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शेयर से लेकर सोना तक, नए साल में कहां लगाएं पैसा?

नए साल ने उम्मीदों और आशंकाओं की साझा चौखट पर कदम रखा है . एक तरफ स्टॉक मार्केट की बुलंदी है, तो दूसरी तरफ ओमिक्रॉन की दहशत. इकॉनमी में सुधार के तेज-तर्रार आंकड़े हैं, तो महंगाई से निपटने को कमर कसती ब्याज दर भी. ऐसे में यह सुझाव देना कि आप अपने पसीने की कमाई कहां लगाएं, सबसे बड़ा जोखिम है. शेयर, म्यूचुअल फंड, सोना, एफडी और बॉन्ड से लेकर डाकघर की स्कीमों तक, सबके अपने आकर्षण हैं और कमजोरियां भी. ऐसे में हम मार्केट एक्सपर्ट्स की मदद से यहां सभी बड़े एसेट क्लास की पोटली खोलकर आपके सामने रख रहे हैं. साथ ही नए साल की आर्थिक संभावनाओं की कसौटी पर उनके फायदे-नुकसान भी गिनाएंगे. फैसला आपको करना है कि 2022 में कौन सा निवेश ठिकाना आपके लिए सही है. आप कहां पैसे लगाना चाहेंगे और किससे दूरी बनाना.

स्टॉक मार्केट

देश की शीर्ष 30 कंपनियों के इंडेक्स सेंसेक्स ने 2021 में करीब 22 फीसदी रिटर्न दिया है. टॉप-100 कंपनियों का औसत रिटर्न करीब 25 फीसदी रहा है. जबकि मिडकैप 35 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स ने 56 फीसदी रिटर्न दिया है. आईपीओ के जरिए पहली बार लिस्ट होने वाली 63 कंपनियों का औसत रिटर्न इस साल छप्परफाड़ 52 फीसदी रहा. लगातार चार साल से सेंसेक्स की ग्रोथ दोहरे अंकों में रही है. ऐसा तब हुआ जब मार्केट ने इसी बीच दो बार कोरोना की बड़ी मार भी झेली.

क्यों लगाएं पैसा :सरकार से लेकर रेटिंग एजेंसियों तक, सबका अनुमान है कि मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 9-10 फीसदी रहेगी. मार्केट के जानकार इस ग्रोथ के आधार पर भी सेंसेक्स में कम से कम 15-20 फीसदी की तेजी देख रहे हैं. उत्साही आकलन की तो पूछिए मत. ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) ने तो अपनी एक रिपोर्ट में यहां तक कहा है कि दिसंबर 2022 तक सेंसेक्स 70,000 से 80,000 तक पहुंच सकता है. बशर्ते कि कोविड को लेकर कोई बड़ी उथल-पुथल न हो.

शेयर मार्केट किसी भी एसेट क्लास के मुकाबले सबसे ज्यादा रिटर्न देता है. आने वाला बजट ग्रोथ बढ़ाने वाला रहा और सरकार निजीकरण की दिशा में बढ़ी तो भी मार्केट को टॉनिक मिलना तय है. सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस कंपनी में निवेश कर रहे हैं. यहां किसी शेयर के ऊपर जाने या गिरने की कोई सीमा नहीं है. जेनरिक सलाह यही रहती है कि आप हमेशा ब्लूचिप कंपनियों में निवेश करें.

रिस्क फैक्टरःओमिक्रॉन फिलहाल सबसे बड़ा जोखिम है. लेकिन मार्केट बहुत हद तक इस आशंका को पचा चुका है. वह पहले भी कोविड जनित दो गिरावटें झेल चुका है और उसकी रिकवरी बड़ी शानदार रही है. लेकिन महामारी का कोई भरोसा नहीं. हालात बदतर भी हो सकते हैं.

शेयर बाजारों के लिए दूसरा जोखिम महंगाई और ब्याज दरों में होने वाली बढ़ोतरी है. इस साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दरें बढ़ाना तय है. यह शेयर बाजारों के लिए एक तरह का ग्लोबल बैरोमीटर हो चला है. डॉलर मजबूत होगा. निवेशक कम रिस्क लेना चाहेंगे. जानकार यह भी कहते हैं कि सेंसेक्स-निफ्टी में बीते डेढ़-दो साल की तेजी के पीछे एक वजह ब्याज दरों की नरमी भी रही है.

म्यूचुअल फंड

टॉप म्यूचुअल फंडों ने 2021 में औसतन 35 पर्सेंट रिटर्न दिया. अगर आपको शेयर मार्केट की बहुत ज्यादा जानकारी नहीं, लेकिन फिक्स्ड इनकम से भी जी नहीं भरता, तो यह रास्ता चुन सकते हैं. जोखिम के लिए लिहाज से म्यूचुअल फंड तीन तरह के हैं- इक्विटी, डेट और बैलेंस्ड. इक्विटी फंड वो हैं, जो अपनी 80 फीसदी रकम शेयरों में लगाते हैं. डेट फंड सिर्फ 20 फीसदी शेयरों में और बाकी फिक्स्ड इनकम स्कीमों में. पहले में शेयर मार्केट जितना ही फायदा-नुकसान है. दूसरे में जोखिम और रिटर्न दोनों कम हैं. बैलेंस्ड या हाइब्रिड फंड में निवेश और जोखिम फिफ्टी-फिफ्टी है.

क्यों लगाएं पैसा : जो आकलन शेयर मार्केट की तेजी के बारे में हैं, वही यहां भी लागू होंगे. बस सहूलियत यह है कि आप कंपनियों और शेयरों की कम समझ रखते हैं तो आपका पैसा कोई और लगाएगा. बीते साल कई वैल्यू फंडों ने तो 50 फीसदी तक रिटर्न दिया. लेकिन अधिकांश एक्सपर्ट मानते हैं कि एक ऐसे समय में जब शेयरों के चढ़ने और गिरने के चांसेज बराबर हों, आपको सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) का रास्ता चुनना चाहिए. हर गिरावट मौका लाएगा और हर तेजी रिटर्न.

रिस्क फैक्टर: डेट फंडों को छोड़ दें तो इक्विटी और बैलेंस्ड फंडों का भविष्य भी लगभग शेयर मार्केट के जैसा रहेगा. यानी जोखिम उतना ही. डेट फंड में पैसा लगाकर एफडी या उससे एकाध पर्सेंट ज्यादा रिटर्न पाना कई लोगों की नजर में समझदारी नहीं.

Dhanteras Celebrations In Mumbai
सोने में निवेश की सांकेतिक तस्वीर

गोल्ड और ईटीएफ

बढ़ती महंगाई के बीच जहां एक तरफ बैंक में रखे पैसे का मोल घट रहा हो और दूसरी तरफ शेयरों के गिरने का डर हो, सोना निवेश का सबसे मुफीद जरिया माना जाता है. लेकिन बीता साल इसके लिए सबसे बुरा रहा. अरसे बाद इसने माइनस में रिटर्न दिया. यानी एक साल में दाम बढ़ने के बजाय 5 फीसदी घटे हैं. लेकिन लंबी अवधि में सोना पिछले कई दशकों से लगातार फायदे का सौदा साबित हुआ है. इसकी सबसे बड़ी खूबी कभी भी, कहीं भी भुना लिया जाना है. सोने में निवेश के दूसरे जरिए भी हैं, मसलन ईटीएफ और सरकारी बॉन्ड स्कीमें.

क्यों लगाएं पैसाः जैसा कि माना जा रहा है कि इस साल अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ेंगी और डॉलर मजबूत होगा. कमजोर रुपया और महंगाई सोने के लिए एक नशीला कॉकटेल तैयार करते हैं. इसमें यह खूब उड़ता है. अगर शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई तब भी सोना नई बुलंदी छू सकता है. जानकारों का मानना है कि इस साल सोना कम से कम 10 फीसदी चढ़ेगा. कॉमट्रेंड्ज के सीईओ गुणाशेखर त्यागराजन ने दी लल्लनटॉप को बताया,

‘अमेरिका में ब्याज पर सख्ती और डॉलर में तेजी से सोने को मजबूती मिलेगी. साल 2022 की दूसरी छमाही में यह अपने पिछले उच्चतम स्तर 56 हजार को भी पार कर सकता है.’

रिस्क फैक्टर : ओमिक्रॉन को छोड़ ऐसी कोई बड़ी आशंका नहीं दिखती कि शेयर बाजरों में बड़ी गिरावट आएगी. अगर बाजारों में तेजी जारी रही तो सोने में सुस्ती आना तय है. फिजिकल गोल्ड अल्पावधि में निवेश के लिहाज से ठीक नहीं माना जाता है. बेचने पर हमेशा 15-20 फीसदी नुकसान ही होता है. ईटीएफ में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है.

फिक्स्ड डिपॉजिट

जब शेयर बाजार पर गिरावट की आशंका हावी हो और ब्याज दरों के बढ़ने की पूरी संभावना हो, तो एफडी से बेहतर क्या हो सकता है. अगर आप बिना किसी टेंशन के एकमुश्त रिटर्न पाना चाहते हैं तो किसी भी बैंक में एक से पांच साल तक के लिए पैसा डाल सकते हैं. एफडी इस मायने में भी बेहतर है कि जरूरत पड़ने पर जब चाहें इसे तोड़कर पैसा निकाल सकते हैं. कम से कम मूल रकम पर कोई आंच नहीं आएगी. जब तक जमा था, तब तक का ब्याज भी मिल जाएगा.

क्यों लगाएं पैसा: शेयर बाजार अपने पीक के आसपास ही है. आप रिस्क भी नहीं लेना चाहते. आरबीआई ने भी संकेत दिए हैं कि मॉनेटरी पॉलिसी की अगली रिव्यू मीटिंग में ब्याज दरें बढ़ाने की पहल हो सकती है. यानी एफडी पर रिटर्न बढ़ेगा. सबसे बड़ी बात कि महामारी की उथल-पुथल के बीच यह सबसे सेफ निवेश जरिया है. फिलहाल एफडी पर टर्म के अनुसार 6-7 फीसदी तक ब्याज मिल रहा है. बुजुर्गों को एकाध पर्सेंट ज्यादा ही. जब शेयर या दूसरे जरिए मुफीद लगें आप एफडी तोड़कर उसमें लगा सकते हैं.

रिस्क फैक्टर : खुदरा महंगाई दर पिछले कई महीनों से करीब 4-5 फीसदी के बीच है. अगर आपको एफडी में एक लाख रुपये के निवेश पर एक साल में 6000 रुपये रिटर्न मिला तो उसमें से महंगाई के नाम पर 4000 घटा दीजिए. यानी आपको वास्तविक रिटर्न मिला केवल 2000. इसके अलावा एफडी पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है. एक साल में 10 हजार रुपये से ज्यादा के रिटर्न पर टीडीएस कटता है.

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फिक्स्ड रिटर्न की सांकेतिक तस्वीर

सरकारी और निजी बॉन्ड

सेफ और फिक्स्ड रिटर्न के लिए आप बॉन्ड में निवेश का रास्ता भी चुन सकते हैं. बीते साल 10 साल की मैच्योरिटी अवधि वाले बॉन्ड्स पर औसतन 6.5 फीसदी ब्याज मिला. आज बाजार में बॉन्ड में निवेश के कई विकल्प मौजूद हैं. सरकारी बॉन्ड के अलावा कॉरपोरेट बॉन्ड भी हैं, जहां कुछ ज्यादा ही रिटर्न पा सकते हैं. भारत बॉन्ड ईटीएफ जैसे हाल में आए विकल्पों ने भी निवेशकों को आकर्षित किया है. इन्हें स्टॉक एक्सचेंज पर शेयरों की तरह खरीदा और बेचा जा सकता है.

क्यों लगाएं पैसा:  एफडी के मुकाबले बॉन्ड इस मायने में बेहतर हैं कि यहां टैक्स सेविंग की बहुत गुंजाइश है. इसके अलावा ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का यहां उतना असर नहीं होता. शेयर बाजार जैसी उठापटक से मुक्त एकमुश्त रिटर्न तय है. कई कंपनियां फंड की जरूरत पूरा करने को आकर्षक रिटर्न वाले बॉन्ड भी लाती हैं.

रिस्क फैक्टरः रिटर्न के लिहाज से जोखिम ज्यादा तो नहीं, पर जब शेयर और सोने के दाम चढ़ते हों, तो बॉन्ड और एफडी वाले मन मसोस कर रह जाते हैं. रेटिंग एजेंसियों की डाउनग्रेडिंग का भी बॉन्ड पर असर होता है.

वॉलिंटरी प्रोविडेंट फंड

नौकरीपेशा लोगों के लिए कहीं भी भागदौड़ करने से अच्छा है, अपने पीएफ अकाउंट में ही स्वेच्छा से अधिक पैसा डाल दें. अगर आप भी नए साल में शेयर बाजार और दूसरे इंस्ट्रूमेंट्स की चाल पर आशंकित हैं, तो इसे आजमा सकते हैं. सबसे बड़ी खूबी यह कि बेसिक सैलरी का न्यूनतम 12 पर्सेंट के ऊपर आप जितना चाहें पैसा जमा कर सकते हैं. ब्याज पूरी रकम पर पीएफ वाला ही मिलेगा, जो आम तौर पर एफडी से एक पर्सेंट ज्यादा ही होता है. नए साल में आप 8.5 पर्सेंट तक टैक्स फ्री रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं.

रिस्क फैक्टरःपिछले साल सरकार ने पीएफ अकाउंट में सालाना 2.5 लाख रुपये से ज्यादा के योगदान पर मिलने वाले ब्याज को इनकम टैक्स के दायरे में ला दिया. इससे इसका आकर्षण थोड़ा घटा है. लेकिन बहुत कम लोग ही 2.5 लाख रुपये की सीमा तक निवेश कर पाते हैं. टैक्सस्पैनर डॉट कॉम के को-फाउंडर सुधीर कौशिक ने ‘दी लल्लनटॉप’ को बताया,

‘इनकम टैक्स प्रावधान के बाद मेरी राय होगी कि निवेशक इसमें 2.5 लाख की टैक्स फ्री सीमा तक ही पैसा लगाएं. बाकी रकम वे नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में लगा सकते हैं. वहां अतिरिक्त टैक्स कटौती तो मिलेगी ही, बेहतर रिटर्न भी आएगा.’

पोस्ट ऑफिस स्कीमें

शेयर बाजार की उठा-पटक और सोने की सुस्ती से बेफिक्र रहने का दूसरा ठिकाना पोस्टऑफिस है. यहां पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) जैसी स्कीमें हैं. ये लंबी अवधि में फिक्स्ड डिपॉजिट से भी ज्यादा ब्याज देती हैं और टैक्स से छूट भी. इनसे इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80सी के तहत 1.50 लाख तक टैक्स कटौती पा सकते हैं. इस साल पीपीएफ पर 7.1 फीसदी और एनएससी पर 6.8 फीसदी ब्याज था.

रिस्क फैक्टरः यहां ब्याज बैंकों से एकाध पर्सेंट ही ज्यादा होता है, लेकिन पैसा लंबे समय तक फंसा रहता है. पीपीएफ में तो 15 साल का लॉक-इन पीरियड है. हालांकि बीच में आंशिक रूप से पैसा निकाल सकते है. एनएससी में भी 5 साल की मैच्योरिटी अवधि से पहले पैसा नहीं निकाला जा सकता.


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