा था, उद्योग-धंधों को लगाया जा रहा था और NOIDA (न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) को आस्तित्व में लाया जा रहा था. ये किस्सा है 80 के दशक के आखिर का, 90 के दशक की शुरुआत का. यहां जब हिंसक वारदातों का दौर जो एक बार शुरू हुआ, तो ना जाने कितनों का खून बह गया. ये कहानी अकेले सुंदर भाटी की नहीं, नरेश भाटी की भी है. उनकी दुश्मनी की भी है और दोनों के बीच हुई उस खूनी गैंगवार की भी है, जिसने वेस्ट यूपी की सड़कों पर मौत का वो तांडव मचाया कि पुलिसवाले भी हैरान रह गए.

80 के दशक में सतबीर गुर्जर और महेंद्र फौजी के बीच जारी दुश्मनी ने गाजियाबाद पुलिस की नींद हराम कर रखी थी. साल 1992 में सतबीर गुर्जर को दिल्ली पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया था और महेंद्र फौजी साल 1994 बुलंदशहर में एनकाउंटर के दौरान मारा गया था. इन दोनों की मौत के बाद इनके गैंग भी बिखर गए. सतबीर गुर्जर गैंग का नरेश भाटी धीरे-धीरे अपना कद बढ़ाता रहा और आस-पास के बदमाशों को अपने साथ जोड़ता रहा. दूसरी तरफ सुंदर भाटी का उभार हुआ. नोएडा, ग्रेटर नोएडा के वरिष्ठ पत्रकार पंकज पाराशर बताते हैं,

“सुंदर भाटी उस वक्त बस यूनियन के साथ जुड़ा हुआ था. पहले मारपीट और लड़ाई झगड़ों में इसका नाम आता था और फिर ये सिलसिला हत्याओं तक पहुंच गया. जब नोएडा में उद्योग लगने लगे तो सुंदर ने रंगदारी और उगाही का काम शुरू कर दिया. 92 में जब नोएडा बना था और तभी इसका (सुंदर) उदय हुआ था. फिर कुछ लोकल नेताओं ने चुनावों में उसका इस्तेमाल शुरू कर दिया था.”

पंकज पाराशर बताते हैं कि साल 1997 में नोएडा, दादरी और जेवर जोड़कर गौतमबुद्ध नगर जिला बना था. सुंदर भाटी ने उद्योगपतियों और बड़े कारोबारियों से रंगदारी वसूलनी शुरू कर दी थी. वे कहते हैं,

“रंगदारी वसूलने को लेकर कुछ हत्याएं भी हुईं, जिनके आरोप सुंदर भाटी गैंग पर लगे. एक वक्त के बाद, बदमाश राजनीति की ओर भागता है. इसका राइवल गैंग था उस दौर में, नरेश भाटी. नरेश जिला पंचायत अध्यक्ष बन गया था. जिला पंचायत अध्यक्ष रहते हुए उसका कत्ल हुआ था. ये आरोप भी सुंदर भाटी पर था. उस मामले में गवाह और सुबूत नहीं मिले थे और भाटी व अन्य बरी हो गए थे.”

आपको बता दें कि पिछले 7 साल से सुंदर भाटी जेल में है. पुलिस ने उसे साल 2014 में ग्रेटर नोएडा के घंघोला से गिरफ्तार किया था. फिलहाल वो यूपी की सोनभद्र जेल में बंद है. ग्रेटर नोएडा में सुंदर भाटी का गैंग डी-11 के नाम से पुलिस की फाइल में दर्ज है.

नरेश भाटी vs सुंदर भाटी

28 मार्च 2004 को गौतमबुद्ध नगर के जिला पंचायत अध्यक्ष नरेश भाटी की हत्या कर दी गई थी. इससे पहले साल 2000 में भी नरेश भाटी पर हमला हुआ था जिसमें उनका गनर और ड्राईवर मारे गए थे. इससे पहले सुंदर गैंग और नरेश गैंग के बीच कई सालों तक गैंगवार चला. हिंदुस्तान अखबार की रिपोर्ट दावा करती है कि इस दौरान दोनों ओर के 50 से अधिक लोगों की हत्या हुई.

ऐसा कहते हैं कि नरेश भाटी जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की ठान चुका था, वहीं सुंदर भाटी भी जिला पंचायत अध्यक्ष बनना चाहता था. इसी को लेकर दोनों के बीच दुश्मनी हुई. गैंगवार शुरू हो गया. ट्रक यूनियन के दो अध्यक्षों की हत्या तक हो गई. नरेश भाटी, जिला पंचायत अध्यक्ष बने, लेकिन 2004 में उनकी हत्या हो गई. उनके मर्डर के बाद इस गैंग की कमान नरेश के भाई रणदीप ने संभाल ली. नरेश का भांजा अमित कसाना भी गैंग का हिस्सा बन गया.

नाम ना छापने की शर्त पर इस इलाके को कवर करते रहे एक वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं,

“सुंदर भाटी को नरेश भाटी का साथी भी बताया जाता है. नरेश भाटी सतबीर गैंग का हिस्सा रहा था. सुंदर और नरेश के बीच जब दुश्मनी हो गई, तब इसने नरेश पर कई हमले किए. आखिरकार एक दिन लाल बत्ती की कार में ही नरेश भाटी को भून दिया गया. उसके साथ जो पुलिसवाले थे, उनको भागने को कह दिया गया था. बाद में अमित कसाना ने सुंदर भाटी को मारने की सौगंध ले ली. फिर सुंदर की दुश्मनी अमित कसाना से हो गई. कसाना ने सुंदर पर हमले किए, वो भी कई बार, लेकिन वो बचता रहा. लेकिन इस गैंगवार में कई लोग मारे गए.”

पंकज पाराशर बताते हैं कि सुंदर की राजनीतिक महत्वकांक्षा थी. वो हमेशा व्हाइट कॉलर होना चाहता था. पंकज कहते हैं,

“सुंदर भाटी ने अपनी पत्नी सुनीता को दनकौर का ब्लॉक प्रमुख बनवा दिया था. 2005 से 2010 तक वो ब्लॉक प्रमुख रहीं. इस बीच हरेंद्र के साथ सुंदर की दुश्मनी हो चली थी. हरेंद्र अपना कारोबार बढ़ा रहा था और ऐसा कहते हैं कि सुंदर ने उससे रंगदारी मांगी थी. वो भी लोकल गुर्जर था. उसने इंकार कर दिया. इस बात पर अदावत बढ़ गई. माना जाता है कि इसी को लेकर हरेंद्र प्रधान की हत्या कराई गई थी. अब इसी केस में सुंदर को सजा हुई है.”

हरेंद्र प्रधान हत्याकांड

8 फरवरी 2015 को दनकौर कोतवाली क्षेत्र के दादूपुर गांव के रहने वाले हरेंद्र प्रधान की हत्या कर दी गई थी. हरेंद्र नागर उर्फ हरेंद्र प्रधान समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए थे. घटना में उनके सरकारी गनर भूदेव शर्मा की भी मौत हुई थी. इस मामले में हरेंद्र नागर के परिवार की ओर से सुंदर भाटी समेत 9 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था.

अब इस बात को समझिए कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में सरिए का बड़ा कारोबार है. ऐसा मानते हैं कि सुंदर भाटी का अपने गुर्गों की मदद से इस कारोबार में बड़ा दखल था. इसी बीच हरेंद्र नागर का वर्चस्व बढ़ने लगा था. वो सरिए और स्क्रैप के काम में बढ़त बना रहे थे. हरेंद्र, जेवर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे थे. राजनीति में हरेंद्र का बढ़ता कद और कारोबार में मिल रही बढ़त, सुंदर को परेशान कर रही थी. आखिरकार इसका अंत हरेंद्र की हत्या से हुआ. बाद में सपा ने हरेंद्र की पत्नी को जेवर सीट से विधानसभा का टिकट भी दिया था.

‘हिंदुस्तान’ अखबार में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक हरेंद्र नागर के भाई रवि नागर ने कहा कि उनकी गवाही रोकने के लिए उन पर 8 बार हमला किया गया था. लेकिन वो, उनके चचेरे भाई विकास और गाड़ी का ड्राईवर आजाद गवाही से पीछे नहीं हटे.

छोटा-मोटा अपराधी नहीं है सुंदर भाटी

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह खुद इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए थे. पुलिस ने इस दौरान सुंदर भाटी और उसके गैंग के लोगों की करोड़ों रुपये की संपत्ति कुर्क कर दी थी. एक-एक करके इस गिरोह के लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा था और जेल भेजा जा रहा था. कमिश्नर आलोक कुमार सिंह के मुताबिक सुंदर भाटी और इसके गुर्गों पर बुलंदशहर, मेरठ, गौतमबुद्धनगर, फरीदाबाद, दिल्ली, साहिबाबाद में हत्या और हत्या की कोशिश के 11 मुकदमे और अन्य मामलों के 152 मुकदमे दर्ज हैं. इनमें से 42 मुकदमों में सुंदर भाटी ही आरोपी है.

हिंदुस्तान अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुंदर भाटी के तार जतन सिरोही गैंग और राजपाल गैंग के साथ भी जुड़े हुए थे. जतन सिरोही बुलंदशहर का एक बड़ा गैंगस्टर था, जो पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था. सुंदर भाटी और उसके गैंग से पुलिस ने 70 करोड़ की संपत्ति जब्त की है. वहीं उम्रकैद की सजा को चुनौती देने के लिए सुंदर भाटी के परिजन हाईकोर्ट जाने की तैयारी भी कर रहे हैं.


 

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